g s singh Jan 24, 2022

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g s singh Jan 24, 2022

~*शुरू हो गई टिकट वाली नौटंकी.*~ अगर फलाने को टिकट नहीं दिया तो हम भाजपा को वोट नहीं देंगे! अगर फलाने को टिकट दे दिया तो हम भाजपा को वोट नहीं देंगे! ऐसी नौटंकी करने वाले कार्यकर्ताओं को तनिक सोचना चाहिए की आपकी ऐसी नौटंकी के चलते अगर सपा आ गई तब क्या कीजिएगा ? 5 साल बैठ के मंजीरा बजाइयेगा! यूपी की जनता से मेरी अपील है, उत्तर प्रदेश में प्रत्येक सीट से योगीजी ही लड़ रहे है! उम्मीदवार नहीं चुनाव निशान देखिये, "कमल का फूल"...!! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से जम्मू कश्मीर से धारा 370 हट गई! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 500 वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से काशी विश्वनाथ धाम भव्य बन गया! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से गुंडों माफियाओं की 2000 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त/ध्वस्त हुई! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से यूपी में दंगाई दंगा करने से घबराते है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 40-50 वर्ष पुरानी लटकी भटकी सरयू नहर और बाण सागर जैसी सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुई! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 31 साल बाद गोरखपुर का खाद कारखाना पुनः चालू हुआ! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से बंद पड़ी 20 से अधिक चीनी मिलें पुनः शुरू हुई और उनकी क्षमता में भी वृद्धि हुई! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 1 करोड़ छात्र छात्राओं को टैबलेट और मोबाइल फोन मिले! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से उत्तर प्रदेश के करोड़ों प्रतियोगी छात्र छात्राओं को मुफ्त कोचिंग की सुविधा मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से बालिकाओं को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा की सुविधा मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 4.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से मुफ्त दोगुना राशन मिल रहा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 1.67 करोड़ गरीबों को मुफ्त उज्जवला गैस कनेक्शन मिला! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 24 घंटे बिजली मिल रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 43 लाख गरीबों को आवास, 2.61 करोड़ शौचालय, नल से स्वच्छ जल मिल रहा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 2.55 करोड़ किसानों को 6000₹ किसान सम्मान निधि मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ हुआ! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से गन्ना किसानों को समय पर 1.55 लाख करोड़ का भुगतान मिला! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली मिल रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा होती है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से अयोध्या में दिव्य दीपावली मनती है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से हमारे धार्मिक स्थलों का भव्य सौंदर्यीकरण हो रहा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन रहे है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से दस शहरों में मेट्रो का निर्माण हो रहा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से प्रदेश में 6 एक्सप्रेसवे बन रहे है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 25 करोड़ जनता को मुफ्त कोरोना वैक्सीन लग रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से पाकिस्तान को हम घर में घुसकर मारते है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से डिफेंस कॉरिडोर बन रहा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से प्रदेश में आकाश, ब्रम्होस जैसी घातक मिसाइलें बनाने का प्लांट लगा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से गुंडे माफिया थाने में जाकर सरेंडर कर रहे है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से दंगाइयों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की वसूली की जा रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से लव जिहादियों पर नकेल कसी जा रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से कैराना में हिंदुओं का पलायन रुका! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से नोएडा में फिल्म सिटी बन रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से नोएडा में डाटा सेंटर बन रहा है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से गैस पाइपलाइन बिछ रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से उत्तर प्रदेश की जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से उत्तर प्रदेश भारत की जीडीपी में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला दूसरा राज्य बना! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 2.68 लाख से अधिक निर्धन कन्याओं का विवाह हुआ! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 98.28 लाख वृद्धजनों को 1000₹ मासिक पेंशन मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 3.81 करोड़ कामगारों को 500₹ मासिक भरण पोषण भत्ता मिला! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 10.93 लाख बेटियों को ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के लिए सहायता मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 1.38 लाख स्कूलों का कायाकल्प और 7 नए राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 1 करोड़ महिलाओं को 10 लाख स्वयं सहायता समूह के जरिए रोजगार मिला! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 2 करोड़ युवाओं को एमएसएमई के जरिए रोजगार मिला! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 3.5 लाख युवाओं को संविदा पर नौकरी मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से प्रदेश में 3 लाख करोड़ का निवेश आया और इससे 25 लाख युवाओं को रोजगार मिला! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से 6.51 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से प्रदेश में दो ऐम्स (गोरखपुर और रायबरेली) का संचालन हुआ! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से कोरोना महामारी से प्रदेशवासियों को बचाने के लिए 550 ऑक्सीजन प्लांट का संचालन हुआ! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से पूर्वांचल में जापानी बुखार से मामलों में 75% की कमी और मृत्यु दर में 95% की कमी आई! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से प्रदेश को 5 नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे मिले! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से प्रदेश को 10 स्मार्ट सिटी मिली! 📌 ये वही कमल का फूल है, जिसका बटन दबाने से प्रदेश को एसजीपीजीआई में देश का सबसे बड़ा किडनी ट्रांसप्लांट केंद्र मिला! इस कमल के फूल की सोच ईमानदार है, काम दमदार है और इसीलिए फिर एक बार कमल के फूल की सरकार है! #TrustYogi #BJPMatters #Vote4BJP साभार🚩🚩🔥🔥🕉🕉🇮🇳🙏🏼

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g s singh Jan 24, 2022

🚩ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में अंतर :-🚩 भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों का बहुत महत्त्व रहा है। ऋषि मुनि समाज के पथ प्रदर्शक माने जाते थे और वे अपने ज्ञान और साधना से हमेशा ही लोगों और समाज का कल्याण करते आये हैं। आज भी वनों में या किसी तीर्थ स्थल पर हमें कई साधु देखने को मिल जाते हैं। धर्म कर्म में हमेशा लीन रहने वाले इस समाज के लोगों को ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी आदि नामों से पुकारते हैं। ये हमेशा तपस्या, साधना, मनन के द्वारा अपने ज्ञान को परिमार्जित करते हैं। ये प्रायः भौतिक सुखों का त्याग करते हैं हालाँकि कुछ ऋषियों ने गृहस्थ जीवन भी बिताया है। आईये आज के इस पोस्ट में देखते हैं ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में कौन होते हैं और इनमे क्या अंतर है ? ऋषि कौन होते हैं भारत हमेशा से ही ऋषियों का देश रहा है। हमारे समाज में ऋषि परंपरा का विशेष महत्त्व रहा है। आज भी हमारे समाज और परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज माने जाते हैं। ऋषि वैदिक परंपरा से लिया गया शब्द है जिसे श्रुति ग्रंथों को दर्शन करने वाले लोगों के लिए प्रयोग किया गया है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है वैसे व्यक्ति जो अपने विशिष्ट और विलक्षण एकाग्रता के बल पर वैदिक परंपरा का अध्ययन किये और विलक्षण शब्दों के दर्शन किये और उनके गूढ़ अर्थों को जाना और प्राणी मात्र के कल्याण हेतु उस ज्ञान को लिखकर प्रकट किये ऋषि कहलाये। ऋषियों के लिए इसी लिए कहा गया है "ऋषि: तु मन्त्र द्रष्टारा : न तु कर्तार : अर्थात ऋषि मंत्र को देखने वाले हैं न कि उस मन्त्र की रचना करने वाले। हालाँकि कुछ स्थानों पर ऋषियों को वैदिक ऋचाओं की रचना करने वाले के रूप में भी व्यक्त किया गया है। ऋषि शब्द का अर्थ ऋषि शब्द "ऋष" मूल से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ देखना होता है। इसके अतिरिक्त ऋषियों के प्रकाशित कृत्य को आर्ष कहा जाता है जो इसी मूल शब्द की उत्पत्ति है। दृष्टि यानि नज़र भी ऋष से ही उत्पन्न हुआ है। प्राचीन ऋषियों को युग द्रष्टा माना जाता था और माना जाता था कि वे अपने आत्मज्ञान का दर्शन कर लिए हैं। ऋषियों के सम्बन्ध में मान्यता थी कि वे अपने योग से परमात्मा को उपलब्ध हो जाते थे और जड़ के साथ साथ चैतन्य को भी देखने में समर्थ होते थे। वे भौतिक पदार्थ के साथ साथ उसके पीछे छिपी ऊर्जा को भी देखने में सक्षम होते थे। ऋषियों के प्रकार ऋषि वैदिक संस्कृत भाषा से उत्पन्न शब्द माना जाता है। अतः यह शब्द वैदिक परंपरा का बोध कराता है जिसमे एक ऋषि को सर्वोच्च माना जाता है अर्थात ऋषि का स्थान तपस्वी और योगी से श्रेष्ठ होता है। अमरसिंहा द्वारा संकलित प्रसिद्ध संस्कृत समानार्थी शब्दकोष के अनुसार ऋषि सात प्रकार के होते हैं ब्रह्मऋषि, देवर्षि, महर्षि, परमऋषि, काण्डर्षि, श्रुतर्षि और राजर्षि। सप्त ऋषि पुराणों में सप्त ऋषियों का केतु, पुलह, पुलत्स्य, अत्रि, अंगिरा, वशिष्ठ और भृगु का वर्णन है। इसी तरह अन्य स्थान पर सप्त ऋषियों की एक अन्य सूचि मिलती है जिसमे अत्रि, भृगु, कौत्स, वशिष्ठ, गौतम, कश्यप और अंगिरस तथा दूसरी में कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, भरद्वाज को सप्त ऋषि कहा गया है। मुनि किसे कहते हैं मुनि भी एक तरह के ऋषि ही होते थे किन्तु उनमें राग द्वेष का आभाव होता था। भगवत गीता में मुनियों के बारे में कहा गया है जिनका चित्त दुःख से उद्विग्न नहीं होता, जो सुख की इच्छा नहीं करते और जो राग, भय और क्रोध से रहित हैं, ऐसे निस्चल बुद्धि वाले संत मुनि कहलाते हैं। मुनि शब्द मौनी यानि शांत या न बोलने वाले से निकला है। ऐसे ऋषि जो एक विशेष अवधि के लिए मौन या बहुत कम बोलने का शपथ लेते थे उन्हीं मुनि कहा जाता था। प्राचीन काल में मौन को एक साधना या तपस्या के रूप में माना गया है। बहुत से ऋषि इस साधना को करते थे और मौन रहते थे। ऐसे ऋषियों के लिए ही मुनि शब्द का प्रयोग होता है। कई बार बहुत कम बोलने वाले ऋषियों के लिए भी मुनि शब्द का प्रयोग होता था। कुछ ऐसे ऋषियों के लिए भी मुनि शब्द का प्रयोग हुआ है जो हमेशा ईश्वर का जाप करते थे और नारायण का ध्यान करते थे जैसे नारद मुनि। मुनि शब्द का चित्र,मन और तन से गहरा नाता है। ये तीनों ही शब्द मंत्र और तंत्र से सम्बन्ध रखते हैं। ऋग्वेद में चित्र शब्द आश्चर्य से देखने के लिए प्रयोग में लाया गया है। वे सभी चीज़ें जो उज्जवल है, आकर्षक है और आश्चर्यजनक है वे चित्र हैं। अर्थात संसार की लगभग सभी चीज़ें चित्र शब्द के अंतर्गत आती हैं। मन कई अर्थों के साथ साथ बौद्धिक चिंतन और मनन से भी सम्बन्ध रखता है। अर्थात मनन करने वाले ही मुनि हैं। मन्त्र शब्द मन से ही निकला माना जाता है और इसलिए मन्त्रों के रचयिता और मनन करने वाले मनीषी या मुनि कहलाये। इसी तरह तंत्र शब्द तन से सम्बंधित है। तन को सक्रीय या जागृत रखने वाले योगियों को मुनि कहा जाता था। जैन ग्रंथों में भी मुनियों की चर्चा की गयी है। वैसे व्यक्ति जिनकी आत्मा संयम से स्थिर है, सांसारिक वासनाओं से रहित है, जीवों के प्रति रक्षा का भाव रखते हैं, अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, ईर्या (यात्रा में सावधानी ), भाषा, एषणा(आहार शुद्धि ) आदणिक्षेप(धार्मिक उपकरणव्यवहार में शुद्धि ) प्रतिष्ठापना(मल मूत्र त्याग में सावधानी )का पालन करने वाले, सामायिक, चतुर्विंशतिस्तव, वंदन, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान और कायतसर्ग करने वाले तथा केशलोच करने वाले, नग्न रहने वाले, स्नान और दातुन नहीं करने वाले, पृथ्वी पर सोने वाले, त्रिशुद्ध आहार ग्रहण करने वाले और दिन में केवल एक बार भोजन करने वाले आदि 28 गुणों से युक्त महर्षि ही मुनि कहलाते हैं। मुनि ऋषि परंपरा से सम्बन्ध रखते हैं किन्तु वे मन्त्रों का मनन करने वाले और अपने चिंतन से ज्ञान के व्यापक भंडार की उत्पति करने वाले होते हैं। मुनि शास्त्रों का लेखन भी करने वाले होते हैं साधु कौन होते हैं किसी विषय की साधना करने वाले व्यक्ति को साधु कहा जाता है। प्राचीन काल में कई व्यक्ति समाज से हट कर या कई बार समाज में ही रहकर किसी विषय की साधना करते थे और उस विषय में विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करते थे। विषय को साधने या उसकी साधना करने के कारण ही उन्हें साधु कहा गया। कई बार अच्छे और बुरे व्यक्ति में फर्क करने के लिए भी साधु शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसका कारण है कि सकारात्मक साधना करने वाला व्यक्ति हमेशा सरल, सीधा और लोगों की भलाई करने वाला होता है। आम बोलचाल में साध का अर्थ सीधा और दुष्टता से हीन होता है। संस्कृत में साधु शब्द से तात्पर्य है सज्जन व्यक्ति। लघुसिद्धांत कौमुदी में साधु का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि "साध्नोति परकार्यमिति साधु : अर्थात जो दूसरे का कार्य करे वह साधु है। साधु का एक अर्थ उत्तम भी होता है ऐसे व्यक्ति जिसने अपने छह विकार काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह और मत्सर का त्याग कर दिया हो, साधु कहलाता है। साधु के लिए यह भी कहा गया है "आत्मदशा साधे " अर्थात संसार दशा से मुक्त होकर आत्मदशा को साधने वाले साधु कहलाते हैं। वर्तमान में वैसे व्यक्ति जो संन्यास दीक्षा लेकर गेरुआ वस्त्र धारण करते हैं और जिनका मूल उद्द्येश्य समाज का पथ प्रदर्शन करते हुए धर्म के मार्ग पर चलते हुए मोक्ष को प्राप्त करते हैं, साधु कहलाते हैं। संन्यासी किसे कहते हैं सन्न्यासी धर्म की परम्परा प्राचीन हिन्दू धर्म से जुडी नहीं है। वैदिक काल में किसी संन्यासी का कोई उल्लेख नहीं मिलता। सन्न्यासी या सन्न्यास की अवधारणा संभवतः जैन और बौद्ध धर्म के प्रचलन के बाद की है जिसमे सन्न्यास की अपनी मान्यता है। हिन्दू धर्म में आदि शंकराचार्य को महान सन्न्यासी माना गया है। सन्न्यासी शब्द सन्न्यास से निकला हुआ है जिसका अर्थ त्याग करना होता है। अतः त्याग करने वाले को ही सन्न्यासी कहा जाता है। सन्न्यासी संपत्ति का त्याग करता है, गृहस्थ जीवन का त्याग करता है या अविवाहित रहता है, समाज और सांसारिक जीवन का त्याग करता है और योग ध्यान का अभ्यास करते हुए अपने आराध्य की भक्ति में लीन हो जाता है। हिन्दू धर्म में तीन तरह के सन्न्यासियों का वर्णन है परिव्राजकः सन्न्यासी : भ्रमण करने वाले सन्न्यासियों को परिव्राजकः की श्रेणी में रखा जाता है। आदि शंकराचार्य और रामनुजनाचार्य परिव्राजकः सन्यासी ही थे। परमहंस सन्न्यासी : यह सन्न्यासियों की उच्चत्तम श्रेणी है। यति : सन्यासी : उद्द्येश्य की सहजता के साथ प्रयास करने वाले सन्यासी इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। वास्तव में संन्यासी वैसे व्यक्ति को कह सकते हैं जिसका आतंरिक स्थिति स्थिर है और जो किसी भी परिस्थिति या व्यक्ति से प्रभावित नहीं होता है और हर हाल में स्थिर रहता है। उसे न तो ख़ुशी से प्रसन्नता मिलती है और न ही दुःख से अवसाद। इस प्रकार निरपेक्ष व्यक्ति जो सांसारिक मोह माया से विरक्त अलौकिक और आत्मज्ञान की तलाश करता हो संन्यासी कहलाता है। उपसंहार ऋषि, मुनि, साधु या फिर संन्यासी सभी धर्म के प्रति समर्पित जन होते हैं जो सांसारिक मोह के बंधन से दूर समाज कल्याण हेतु निरंतर अपने ज्ञान को परिमार्जित करते हैं और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति हेतु तपस्या, साधना, मनन आदि करते हैं। जयतु भारत 🚩

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g s singh Jan 24, 2022

❤️❤️🔱🔱❤️❤️ *सोलह सुखों के बारे में सुना था तो जानिये क्या हैं वो सोलह सुख* 1 *पहला सुख निरोगी काया।* 2 *दूजा सुख घर में हो माया।* 3 *तीजा सुख कुलवंती नारी।* 4 *चौथा सुख सुत आज्ञाकारी।* 5 *पाँचवा सुख सदन हो अपना।* 6 *छट्ठा सुख सिर कोई ऋण ना।* 7 *सातवाँ सुख चले व्यापारा।* 8 *आठवाँ सुख हो सबका प्यारा।* 9 *नौवाँ सुख भाई औ' बहन हो ।* 10 *दसवाँ सुख न बैरी स्वजन हो।* 11 *ग्यारहवाँ मित्र हितैषी सच्चा।* 12 *बारहवाँ सुख पड़ौसी अच्छा।* 13 *तेरहवां सुख उत्तम हो शिक्षा।* 14 *चौदहवाँ सुख सद्गुरु से दीक्षा।* 15 *पंद्रहवाँ सुख हो साधु समागम।* 16 *सोलहवां सुख संतोष बसे मन।* *16 सोलह सुख ये होते भाविक जन।* *जो पावैं सोइ धन्य हो जीवन।।* *हालांकि आज के समय में ये सभी सुख हर किसी को मिलना मुश्किल हैं लेकिन इनमे से जितने भी सुख मिले उससे खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए.*

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