J. P. AGARWAL Oct 21, 2021

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J. P. AGARWAL Oct 20, 2021

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J. P. AGARWAL Oct 20, 2021

*कार्तिक मास मे दीप दान करने की महिमा विभिन्न ग्रंथो से संकलित*. 🌹🌹🙏🙏🌹🌹🙏🙏 स्कन्द पुराण में ब्रह्मा-नारद संवाद में कहा गया है—कार्तिक मास में आधे क्षण के लिए भी भगवान् विष्णु के मन्दिर में दीपदान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और पुनः पृथ्वी पर जन्म ग्रहण नहीं करना पड़ता है। विष्णु मन्दिर में जिस व्यक्ति का घी या तिल-तेल-प्रदीप प्रज्जवलित होता है, हे मुनिशार्दूल! उसे सूर्यग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में और चन्द्रग्रहण के समय नर्मदा आदि में दान या अन्य यज्ञ करने की क्या आवश्यकता है? कार्तिक में दीपदानकारी के मंत्रहीन, क्रियाहीन और शौचहीन समस्त कार्य भी संपूर्णता लाभ करते हैं। जो व्यक्ति कार्तिक मास में केशव के समक्ष दीपदान करता है, उसके सभी प्रकार के यज्ञ और सभी तीर्थों में स्नान हो जाता है। हे नारद! पितृगण कहते हैं, यदि उनके वंश में पृथ्वी पर ऐसी कोई संतान उत्पन्न हो जो कार्तिक मास में दीपदान के द्वारा केशव को संतुष्ट करे तो उन्हें चक्रपाणि (श्रीविष्णु) की कृपा से निश्चय ही मुक्ति प्राप्त होगी। कार्तिक मास में वासुदेव के मंदिर में दीपदान करने से सभी बाधाओं से रहित नित्य-स्थान लाभ होता है। हे मुने! जो मानव कार्तिक मास में कर्पूर सहित दीपदान करता है उसके कुल में उत्पन्न और भविष्य के वंशज भी चक्रपाणि (भगवान्) की कृपा से अवश्य ही मुक्ति प्राप्त करते हैं। हे विप्रेन्द्र! कार्तिक मास में, खेल-खेल में ही सही, विष्णु या वैष्णवों के मन्दिर को दीपों से आलोकित करने से व्यक्ति को धन, यश तथा कीर्त्ति लाभ होती है और उसके सात कुल पवित्र हो जाते हैं। हे मुने! निर्धन व्यक्ति के लिए अपने आप को बेचकर भी कार्तिकी पूर्णिमा तक दीपदान करना कर्तव्य है। *जो मूर्ख व्यक्ति कार्तिक मास में विष्णु मंदिर में दीपदान नहीं करता, वह वैष्णव कहलाने योग्य नहीं है।* पद्मपुराण और नारद पुराण में रुक्मांगद-मोहिनी संवाद में वर्णित है, जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीहरि के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य-कान्ति-युक्त होकर विष्णुलोक में विहार करता है। एक ओर समस्त प्रकार के दान तथा दूसरी ओर कार्तिक मास में दीपदान ये दोनों बराबर नहीं होने पर भी दीपदान का ही माहात्म्य अधिक है। स्कन्दपुराण के ब्रह्म-नारद-संवाद में कहा गया है, कार्तिक मास में दूसरों का दीप प्रज्जवलित करने और वैष्णवों की सेवा करने से अन्नदान, राजसूय आदि महायज्ञों का फल लाभ होता है। हे विप्रेन्द्र! जो सभी लोग कार्तिक मास में श्रीहरि के मन्दिर में दूसरों के द्वारा रखे गये दीपों को प्रज्ज्वलित करते हैं, उन्हें यम-यातना भोग नहीं करनी पड़ती। एक चूहे ने एकादशी में दूसरों के द्वारा दिये गये दीप को प्रज्ज्वलित करके दुर्लभ मनुष्य जन्म लाभ किया था। समुद्र सहित पृथ्वी-दान और बछड़ों सहित दुग्धवती करोड़ों गायों के दान का फल विष्णु मंदिर के शिखर पर दीपदान करने के सोलहवें अंश के एक अंश के समान भी नहीं है। हे महामुने! मूल्य ग्रहण करके भी शिखर या हरिमंदिर में दीपदान करने से शत-कुल का उद्धार हो जाता है। हे विप्रेन्द्र! शिखर दीपदान की बात तो दूर, जो समस्त व्यक्ति भक्ति भाव से कार्तिक मास में केवल मात्र ज्योति-दीप्त विष्णु मंदिर के दर्शन करते हैं, उनके कुल में कोई नारकी नहीं होता। देवगण भी विष्णु के गृह में दीपदान करने वाले मनुष्य के संग की कामना करते हैं। हे मुनि-श्रेष्ठ! कार्तिक मास में कार्तिकी पूर्णिमा तक विष्णु-मंदिर के ऊपर दीपदान करने से भगवत्-पार्षदत्व सुलभ (सहजता से लाभ) होता है। *दीपमाला-माहात्म्य* स्कंद पुराण में ब्रह्मा-नारद संवाद में वर्णित है—जो श्रीहरिमंदिर में बाहर और अंदर दीपमाला की रचना करते हैं, उनके वंश में उत्पन्न लाखों पुरुषों को नरक के दर्शन नहीं होते और वे स्वयं विष्णु का सारूप्य और परमपद प्राप्त करते हैं। भविष्य पुराण में वर्णित है,―जो कार्तिक मास में विशेष रूप से विष्णु के उत्थान के समय द्वादशी या एकादशी में घी-युक्त-प्रदीप प्रज्ज्वलित करते हैं, वे दस हज़ार सूर्यों के समान प्रकाश और कान्ति विशिष्ट होकर दिव्य विमान में सवार होकर विष्णुलोक में अवस्थित होते है।

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J. P. AGARWAL Oct 7, 2021

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J. P. AGARWAL Oct 7, 2021

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J. P. AGARWAL Oct 7, 2021

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