👌🌷जय श्री राधे कृष्णा जी 🌷👌 *🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐सास और बहू💐💐* *अरे मधु ... वट सावित्री के व्रत के दिन भी तूने मेंहदी नहीं लगाई... पहले तो हमेशा लगाती थी.... और वो तेरी शादी वाली लाल चुनरी भी नहीं पहनी आज ....।,,* *" वो आंटी जी.... बस जल्दी जल्दी में भूल गई । ,,* *कहकर मधु नजरें चुराकर आगे जाकर अपनी पूजा करने लगी । दर असल उसे काम काम में याद ही नहीं रहा कि मेंहदी लगानी है, लेकिन रह रहकर उसका ध्यान भी मंदिर में आई बाकी औरतों के हाथों पर जा रहा था । सबके हाथों में रची मेंहदी देखकर आज उसे अपनी सासु माँ की बहुत याद आ रही थी....। कैसे हर त्यौहार के पहले दिन ही वो बोलने लगती थीं , " बहु.... मेंहदी जरूर लगा लेना । त्यौहार पर खाली हाथ! अच्छे नहीं लगते .... ।,,* *सास की इस बात पर मधु को बहुत खीझ भी आती थी। वो बुदबुदाती रहती " घर के काम करूँ या मेंहदी लगाकर बैठ जाऊँ??? ,,* *सासु माँ भी शायद उसके मन की बात समझ जाती थी और कहतीं,* *" अरे बहु.. आजकल तो रेडिमेड मेंहदी की कीप आती हैं.. आधे घंटे में ही रच भी जाती हैं। हमारे टाइम में तो खुद ही मेंहदी घोल कर कीप बनानी पड़ती थी । ऊपर से कम से कम तीन चार घंटे तक उसे सुखाना भी पड़ता था ।* *.... चाय वाय तो में भी बना दूंगी तूं जा मेंहदी लगा ले। ,,* *उनके बार बार टोकने पर मधु मेंहदी लगा लेती थी । जब सुबह अपने गोरे हाथों में रची हुई मेंहदी देखती तो खुश भी हो जाती थी ।* *मौहल्ले की सारी औरतें जब उसकी मेंहदी की तारिफ़ करती थीं तो उसे अपनी सासु माँ पर बहुत प्यार आता था...।* *मंदिर से घर वापस आकर मधु चुपचाप बैठ गई। थोड़ी देर में मधु का बेटा आरव भागते हुए आया और बोला, " मम्मी मम्मी... कुछ खाने को दो ना । ,,* *" बेटा वहाँ बिस्किट रखे हैं अभी वो खा लो। ,,* *" मुझे नहीं खाने बिस्किट..। पहले तो आप मठरी और लड्डू बनाती थीं लेकिन दादी के जाने के बाद क्यों नहीं बनातीं । ,, आरव ने मुंह फुलाते हुए कहा।* *मधु चुप थी..... कहती भी क्या?? सच में सास के जाने के बाद उसने मठरी और लड्डू नहीं बनाए थे । सासु माँ तो पीछे पड़ी रहती थीं, " बहु घर में बनाई हुई चीजें अच्छी रहती हैं और साथ साथ बरकत भी करती हैं । घर में अचानक से कोई मेहमान आ जाए तो भी चाय के साथ नाश्ते के लिए बाहर नहीं भागना पड़ता। ,,* *मधु को उस वक्त उनकी बातें अच्छी नहीं लगती थीं । वो कहती , " आजकल सब कुछ रेडिमेड भी तो आता है... ये सब बनाने के चक्कर में सारा दिन निकल जाता है । ,,* *लेकिन सासु माँ नहीं मानती और खुद ही मठरी बनाने लग जातीं । फिर मधु को ना चाहते हुए भी ये सब बनवाना पड़ता था ।* *ये सब बातें याद करते करते मधु अनमनी हो रही थी । घर के काम करते करते दोपहर हो गई थी । अचानक से उसका सर घूमने लगा तब उसे याद आया कि उसने सुबह से पानी भी नहीं पीया है ।* *जब उसकी सास थीं तो व्रत वाले दिन सुबह से ही पीछे पड़ जाती थीं ।* *कहतीं " पहले थोड़ा जूस निकाल कर पी ले फिर घर के काम कर लेना । नहीं तो गर्मी में चक्कर आने लगेगा। ,,* *आज ये सब बातें मधु को अंदर ही अंदर कचोट रही थीं । उसे हमेशा अपनी सास का टोकना अच्छा नहीं लगता था। लेकिन अब उसे टोकने वाला कोई नहीं था । फिर भी वो खुश नहीं थी।* *कहीं बाहर जाने से पहले भी उसे अब दस बार सोचना पड़ता है। घर के सारे काम करके जाओ फिर आते ही फिर से काम में जुट जाओ। यहाँ तक की घर की चिंता भी लगी रहती है कि कहीं कुछ खुला तो नहीं छोड़ आई । कहीं कपड़े छत पर तो नहीं रह गए ।* *सब की नजरों में तो वो आज आजाद थी लेकिन वो कितना बंध गई है ये बात उसके अलावा कोई नहीं जानता था... ।* *दोस्तों, हमारे बड़ो का साथ हमारे सर पर छत्रछाया सा होता है जो हमेशा हमारे लिए कवच की तरह काम करता है ... लेकिन उनकी* *अहमियत को हम नजर अंदाज करते रहते हैं । जब वो हमसे दूर हो जाते हैं तब उनकी कमी का एहसास हमें पल पल होता रहता है.... ।* *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🌳🌳🌳

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👌🌷राधा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं जी🌷👌 *🙏💞राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त*💞🙏 राधा अष्टमी तिथि 13 सितंबर दोपहर 3 बजकर 10 मिनट से शुरू होगी, जो कि 14 सितंबर की दोपहर 1 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। *राधा अष्टमी महत्व* जन्माष्टमी की तरह ही राधा अष्टमी का विशेष महत्व है। कहते हैं कि राधा अष्टमी का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं संतान सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो लोग राधा जी को प्रसन्न कर देते हैं उनसे भगवान श्रीकृष्ण अपने आप प्रसन्न हो जाते हैं। कहा जाता है कि व्रत करने से घर में मां लक्ष्मी आती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। *राधा अष्टमी व्रत की पूजा विधि* -प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। -इसके बाद मंडप के नीचे मंडल बनाकर उसके मध्यभाग में मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें। -कलश पर तांबे का पात्र रखें। - अब इस पात्र पर वस्त्राभूषण से सुसज्जित राधाजी की सोने (संभव हो तो) की मूर्ति स्थापित करें। -तत्पश्चात राधाजी का षोडशोपचार से पूजन करें। - ध्यान रहे कि पूजा का समय ठीक मध्याह्न का होना चाहिए। -पूजन पश्चात पूरा उपवास करें अथवा एक समय भोजन करें। - दूसरे दिन श्रद्धानुसार सुहागिन स्त्रियों तथा ब्राह्मणों को भोजन कराएं व उन्हें दक्षिणा दें। अन्य व्रतों की भांति इस दिन भी प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि क्रियाओं से निवृत होकर श्री राधा जी का विधिवत पूजन करना चाहिए। इस दिन श्री राधा-कृष्ण मंदिर में ध्वजा, पुष्पमाला, वस्त्र, पताका, तोरणादि व विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्नों एवं फलों से श्री राधाजी की स्तुति करनी चाहिए। मंदिर में पांच रंगों से मंडप सजाएं, उनके भीतर षोडश दल के आकार का कमलयंत्र बनाएं, उस कमल के मध्य में दिव्य आसन पर श्री राधा-कृष्ण की युगलमूर्ति पश्चिमाभिमुख करके स्थापित करें। बंधु-बांधवों सहित अपनी सामर्थ्यानुसार पूजा की सामग्री लेकर भक्तिभाव से भगवान की स्तुति गाएं। दिन में हरिचर्चा में समय बिताएं तथा रात्रि को नाम संकीर्तन करें। एक समय फलाहार करें। मंदिर में दीपदान करें। *श्रीराधाष्टमी व्रत का पुण्यफल* श्री राधा-कृष्ण जिनके इष्टदेव हैं, उन्हें राधाष्टमी का व्रत अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह व्रत श्रेष्ठ है। श्री राधाजी सर्वतीर्थमयी एवं ऐश्वर्यमयी हैं। इनके भक्तों के घर में सदा ही लक्ष्मीजी का वास रहता है। जो भक्त यह व्रत करते हैं उन साधकों की जहां सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं मनुष्य को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन राधाजी से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। जो मनुष्य श्री राधाजी के नाम मंत्र का स्मरण एवं जाप करता है वह धर्मार्थी बनता है। अर्थार्थी को धन की प्राप्ति होती है, मोक्षार्थी को मोक्ष मिलता है। राधाजी की पूजा के बिना श्रीकृष्ण जी की पूजा अधूरी रहती है। *राधा रानी के मंत्र* तप्त-कांचन गौरांगी श्री राधे वृंदावनेश्वरी वृषभानु सुते देवी प्रणमामि हरिप्रिया ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै नम:। ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्। श्री राधा विजयते नमः, श्री राधाकृष्णाय नम: 🙏🌹जय श्री राधेकृष्ण🌹🙏

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