Krishan Kumar Nov 27, 2021

🚩🛕काल भैरव जयंती🛕🚩 🛕🚩🌹🙏🌹🚩🛕 भगवान काल भैरव को भगवान शिव का रुद्र रुप बताया गया है। वैसे तो हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मासिक कालाष्टमी व्रत किया जाता है। लेकिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव जंयती के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव भगवान का अवतरण हुआ था। इस साल काल भैरव जंयती 27 नवंबर, शनिवार के दिन पड़ रही है। भगवान शिव का रुद्र रुप कहे जाने वाले काल भैरव भगवान की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन प्रातः काल उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। रात्रि के समय काल भैरव की पूजा की जाती है। बता दें कि भगवान काल भैरव को दंडापणि (जिसके हाथों में दंड हो) कहा जाता है। काल भैरव दयालु, कल्याण करने वाले और अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देव कहे जाते हैं, वहीं अनैतिक कार्य करने वालों के लिए ये दंडनायक भी हैं। इतना ही नहीं, काल भैरव भगवान को लेकर ये मान्यता भी है कि भगवान कैल भैरव के भक्तों के साथ कोई अहित करता है तो उसे तीनों लोकों में कहीं भी शरण नहीं मिलती। कालभैरभ जयंती शुभ मुहूर्त- 👉मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ- 27 नवंबर 2021, शनिवार को प्रातः 05 बजकर 43 मिनट से मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी समापन- 28 नवंबर 2021, रविवार को प्रातः 06:00 बजे पूजा विधि 👉इस दिन सुबह उठ जाएं। इसके बाद सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर लें। स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इसके बाद घर के मंदिर में या किसी शुभ स्थान पर कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अब इसके चारों तरफ गंगाजल छिड़क लें। फिर उन्हें फूल अर्पित करें। फिर नारियल, इमरती, पान, मदिरा, गेरुआ आदि चीजें अर्पित करें। फिर कालभैरव के समक्ष चौमुखी दीपक जलाएं और धूप-दीप करें। फिर भैरव चालीसा का पाठ करें। फिर भैरव मंत्रों का 108 बार जाप करें। इसके बाद आरती करें और पूजा संपन्न करें। व्रत कथा 👉पौराणिक कथा के अनुसार एक बार की बात है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों में श्रेष्ठता की लड़ाई चली। इस बात पर बहस बढ़ गई, तो सभी देवताओं को बुलाकर बैठक की गई। सबसे यही पूछा गया कि श्रेष्ठ कौन है? सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और उत्तर खोजा लेकिन उस बात का समर्थन शिवजी और विष्णु ने तो किया, परंतु ब्रह्माजी ने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिवजी को क्रोध आ गया और शिवजी ने अपना अपमान समझा। शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। इस भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को ‘महाकालेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है इसलिए ही इन्हें दंडाधिपति कहा गया है। शिवजी के इस रूप को देखकर सभी देवता घबरा गए। भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। इस प्रकार ब्रह्माजी के सिर को काटने के कारण भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया। ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर शिवजी अपने असली रूप में आए। भैरव बाबा को उनके पापों के कारण दंड मिला इसीलिए भैरव को कई दिनों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा। इस प्रकार कई वर्षों बाद वाराणसी में इनका दंड समाप्त होता है। इसका एक नाम ‘दंडपाणी’ पड़ा था। इसी के साथ काल भैरव अवतार से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है। काल भैरव जयंती पर किए जाने वाले उपाय 👉काल भैरव जयंती के दिन भगवान शिव की पूजा करने से भगवान भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें और साथ ही मन में अपनी मनोकामना कहें। मान्यता है कि इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि इस दिन ऐसे मंदिर में जाकर पूजन करें जहां बहुत कम लोग जाते हो या फिर कई दिनों से किसी ने पूजा न की हो। ऐसा माना जाता है कि जो भैरव बहुत कम पूजे जाते हैं उनका पूजन करने से भगवान भैरव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस दिन मंदिर जाकर दीपक प्रज्वलित करें और भगवान भैरव को नारियल, जलेबी का भोग लगाएं। 👉भगवान भैरव का वाहन श्वान यानी कुत्ता माना गया है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने के साथ ही कुत्ते को भोजन अवश्य करवाएं। खासतौर पर काले कुत्ते को भोजन कराएं। इससे काल भैरव के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। ऐसा करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

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