🎎सोलह श्रृंगार का महत्व🎎 ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ 🌹सीता जी ने पूछा मैया से बताओ ---- माँ एक सार ! विवाहोपरांत --- हर नारी क्यों करती सोलह श्रृंगार!! 🌺मैया ने -----मीठी वाणी में समझाई ------- हर बात ! सोलह श्रृंगार से पूर्ण होती धरा पर ------- नारी जात !! 💐मेंहदी ---को हर समय अपने हाथों में रचाना ! कर्मो की लालिमा से सारा जग -- महकाना !! 🌺आँखों में प्रेम बसा कर काजल उनमें लगाना ! भलै सम्पति खो जाये पर , शील जल बचाना!! 🌞सूर्य की भाँति प्रकाशवान हो छोड़ देना -- शरारत -- जिद्दी ! इसिलिए तो ---- नारी लगाये अपने माँथे पर ------- बिन्दी !! 🎎मन को काबू में करके लगा देना उस पर लगाम ! नारी की नाक की नथनी देती है - यह सुंदर पैगाम !! 🎭बूरे कर्म से परहेज करना यश कमाना ---- भरपूर ! पतिव्रत धर्म का पालन यह सिखलाता है -सिंदूर !! 👏खुद की प्रशंसा सुनने की मत करना तुम ---- भूल ! हर हाल में खुश रहना शिक्षा यह देता कर्णफूल !! 🥀सबके मन को मोहने वाले कर्म करना तू ------ बाला ! सुख - दुख में --सम रहना यह सीख देती मोहन माला !! ❤️सीघा-सादा जीवन रखना मत करना तुम ----- फंद ! इसिलिए तो -- नारी बाँधे अपने हाथ में -- बाजूबंद !! 🎭कभी किसी में छल न करना रुपया हो या -------- गल्ला ! कमर में --- लटकाये रखना अपना --------- सुंदर छल्ला !! 🎎बड़े - बूढ़ो की सेवा करके कर देना उनको --- कायल ! घर-आँगन छनकाती रहना अपने पैरों की ----- पायल !! 🙏छोटो को आशीष देना खबरदार-जो उनसे रुठी ! हाथों की --अँगुलियों में पहने रखना ---- अँगूठी !! 💐परिवार को बिछड़ने न देना रखना सबको ------- साथ ! पैरों की बिछिया --- प्यारी बतलाती ------- यह बात !! 🎎कठोर वाणी का त्याग कर करना सबका ---- मंगल ! जीवन को - रंगो से भरना पहने रखना ------ कंगन !! 💫कमरबंद की भाँति तुम सेवा में ------- बँध जाना ! पति के संग - --संग तुम पूरे परिवार को अपनाना !! 🌹🌿जय श्री राम 🌿🌹 💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫

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((🦚श्रीकृष्ण के जन्म की पौराणिक कथा🦚)) 🌹********************************🌹 🦚🌹🌻सुप्रभात🌻🌹🦚 🦚🎂🌹जय श्री कृष्ण🌹🎂🦚 🔱🌿🛕ॐ नमः शिवाय🛕🌿🔱 🦚🎂🏵️शुभ कृष्ण जन्माष्टमी🏵️🎂🦚 🦚🌺🥗 शुभ सोमवार🥗🎂🦚 🙏आपको सपरिवार 🎂भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव और अगस्त माह के अंतिम 🔱शिवमय सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर भगवान श्री कृष्ण जी और बाबा भोलेनाथ की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका दिन शुभ और मंगलमय हो🌹 🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂 ((🦚श्रीकृष्ण के जन्म की पौराणिक कथा🦚) 🌹********************************🌹 🎎भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था। एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई- 'हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा।' यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ। तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- 'मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ है?' कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया। वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। उन्होंने वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ 'माया' थी। जिस कोठरी में देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े। तब भगवान ने उनसे कहा- 'अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंदजी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। इस समय वातावरण अनुकूल नहीं है। फिर भी तुम चिंता न करो। जागते हुए पहरेदार सो जाएंगे, कारागृह के फाटक अपने आप खुल जाएंगे और उफनती अथाह यमुना तुमको पार जाने का मार्ग दे देगी।' उसी समय वसुदेव नवजात शिशु-रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंदजी के घर पहुंचे। वहां उन्होंने नवजात शिशु को यशोदा के साथ सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा आ गए। कारागृह के फाटक पूर्ववत बंद हो गए। अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी को बच्चा पैदा हुआ है। उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- 'अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारनेवाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है। वह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा।' यह है कृष्ण जन्म की कथा। 🦚🌹जय श्री कृष्ण 🌹🦚

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💐🌲🌹शुभ शनिवार🌹🌲💐 🌀🌹🎇शुभसंध्या 🎇🌹🌀 🎎((गोपी गीत इतना श्रेष्ठ क्यों है))🎎 ******************************* 🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇🍇 🌷श्रीमद्भागवत में दशम स्कंध में गोपी गीत आता है। ये गोपी गीत भगवान कृष्ण को साक्षात् पाने का मन्त्र है। भगवान कृष्ण को पाने के जितने भी तरीके हैं या होंगे उनमे से एक गोपी गीत है। इस गोपी गीत(gopi geet) में उन्नीस श्लोक हैं। जब भगवान शरद पूर्णिमा की रात में रास लीला का प्रारम्भ करते है तो कुछ समय बाद गोपियों को मान हो जाता है कि इस जगत में हमारा भाग्य ही सबसे श्रेष्ठ है भगवान उनके मन की बात समझकर बीच रास से अंतर्ध्यान हो जाते है, 🌹व्यक्ति केवल दो ही जगह जा सकता है, एक है संसार और दूसरा है आध्यात्म या भगवान. जैसे ही भगवान से हटकर गोपियों का मन अपने ही भाग्य पर चला गया यहाँ भगवान बता रहे है कि जैसे ही भक्त मुझसे मन हटाता है वैसे ही मै चला जाता हूँ। 🎎भगवान सहसा अंतर्धान हो गये:-% 💐उन्हें न देखकर व्रजयुवतियो के हदय में विरह की ज्वाला जलने लगी – भगवान की मदोन्मत्त चाल, प्रेमभरी मुस्कान, विलासभरी चितवन, मनोरम प्रेमालाप, भिन्न-भिन्न प्रकार की लीलाओ और श्रृंगाररस की भाव-भंगियो ने उनके चित्त को चुरा लिया था. वे प्रेम की मतवाली गोपियाँ श्रीकृष्णमय हो गयी और फिर श्रीकृष्ण की विभिन्न चेष्टाओं और लीलाओ का अनुकरण करने लगी. अपने प्रियतम की चाल-ढाल, हास-विलास और चितवन- बोलन आदि मे श्रीकृष्ण की प्यारी गोपियाँ उनके समान ही बन गयी. 🌹सर्वथा भूलकर ‘श्रीकृष्ण स्वरुप’ हो गयी:- 🌋उनके शरीर में भी वही गति-मति वही भाव-भंगिमा उतर आयी, वे अपने को सर्वथा भूलकर ‘श्रीकृष्ण स्वरुप’ हो गयी. ‘मै श्रीकृष्ण ही हूँ’ इस प्रकार कहने लगी वे सब परस्पर मिलकर ऊँचे स्वर से उन्ही के गुणों का गान करने लगी. मतवाली होकर एक वन से दूसरे वन में एक झाड़ी से दूसरी झाड़ी में जा-जाकर श्रीकृष्ण को ढूँढने लगी. वे पेड-पौधों से उनका पता पूछने लगी – हे पीपल, बरगद! नंदनंदन श्यामसुन्दर अपनी प्रेमभरी मुस्कान और चितवन से हमारा मन चुराकर चले गये है क्या तुमने उन्हें देखा है ? 🎸एक ही स्वर में, ‘गोपी-गीत’ गाया :- 🎎जब भगवान उन्हें कही नहीं मिले तो श्रीकृष्ण के ध्यान में डूबी गोपियाँ यमुना जी के पावन पुलिन पर रमणरेती में लौट आयी और एक साथ मिलकर श्रीकृष्ण के गुणों का गान करने लगी.सबने एक साथ, एक ही स्वर में, ‘गोपी-गीत‘ गाया. जब सब गोपियों के मन की दशा एक जैसी ही थी, सबके भाव की एक ही दशा थी, तब उन करोड़ो गोपियों के मुँह से एक ही गीत, एक साथ निकला,इसमें आश्चर्य कैसा ? गोपी गीत में उन्नीस श्लोक है. गोपी गीत `कनक मंजरी’ छंद में है. ये गोपी गीत बड़ा ही विलक्षण ,आलौकिक है जो नित्य इस गोपी गीत पाठ करता है भगवान श्री कृष्ण जी में उसका प्रेम होता है और उसे उनकी अनुभूति होती है. 🎎भगवान के अन्तर्धान होने का एक कारण और था भगवान गोपियों के प्रेम को जगत को दिखाना चाहते थे कि गोपियाँ मुझसे कितना प्रेम करती है. नीचे पूरा गोपी गीत दिया गया है। आप उस गोपी गीत का एक एक श्लोक पढ़िए और उसका मर्म जानिए। यदि आप ह्रदय से , भगवान के प्रेम में डूबकर, सब कुछ भुलाकर गोपी गीत नहीं पढ़ेंगे तो आपको कुछ भी समझ नहीं आने वाला है। इसलिए मन को भगवान के चरणों में सौंपकर गोपी गीत का पाठ कीजिये। 🦚🌹जय श्री राधे कृष्ण🌹🦚 🦚 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸

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🎎धर्मपत्नी के भाई को साला क्यों कहते हैं🎎 ************************************ 🚩🪔👣जय माता दी 👣🪔🚩 🌺🎇🍑शुभ शुक्रवार🍑🎇🌺 🌹🌴🌀शुभरात्रि🌀🌴🌹 🙏आप और आपके पूरे परिवार को भादो माह के पहले शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🌺आप और आपके पूरे परिवार पर माता रानी की आशीर्वाद निरंतर बनी रहेऔर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो 👏 🌀अपका का दिन शुभ और मंगलमय हो 🌀 🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇 🎎धर्मपत्नी के भाई को साला क्यों कहते हैं🎎 ************************************* 🧑कितना श्रेष्ठ और सम्मानित होता है🧑 🌹"साला" शब्द की रोचक जानकारी🌹 हम प्रचलन की बोलचाल में *साला* शब्द को एक *"गाली"* के रूप में देखते हैं साथ ही *"धर्मपत्नी"* के भाई/भाइयों को भी "साला", *"सालेसाहब"* के नाम से इंगित करते हैं। 🏵️"पौराणिक कथाओं"* में से एक *"#समुद्र_मंथन"* में हमें एक जिक्र मिलता है, मंथन से जो *14 दिव्य रत्न* प्राप्त हुए थे वो : कालकूट (हलाहल), ऐरावत, कामधेनु, उच्चैःश्रवा, कौस्तुभमणि, कल्पवृक्ष, रंभा (अप्सरा), महालक्ष्मी, शंख (जिसका नाम साला था!), वारुणी, चन्द्रमा, शारंग धनुष, गंधर्व, और अंत में अमृत। 🌺*"लक्ष्मीजी"* मंथन से *"स्वर्ण"* के रूप में निकली थी, इसके बाद जब *"साला शंख"* निकला, तो उसे *लक्ष्मीजी* का भाई कहा गया! *दैत्य और दानवों* ने कहा कि अब देखो लक्ष्मीजी का *भाई साला (शंख)* आया है .. तभी से ये प्रचलन में आया कि नव विवाहिता "बहु" या *धर्मपत्नी* जिसे हम *"गृहलक्ष्मी"* भी कहते है, उसके भाई को बहुत ही पवित्र नाम साला कह कर पुकारा जाता हैं। 🐚समुद्र *मंथन* के दौरान "#पांचजन्य साला शंख" *प्रकट* हुआ, इसे भगवान *विष्णु* ने अपने पास रख लिया। 🐚इस शंख को *"विजय का प्रतीक"* माना गया है, साथ ही इसकी ध्वनि को भी बहुत ही शुभ माना गया है। 🌋*विष्णु पुराण* के अनुसार *माता लक्ष्मी* समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका *सहोदर* भाई है। अतः यह भी मान्यता है कि जहाँ *शंख है*, वहीं *लक्ष्मी* का वास होता है। 🩸इन्हीं कारणों से *हिन्दुओं* द्वारा पूजा के दौरान *शंख* को बजाया जाता है। 🏵️जब भी *धन-प्राप्ति* के उपाय करो "*शंख" को कभी नजर अंदाज ना करे, *लक्ष्मीजी* का चित्र या प्रतिमा के नजदीक रखें। जब भी किसी जातक का साला या जातिका का भाई खुश होता है तो ये उनके यहाँ *"धन आगमन"* का शुभ सूचक होता है और इसके विपरीत साले से *संबंध बिगाड़ने पर जातक घोर दरिद्रता का जीवन जीने लगता है। 🎎अतः *साले* साहब को सदैव *प्रसन्न* रखें *लक्ष्मी* स्वयं चलकर आपके घर दस्तक देगी और है तो बनी रहेगी..... 🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗 🌹🙏 जय माता लक्ष्मी जी🙏🌹

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