Kiran Khemka Jan 7, 2022

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Kiran Khemka Jan 1, 2022

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 हिन्दू जागृति अभियान :- ------------------------------ *🚩 १ जनवरी का इतिहास जान लेंगे आप तो छोड़ देंगे नववर्ष मनाना,* *🚩विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में राज करने के लिए सबसे पहले भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात किया जिससे हम अपनी महान दिव्य संस्कृति भूल जाएं और उनकी पाश्चात्य संस्कृति अपना लें जिसके कारण वे भारत में राज कर सकें।* *🚩अपनी संस्कृति का ज्ञान न होने के कारण आज हिन्दू भी ३१ दिसंबर की रात्रि में एक-दूसरे को हैपी न्यू इयर कहते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं ।* *🚩नववर्ष उत्सव ४००० वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार २५ मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि (हिन्दुओं का नववर्ष ) भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी ये तिथि नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी लेकिन रोम के तानाशाह जूलियस सीजर को भारतीय नववर्ष मनाना पसन्द नही आ रहा था इसलिए उसने ईसा पूर्व ४५वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार १ जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष यानि ईसापूर्व ४६ ईस्वी को ४४५ दिनों का करना पड़ा था । उसके बाद भारतीय नववर्ष के अनुसार छोड़कर ईसाई समुदाय उनके देशों में १ जनवरी से नववर्ष मनाने लगे ।* *🚩भारत देश में अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना ३१ दिसम्बर सन् १६०० ई. को की । उसके बाद भारत को १९० साल तक गुलाम बनाकर रखा गया। इसमें वो लोग लगे हुए थे जो भारत की ऋषि-मुनियों की प्राचीन सनातन संस्कृति को मिटाने में कार्यरत थे। लॉर्ड मैकाले ने सबसे पहले भारत का इतिहास बदलने का प्रयास किया जिसमें गुरुकुलों में हमारी वैदिक शिक्षण पद्धति को बदला गया ।* *🚩भारत का प्राचीन इतिहास बदला गया जिसमें भारतीय अपने मूल इतिहास को भूल गये और अंग्रेजों का गुलाम बनाने वाले इतिहास याद रह गया और आज कई भोले-भाले भारतवासी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष नही मनाकर १ जनवरी को ही नववर्ष मनाने लगे ।* *🚩हद तो तब हो जाती है जब एक दूसरे को नववर्ष की बधाई भी देने लग जाते हैं। क्या किसी भी ईसाई देशों में हिन्दुओं को हिन्दू नववर्ष की बधाई दी जाती है..??? किसी भी ईसाई देश में हिन्दू नववर्ष नहीं मनाया जाता है फिर भोले भारतवासी उनका नववर्ष क्यों मनाते हैं?* *🚩इस साल आने वाला नया वर्ष२०२२ अंग्रेजों अर्थात ईसाई रिलीजन का नया साल है।* *🚩हिन्दू धर्म का इस समय विक्रम संवत २०७८ चल रहा है।* *🚩इससे सिद्ध हो गया कि हिन्दू धर्म ही सबसे पुराना एकमात्र धर्म है ।* *🚩इस विक्रम संवत से ५००० साल पहले इस धरती पर भगवान विष्णु श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए ।उनसे पहले भगवान राम, और अन्य अवतार हुए यानि जबसे पृथ्वी का प्रारम्भ हुआ तबसे सनातन (हिन्दू) धर्म है।* *🚩कहाँ करोड़ों वर्ष पुराना हमारा सनातन धर्म और कहाँ भारतीय अपनी गरिमा से गिर 2000 साल पुराना नववर्ष मना रहे हैं!* *🚩जरा सोचिए....!!!* *🚩सीधे-सीधे शब्दों में हिन्दू धर्म ही सब धर्मों की जननी है। यहाँ किसी धर्म का विरोध नहीं है परन्तु सभी भारतवासियों को बताना चाहते हैं कि इंग्लिश कैलेंडर के बदलने से हिन्दू वर्ष नहीं बदलता!* *🚩जब बच्चा पैदा होता है तो पंडित जी द्वारा उसका नामकरण कैलेंडर से नहीं हिन्दू पंचांग से किया जाता है । ग्रहदोष भी हिन्दू पंचाग से देखे जाते हैं और विवाह,जन्मकुंडली आदि का मिलान भी हिन्दू पंचाग से ही होता है । सभी व्रत, त्यौहार हिन्दू पंचाग से आते हैं। मरने के बाद तेरहवाँ भी हिन्दू पंचाग से ही देखा जाता है। मकान का उद्घाटन, जन्मपत्री, स्वास्थ्य रोग और अन्य सभी समस्याओं का निराकरण भी हिन्दू कैलेंडर {पंचाग} से ही होता है।* *🚩आप जानते हैं कि रामनवमी, जन्माष्टमी, होली, दीपावली, राखी, भाई दूज, करवा चौथ, एकादशी, शिवरात्री, नवरात्रि, दुर्गापूजा सभी विक्रमी संवत कैलेंडर से ही निर्धारित होते हैं | इंग्लिश कैलेंडर में इनका कोई स्थान नहीं होता।* *🚩सोचिये! आपके इस सनातन धर्म के जीवन में इंग्लिश नववर्ष या कैलेंडर का स्थान है कहाँ ?* *🚩1 जनवरी को क्या नया हो रहा है..????* *🚩न ऋतु बदली... न मौसम...न कक्षा बदली...न सत्र....न फसल बदली...न खेती.....न पेड़ पौधों की रंगत...न सूर्य चाँद सितारों की दिशा.... ना ही नक्षत्र...* *🚩हाँ, नए साल के नाम पर करोड़ो /अरबों जीवों की हत्या व करोड़ों /अरबों गैलन शराब का पान व रात पर फूहणता अवश्य होगी।* *🚩भारतीय संस्कृति का नव संवत् ही नया साल है.... जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तियां, किसान की नई फसल, विद्यार्थी की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते हैं जो विज्ञान आधारित है और चैत्र नवरात्रि का पहला दिन होने के कारण घर, मन्दिर, गली, दुकान सभी जगह पूजा-पाठ व भक्ति का पवित्र वातावरण होता है ।* *🚩अतः हिन्दुस्तानी अपनी मानसिकता को बदले, विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने और चैत्री शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन ही नूतन वर्ष मनाएं।* 🚩🔥🚩🔥🚩🔥🚩🔥🚩🔥🚩🔥🚩🔥

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Kiran Khemka Dec 31, 2021

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Kiran Khemka Dec 30, 2021

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Kiran Khemka Dec 30, 2021

एक बार एक अजनबी किसी के घर गया। वो अंदर गया और मेहमान कक्ष में बैठ गया। वो खाली हाथ आया था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा। फिर उसने वहीं पर रखी एक वस्तु उठाई। जब घर का मालिक आया तो उसने वो वस्तु उसे देते हुए कहा, "यह मैं आपके लिए भेंट स्वरूप लाया हूं" 🤔घर का मालिक, जिसे पता था कि यह चीज उसी की है जो उसे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया😲 अब बताइए, कि क्या वह भेंट पाकर, जो कि पहले से ही उसकी है, उस घर के मालिक को खुश होना चाहिए? शायद नहीं! परन्तु इसी प्रकार हम परमात्मा के साथ भी करते हैं। हम उन्हें रूपय-पैसे चढ़ाते हैं और हर वो चीज, जो उनकी ही बनाई है, उन्हें भेंट करते हैं। परन्तु मन में भाव रखते हैं कि यह वस्तु हम परमात्मा को दे रहे हैं और सोचते हैं कि परमात्मा प्रसन्न हो जाएंगे😊 मूर्ख हैं हम। हम यह नहीं समझते हैं कि परमात्मा को इन सब चढ़ावों की कोई भी आवश्यकता नहीं है। यदि हम वास्तव में उन्हें कुछ देना चाहते हैं तो अपनी श्रद्धा दें, और उन्हें अपनी हर एक सांस में याद करें, फिर विश्वास कीजिए, परमात्मा अवशय ही प्रसन्न होंगे। इनसान कहता है, "अजब हैरान हूं भगवन्, तुझे कैसे रिझाऊँ मैं, कोई भी वस्तु नहीं ऐसी, जिसे तुझ पर चढ़ाऊं मैं"।। परमात्मा ने जवाब दिया, "संसार की हर वस्तु तुझे मैंने दी है। तेरे पास अपनी चीज़ केवल तेरा अहंकार है जो मैंने नहीं दिया, उसी को तू मुझे अर्पण कर दे, तेरा जीवन सफल हो जाएगा।

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Kiran Khemka Dec 27, 2021

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Kiran Khemka Dec 24, 2021

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