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इसके हृदय में प्रेम नहीं जिसके हृदय में दया नहीं क्या वह इंसान है बात कहने या सोचने की नही विचार करने की है ?? आज बेजुबान हमारी जान की टीम वृन्दावन परिक्रमा मार्ग रमणरेती चौकी के पास से गुज़र रही थी तभी देखा कि एक माता जी बीमार अवस्था में गंभीर हालत में पड़ी हुई है जिनके हाथ पैरों में बहुत सूजन है और सिर मैं चोट लगी थी जिसके कारण खून बह रहा था मुँह से पानी निकल रहा है उल्टियां भी हो रही है । ऐसा नही परिक्रमा मार्ग में कोई था नही या वहां से होकर निकला नही लेकिन देखकर भी अनदेखा कर दिया लेकिन बेजुबान हमारी जान की टीम ने देखकर अनदेखा नही किया और उन माता जी को वहां से उठाकर वाहन के द्वारा संयुक्त चिकित्सालय लाकर उनको भर्ती करवाया और उनका उचित उपचार करवाया । सेवा का भाव हृदय मैं होना चाहिए बातो मैं नही बातो से सब सेवा करते है और कर रहे है जरूरी ये है सेवा ओर दया का भाव किसके हृदय मैं है

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