🌸💐शुभ शुक्रवार💐💐 🌹 🐚जय श्रीगणेश🐚 🌹 🐚🥗संकष्टी चतुर्थी व्रत🥗🐚 🎎आप और आपके परिवार को शुभ शुक्रवार एंव संकट चौथ व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🌹प्रथम पूज्य श्री गणेश जी एंव माता रानी की कृपा से आपके घर परिवार में सुख, शांति एंव समृद्धि सदैव बनी रहे🌺 🏵️आपका दिन शुभ व मंगलमय हो 👏 (( 🎎तिल चौथ या चतुर्थी की कहानी🎎)) =========================== 🧕एक शहर में देवरानी-जेठानी रहती थी। जेठानी अमीर थी और देवरानी गरीब थी। देवरानी गणेश जी की भक्त थी। देवरानी का पति जंगल से लकड़ी काट कर बेचता था और अक्सर बीमार रहता था। देवरानी, जेठानी के घर का सारा काम करती और बदले में जेठानी बचा हुआ खाना, पुराने कपड़े आदि उसको दे देती थी। इसी से देवरानी का परिवार चल रहा था। माघ महीने में देवरानी ने तिल चौथ का व्रत किया। 5 आने का तिल व गुड़ लाकर तिलकुट्टा बनाया। पूजा करके तिल चौथ की कथा/ कहानी सुनी और तिलकुट्टा छींके में रख दिया और सोचा की चांद उगने पर पहले तिलकुट्टा और उसके बाद ही कुछ खाएगी। कथा सुनकर वह जेठानी के यहां चली गई। खाना बनाकर जेठानी के बच्चों से खाना खाने को कहा तो बच्चे बोले- मां ने व्रत किया हैं और मां भूखी हैं। जब मां खाना खाएगी हम भी तभी खाएंगे। जेठजी को खाना खाने को कहा तो जेठजी बोले- 'मैं अकेला नही खाऊंगा, जब चांद निकलेगा तब सब खाएंगे तभी मैं भी खाऊंगा' जेठानी ने उसे कहा कि आज तो किसी ने भी अभी तक खाना नहीं खाया तुम्हें कैसे दे दूं? तुम सुबह सवेरे ही बचा हुआ खाना ले जाना। देवरानी के घर पर पति, बच्चे सब आस लगाए बैठे थे कि आज तो त्योहार हैं इसलिए कुछ पकवान आदि खाने को मिलेगा। परंतु जब बच्चों को पता चला कि आज तो रोटी भी नहीं मिलेगी तो बच्चे रोने लगे। उसके पति को भी बहुत गुस्सा आया, कहने लगा- सारा दिन काम करके भी दो रोटी नहीं ला सकती तो काम क्यों करती हो? पति ने गुस्से में आकर पत्नी को कपड़े धोने के धोवने से मारा। धोवना हाथ से छूट गया तो पाटे से मारा। वह बेचारी गणेश जी को याद करती हुई रोते-रोते पानी पीकर सो गई। उस दिन गणेश जी देवरानी के सपने में आए और कहने लगे- धोवने मारी, पाटे मारी सो रही है या जाग रही है...। वह बोली- 'कुछ सो रही हूं, कुछ जाग रही हूं...। गणेश जी बोले- भूख लगी हैं, कुछ खाने को दे'। देवरानी बोली 'क्या दूं, मेरे घर में तो अन्न का एक दाना भी नहीं हैं.. जेठानी बचा खुचा खाना देती थी आज वह भी नहीं मिला। पूजा का बचा हुआ तिल कुट्टा छींके में पड़ा हैं वही खा लो। तिलकुट्टा खाने के बाद गणेश जी बोले- 'धोवने मारी, पाटे मारी निमटाई लगी है, कहां निमटे...। वह बोली, यह पड़ा घर, जहां इच्छा हो वहां निमट लो...। फिर गणेश जी बच्चे की तरह बोले, अब कहां पोंछू? नींद में मग्न अब देवरानी को बहुत गुस्सा आया कि कब से तंग किए जा रहे हैं, सो बोली, 'मेरे सर पर पोंछो और कहा पोछोगे... सुबह जब देवरानी उठी तो यह देखकर हैरान रह गई कि पूरा घर हीरे-मोती से जगमगा रहा है, सिर पर जहां विनायक जी पोंछनी कर गए थे वहां हीरे के टीके व बिंदी जगमगा रहे थे। उस दिन देवरानी, जेठानी के यहां काम करने नहीं गई। बड़ी देर तक राह देखने के बाद जेठानी ने बच्चों को देवरानी को बुलाने भेजा। जेठानी ने सोचा कल खाना नहीं दिया इसीलिए शायद देवरानी बुरा मान गई है। बच्चे बुलाने गए और बोले- चाची चलो, मां ने बुलाया है, सारा काम पड़ा है। देवरानी ने जवाब दिया अब उसकी जरूरत नहीं है। घर में सब भरपूर है गणेश जी के आशीष से...। बच्चो ने घर जाकर मां को बताया कि चाची का तो पूरा घर हीरे-मोतियों से जगमगा रहा है। जेठानी दौड़ती हुई देवरानी के पास आई और पूछा कि यह सब हुआ कैसे? देवरानी ने उसके साथ जो हुआ वो सब कह डाला। घर लौटकर जेठानी अपने पति से कहा कि आप मुझे धोवने और पाटे से मारो। उसका पति बोला कि भलीमानस मैंने कभी तुम पर हाथ भी नहीं उठाया। मैं तुम्हे धोवने और पाटे से कैसे मार सकता हूं। वह नहीं मानी और जिद करने लगी। मजबूरन पति को उसे मारना पड़ा। उसने ढ़ेर सारा घी डालकर चूरमा बनाया और छीकें में रखकर और सो गई। रात को चौथ विनायक जी सपने में आए कहने लगे, भूख लगी है, क्या खाऊं...। जेठानी ने कहा, हे गणेश जी महाराज, मेरी देवरानी के यहां तो आपने सूखा तिल कुट्टा खाया था, मैंने तो झरते घी का चूरमा बनाकर आपके लिए छींके में रखा हैं, फल और मेवे भी रखे हैं जो चाहें खा लीजिए...। बालस्वरूप गणेश जी बोले अब निपटे कहां...? जेठानी बोली, उसके यहां तो टूटी फूटी झोपड़ी थी मेरे यहां तो कंचन के महल हैं। जहां चाहो निपटो...। फिर गणेश जी ने पूछा, अब पोंछू कहां...? जेठानी बोली, मेरे ललाट पर बड़ी सी बिंदी लगाकर पोंछ लो...। धन की भूखी जेठानी सुबह बहुत जल्दी उठ गई। सोचा घर हीरे-जवाहरात से भर चूका होगा पर देखा तो पूरे घर में गंदगी फैली हुई थी। तेज बदबू आ रही थी। उसके सिर पर भी बहुत सी गंदगी लगी हुई थी। उसने कहा 'हे गणेश जी महाराज, यह आपने क्या किया...? मुझसे रूठे और देवरानी पर टूटे। जेठानी ने घर की सफाई करने की बहुत ही कोशिश की, परंतु गंदगी और ज्यादा फैलती गई। जेठानी के पति को मालूम चला तो वह भी बहुत गुस्सा हुआ और बोला- तेरे पास इतना सब कुछ था फिर भी तेरा मन नहीं भरा। परेशान होकर चौथ के गणेश जी से मदद की विनती करने लगी। गणेश जी ने कहा, देवरानी से जलन के कारण तूने जो किया था यह उसी का फल है। अब तू अपने धन में से आधा उसे दे देगी तभी यह सब साफ होगा...। उसने आधा धन बांट दिया किंतु मोहरों की एक हांडी चूल्हे के नीचे गाड़ रखी थी। उसने सोचा किसी को पता नहीं चलेगा और उसने उस धन को नहीं बांटा। उसने कहा 'हे श्री गणेश जी, अब तो अपना यह बिखराव समेटो, वे बोले- पहले चूल्हे के नीचे गाड़ी हुई मोहरों की हांडीसहित ताक में रखी दो सुई के भी दो हिस्से कर कर। इस प्रकार श्री गणेश ने बाल स्वरूप में आकर सुई जैसी छोटी चीज का भी बंटवारा किया और अपनी माया समेटी। हे गणेश जी महाराज, जैसी आपने देवरानी पर कृपा की वैसी सब पर करना। कहानी कहने वाले, सुनने वाले व हुंकारा भरने वाले सब पर कृपा करना। किंतु जेठानी को जैसी सजा दी वैसी किसी को मत देना। बोलो गणेश जी महाराज की जय !!! चौथ माता की जय !!! 🌹🐚🌺ॐ गणपतए नमः 🌺🐚🌹

+342 प्रतिक्रिया 222 कॉमेंट्स • 141 शेयर

🚩🥗🌹ॐ विष्णु देवाय नमः🌹🥗🚩 🔥🌺🌻सुप्रभात🌻🌺🔥 🌸🦚🩸शुभ गुरुवार🩸🦚🌸 🏵️ऐसे करें भगवान विष्‍णु का ध्‍यान, बनेंगे बिगड़े काम🏵️ 🎎महान तपस्वी भगवान श्रीहरि के परम भक्त ध्रुव 'ऊं नम: भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते थे और भगवान विष्‍णु को चतुर्भुज रूप में याद करते थे. ध्‍यान के समय ध्रुव भगवान का 'नारायण' नाम का जाप किया करते थे. नारायण भगवान विष्‍णु का ही नाम है. इसमें चार अक्षर है. ना रा य ण. भगवान की चार भुजाएं है और चार ही आयुध हैं. भगवान के चारो हाथों में शंख, गदा, चक्र और पद्म सुशोभित है. भगवान का ध्‍यान करने के लिए सबसे पहले आकाश की ओर मुख कर भगवान का ध्‍यान करना चाहिए और चिंतन करना चाहिए कि भगवान आकाश में दिखाई दे रहे हैं. भगवन अपने चतुर्भुज रूप में आकाश में विद्यमान हैं और उनके चरण धरती को छू रहे हैं. उनकी दो भुजाएं जमीन की ओर हैं और दो भुजाएं उपर की ओर हैं जिनमें शंख और चक्र धारण किये हुए है. उसके बाद भगवान का ध्‍यान अपने हृदय में करना चाहिए. ऐसा ध्‍यान करना चाहिए कि भगवान हृदय में विराजित हैं और सभी प्राणियों के हृदय में परम भगवान विष्‍णु स्वयं विद्यमान हैं. भगवान की स्तूति गान इस प्रकार करें त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ।। यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुत: स्तुवन्ति दिव्यै: स्तवै, वेदै: सांगपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगा:। ध्यानावस्थिततद् गतेन मनसा पशयन्ति यं योगिनो, यस्यान्तं न विदु: सुरासुरगणा देवाय तस्मै नम:।। परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् । पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम् ॥ आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा । असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे ॥ इन श्‍लोकों से करें भगवान को प्रसन्न शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ।। भगवान विष्‍णु का भजन गाकर भगवान को प्रसन्न करें श्री मन्ननारायणनारायणनारायण, श्री मन्ननारायणनारायणनारायण. 🚩🥗🌹ॐ विष्णु देवाय नमः 🌹🥗🚩

+266 प्रतिक्रिया 156 कॉमेंट्स • 66 शेयर

🏹🌹जय श्री राम 🌹🏹 🚩🛕जय श्री हनुमान 🛕🚩 🌻💐शुभ प्रभात 💐🌻 🌺🥗शुभ मंगलवार🌱🌺 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री राम भक्त हनुमान जी की कृपा हमेशा बनी रहे🌹 🙏आपका दिन शुभ व मंगलमय हो🙏 💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦 *दुर्लभ मानव तन मिला।* *मिला है धाम महान* *मत खो भोग विलास में* *भज ले जय श्री राम🙏 🎎एक बार नारद जी ने भगवान से प्रश्न किया कि प्रभु आपके भक्त निर्धन क्यों होते हैं? भगवान बोले - "नारद जी ! मेरी कृपा को समझना बड़ा कठिन है।" इतना कहकर भगवान नारद के साथ साधु भेष में पृथ्वी पर पधारे और एक सेठ जी के घर भिक्षा मांगने के लिए द्वार खटखटाने लगे। सेठ जी बिगड़ते हुए द्वार की और आए और देखा तो दो साधु खड़े हैं। भगवान बोले - "भैया ! बड़े जोरों की भूख लगी है। थोड़ा सा भोजन मिल जाए।" सेठ जी बिगड़कर बोले "तुम दोनों को लाज नहीं आती। तुम्हारे बाप का माल है ? कर्म करके खाने में लाज आती है, जाओ-जाओ किसी होटल में भिक्षा मांगना।" नारद जी बोले - "देखा प्रभु ! यह आपके भक्तों और आपका निरादर करने वाला सुखी प्राणी है। इसको अभी शाप दीजिये।" नारद जी की बात सुनते ही भगवान ने उस सेठ को अधिक धन सम्पत्ति बढ़ाने वाला वरदान दे दिया। इसके बाद भगवान नारद जी को लेकर एक बुढ़िया मैया के घर में गए। जिसकी एक छोटी सी झोपड़ी थी, जिसमें एक गाय के अलावा और कुछ भी नहीं था। जैसे ही भगवान ने भिक्षा के लिए आवाज लगायी, बुढ़िया मैया बड़ी खुशी के साथ बाहर आयी। दोनों सन्तों को आसन देकर बिठाया और उनके पीने के लिए दुध लेकर आयीं और.. बोली - "प्रभु ! मेरे पास और कुछ नहीं है, इसे ही स्वीकार कीजिये।" भगवान ने बड़े प्रेम से स्वीकार किया। तब नारद जी ने भगवान से कहा - "प्रभु ! आपके भक्तों की इस संसार में देखो कैसी दुर्दशा है, मेरे पास तो देखी नहीं जाती। यह बेचारी बुढ़िया मैया आपका भजन करती है और अतिथि सत्कार भी करती है। आप इसको कोई अच्छा सा आशीर्वाद दीजिए।" भगवान ने थोड़ा सोचकर उसकी गाय को मरने का अभिशाप दे डाला।" यह सुनकर नारद जी बिगड़ गए और कहा - "प्रभु जी ! यह आपने क्या किया ?" भगवान बोले - "यह बुढ़िया मैया मेरा बहुत भजन करती है। कुछ दिनों में इसकी मृत्यु हो जाएगी और मरते समय इसको गाय की चिन्ता सताएगी कि.. मेरे मरने के बाद मेरी गाय को कोई कसाई न ले जाकर काट दे, मेरे मरने के बाद इसको कौन देखेगा ? तब इस मैया को मरते समय मेरा स्मरण न होकर बस गाय की चिन्ता रहेगी और वह मेरे धाम को न जाकर गाय की योनि में चली जाएगी।" उधर सेठ को धन बढ़ाने वाला वरदान दिया कि मरने वक़्त धन तथा तिजोरी का ध्यान करेगा और वह तिजोरी के नीचे साँप बनेगा। प्रकृति का नियम है जिस चीज मे अति लगाव रहेगा यह जीव मरने के बाद वही जन्म लेता है ओर बहुत दुख भोगता है..अतः अपना चिंतन प्रभू की और अधिक रखे ! *ईश्वर का अस्तित्व तुम्हें साकार नजर आ जाएगा* *श्रद्धा से नतमस्तक हो आधार नजर आ जाएगा* 🙏🚩 जय श्री राम 🚩🙏 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

+282 प्रतिक्रिया 196 कॉमेंट्स • 90 शेयर

🛕🌿🔱काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग 🔱🌿🛕 🌹🔱🩸ॐ नमः शिवाय 🩸🔱🌹 🌺🌿🌸शुभ सोमवार🌸🌿🌺 🌈🥗🌻सुप्रभात🌻🥗🌈 🙏आप और आपके पूरे परिवार पर महादेव जी की कृपा सदा बनी रहे 🌹 👏आपका दिन शुभ और मंगलमय हो🔥 💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦 🌹मनोबुद्धयहंकारचित्तानि नाहम् न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे न च व्योम भूमिर्न तेजॊ न वायु: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥1॥ मैं न तो मन हूं, न बुद्धि, न अहंकार, न ही चित्त हूं मैं न तो कान हूं, न जीभ, न नासिका, न ही नेत्र हूं मैं न तो आकाश हूं, न धरती, न अग्नि, न ही वायु हूं मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 न च प्राण संज्ञो न वै पञ्चवायु: न वा सप्तधातुर्न वा पञ्चकोश: 🔱न वाक्पाणिपादौ न चोपस्थपायू चिदानन्द रूप:शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥2॥ मैं न प्राण हूं, न ही पंच वायु हूं मैं न सात धातु हूं, और न ही पांच कोश हूं मैं न वाणी हूं, न हाथ हूं, न पैर, न ही उत्‍सर्जन की इन्द्रियां हूं मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं। 🥓🥓🥓🥓🥓🥓🥓🥓🥓🥓🥓🥓 🏵️न मे द्वेष रागौ न मे लोभ मोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव: न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥3॥ न मुझे घृणा है, न लगाव है, न मुझे लोभ है, और न मोह न मुझे अभिमान है, न ईर्ष्या मैं धर्म, धन, काम एवं मोक्ष से परे हूं मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं। 🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸 🌸न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खम् न मन्त्रो न तीर्थं न वेदार् न यज्ञा: 🎎अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता चिदानन्द रूप:शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥4॥ मैं पुण्य, पाप, सुख और दुख से विलग हूं मैं न मंत्र हूं, न तीर्थ, न ज्ञान, न ही यज्ञ न मैं भोजन(भोगने की वस्‍तु) हूं, न ही भोग का अनुभव, और न ही भोक्ता हूं मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🌀न मे मृत्यु शंका न मे जातिभेद:पिता नैव मे नैव माता न जन्म: 🌹न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥5॥ न मुझे मृत्यु का डर है, न जाति का भेदभाव मेरा न कोई पिता है, न माता, न ही मैं कभी जन्मा था मेरा न कोई भाई है, न मित्र, न गुरू, न शिष्य, मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 🔱अहं निर्विकल्पॊ निराकार रूपॊ विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम् न चासंगतं नैव मुक्तिर्न मेय: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥6॥ मैं निर्विकल्प हूं, निराकार हूं मैं चैतन्‍य के रूप में सब जगह व्‍याप्‍त हूं, सभी इन्द्रियों में हूं, न मुझे किसी चीज में आसक्ति है, न ही मैं उससे मुक्त हूं, मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि‍, अनंत शिव हूं 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 🛕🔥🔱ॐ नमः शिवाय 🔱🔥🛕

+281 प्रतिक्रिया 135 कॉमेंट्स • 75 शेयर

🔥🌲🌞ॐ सूर्य देवाय नमः 🌞🌲🔥 🌀🌿🌺शुभ रविवार🌺🌿🌀 🌹🥗🌻सुप्रभात🌻🥗🌹 🙏आपका का दिन शुभ और मंगलमय हो 🙏 🔥🌞सूर्य और साथ घोड़े🌞🔥 :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 🌞 *अद्भुत है सूर्य रथ के सात घोड़ों से जुड़ा विज्ञान🩸* 🎎हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं तथा उनसे जुड़ी कहानियों का इतिहास काफी बड़ा है या यूं कहें कि कभी ना खत्म होने वाला यह इतिहास आज विश्व में अपनी एक अलग ही पहचान बनाए हुए है। विभिन्न देवी-देवताओं का चित्रण, उनकी वेश-भूषा और यहां तक कि वे किस सवारी पर सवार होते थे यह तथ्य भी काफी रोचक हैं। 🌞 *सूर्य रथ*🌷 *************** हिन्दू धर्म में विघ्नहर्ता गणेश जी की सवारी काफी प्यारी मानी जाती है। गणेश जी एक मूषक यानि कि चूहे पर सवार होते हैं जिसे देख हर कोई अचंभित होता है कि कैसे महज एक चूहा उनका वजन संभालता है। गणेश जी के बाद यदि किसी देवी या देवता की सवारी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है तो वे हैं सूर्य भगवान। 🌞 *क्यों जुते हैं सात घोड़े *🌸 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 सूर्य भगवान सात घोड़ों द्वारा चलाए जा रहे रथ पर सवार होते हैं। सूर्य भगवान जिन्हें आदित्य, भानु और रवि भी कहा जाता है, वे सात विशाल एवं मजबूत घोड़ों पर सवार होते हैं। इन घोड़ों की लगाम अरुण देव के हाथ होती है और स्वयं सूर्य देवता पीछे रथ पर विराजमान होते हैं। 🌞 *सात की खास संख्या*🌺 💫💫💫💫💫💫💫💫💫 लेकिन सूर्य देव द्वारा सात ही घोड़ों की सवारी क्यों की जाती है? क्या इस सात संख्या का कोई अहम कारण है? या फिर यह ब्रह्मांड, मनुष्य या सृष्टि से जुड़ी कोई खास बात बताती है। इस प्रश्न का उत्तर पौराणिक तथ्यों के साथ कुछ वैज्ञानिक पहलू से भी बंधा हुआ है। 🌞 *कश्यप और अदिति की संतानें*🎎 ******************************** सूर्य भगवान से जुड़ी एक और खास बात यह है कि उनके ११ भाई हैं, जिन्हें एकत्रित रूप में आदित्य भी कहा जाता है। यही कारण है कि सूर्य देव को आदित्य के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य भगवान के अलावा ११ भाई ( अंश, आर्यमान, भाग, दक्ष, धात्री, मित्र, पुशण, सवित्र, सूर्या, वरुण, वमन, ) सभी कश्यप तथा अदिति की संतान हैं। 🌞 *वर्ष के १२ माह के समान*🩸 ======================= पौराणिक इतिहास के अनुसार कश्यप तथा अदिति की ८ या ९ संतानें बताई जाती हैं लेकिन बाद में यह संख्या १२ बताई गई। इन १२ संतानों की एक बात खास है और वो यह कि सूर्य देव तथा उनके भाई मिलकर वर्ष के १२ माह के समान हैं। यानी कि यह सभी भाई वर्ष के १२ महीनों को दर्शाते हैं। 🌞 *सूर्यदेव की दो पत्नियां*🧕 ~~~~~~~~~~~~~~~~~ सूर्य देव की दो पत्नियां – संज्ञा एवं छाया हैं जिनसे उन्हें संतान प्राप्त हुई थी। इन संतानों में भगवान शनि और यमराज को मनुष्य जाति का न्यायाधिकारी माना जाता है। जहां मानव जीवन का सुख तथा दुख भगवान शनि पर निर्भर करता है वहीं दूसरी ओर शनि के छोटे भाई यमराज द्वारा आत्मा की मुक्ति की जाती है। इसके अलावा यमुना, तप्ति, अश्विनी तथा वैवस्वत मनु भी भगवान सूर्य की संतानें हैं। आगे चलकर मनु ही मानव जाति का पहला पूर्वज बने। 🌞 *सूर्य भगवान का रथ*🌞 =================== सूर्य भगवान सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होते हैं। इन सात घोड़ों के संदर्भ में पुराणों तथा वास्तव में कई कहानियां प्रचलित हैं। उनसे प्रेरित होकर सूर्य मंदिरों में सूर्य देव की विभिन्न मूर्तियां भी विराजमान हैं लेकिन यह सभी उनके रथ के साथ ही बनाई जाती हैं। 🛕 *कोणार्क मंदिर*🛕 ||||||||||||||||||||||||||||||||||| विशाल रथ और साथ में उसे चलाने वाले सात घोड़े तथा सारथी अरुण देव, यह किसी भी सूर्य मंदिर में विराजमान सूर्य देव की मूर्ति का वर्णन है। भारत में प्रसिद्ध कोणार्क का सूर्य मंदिर भगवान सूर्य तथा उनके रथ को काफी अच्छे से दर्शाता है। 🌞 *सात से कम या ज्यादा क्यों नहीं*🔥 ∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆ लेकिन इस सब से हटकर एक सवाल काफी अहम है कि आखिरकार सूर्य भगवान द्वारा सात ही घोड़ों की सवारी क्यों की जाती हैं। यह संख्या सात से कम या ज्यादा क्यों नहीं है। यदि हम अन्य देवों की सवारी देखें तो श्री कृष्ण द्वारा चालए गए अर्जुन के रथ के भी चार ही घोड़े थे, फिर सूर्य भगवान के सात घोड़े क्यों? क्या है इन सात घोड़ों का इतिहास और ऐसा क्या है इस सात संख्या में खास जो सूर्य देव द्वारा इसका ही चुनाव किया गया। 🌞 *सात घोड़े और सप्ताह के सात दिन*🌀 ============================ सूर्य भगवान के रथ को संभालने वाले इन सात घोड़ों के नाम हैं - गायत्री, भ्राति, उस्निक, जगति, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति। कहा जाता है कि यह सात घोड़े एक सप्ताह के सात दिनों को दर्शाते हैं। यह तो महज एक मान्यता है जो वर्षों से सूर्य देव के सात घोड़ों के संदर्भ में प्रचलित है लेकिन क्या इसके अलावा भी कोई कारण है जो सूर्य देव के इन सात घोड़ों की तस्वीर और भी साफ करता है। 🌞 *सात घोड़े रोशनी को भी दर्शाते हैं।*🌼 •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• पौराणिक दिशा से विपरीत जाकर यदि साधारण तौर पर देखा जाए तो यह सात घोड़े एक रोशनी को भी दर्शाते हैं। एक ऐसी रोशनी जो स्वयं सूर्य देवता यानी कि सूरज से ही उत्पन्न होती है। यह तो सभी जानते हैं कि सूर्य के प्रकाश में सात विभिन्न रंग की रोशनी पाई जाती है जो इंद्रधनुष का निर्माण करती है। 🌞 *बनता है इंद्रधनुष*🌈 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ यह रोशनी एक धुर से निकलकर फैलती हुई पूरे आकाश में सात रंगों का भव्य इंद्रधनुष बनाती है जिसे देखने का आनंद दुनिया में सबसे बड़ा है। 🌞 *प्रत्येक घोड़े का रंग भिन्न*🌹 ∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆∆ सूर्य भगवान के सात घोड़ों को भी इंद्रधनुष के इन्हीं सात रंगों से जोड़ा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि हम इन घोड़ों को ध्यान से देखें तो प्रत्येक घोड़े का रंग भिन्न है तथा वह एक-दूसरे से मेल नहीं खाता है। केवल यही कारण नहीं बल्कि एक और कारण है जो यह बताता है कि सूर्य भगवान के रथ को चलाने वाले सात घोड़े स्वयं सूरज की रोशनी का ही प्रतीक हैं। 🎎*पौराणिक गाथा से इतर*🎎 ************************** यदि आप किसी मंदिर या पौराणिक गाथा को दर्शाती किसी तस्वीर को देखेंगे तो आपको एक अंतर दिखाई देगा। कई बार सूर्य भगवान के रथ के साथ बनाई गई तस्वीर या मूर्ति में सात अलग-अलग घोड़े बनाए जाते हैं, ठीक वैसा ही जैसा पौराणिक कहानियों में बताया जाता है लेकिन कई बार मूर्तियां इससे थोड़ी अलग भी बनाई जाती हैं। 🌞 *अलग-अलग घोड़ों की उत्पति🌞 """"""""""""""""""""""""""""""""""""""""”""""""" कई बार सूर्य भगवान की मूर्ति में रथ के साथ केवल एक घोड़े पर सात सिर बनाकर मूर्ति बनाई जाती है। इसका मतलब है कि केवल एक शरीर से ही सात अलग-अलग घोड़ों की उत्पत्ति होती है। ठीक उसी प्रकार से जैसे सूरज की रोशनी से सात अलग रंगों की रोशनी निकलती है। इन दो कारणों से हम सूर्य भगवान के रथ पर सात ही घोड़े होने का कारण स्पष्ट कर सकते हैं। 🌞 *सारथी अरुण*🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ पौराणिक तथ्यों के अनुसार सूर्य भगवान जिस रथ पर सवार हैं उसे अरुण देव द्वारा चलाया जाता है। एक ओर अरुण देव द्वारा रथ की कमान तो संभाली ही जाती है लेकिन रथ चलाते हुए भी वे सूर्य देव की ओर मुख कर के ही बैठते है ! 🌀केवल एक ही पहिया🌀 ********************** रथ के नीचे केवल एक ही पहिया लगा है जिसमें १२ तिल्लियां लगी हुई हैं। यह काफी आश्चर्यजनक है कि एक बड़े रथ को चलाने के लिए केवल एक ही पहिया मौजूद है, लेकिन इसे हम भगवान सूर्य का चमत्कार ही कह सकते हैं। कहा जाता है कि रथ में केवल एक ही पहिया होने का भी एक कारण है। 🌞पहिया एक वर्ष को दर्शाता है🌞 """""""""""”"""""""""""""""""""""""""""""""" यह अकेला पहिया एक वर्ष को दर्शाता है और उसकी १२ तिल्लियां एक वर्ष के १२ महीनों का वर्णन करती हैं। एक पौराणिक उल्लेख के अनुसार सूर्य भगवान के रथ के समस्त ६० हजार वल्खिल्या जाति के लोग जिनका आकार केवल मनुष्य के हाथ के अंगूठे जितना ही है, वे सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करते हैं। इसके साथ ही गांधर्व और पान्नग उनके सामने गाते हैं औरअप्सराएं उन्हें खुश करने के लिए नृत्य प्रस्तुत करती हैं। 🌞 ऋतुओं का विभाजन🌞 ================== कहा जाता है कि इन्हीं प्रतिक्रियाओं पर संसार में ऋतुओं का विभाजन किया जाता है। इस प्रकार से केवल पौराणिक रूप से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों से भी जुड़ा है भगवान सूर्य का यह विशाल रथ। 🚩🌞ॐ आदित्याय नमः 🌞🚩

+214 प्रतिक्रिया 146 कॉमेंट्स • 62 शेयर

🌹शुभ शुक्रवार🌹 🌞शुभ मकर संक्रांति🌞 🙏आपको सपरिवार मकर संक्रांति पर्व( खिचड़ी ) और शुभ शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेर सारी बधाई🙏 🏵️आप सभी पर भगवान सूर्यदेव और माता रानी की कृपा सदा बनी रहे 🌹 🌻आपका दिन शुभ और मंगलमय हो 🙏 🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊 🎎क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व🎎 ************************************** 🌞मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन इस साल देशभर में 15 जनवरी को मनाया जायेगा। इसलिए शास्त्र नियम के अनुसार मध्यरात्रि में संक्रांति होने के वजह से पुण्य काल अगले दिन पर होता हैं। इस दिन सुबह उठकर सूर्य देवता को जल, तिल और लाल चन्दन अर्पणा करना अच्छा होता है। मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन इस साल देशभर में 15 जनवरी को मनाया जायेगा। 15 जनवरी इसलिए क्योंकि देर रात 2.07 मिनट को सूर्य मकर राशि में आगमन करने वाला है। इसलिए शास्त्र नियम के अनुसार मध्यरात्रि में संक्रांति होने के वजह से पुण्य काल अगले दिन पर होता हैं। इस दिन सुबह उठकर सूर्य देवता को जल, तिल और लाल चन्दन अर्पणा करना अच्छा होता है। पौष माश में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है तभी हिन्दू मकर संक्रांति मनाते है। संक्रांत के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति होती है इसलिए इस त्यौहार को कहीं कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। माना जाता हैं कि इस भगवान सूर्य अपने पुत्र शानि से मिलने उनके घर जाते हैं जो कि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस त्यौहार को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन जप, तप और दान ऐसी धर्म क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। इस दिन दिया हुआ दान सो गुना बढ़कर दिया है ऐसा माना जाता है। इस दिन तिल और गुड़ का दान करना शुभ होता है। 🌞ॐ सूर्य देवाय नमः 🌞

+242 प्रतिक्रिया 187 कॉमेंट्स • 149 शेयर