Krishan Kumar Oct 1, 2022

🚩🛕जय माता दी 🛕🚩 🙏जय माँ कात्यायनी🙏 🛕🚩🛕🚩🛕🚩🛕 या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। 🛕🚩🛕🚩🛕🚩🛕 माता रानी का छठा रूप माँ कात्यायनी है। माता रानी के छठवें नवरात्रे पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई। माँ दुर्गा की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे। 🚩🙏🚩👏🚩🙏🚩 🛕🚩🛕🚩🛕🚩🛕 🚩🙏 आरती 🙏🚩 जय जय अंबे जय कात्यायनी । जय जगमाता जग की महारानी ।। बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहां वरदाती नाम पुकारा ।। कई नाम हैं कई धाम हैं। यह स्थान भी तो सुखधाम है।। हर मंदिर में जोत तुम्हारी। कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।। हर जगह उत्सव होते रहते। हर मंदिर में भक्त हैं कहते।। कात्यायनी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की ।। झूठे मोह से छुड़ानेवाली। अपना नाम जपानेवाली।। बृहस्पतिवार को पूजा करियो। ध्यान कात्यायनी का धरियो।। हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी ।। जो भी मां को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे।। 🛕🚩🛕👏🛕🚩🛕

+10 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Krishan Kumar Oct 1, 2022

_*🚩जय माँ कात्यायनी 🚩*_ *“माँ दुर्गा का छठा स्वरूप"* 🙏🚩🙏🌹🙏🚩🙏 माँ का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा इसकी भी एक कथा है- कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं। ऐसी भी कथा मिलती है कि ये महर्षि कात्यायन के वहाँ पुत्री रूप में उत्पन्न हुई थीं। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्त सप्तमी, अष्टमी तथा नवमी तक तीन दिन इन्होंने कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था। माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पतिरूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भास्वर है। इनकी चार भुजाएँ हैं। माताजी का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है। माँ कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है। *_🚩👏 उपासना 👏🚩_* नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए। *या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥* अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और शक्ति -रूपिणी प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। इसके अतिरिक्त जिन कन्याओ के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, उन्हे इस दिन माँ कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हे मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है। विवाह के लिये *कात्यायनी मन्त्र* *ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥* 🙏👏🙏🚩🙏👏🙏

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 26 शेयर
Krishan Kumar Sep 30, 2022

🚩🛕जय माता दी। 👏 🙏जय माँ स्कंदमाता🙏 🛕🚩🛕🚩🛕🚩🛕 या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। 🛕🚩🛕🚩🛕🚩🛕 माता रानी का पंचम रूप माँ स्कंदमाता है। माता रानी के पांचवे नवरात्रे पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई। माँ दुर्गा की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे। 🚩🙏🚩👏🚩🙏🚩 🛕🚩🛕🚩🛕🚩🛕 🚩🙏 आरती 🙏🚩 जय तेरी हो स्कंदमाता। पांचवां नाम तुम्हारा आता।। सब के मन की जानन हारी। जग जननी सब की महतारी।। तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं। हर दम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।। कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा।। कहीं पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरो में तेरा बसेरा।। हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे।। भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।। इंद्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे। दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तुम ही खंडा हाथ उठाएं।। दास को सदा बचाने आईं ‘चमन’ की आस पुराने आई।। 🛕🚩🛕🙏🛕🚩🛕

+12 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 14 शेयर
Krishan Kumar Sep 30, 2022

🚩🙏जय माता दी🙏🚩 नवरात्रे के पंचम स्वरूप माँ स्कन्दमाता के पावन पर्व पर हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏🚩🙏🌹🙏🚩🙏 सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥ पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता। नवरात्रि में पांचवें दिन इस देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है। शास्त्रों में इसका काफी महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है। उनकी पूजा से मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है। यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति है। यानी चेतना का निर्माण करने वालीं। कहते हैं कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुईं।। 🙏🚩🙏🌹🙏🚩🙏

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 17 शेयर
Krishan Kumar Sep 29, 2022

🚩जय माँ कुष्मांडा 🚩 🙏🚩🙏🌹🙏🚩🙏 या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। 👏माँ दुर्गा का चौथा स्वरूप👏 नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है। विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। ये देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंततः इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए। 🚩🙏🚩🛕🚩🙏🚩

+21 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 12 शेयर