X7skr Oct 7, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 08 अक्टूबर 2022* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2079* *⛅शक संवत् - 1944* *⛅अयन - दक्षिणायन* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - आश्विन* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - चतुर्दशी 09 अक्टूबर प्रातः 03:41 तक तत्पश्चात पूर्णिमा* *⛅नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद शाम 05:08 तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद* *⛅योग - वृद्धि रात्रि 08:54 तक तत्पश्चात ध्रुव* *⛅राहु काल - सुबह 09:30 से 10:59 तक* *⛅सूर्योदय - 06:34* *⛅सूर्यास्त - 06:20* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:56 से 05:45 तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 से 12:52 तक* *⛅व्रत पर्व विवरण -* *⛅ विशेष - चतुर्दशी के दिन तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)* *🌹 अमृत बरसाती शरद पूर्णिमा 🌹* *(शरद पूर्णिमाः 09 अक्टूबर 2022)* *🌹 शरद पूर्णिमा की रात को चन्द्रमा की किरणों से अमृत बरसाता है । ये किरणें स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त लाभदायी हैं । इस रात्रि में शरीर पर हल्के-फुल्के परिधान पहनकर चन्द्रमा की चाँदनी में टहलने, घास के मैदान पर लेटने तथा नौका-विहार करने से त्वचा के रोमकूपों में चन्द्र किरणें समा जाती हैं और बंद रोम-छिद्र प्राकृतिक ढंग से खुलते हैं । शरीर के कई रोग तो इन चन्द्र किरणों के प्रभाव से ही धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं ।* *🌹 इन चन्द्र किरणों से त्वचा का रंग साफ होता है, नेत्रज्योति बढ़ती है एवं चेहरे पर गुलाभी आभा उभरने लगती है । यदि देर तक पैरों को चन्द्र किरणों का स्नान कराया जाय तो ठंड के दिनों में तलुए, एड़ियाँ, होंठ फटने से बचे रहते हैं ।* *🌹 चन्द्रमा की किरणें मस्तिष्क के लिए अति लाभकारी हैं मस्तिष्क की बंद तहें खुलती हैं, जिससे स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है । साथ ही सिर के बाल असमय सफेद नहीं होते हैं ।* *🔹शरद पूर्णिमा की चाँदनी के स्वास्थ्य प्रयोग🔹* *🌹 शरद पूर्णिमा की शीतल रात्रि को (9 से 12 बजे के बीच) चन्द्रमा की किरणों में महीन कपड़े ढँककर रखी हुई दूध-चावल की खीर वर्षभर आयु, आरोग्य, पुष्टि व प्रसन्नतादायक होती है, अतः इसका अवश्य सेवन करना चाहिए । देर रात होने के कारण कम खायें, भरपेट न खायें, सावधानी बरतें ।* *🌹 दो पके सेवफल के टुकड़े करके शरद पूर्णिमा को रातभर चाँदनी में रखने से उनमें चन्द्र किरणें और ओज के कण समा जाते हैं । सुबह खाली पेट सेवन करने से कुछ दिनों में स्वास्थ्य में आश्चर्यजनक लाभकारी परिवर्तन होते हैं ।* *🌹 इस दिन रात को चाँदनी में सेवफल 2-3 घंटे रख के फिर उसे चबा-चबाकर खाने से मसूड़ों से खून निकलने का रोग (स्कर्वी) नहीं होता तथा कब्ज से भी छुटकारा मिलता है ।* *🌹 250 ग्राम दूध में 1-2 बादाम व 2-3 छुहारों के टुकड़े करके उबालें । फिर इस दूध को पतले सूती कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में 2-3 घंटे तक रख दें । यह दूध औषधिय गुणों से पुष्ट हो जायेगा । सुबह इस दूध को पी लें ।* *🌹 सोंठ, काली मिर्च और लौंग डालकर उबाला हुआ दूध चाँदनी रात में 2-3 घंटे रखकर पीने से बार-बार जुकाम नहीं होता, सिरदर्द में लाभ होता है ।* *🌹 इस रात्रि में 3-4 घंटे तक बदन पर चन्द्रमा की किरणों को अच्छी तरह पड़ने दें । इससे त्वचा मुलायम, कोमल व कंचन सी दमकने लगेगी ।* *🌹 तुलसी के 10-12 पत्ते एक कटोरी पानी में भिगोकर चाँदनी रात में 2-3 घंटे के लिए रख दें । फिर इन पत्तों को चबा-चबाकर खा लें व थोड़ा पानी पियें । बचे हुए पानी को छानकर एक-एक बूँद आँखों में डालें, नाभि में मलें तथा पैरों के तलुओं पर भी मलें । आँखों से धुँधला दिखना, बार-बार पानी आना आदि में इससे लाभ होता है । तुलसी के पानी की बूँदें चन्द्रकिरणों के संग मिलकर प्राकृतिक अमृत बन जाती हैं । (दूध व तुलसी के सेवन में दो-ढाई घंटे का अंतर रखें ।)* *स्रोतः 📖 ऋषि प्रसाद, अक्टूबर 2013* *🌹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🌹* *🌹 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)* *🌹 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)* *🔹आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔹* *🔹एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।* *📖 ऋषि प्रसाद - मई 2018 से*

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X7skr Oct 6, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @*Śrīmad-Bhāgavatam - Canto 01,Chapter 02,Text-07( SB-1.2.7 )* वासुदेवे भगवति भक्तियोग: प्रयोजित: । जनयत्याशु वैराग्यं ज्ञानं च यदहैतुकम् ॥ ७ ॥ vāsudeve bhagavati bhakti-yogaḥ prayojitaḥ janayaty āśu vairāgyaṁ jñānaṁ ca yad ahaitukam _*Translation*_ *By rendering devotional service unto the Personality of Godhead, Śrī Kṛṣṇa, one immediately acquires causeless knowledge and detachment from the world.* *Purport* _(https://vedabase.io/en/library/sb/1/2/7)_ Those who consider devotional service to the Supreme Lord Śrī Kṛṣṇa to be something like material emotional affairs may argue that in the revealed scriptures, sacrifice, charity, austerity, knowledge, mystic powers and similar other processes of transcendental realization are recommended. According to them, bhakti, or the devotional service of the Lord, is meant for those who cannot perform the high-grade activities. Generally it is said that the bhakti cult is meant for the śūdras, vaiśyas and the less intelligent woman class. But that is not the actual fact. The bhakti cult is the topmost of all transcendental activities, and therefore it is simultaneously sublime and easy. It is sublime for the pure devotees who are serious about getting in contact with the Supreme Lord, and it is easy for the neophytes who are just on the threshold of the house of bhakti. To achieve the contact of the Supreme Personality of Godhead, Śrī Kṛṣṇa, is a great science, and it is open for all living beings, including the śūdras, vaiśyas, women and even those lower than the lowborn śūdras, so what to speak of the high-class men like the qualified brāhmaṇas and the great self-realized kings. The other high-grade activities designated as sacrifice, charity, austerity, etc., are all corollary factors following the pure and scientific bhakti cult. The principles of knowledge and detachment are two important factors on the path of transcendental realization. The whole spiritual process leads to perfect knowledge of everything material and spiritual, and the results of such perfect knowledge are that one becomes detached from material affection and becomes attached to spiritual activities. Becoming detached from material things does not mean becoming inert altogether, as men with a poor fund of knowledge think. Naiṣkarma means not undertaking activities that will produce good or bad effects. Negation does not mean negation of the positive. Negation of the nonessentials does not mean negation of the essential. Similarly, detachment from material forms does not mean nullifying the positive form. The bhakti cult is meant for realization of the positive form. When the positive form is realized, the negative forms are automatically eliminated. Therefore, with the development of the bhakti cult, with the application of positive service to the positive form, one naturally becomes detached from inferior things, and he becomes attached to superior things. Similarly, the bhakti cult, being the supermost occupation of the living being, leads him out of material sense enjoyment. That is the sign of a pure devotee. He is not a fool, nor is he engaged in the inferior energies, nor does he have material values. This is not possible by dry reasoning. It actually happens by the grace of the Almighty. In conclusion, one who is a pure devotee has all other good qualities, namely knowledge, detachment, etc., but one who has only knowledge or detachment is not necessarily well acquainted with the principles of the bhakti cult. Bhakti is the supermost occupation of the human being.

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X7skr Oct 6, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 07 अक्टूबर 2022* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2079* *⛅शक संवत् - 1944* *⛅अयन - दक्षिणायन* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - आश्विन* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - द्वादशी सुबह 07:26 तक तत्पश्चात त्रयोदशी 8 अक्टूबर प्रातः 05:24 तक* *⛅नक्षत्र - शतभिषा शाम 06:17 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद* *⛅योग - गण्ड रात्रि 11:31 तक तत्पश्चात वृद्धि* *⛅राहु काल - सुबह 10:59 से 12:27 तक* *⛅सूर्योदय - 06:33* *⛅सूर्यास्त - 06:21* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:56 से 05:44 तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 से 12:52 तक* *⛅व्रत पर्व विवरण - प्रदोष व्रत* *⛅ विशेष - द्वादशी को पूतिका(पोई), त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🔹शरद पूनम की रात दिलाये आत्मशांति, स्वास्थ्यलाभ* *(09 अक्टूबर 2022)* 🔹 *आश्विन पूर्णिमा को ‘शरद पूर्णिमा’ बोलते हैं । इस दिन रास-उत्सव और कोजागर व्रत किया जाता है । गोपियों को शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर अपने पास बुलाया और ईश्वरीय अमृत का पान कराया था । अतः शरद पूर्णिमा की रात्रि का विशेष महत्त्व है । इस रात को चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है ।* 🔹 *शरद पूनम की रात को क्या करें, क्या न करें ?* 🌹 *दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं । इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें । नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक करें ।* 🔹 *अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं । जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखना और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’ फिर वह खीर खा लेना ।* 🔹 *इस रात सुई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रज्योति बढ़ती है ।* 🔹 *शरद पूनम दमे की बीमारी वालों के लिए वरदान का दिन है । अपने आश्रमों में निःशुल्क औषधि मिलती है, वह चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर में मिलाकर खा लेना और रात को सोना नहीं । दमे का दम निकल जायेगा ।* 🔹 *चन्द्रमा की चाँदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है । शरद पूनम की चाँदनी का अपना महत्त्व है लेकिन बारहों महीने चन्द्रमा की चाँदनी गर्भ को और औषधियों को पुष्ट करती है ।* 🔹 *अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है । जब चन्द्रमा इतने बड़े दिगम्बर समुद्र में उथल-पुथल कर विशेष कम्पायमान कर देता है तो हमारे शरीर में जो जलीय अंश है, सप्तधातुएँ हैं, सप्त रंग हैं, उन पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है । इन दिनों में अगर काम-विकार भोगा तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी हो जाती है और यदि उपवास, व्रत तथा सत्संग किया तो तन तंदुरुस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रकाश आता है ।* *🔹खीर को बनायें अमृतमय प्रसाद खीर को रसराज कहते हैं । सीताजी को अशोक वाटिका में रखा गया था । रावण के घर का क्या खायेंगी सीताजी ! तो इन्द्रदेव उन्हें खीर भेजते थे ।* *🔹खीर बनाते समय घर में चाँदी का गिलास आदि जो बर्तन हो, आजकल जो मेटल (धातु) का बनाकर चाँदी के नाम से देते हैं वह नहीं, असली चाँदी के बर्तन अथवा असली सोना धो-धा के खीर में डाल दो तो उसमें रजतक्षार या सुवर्णक्षार आयेंगे । लोहे की कड़ाही अथवा पतीली में खीर बनाओ तो लौह तत्त्व भी उसमें आ जायेगा । इलायची, खजूर या छुहारा डाल सकते हो लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, चारोली ये रात को पचने में भारी पड़ेंगे । रात्रि 8 बजे महीन कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर 11 बजे के आसपास भगवान को भोग लगा के प्रसादरूप में खा लेनी चाहिए । लेकिन देर रात को खाते हैं इसलिए थोड़ी कम खाना और खाने से पहले एकाध चम्मच मेरे हवाले भी कर देना । मुँह अपना खोलना और भाव करना : ‘लो महाराज ! आप भी लगाओ भोग ।’* 🔹 *(खीर दूध, चावल, मिश्री, चाँदी, चन्द्रमा की चाँदनी - इन पंचश्वेतों से युक्त होती है, अतः सुबह बासी नहीं मानी जाती ।)* *📖 ऋषि प्रसाद : सितम्बर 2014*

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X7skr Oct 5, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 06 अक्टूबर 2022* *⛅दिन - गुरुवार* *⛅विक्रम संवत् - 2079* *⛅शक संवत् - 1944* *⛅अयन - दक्षिणायन* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - आश्विन* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - एकादशी सुबह 09:40 तक तत्पश्चात द्वादशी* *⛅नक्षत्र - धनिष्ठा शाम 07:42 तक तत्पश्चात शतभिषा* *⛅योग - शूल रात्रि 02:21 तक तत्पश्चात गण्ड* *⛅राहु काल - दोपहर 01:56 से 03:25 तक* *⛅सूर्योदय - 06:33* *⛅सूर्यास्त - 06:22* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:56 से 05:44 तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:03 से 12:52 तक* *⛅व्रत पर्व विवरण - पापांकुशा एकादशी* *⛅ विशेष - एकादशी को शिम्बी(सेम), द्वादशी को पूतिका(पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है ।* *🔹नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए🔹* *🔹दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं । इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें । नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक (पलकें झपकाये बिना एकटक देखना) करें ।* - *🌹पूज्य बापूजी🌹* *🔹पापांकुशा एकादशी - 06 अक्टूबर 2022🔹* *एकादशी 05 अक्टूबर दोपहर 12:01 से 06 अक्टूबर सुबह 09:40 तक । उपवास 06 अक्टूबर गुरुवार को रखें ।* *👉 एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।* *👉 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* *👉 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* *👉 एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।* *👉 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।* *👉 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।* *👉 परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।* *🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹* *🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें ।* *🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें ।* *🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।* *🌹राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।* *सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।।* *एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l* *🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए ।* *🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें ।* *🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है ।* *🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) - इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) - इनका सेवन न करें ।* *🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए ।* *🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए ।* *🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए ।* *🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है ।* *🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें ।* *🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें ।* *🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) ।* *🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है ।* *🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है ।*

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X7skr Oct 4, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 05 अक्टूबर 2022* *⛅दिन - बुधवार* *⛅विक्रम संवत् - 2079* *⛅शक संवत् - 1944* *⛅अयन - दक्षिणायन* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - आश्विन* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - दशमी दोपहर 12:00 तक तत्पश्चात एकादशी* *⛅नक्षत्र - श्रवण रात्रि 09:15 तक तत्पश्चात धनिष्ठा* *⛅योग - सुकर्मा सुबह 08:21 तक तत्पश्चात धृति* *⛅राहु काल - दोपहर 12:28 से 01:57 तक* *⛅सूर्योदय - 06:32* *⛅सूर्यास्त - 06:23* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:55 से 05:44 तक* *⛅विजय मुहूर्त - दोपहर 02:26 से 03:14 तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:04 से 12:52 तक* *⛅व्रत पर्व विवरण - विजयादशमी, दशहरा* *⛅ विशेष - दशमी को कलम्बिका शाक खाना सर्वथा त्याज्य है । एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🌹 विजयादशमी, दशहरा - 05 अक्टूबर 2022 🌹* 👉🏻 *विजयादशमी का दिन बहुत महत्त्व का है और इस दिन सूर्यास्त के पूर्व से लेकर तारे निकलने तक का समय अर्थात् संध्या का समय बहुत उपयोगी है ।* 👉 *रघु राजा ने इसी समय कुबेर पर चढ़ाई करने का संकेत कर दिया था कि ‘सोने की मुहरों की वृष्टि करो या तो फिर युद्ध करो ।’ रामचन्द्रजी रावण के साथ युद्ध में इसी दिन विजयी हुए ।* 👉 *इस विजयादशमी के दिन अपने मन में जो रावण के विचार हैं काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय, शोक, चिंता – इन अंदर के शत्रुओं को जीतना है और रोग, अशांति जैसे बाहर के शत्रुओं पर भी विजय पानी है । दशहरा यह खबर देता है ।* *👉🏻 विजयादशमी का पूरा दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त है अर्थात इस दिन कोई भी शुभ कर्म करने के लिए पंचांग-शुद्धि या शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं रहती;। इसलिए दशहरे के दिन कोई भी वीरतापूर्ण काम करने वाला सफल होता है।* 👉🏻 *वरतंतु ऋषि का शिष्य कौत्स विद्याध्ययन समाप्त करके जब घर जाने लगा तो उसने अपने गुरुदेव से गुरूदक्षिणा के लिए निवेदन किया । तब गुरुदेव ने कहाः वत्स ! तुम्हारी सेवा ही मेरी गुरुदक्षिणा है । तुम्हारा कल्याण हो ।’* 👉🏻 *परंतु कौत्स के बार-बार गुरुदक्षिणा के लिए आग्रह करते रहने पर ऋषि ने क्रुद्ध होकर कहाः ‘तुम गुरूदक्षिणा देना ही चाहते हो तो चौदह करोड़ स्वर्णमुद्राएँ लाकर दो ।”* 👉🏻 *अब गुरुजी ने आज्ञा की है। इतनी स्वर्णमुद्राएँ और तो कोई देगा नहीं, रघु राजा के पास गये । रघु राजा ने इसी दिन को चुना और कुबेर को कहाः “या तो स्वर्णमुद्राओं की बरसात करो या तो युद्ध के लिए तैयार हो जाओ।” कुबेर ने शमी वृक्ष पर स्वर्णमुद्राओं की वृष्टि की । रघु राजा ने वह धन ऋषिकुमार को दिया लेकिन ऋषिकुमार ने अपने पास नहीं रखा, ऋषि को दिया ।* 👉🏻 *विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष का पूजन किया जाता है और उसके पत्ते देकर एक-दूसरे को यह याद दिलाना होता है कि सुख बाँटने की चीज है और दुःख पैरों तले कुचलने की चीज है । धन-सम्पदा अकेले भोगने के लिए नहीं है । तेन त्यक्तेन भुंजीथा… । जो अकेले भोग करता है, धन-सम्पदा उसको ले डूबती है ।* 👉🏻 *भोगवादी, दुनिया में विदेशी ‘अपने लिए – अपने लिए….’ करते हैं तो ‘व्हील चेयर’ पर और ‘हार्ट अटैक’ आदि कई बीमारियों से मरते हैं । अमेरिका में 58 प्रतिशत को सप्ताह में कभी-कभी अनिद्रा सताती है और 35 प्रतिशत को हर रोज अनिद्रा सताती है । भारत में अनिद्रा का प्रमाण 10 प्रतिशत भी नहीं है क्योंकि यहाँ सत्संग है और त्याग, परोपकार से जीने की कला है । यह भारत की महान संस्कृति का फल हमें मिल रहा है ।* 👉🏻 *तो दशहरे की संध्या को भगवान को प्रीतिपूर्वक भजे और प्रार्थना करें कि ‘हे भगवान ! जो चीज सबसे श्रेष्ठ है उसी में हमारी रूचि करना ।’ संकल्प करना कि’आज प्रतिज्ञा करते हैं कि हम ॐकार का जप करेंगे ।’* 👉🏻 *‘ॐ’ का जप करने से देवदर्शन, लौकिक कामनाओं की पूर्ति, आध्यात्मिक चेतना में वृद्धि, साधक की ऊर्जा एवं क्षमता में वृद्धि और जीवन में दिव्यता तथा परमात्मा की प्राप्ति होती है ।* *स्रोतः 📖 ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2011* *🌹 दशहरा के दिन जपने योग्य मंन्त्र 🌹* *👉 दशहरे की शाम को सूर्यास्त होने से कुछ समय पहले से लेकर आकाश में तारे उदय होने तक का समय सर्व सिद्धिदायी विजयकाल कहलाता है ।* *👉 इस विजयकाल में थोड़ी देर "राम रामाय नमः" मंत्र के नाम का जप करें ।* *👉 मन-ही-मन भगवान को प्रणाम करके प्रार्थना करें कि हे भगवान सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है, हम विजय के लिए "ॐ अपराजितायै नमः "मंत्र का जप कर रहे हैं ।* *👉 श्री हनुमानजी का सुमिरन करते हुए नीचे दिए गए मंत्र की एक माला जप करें ।* *"पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना।"* *🔹दशहरे के दिन विजयकाल में इन मंत्रों का जप करने से अगले साल के दशहरे तक गृहस्थ में जीनेवाले को बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं ।*

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