🙏🌹 *जय श्री महाकाल*🌹🙏 *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती शृंगार दर्शन* 🔱 *20 जनवरी 2022 ( गुरुवार )*🔱 वर्तमान समय में मनुष्य अनेक परेशानियों से जूझ रहा है और उन्ही में से एक है कर्ज, आम बोलचाल की भाषा में कर्ज को मर्ज कहा जाता है। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=5215299805167643&id=100000630247964 एक बार व्यक्ति कर्ज में डूबा तो वो फिर उसमें डूबता ही चला जाता है।ज्योतिष में ऐसे अनेक सूत्र हैं जिनके माध्यम से व्यक्ति की जन्मकुंडली में कर्ज का पता चलता है। इस लेख में हम उन्ही कुछ सूत्रों के बारे में चर्चा करेंगे। ज्योतिष में दूसरे भाव में धन का, ग्यारहवें भाव से लाभ का और छठे भाव से कर्ज का पता चलता है। दूसरे भाव और लाभ भाव का अगर आपस में परिवर्तन हो यानी धन का स्वामी लाभ में और लाभ का स्वामी धन में बैठा हो तो ये लक्ष्मी योग बनता है। ऐसा व्यक्ति धनवान होता है लेकिन अगर छठे भाव की स्थिति कमजोर हुई तो उसे नौकरी, कर्ज संबंधी समस्या रहती है। 1 - अगर किसी कुंडली में नीच का पाप ग्रह छठे भाव में हो और लग्नेश दुर्बल हो तो ऐसा व्यक्ति कर्ज का शिकार होता है। अगर मारकेश छठे भाव में सम्बन्ध बना रहा तो तो मुमकिन है कि बीमारी के लिए जातक कर्ज ले। यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि सूत्र में पाप ग्रह नीच राशि में ही होना चाहिए। छठे भाव में सूर्य, मंगल और राहु जैसे ग्रह शुभ फल कारक माने गए है। ये व्यक्ति के शत्रु का नाश करते है लेकिन अगर ग्रह नीच है और पीड़ित है तो वो व्यक्ति को शुभ फल नहीं देता है। 2 - छठे भाव में ग्रहण योग हो और धन, लाभ के स्वामी पीड़ित हो तो भी जातक कर्ज में जाता है। दरअसल राहु-सूर्य, सूर्य-मंगल, सूर्य-केतु जैसे पाप ग्रह अगर छठे भाव में युति करे तो वो उस भाव के शुभ फल में कमी करते है। उस स्थिति में ये आवश्यक हो जाता है कि धन और लाभ के स्वामी बलवान हो लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो जातक उन ग्रहों की दशा में अवश्य ही कर्जदार होगा। विज्ञापन 3- छठे भाव का स्वामी खुद कमजोर हो और छठे भाव में शनि राहु, शनि मंगल या शनि केतु की युति हो तो भी यह योग बनता है। दरअसल छठे भाव को उपचय भाव यानी वृद्धि का भाव कहा गया है। अगर छठे भाव का स्वामी नीच होकर केंद्र में जाए तो भाव के शुभ फल में कमी हो। वहीं शनि मंगल या शनि राहु की युति इस भाव में मनुष्य के शत्रु द्वारा धन का नाश करवाती है। शनि मंगल की युति छठे भाव में कभी भी व्यक्ति को सफल नहीं होने देती। 4- गुरु अगर धन का स्वामी होकर राहु के साथ छठे भाव में हो और लग्नेश कमजोर हो तो भी व्यक्ति पीड़ित होता है। दरअसल गुरु जीव कारक ग्रह है और राहु के साथ युति होने पर वो गुरु चांडाल योग का निर्माण करता है। यह युति जिस भाव में होती है उसी भाव के शुभ फल में कमी आ जाती है। राहु छल का कारक है और छठा भाव शत्रु का, अगर गुरु धन का स्वामी होकर छठे में बैठे और राहु भी वही हो तो ऐसे व्यक्ति का धन छल कपट से लूट लिया जाता है और वो कर्ज में डूबता है। हर स्त्री-पुरुष की यह कामना होती है कि उन्हें एक योग्य संतान उत्पन हो जिससे उनका वंश चले और वह उम्र के आखरी पड़ाव में उनका सहारा बने। नीचे दिए गए ग्रह योग जो संतान बाधक योग हैं, यदि किसी की कुंडली में मौजूद हो तो उन्हें अवश्य सचेत हो जाना चाहिए और समय रहते उचित उपाय के जरिये उन प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल बनाना चाहिए जिनके वजह यह बाधक योग उत्पन्न हुए हैं। 1:- लग्न से, चंद्र से तथा गुरु से पंचम स्थान पाप ग्रह से यक्त हो और वहाँ कोई शुभ ग्रह न बैठा हो न ही शुभ ग्रह की दृष्टि हो। 2:- लग्न, चंद्र तथा गुरु से पंचम स्थान का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में बैठा हो। 3:- यदि पंचमेश पाप ग्रह होते हुए पंचम में हो तो पुत्र होवे किन्तु शुभ ग्रह पंचमेश होकर पंचम में बैठ जाये और साथ में कोई पाप ग्रह हो तो वह पाप ग्रह संतान बाधक बनेगा। 4:- यदि पंचम भाव में वृष, सिंह, कन्या या वृश्चिक राशि हो और पंचम भाव में सूर्य, आठवें भाव में शनि तथा लग्न में मंगल स्थित हो तो संतान होने में दिक्कत होती है एवं विलंब होता है। 5:- लग्न में दो या दो से अधिक पाप ग्रह हों तथा गुरु से पांचवें स्थान पर भी पाप ग्रह हो तथा ग्यारहवें भाव में चन्द्रमा हो तो भी संतान होने में विलंब होता है। 6:- प्रथम, पंचम, अष्टम एवं द्वादस । इन चारो भावों में अशुभ ग्रह हो तो वंश वृद्धि में दिक्कत होती है। 7:- चतुर्थ भाव में अशुभ ग्रह, सातवें में शुक्र तथा दसवें में चन्द्रमा हो तो भी वंश वृद्धि के लिए बाधक है। 8:- पंचम भाव में चंद्रमा तथा लग्न, अष्टम तथा द्वादश भाव में पाप ग्रह हो तो भी वंश नहीं चलता। 9:- पंचम में गुरु, सातवें भाव में बुध- शुक्र तथा चतुर्थ भाव में क्रूर ग्रह होना संतान बाधक है। 10:- लग्न में पाप ग्रह, लग्नेश पंचम में, पंचमेश तृतीय भाव में हो तथा चन्द्रमा चौथे भाव में हो तो पुत्र संतान नहीं होता। 11:- पंचम भाव में मिथुन, कन्या, मकर या कुंभ राशि हो। शनि वहां बैठा हो या शनि की दृष्टि पांचवे भाव पर हो तो पुत्र संतान प्राप्ति में समस्या होती है। 12:- षष्ठेश, अष्टमेश या द्वादशेश पंचम भाव में हो या पंचमेश 6-8-12 भाव में बैठा हो या पंचमेश नीच राशि में हो या अस्त हो तो संतान बाधायोग उत्पन्न होता है। 13:- पंचम में गुरु यदि धनु राशि का हो तो बड़ी परेशानी के बाद संतान की प्राप्ति होती है। 14:- पंचम भाव में गुरु कर्क या कुंभ राशि का हो और गुरु पर कोई शुभ दृष्टि नहीं हो तो प्रायः पुत्र का आभाव ही रहता है। 15:- तृतीयेश यदि 1-3-5-9 भाव में बिना किसी शुभ योग के हो तो संतान होने में रूकावट पैदा करते हैं। 16:- लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश एवं गुरु सब के सब दुर्बल हों तो जातक संतानहीन होता है। 17:- पंचम भाव में पाप ग्रह, पंचमेश नीच राशि में बिना किसी शुभ दृष्टि के तो जातक संतानहीन होता है। 18:- सभी पाप ग्रह यदि चतुर्थ में बैठ जाएँ तो संतान नहीं होता। 19:- चंद्रमा और गुरु दोनों लग्न में हो तथा मंगल और शनि दोनों की दृष्टि लग्न पर हो तो पुत्र संतान नहीं होता । 20:- गुरु दो पाप ग्रहों से घिरा हो और पंचमेश निर्बल हो तथा शुभ ग्रह की दृष्टि या स्थिति न हो तो जातक को संतान होने में दिक्कत होता है। 21:- दशम में चंद्र, सप्तम में राहु तथा चतुर्थ में पाप ग्रह हो तथा लग्नेश बुध के साथ हो तो जातक को पुत्र नहीं होता । 22:- पंचम,अष्टम, द्वादश तीनो स्थान में पाप ग्रह बैठे हों तो जातक को पुत्र नहीं होता। 23:- बुध एवं शुक्र सप्तम में, गुरु पंचम में तथा चतुर्थ भाव में पाप ग्रह हो एवं चंद्र से अष्टम भाव में भी पाप ग्रह हो तो जातक के लड़का नहीं होता। 24:- चंद्र पंचम हो एवं सभी पाप ग्रह 1-7-12 या 1-8-12 भाव में हो तो संतान नहीं होता । 25:- पंचम भाव में तीन या अधिक पाप ग्रह बैठे हों और उनपर कोई शुभ दृष्टि नहीं हो तथा पंचम भाव पाप राशिगत हो तो संतान नहीं होता। 26:- 1-7-12 भाव में पाप ग्रह शत्रु राशि में हों तो पुत्र होने में दिक्कत होती है । 27:- लग्न में मंगल, अष्टम में शनि, पंचम में सूर्य हो तो यत्न करने पर ही पुत्र प्राप्ति होती है। 28:- पंचम में केतु हो और किसी शुभ गृह की दृष्टि न हो तो संतान होने में परेशानी होती है। 29:- पति-पत्नी दोनों के जन्मकालीन शनि तुला राशिगत हो तो संतान प्राप्ति में समस्या होती है। शुभ कार्य करने के लिये अशुभ योगों का त्याग (भाग 2) 🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼 शुभाशुभ कर्मो अथवा दैनिक कार्यो में भी मुहूर्त साधना प्राचीन परंपरा रही है इससे मनुष्य भविष्य में होने वाली अशुभ घटनाओं से बच सकता है। कुछ प्रमुख अशुभ योग का विवरण दिया जा रहा है यह आपके लिए अवश्य लाभदायक रहेगा। कुयोग👉 (अशुभ) वार, तिथि एवं नक्षत्रों के संयोग से अथवा केवल नक्षत्र के आधार पर कुछ ऐसे अशुभ योग बनते हैं जिन्हें, कुयोग कहा जा सकता है। इन कुयोगों में कोई शुभ कार्य प्रारंभ किया जाए तो वह सफल नहीं होता अपितु उसमें हानि, कष्ट एवं भारी संकट का सामना करना पड़ता है। कुयोग-सुयोग: यदि किन्हीं कारणों से एक कुयोग तथा एक सुयोग एक ही दिन पड़ जाए तो भी उस दिन को त्याग देना चाहिये । दग्ध नक्षत्र👉 रविवार को भरणी, सोमवार को चित्रा, मंगलवार को उत्तराषाढ़ा, बुधवार को धनिष्ठा, गुरुवार को उत्तरा फाल्गुनी, शुक्रवार को ज्येष्ठा, शनिवार को रेवती नक्षत्र दग्ध नक्षत्र कहलाते हैं। इनमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाना चाहिए। मास-शून्य नक्षत्र👉 चैत्र में अश्विनी और रोहिणी, वैशाख में चित्रा और स्वाति, ज्येष्ठ में उत्तराषाढ़ा और पुष्य, आषाढ़ में पूर्वा फाल्गुनी और धनिष्ठा, श्रवण में उत्तराषाढा़ और श्रवण, भाद्रपद में शतभिषा और रेवती, अश्विनी में पूर्वा भाद्रपद, कार्तिक में कृतिका और मघा, मार्गशीर्ष में चित्रा और विशाखा, पौष में आर्द्रा और अश्विनी, माघ में श्रवण और मूल तथा फाल्गुन में भरणी और ज्येष्ठा मास-शून्य नक्षत्र होते हैं। इनमें शुभ कार्य करने से धन नाश होता है। जन्म नक्षत्र👉 जातक का जन्मनक्षत्र, 10 वां अनु जन्म नक्षत्र तथा 19 वां त्रिजन्म नक्षत्र कहलाते है। ये तीनों समान रूप से जन्म नक्षत्र की श्रेणी में आते हैं। शुभ कार्य प्रारंभ करने हेतु जन्म नक्षत्र त्यागना चाहिए। चर योग👉 रविवार को उत्तराषाढा, सोमवार को आर्द्रा, मंगल को विशाखा, बुध को रोहिणी, गुरू को शतभिषा शुक्रवार को मघा तथा शनिवार को मूल नक्षत्र हो तो चर योग बनता है। इस योग में कार्य की अस्थिरता रहती है। दग्ध योग👉 रविवार को 12, सोमवार को 11, मंगल को 5, बुध को 3, गुरू को 6, शुक्र को 8, और शनिवार को 9, तिथि होने पर दग्ध योग अशुभ कारक होता है। मृत्युदा तिथिया👉 रविवार को 1, 6, 11, सोमवार को 2, 7, 12, मंगल को 1, 6, 11, बुध को 3, 8, 13, गुरू को 4, 9, 14, शुक्र को 2, 7, 12, शनिवार 5, 10, 15 तिथियां होने पर मृत्युकारक होती हैं। मृत्यु योग👉 रविवार को अनुराधा, सोमवार को उत्तराषाढा, मंगल को शतभिषा, बुध को अश्विनी, गुरूवार को मृगशिरा, शुक्रवार को अश्लेषा , तथा शनिवार को हस्त नक्षत्र मृत्युयोग बनाते हैं। इनमे शुभ कार्य करने से जनहानि होती है। यमघंट योग👉 रविवार को मघा , सोम को विशाखा ,मंगल को आर्द्रा , बुक को मूल , गुरू को कृतिका , शुक्र को रोहिणी तथा शनिवार को हस्त नक्षत्र के होने पर यमघंट योग अशुभ कारक होगा। यमदंष्ट्रा योग👉 रविवार को मघा व धनिष्ठा, सोम को मूल व विशाखा, मंगल को भरणी व कृतिका , बुध को पुनर्वसु व रेवती ,गुरू को अश्विनी व उत्तराषाढा, शुक्र को रोहिणी व अनुराधा , तथा शनिवार को श्रवण व धनिष्ठा नक्षत्र होने पर यह योग बनता है ,आय्यंत पीडादायक होता है। वज्र मुसल योग👉 रविवार+भरणी,सोमवार+चित्रा, मंगल+उत्तराषाढा, बुध+धनिष्ठा, गुरू+उत्तराफाल्गुनी , शुक्रवार+ज्येष्ठा , तथा शनिवार +रेवती नक्षत्र से यह योग भी अशुभ कारक होता है जोकि कार्य में विवाद उत्पन्न करता है । 🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂 ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *“Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़”* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* *Powerful All-in-One Tabiz* *This is Laxmi Shani Yantr & work for Good Health & Wealth full Life.* ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *“Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़”* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* *Powerful All-in-One Laxmi Shani Yantr Tabiz* *This is Laxmi Shani Yantr & work for Good Health & Wealth full Life.* इस लक्ष्मी शनि यन्त्र को बनाने में दस दिन का समय लगता है इस एक ही यन्त्र में दस यन्त्रो का मिश्रण है यह पूर्णत: धार्मिक कवच है किसी तान्त्रिक विद्या द्वारा नहीं बनाया जाता है और इसमें सभी धर्मो का समावेश है किसी विशेष जाति या धर्म को लेकर नहीं बनाया जाता है इसलिए इसे कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है। यह हर क्षेत्र में व्यक्ति को फायदा देता है। यदि किसी की कुंडली में मंगल दोष, कालसर्प दोष, गंडमूल दोष, अंगारक दोष, पितृदोष, ग्रहणदोष, या फिर विष योग, गुरु चाण्डाल योग है तो इसे धारण करने से उसका भी निवारण हो जाता है। यह आपके नाम और उम्र के हिसाब से बनाया जाता है। इसे धारण करने पर किसी विशेष नियम या परहेज का पालन नही करना होता है। यह बच्चों की पढ़ाई में व्यापार नौकरी में, कोई गृह क्लेश हो, कोई समस्या हो सभी में फायदा करता है। वाद-विवाद, मुकदमे, बहस, समूह वार्तालाप, आपसी बातचीत में सामने वाला वश में हो, कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस उसके वश में हो, और जब चाहें उसे छुट्टी मिल जाए….. पत्नी सोचती है पति वश में रहें, यही सोच पति की भी होती है….. कोई सोचता है/सोचती है कि मेवैसा ही करें…… लड़कों को लड़कियों को वश में करे सभी दोस्त मेरे वश में हो, और जो मैं बोलूं सभी रना होता है और लड़कियों को लड़के अपने वश में चाहिए….. व्यापारी चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक मेरे वश में हो, और उसके ग्राहक पड़ोसियों के पास न जाएं….. प्रेम विवाह करने वाले सोचते है कि उनके घर वाले उनके वश में हो, और उनकी शादी में कोई रुकावट न डाले….. माता-पिता सोचते हैं कि उनकी संतान उनके कहने से बाहर न हो, और उनके बताए गये अच्छे रास्तों को छोड़कर गलत रास्ते पर न जाएं। सामान्यतः ऐसीे ही सोच सभी की होती है। लक्ष्मी शनि यन्त्र का मतलब होता है किसी को अपने अनुकूल कर लेना। अगर प्रेमी या प्रेमिका मन बदल गया हो, या विवाह करने को राजी न हो रहे हो। या कोई अधिकारी आपके विरोध में कार्य कर रहा हो। या परिवार में कोई सदस्य गलत रास्ते पर जा रहा हो, तो “Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़” के प्रयोग से उसका मन बदला जा सकता है। ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ #Astro Sunil Garg (Nail & Teeth) Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet:- ( Specialist in Alternative Medicine ) #Whatsapp no :- 9911020152, 7982311549 Paytm no:- 9911020152 ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *आप हमसे तभी संपर्क करे जब आप अपनी समस्याओं का समाधान कराते कराते पूरी तरह से थक चुके हो और आपको कही भी कोई रास्ता नजर नही आ रहा हो उसके बाद ही आप हमसे संपर्क करे* *अब घर बैठे सभी प्रकार कि नकारात्मक एनर्जी से 100% मुक्ति पाऐ जैसे तंत्र मंत्र जादु टोना भूत प्रेत गृह क्लेश तलाक होना मानसिक तनाव साइकिक अटैक डिप्रेशन सीजोफ्रोनीया अल्जाइमर असाध्य रोगों से घर बैठे मुक्ति पाऐ* 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *शुगर से यदि हड्डियों और नसों पर असर पड़ रहा है तो उसके लिए लीजिए जड़ी बुटियों से बनी यह दवाई।* *यदि शुगर की दवाई या इन्यसुलिन लेने पर भी शुगर ठीक नही हो रही तो इस दवाई के लेने से हड्डियों में दर्द, बालों का झड़ना, आँखो की रोशनी तेज, लीवर, किडनी संबंधी बीमारियों में लाभदायक और शुगर को भी कंट्रोल करती है।* *यदि किसी को जमीन पर बैठने में प्रॉबल्म है तो वह भी तीन - चार महीने के बाद बैठने लग सकते है।* 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *किसी भी प्रकार के तीसरे चरण के कैंसर का ईलाज खानपान के द्वारा 40 से 100% तक ठीक* *Any type of third stage cancer can cure by 40 to 100% only through diet.* *सिर्फ खानपान में परिवर्तन के द्वारा किडनी का इलाज में 50 से 100 % आराम* *Diseased kidney can cure to 50 to 100% only through diet* *खान पान के द्वारा बिना ऑपरेशन से घुटनों के इलाज में 60 से 100% तक आराम* *Knee cap replacement problem or joint pain can be cure to 60-100% only through diet* खान-पान शुरु 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Thereafter, they can live long life.* *Cancer, Kidney, Heart Problem , Joint Pain, Skin Disease, Stomach Problem, Piles, Neurology can also cure by diet only.* *In the old age, people have problem in walking, eating, doing activities ,etc. can also be cured only through special diet.* *In dengue, after my prescribed diet treatment relief will be in 10 minutes only.* *Dengue , Swine flu , Typhoid, and any other temperature will be cure by my prescribed diet treatment in 10 minutes only.* *In chickungunya, after my prescribed diet treatment relief will be in 2 hours and person will start walking and activities.* *Health Checkup by Nails & Teeth and Treatment can be done by Diet only.* *( Specialist in Alternative diet Medicine )* *{Loose your extra weight through diet only.* *नियमित आहार को ही बनाऐ आर्युवेदिक आहार* *सिर्फ खान-पान के द्वारा बिना किसी दवाई के बीमारी ठीक करे।* *केंसर,डेंगू,चिकनगुनिया,*त्वचा रोग,मिर्गी,पेट से संबंधित रोग, ल्यूकोरिया, बवासीर,किडनी,जोडो के दर्द, गंठिया भाव (भादी) ( जॉइंट पैन ,कमर दर्द ,और फुल बदन दर्द की शिकायत (शरीर मे अकडन) ) , दमा (Asthma) 💐💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *समस्सया चाहें केसी भी हो काम कारोबार में नुकसान job ना मिलना।पति पत्नी में लड़ाई अनबन Husband vashikarn speclist प्रेम विवाह Intercast Love marrige शादी विवाह में आने वाली रूकावटे Love vashikarn स्पेशलिस्ट,सौतन से छुटकारा, प्रमिका को मनाना, वस में करना।* *हस्ताक्षर से जाने अपना भविष्य .* *अपने_Thumb_Impression से जाने अपने घर, दफ्तर, फैक्टरी या गोदाम का वास्तु दोष और साथ ही उसका उपाय जानकर अपनी मुशिक्लों का हल* *मेरे व्याटसप नम्बर 9911020152 , 7982311549 , पर भेजें अपने Thumbs Impression किसी प्लेन पेपर पर* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet ( Specialist in Alternative Medicine ) अंक ज्योतिष & वास्तु विशेषज्ञ,वैदिक,तांत्रिक,तंन्त्र मंत्र, टोने टोटके एवं ज्योतिषी समाधान के लिए संपर्क करें:- 7982311549, 9911020152 जैसै किसी प्रेमी,प्रेमिका या पति,पत्नी ,स्त्री पुरुष को वश में करना हो या फिर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करना हो, प्रेम विवाह आ रहीं समस्या को दूर करना हो, शत्रु को अपने वश में करना हो, सौतन से छुटकारा किसी ने कुछ किया-कराया हो, गृहक्लेश हो, मनचाहा जीवन साथी पाने के लिये, बेरोजगारी की समस्या के लिये, व्यवसाय में सफलता ना मिल रहीं हो, संतान का ना होना या फिर होकर मर जाना, *Janiye apne Business, Career, & Life se judi har samasya ka Samadhan.* ज्योतिषी और हस्तरेखाविद मो. 9911020152, 7982311549 नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें। भारत के प्रसिद्ध वशीकरण स्पेशलिस्ट सुनील गर्ग जी Cont & wtsap No.+91-7982311549, Paytm 9911020152 11AM to 07 PM (प्रेम-विवाह ) (मनचाहा प्यार ) (काम-कारोबार)( पति - पत्नी में अनबन)"जैसी सभी समस्या के लिए सम्पर्क करे।( ईधर_उधर_न_भटके_विशवाश_है_तो_एक_बार_जरूर_फोनकरें) Get Ur All Problems Solution i So Contact Now.. +91-9911020152, 7982311549 11AM to 07 PM 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 सभी जगह से निराश प्रेमी-प्रेमिकाएं एक बार जरूर कॉल करें, आपका प्यार टूटने नहीं दिया जाएगा। NOTE-(वशीकरण_स्पेशलिस्ट_सुनील_गर्ग_जी) आगे पढ़ें- 1) Love_problem_solution, 2) Inter_caste_marriage_solution, 3) Husband_wife_disputes, 4) Child_problems, +91-9911020152, Paytm 9911020152 11AM to 07 PM 5) Diveroce_problem_solution, 6) Family_problem, 7) Business_problem, 8) Visa_problem, 9) Job Problem, नोट :-Note–उपरोक्त समस्याओं के अलावा भी कोई और समस्या हो जिसका निवारण तंत्र-मंत्र व एस्ट्रोलॉजी के रिलेटेड हो तो आप हमें कॉल करके बताइयेगा। आपकी सभी समस्याओं का समाधान घर बैठे फ़ोन पर आपके द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार किया जाता है -----अभी संपर्क करें :- सुनील गर्ग जी Sunil Garg ji +91-9911020152, 7982311549 Paytm 9911020152 11AM to 07 PM *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* *हस्ताक्षर से जाने अपना भविष्य ।* *अपने Thumb Impression से जाने अपने घर, दफ्तर, फैक्टरी या गोदाम का वास्तु दोष और साथ ही उसका उपाय जानकर अपनी मुशिक्लों का हल।* *मेरे व्याटसप नम्बर 9911020152, 7982311549 पर भेजें अपने Thumbs Impression किसी प्लेन पेपर पर* *Pay to Paytm Number :- 9911020152* *Mera A/C no* 🌹स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया🌹 State Bank of India, Sunil Kumar Garg SA/C no 10614925460, ( IFS Code: SBIN0000737 ) Pahar Ganj New Delhi 110055, mai Deposit karva sakte hain, Uski Receipt Whatsapp par dal kar pooch sakte hain Mera Whatsapp No hai 9911020152,. 7982311549 *Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet:-* *( Specialist in Alternative Medicine )* *New Kaushal Furniture House* *Godrej Home Safe* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *1/1,Panchkuian Road,* *Opposite metro pillar no.17, RK Ashram Marg metro station ,* *New Delhi-110001*

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🌹 जय श्री महाकाल🌹 श्री महाकाल जी के आज के भस्म आरती श्रृंगार दर्शन मध्य प्रदेश उज्जैन से 19 जनवरी 2022 दिन बुधवार कुंडली में दूसरे भाव को ही धन भाव कहा गया है। इसके अधिपति की स्थिति संग्रह किए जाने वाले धन के बारे में संकेत देती है। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=5223010967729860&id=100000630247964 कुंडली का चौथा भाव हमारे सुखमय जीवन जीने का संकेत देता है। पांचवां भाव हमारी उत्पादकता बताता है, छठे भाव से ऋणों और उत्तरदायित्वों को देखा जाएगा। सातवां भाव व्यापार में साझेदारों को देखने के लिए बताया गया है। इसके अलावा ग्यारहवां भाव आय और बारहवां भाव व्यय से संबंधित है। प्राचीन काल से ही जीवन में अर्थ के महत्व को प्रमुखता से स्वीकार किया गया। इसका असर फलित ज्योतिष में भी दिखाई देता है। केवल दूसरा भाव सक्रिय होने पर जातक के पास पैसा होता है, लेकिन आय का निश्चित स्रोत नहीं होता जबकि दूसरे और ग्यारहवें दोनों भावों में मजबूत और सक्रिय होने पर जातक के पास धन भी होता है और उस धन से अधिक धन पैदा करने की ताकत भी। ऐसे जातक को ही सही मायने में अमीर कहेंगे। यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः। स पण्डितः स श्रुतिमान गुणज्ञः। स एवं वक्ता स च दर्शनीयः। सर्वेगुणाः कांचनमाश्रयन्ति।। नीति का यह श्लोक आज के अर्थ-प्रधान युग का वास्तविक स्वरूप व सामाजिक चित्र प्रस्तुत करता है। ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली में धन योग के लिए द्वितीय भाव, पंचम५ भाव, नवम भाव व एकादश भाव विचारणीय है। पंचम-एकादश धुरी का धन प्राप्ति में विशेष महत्व है। महर्षि पराशर के अनुसार जैसे भगवान विष्णु के अवतरण के समय पर उनकी शक्ति लक्ष्मी उनसे मिलती है तो संसार में उपकार की सृष्टि होती है। उसी प्रकार जब केन्द्रों के स्वामी त्रिकोणों के भावधिपतियों से संबंध बनाते हैं तो बलशाली धन योग बनाते हैं। यदि केन्द्र का स्वामी-त्रिकोण का स्वामी भी है, जिसे ज्योतिषीय भाषा में राजयोग भी कहते हैं। इसके कारक ग्रह यदि थोड़े से भी बलवान हैं तो अपनी और विशेषतया अपनी अंतर्दशा में निश्चित रूप से धन पदवी तथा मान में वृद्धि करने वाले होते हैं। पराशरीय नियम, यह भी है कि त्रिकोणाधिपति सर्वदा धन के संबंध में शुभ फल करता है। चाहे, वह नैसर्गिक पापी ग्रह शनि या मंगल ही क्यों न हो। यह बात ध्यान रखने योग्य है कि जब धनदायक ग्रह अर्थात् दृष्टि, युति और परिवर्तन द्वारा परस्पर संबंधित हो तो शास्त्रीय भाषा में ये योग महाधन योग के नाम से जाने जाते हैं। लग्नेष, धनेष, एकादशेष, धन कारक ग्रह गुरु तथा सूर्य व चन्द्र अधिष्ठित राशियों के अधिपति सभी ग्रह धन को दर्शाने वाले ग्रह हैं। इनका पारस्परिक संबंध जातक को बहुत धनी बनाता है। नवम भाव, नवमेश भाग्येश, राहु केतु तथा बुध ये सब ग्रह भी शीघ्र अचानक तथा दैवयोग द्वारा फल देते हैं। धन प्राप्ति में लग्न का भी अपना विशेष महत्व होता है। लग्नाधिपति तथा लग्न कारक की दृष्टि के कारण अथवा इनके योग से धन की बढ़ोत्तरी होती है। योग कारक ग्रह (जो कि केन्द्र के साथ-साथ त्रिकोण का भी स्वामी हो) सर्वदा धनदायक ग्रह होता है। यह ग्रह यदि धनाधिपति का शत्रु भी क्यों न हो तो भी जब धनाधिपति से संबंध स्थापित करता है तो धन को बढ़ाता है। जैसे कुंभ लग्न के लिए, यदि लाभ भाव में योग कारक ग्रह ‘शुक्र’ हो और धन भाव में बृहस्पति स्वग्रही हो तो अन्य बुरे योग होते हुए भी जातक धनी होता है, क्योंकि योग कारक ‘शुक्र’ व धनकारक ‘बृहस्पति′ व लाभाधिपति ‘वृह’ का केन्द्रीय प्रभाव है। यद्यपि ये दोनों ग्रह एक दूसरे के शुभ हैं। दशाओं का प्रभाव:- धन कमाने या संग्रह करने में जातक की कुंडली में दशा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। द्वितीय भाव के अधिपति यानी द्वितीयेश की दशा आने पर जातक को अपने परिवार से संपत्ति प्राप्त होती है, पांचवें भाव के अधिपति यानी पंचमेश की दशा में सट्टे या लॉटरी से धन आने के योग बनते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि यह दशा बीतने के साथ ही जातक का धन भी समाप्त हो जाता है। ग्यारहवें भाव के अधिपति यानी एकादशेश की दशा शुरू होने के साथ ही जातक की कमाई के कई जरिए खुलते हैं। ग्रह और भाव की स्थिति के अनुरूप फलों में कमी या बढ़ोतरी होती है। छठे भाव की दशा में लोन मिलना और बारहवें भाव की दशा में खर्चों में बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं। शुक्र की भूमिका:- किसी व्यक्ति के धनी होने का आकलन उसकी सुख सुविधाओं से किया जाता है। ऐसे में शुक्र की भूमिका उत्तरोत्तर महत्वपूर्ण होती जा रही है। किसी जातक की कुंडली में शुक्र बेहतर स्थिति में होने पर जातक सुविधा संपन्न जीवन जीता है। शुक्र ग्रह का अधिष्ठाता वैसे शुक्राचार्य को माना गया है, जो राक्षसों के गुरु थे, लेकिन उपायों पर दृष्टि डालें तो पता चलता है कि शुक्र का संबंध लक्ष्मी से अधिक है। शुक्र के आधिपत्य में वृषभ और तुला राशियां हैं। इसी के साथ शुक्र मीन राशि में उच्च का होता है। इन तीनों राशियों में शुक्को बेहतर माना गया है। कन्या राशि में शुक्र नीच हो जाता है, इसलिए कन्या का शुक्र अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता। लग्न के अनुसार पैसे वाले:- मेष लग्न के जातकों का शुक्र, वृष लग्न के जातकों का बुध, मिथुन लग्न के जातकों का चंद्रमा, कर्क लग्न वाले जातकों का सूर्य, सिंह लग्न वाले जातकों का बुध, कन्या लग्न वाले जातकों का शुक्र, तुला लग्न वाले जातकों का मंगल, वृश्चिक लग्न वाले जातकों का गुरु, धनु लग्न वाले जातकों का शनि, मकर लग्न वाले जातकों का शनि, कुंभ लग्न वाले जातकों का गुरु और मीन लग्न वाले जातकों का मंगल अच्छी स्थिति में होने पर या इनकी दशा और अंतरदशा आने पर जातक के पास धन का अच्छा संग्रह होता है या पैतृक संपत्ति की प्राप्ति होती है। अगर लग्न से संबंधित ग्रह की स्थिति सुदृढ़ नहीं है तो संबंधित ग्रहों का उपचार कर स्थिति में सुधार कर सकते हैं। लग्न के अनुसार कमाने वाले:- कमाई के लिए कुंडली में ग्यारहवां भाव देखना होगा। इससे आने वाले धन और आय-व्यय का अंदाजा लगाया जा सकता है। मेष लग्न वाले जातकों का शनि, वृष लग्न का गुरु, मिथुन लग्न का मंगल, कर्क लग्न का शुक्र, सिंह लग्न का बुध, कन्या लग्न का चंद्रमा, तुला लग्न का सूर्य, वृश्चिक लग्न का बुध, धनु लग्न का शुक्र, मकर लग्न का मंगल, कुंभ लग्न का गुरु और मीन लग्न का शनि अच्छी स्थिति में होने पर जातक अच्छा धन कमाता है। इन ग्रहों की दशा में भी संबंधित लग्न के जातक अच्छी कमाई करते हैं। उन्हें पुराना पैसा मिलता है और पैतृक सम्पत्ति मिलने के भी इन्हें अच्छे अवसर मिलते हैं। विभिन्न प्रमुख ज्योतिषीय ग्रन्थों वृहत पराशर होरा-शास्त्र, वृहतजातक, जातक तत्व, होरा सार, सारावली, मानसागरी, जातक परिजात आदि विभिन्न-विभिन्न धन योगों का विवरण प्राप्त होता है। परन्तु उनमें मुख्य जो अक्सर जन्मकुंडलियों में पाये जाते हैं तथा फलदायी भी हैं, जातक को धन इन युतियों मे मिलने का कारण बनता है: (1) भाग्येश बुध से लाभेश मंगल कार्येश शुक्र सुखेश मंगल पंचमेश शुक्र लगनेश शनि धनेश शनि का गोचर से जन्म के बुध के साथ गोचर हो। (2) कार्येश शुक्र का लाभेश मंगल सुखेश मंगल लगनेश शनि पंचमेश शुक्र धनेश शनि से गोचर से जन्म के कार्येश शुक्र के साथ गोचर हो। (3) लाभेश मंगल का धनेश शनि लगनेश शनि से गोचर से जन्म के मंगल के साथ युति बने। (4) लगनेश शनि का सुखेश मंगल धनेश शनि पंचमेश शुक्र से गोचर से जन्म के शनि के साथ योग बने। (5) धनेश शनि का सुखेश मंगल पंचमेश शुक्र से योगात्मक रूप जन्म के शनि के साथ बने। (6) सुखेश मंगल के साथ पंचमेश शुक्र से गोचर से जन्म के मंगल के साथ योगात्मक रूप बने। (7) अगर भाग्येश और षष्ठेस एक ही ग्रह हो। (8) मकर लगन की कुंडली मे भाग्येश और षष्ठेश बुध एक ही ग्रह है,यह धन आने का कारण तो बनायेंगे लेकिन अधिकतर मामले मे धनेश,लगनेश,सुखेश,कार्येश के प्रति धन को या तो नौकरी से प्राप्त करवायेंगे या कर्जा से धन देने के लिये अपनी युति को देंगे। (9) यदि चन्द्रमा से 6, 7, 8 वें भाव में समस्त शुभ ग्रह विद्यमान हों और वे शुभ ग्रह क्रूर राशि में न हों और न ही सूर्य के समीप हों तो ऐसे योग (चन्द्राधियोग) में उत्पन्न होने वाला जातक धन, ऐश्वर्य से युक्त होता है तथा महान बनता है। (10) अनफा व सुनफा योग जो चन्द्र से द्वितीय, द्वादश भाव में सूर्य को छोड़कर अन्य ग्रहों की स्थिति द्वारा बनते हैं, जातक अपने पुरुषार्थ से धन को प्राप्त करता है। या करने वाला होता है। (11) एक भी शुभ ग्रह केन्द्रादि शुभ, स्थान में स्थित होकर, उच्च का हो व शुभ ग्रह से युक्त अथवा दृष्ट हो तो धनाढ्य तथा राजपुरुष बना देता है। (12) पुष्फल योग एक धन और यश देने वाला योग है, जिसमें चन्द्राधिष्ठित, राशि के स्वामी का लग्नेश के साथ होकर केन्द्र में बलवान होना अपेक्षित होता है। (13) लग्नेश द्वितीय भाव में तथा द्वितीयेश लाभ भाव में हो। (14) चंद्रमा से तीसरे, छठे, दसवें, ग्यारहवें स्थानों में शुभ ग्रह हों। (15) पंचम भाव में चंद्र एवं मंगल दोनों हों तथा पंचम भाव पर शुक्र की दृष्टि हो। (16) चंद्र व मंगल एकसाथ हों, धनेश व लाभेश एकसाथ चतुर्थ भाव में हों तथा चतुर्थेश शुभ स्थान में शुभ दृष्ट हो। (17) द्वितीय भाव में मंगल तथा गुरु की युति हो। (18) गज केसरी योग जिसमें बृहस्पति और चन्द्र का केन्द्रीय समन्वय होता है, धन एवं यश देने वाला होता है। (19) यदि कुंडली में कर्क राशि में बुध और शनि 11वें भाव में हो तो जातक महाधनी होता है। (जा0त0) (20) जिस जातक की कुंडली में लाभ भाव में बृहस्पति हों और पंचम भाव में सूर्य स्वगृही हों तो जातक की कुंडली में महाधनी योग बनता है। (21) कर्क राशि का चन्द्र लग्न भाव में बृहस्पति और मंगल के साथ हो तो महाधनी योग बनता है। (22) धनेश अष्टम भाव मेतथा अष्टमेश धन भाव में हो। (23) पंचम भाव में बुध हो तथा लाभ भाव में चंद्र-मंगल की युति हो। (24) गुरु नवमेश होकर अष्टम भाव में हो। (25) वृश्चिक लग्न कुंडली में नवम भाव में चंद्र व बृहस्पति की युति हो। (26) मीन लग्न कुंडली में पंचम भाव में गुरु-चंद्र की युति हो। (27) कुंभ लग्न कुंडली में गुरु व राहु की युति लाभ भाव में हो। (28) चंद्र, मंगल, शुक्र तीनों मिथुन राशि में दूसरे भाव में हों। (29) कन्या लग्न कुंडली में दूसरे भाव में शुक्र व केतु हो। (30) तुला लग्न कुंडली में लग्न में सूर्य-चंद्र तथा नवम में राहु हो। (31) मीन लग्न कुंडली में ग्यारहवें भाव में मंगल हो। (32) यदि जन्मकुंडली में स्वराशि का गुरु लग्न भाव में ‘चन्द्रमा’ और ‘मंगल′ के साथ हो तो महाधनी योग होता है। (33) यदि स्वराशि का ‘षु’ लग्न भाव में चंद्र और सूर्य से युक्त अथवा दृष्ट हो तो महाधनी योग होता है। (34) यदि कुंडली में लाभेश-धनभाव में और धनेश-लाभ भाव में हो तो जातक को धन लाभ बहुत अधिक कम प्रयास से प्राप्त होता है। (35) धनेश और लाभेश केन्द्रों में हो तो भी जातक को धन-लाभ होता है। (36) यदि धनेश लाभ भाव में हो तो जातक धनी होता है। (37) जन्म लग्न या पंचम भाव में मकर या कुंभ राशि का ‘शनि′ हो और बुध लाभ स्थान में हो तो जातक को सब प्रकार से धन लाभ होता है। (38) यदि जन्म लग्न में कर्क लग्न हो और लग्न में चंद्र, गुरु तथा मंगल हो तो जातक को अचानक धन लाभ होता है। (39) धन स्थान का स्वामी धन स्थान में, लाभ स्थान का अधिपति लाभ स्थान, धनेश, लाभेश लाभ स्थान में स्वराशि या मित्र राशि का अथवा उच्च का हो तो जातक धनवान होता है। (40) यदि जन्मकुंडली में लाभेश और धनेश लग्न में हो तो दोनों मित्र हों तो धन-योग बनता है और यदि लग्न का स्वामी धनेश और लाभेश से युक्त हो तो महाधनी योग बनता है। (41) यदि धनेश लग्न में और लग्न का स्वामी धन भाव में हो तो बिना प्रयत्न किये जातक धनवान होता है। (42) धन भाव में ‘गुरु′ शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो जातक धनवान होता है। (43) जब जन्मकुंडली में धन स्थान में ‘शुक्र’ हो, शुभ ग्रह युक्त तथा दृष्ट हो तो जातक धनवान होता है। “जन्मकुंडली में यदि ग्रह नीच राशि में भी स्थित हो तो भी यदि उसकी नीच राशि का स्वामी लग्न में या केन्द्र में स्थित हो अथवा उसकी उच्च राशि का स्वामी यदि लग्न से केन्द्र में स्थित हो तो नीच भंग योग होता है व जातक धनी होता है।” (44) जब लग्न भाव का स्वामी त्रिकोण में स्थित हो, धन भाव का स्वामी लाभ भाव में हो, तथा धन भाव पर धनेश की दृष्टि हो तो कुंडली में महालक्ष्मी योग बनता है। (45) यदि भाग्य स्थान का स्वामी अपनी उच्च राशि में या मूल त्रिकोण अथवा स्वराशि में केन्द्र में स्थित हो, तो भी जातक धनी होगा। (46) ग्यारहवें और बारहवें भाव का अच्छा संबंध होने पर जातक लगातार निवेश के जरिए चल-अचल संपत्तियां खड़ी कर लेता है। पांचवां भाव मजबूत होने पर जातक सट्टा या लॉटरी के जरिए विपुल धन प्राप्त करता है। (47) किसी भी जातक के पास किसी समय विशेष में कितना धन हो सकता है, इसके लिए हमें उसका दूसरा भाव, पांचवां भाव, ग्यारहवां और बारहवें भाव के साथ इनके अधिपतियों का अध्ययन करना होगा। इससे जातक की वित्तीय स्थिति का काफी हद तक सही आकलन हो सकता है। इन सभी भावों और भावों के अधिपतियों की स्थिति सुदृढ़ होने पर जातक कई तरीकों से धन कमाता हुआ अमीर बन जाता है। (48) किसी भी लग्न में पांचवें भाव में चंद्रमा होने पर जातक सट्टा या अचानक पैसा कमाने वाले साधनों से कमाई का प्रयास करता है। चंद्रमा फलदाई हो तो ऐसे जातक अच्छी कमाई कर भी लेते हैं। (49) कारक ग्रह की दशा में जातक सभी सुख भोगता है और उसे धन संबंधी परेशानियां भी कम आती हैं। (50) सातवें भाव में चंद्रमा होने पर जातक साझेदार के साथ व्यवसाय करता है लेकिन धोखा खाता है। (51) छठे भाव का ग्यारहवें भाव से संबंध हो तो, जातक ऋण लेता है और उसी से कमाकर समृद्धि पाता है। (52) भगवान के प्रकाश यौगिक क्रिया द्वारा और पदजनजपवाद द्वारा जातक के मुख, हथेली, कुंडली आदि का ध्यान रखकर सम्पत्ति, धन, लाभ, निधि आदि का ज्ञान कराना ही ज्योतिष और धन योग है। सम्पत्ति का संबंध भूमि से और धन का संबंध नगदी, सिक्के नोट आदि से है और लाभ का संबंध व्यापार, व्यवसाय, कपड़ा, मकान, वाहन आदि से संबंध है निधि का अर्थ है अनायास धन प्राप्त होना या आकस्मिक धन प्राप्त होना या अचानक पैतृक सम्पत्ति प्राप्त होना। सर्वप्रथम जन्मकुंडली में धन योग या राजयोग का ज्ञान ग्रहों, राशि, नक्षत्र स्वामी, की क्रूरता सौम्यता स्थान की शुभता/अशुभता और ग्रहों के अधिकार संबंध दशा/अन्तरदशा, होरा, अष्टक वर्ग व गोचर का पारस्परिक संबंध होने से धन योग की शुभता और अशुभता का ज्ञान हो सकता है। धन का कारक :- धन का कारक गुरु है, धन प्रदाता सधन प्रदाता स्थान 2, 1, 5, 6, 10, 11। धन योग/ राजयोग के द्वारा धन कैसे प्राप्त होगा और कहां से प्राप्त होगा और किस दिशा में और किसके द्वारा व कितना प्राप्त होगा व किस प्रकार धनयोग अशुभ हो जायेगा व उसका इलाज कैसे होगा। शुभ योग है तो उसे अधिक अशुभता। कभी-कभी जन्म कुंडली में धन योग होने पर भी उसे धन की प्राप्ति नहीं होती, क्योंकि धन योग को कम करने में (1) प्रेत बाधा, (2) संगत, (3) बुरे कर्म, (4) प्रारब्ध, (5) प्रायश्चित आदि कुछ चीजें तथा शष्टेश, अष्टमेश, द्वादशेष से संबंध द्वितीयेश, चतुर्थेश, पंचमेश, नवमेश, दशमेश, एकादेश, युक्त, दृष्ट, परिवर्तन योग। 1. लग्न/लग्नेश 2, 4, 5, 6, 10, 11 के स्वामियों से संबंध हो धनेश का 4, 5, 6, 10, 11, चतुर्थेश का 5, 6, 10, 11, पंचमेश का 6, 10, 11 नवमेश का 10, 11 या 3, 6, 11 में राहु हो। कन्या राशि में राहु के साथ शनि, मंगल, शुक्र, हो तो अधिक धन प्राप्त होगा। गुरु/चंद्र त्रिकोण में हो। 10 वें और लग्न बृहस्पति/शुक्र हो। सू०/चं० पर स्पष्ट दृष्टि हो तथा दूसरे घर में षुक्र हो और सू०/चं० की दृष्टि हो, 2 गुरु हो। सू०/चं० की राशि हो, दूसरे घर में गुरु हो बुध हो दृष्ट हो। जन्म दिन का हो और चं० स्वांश या मित्र नवांश में हो, गुरु की दृष्टि हो। जन्म राम का हो चंद्र स्वांश मित्र नवांश में हो गुरु पर षुक्र की दृष्टि हो। निश्चय धन योग:- लग्न में, स्वगृही सूर्य हो मंगल/शुक्र की दृष्टि या युति हो। लग्न में बुध/गुरु की युति या दृष्टि हो, लग्न में मंगल हो, लग्न में बुध हो, गुरु या शुक्र की युति हो, बुध या मंगल की दृष्टि हो। लग्न में शुक्र हो या बुध या लग्न में शनि हो मंगल या गुरु दृष्टि हो। धन नैतिक/अनैतिक कार्य से:- नवमेश/दशमेश धन प्रदाय है, जिस ग्रह के साथ हो, उसके अनुसार नैतिक या अनैतिक कर्म से धन प्राप्त हो। अनैतिक चोरी, लॉटरी, मटका, जुआ/लग्न या चन्द्र से उपचय भावों में बुध, गुरु, शुक्र या तीनों ग्रह हो तो अधिक धन एक ग्रह हो तो कम। धन मिलने का समय:- दूसरे घर में चन्द्र या कोई शुभ ग्रह व द्वितीयेश व लग्नेश हो तो उस समय लाभ कारक ग्रह की दशा/अंतरदशा में धन अवश्य मिलता है। अवस्था:- केन्द्र 1, 2, 11 में ग्रह उच्च और मित्र हो तो बाल्यवस्था में धन प्राप्त होगा। धनेश, लाभेश, लग्नेश, केन्द्र व त्रिकोण में हो तो मध्यम अवस्था में धन प्राप्त होगा। लग्नेश जहां हो उस स्थान का स्वामी लग्नेश में आ जाये तो वृद्धावस्था में धन प्राप्त होगा। किस दिशा/देश/विदेश :- चर लग्न हो/लग्नेश चर में हो और शीघ्रगामी ग्रह की दृष्टि हो तो विदेश से धन प्राप्त होगा। स्थिर लग्न/लग्नेश स्थिर राशि में हो और स्थिर ग्रहों की दृष्टि हो तो उसी देश में धन प्राप्त होगा। किस दिशा:- दशा नाथ की राशि, लाभेश की दिशा, द्वितीयेश की दिशा में जो बलवान हो, उस दिशा में धन प्राप्त होगा। किस के द्वारा:- दशम में सूर्य – पिता दशम में चन्द्र – माता दशम में मंगल – शत्रु/भाई दशम में बुध – मित्र दशम में गुरु – विद्या दशम में शुक्र – स्त्री से दशम में शनि – दासों से धन संख्या:- उच्च राशि में सूर्य हो तो – एक हजार उच्च राशि में चन्द्र हो तो – एक लाख उच्च राशि में मंगल हो तो – एक शत लाख उच्च राशि में बुध हो तो – करोड़ उच्च राशि में गुरु हो तो – अरब उच्च राशि में शुक्र हो तो – खरब उच्च राशि में शनि हो तो – कम/अल्प द्वितीयेश गोपुरांश हो और शुक्र पारवंतांश हो तो धन प्राप्त होगा। उपजीविका:- दशम में जो ग्रह हो, उसकी प्रकृति के अनुसार दो तीन हो तो उनमें बलवान ग्रह/दशमेश जहां स्थित हो, उस ग्रह को प्रकृति के अनुसार होगी। वराहमिहिर के अनुसार दशमेश जिसके नवांश में स्थित हो, उस नवांश के अनुसार जीविका, उपजीविका का व्यवसाय से संबंध होता हैं। तत्काल धन:- धनेश/दशमेश युक्त हो या संबंध हो। 1, 2, 11 अपने स्वामी से युक्त हो तब। लग्न में 2, 11 भाव स्वामी हो। लाभेश पर 2, 4, की दृष्टि हो तथा नवम की भी दृष्टि चं०/मं० लग्नेश में किसी स्थान में हो तो व्यय भाव में शुक्र/शनि/बुध हो तो धन संग्रह करने की आदत रहती है। *“Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़”* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* *Powerful All-in-One Tabiz* *This is Laxmi Shani Yantr & work for Good Health & Wealth full Life.* ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *“Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़”* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* *Powerful All-in-One Laxmi Shani Yantr Tabiz* *This is Laxmi Shani Yantr & work for Good Health & Wealth full Life.* इस लक्ष्मी शनि यन्त्र को बनाने में दस दिन का समय लगता है इस एक ही यन्त्र में दस यन्त्रो का मिश्रण है यह पूर्णत: धार्मिक कवच है किसी तान्त्रिक विद्या द्वारा नहीं बनाया जाता है और इसमें सभी धर्मो का समावेश है किसी विशेष जाति या धर्म को लेकर नहीं बनाया जाता है इसलिए इसे कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है। यह हर क्षेत्र में व्यक्ति को फायदा देता है। यदि किसी की कुंडली में मंगल दोष, कालसर्प दोष, गंडमूल दोष, अंगारक दोष, पितृदोष, ग्रहणदोष, या फिर विष योग, गुरु चाण्डाल योग है तो इसे धारण करने से उसका भी निवारण हो जाता है। यह आपके नाम और उम्र के हिसाब से बनाया जाता है। इसे धारण करने पर किसी विशेष नियम या परहेज का पालन नही करना होता है। यह बच्चों की पढ़ाई में व्यापार नौकरी में, कोई गृह क्लेश हो, कोई समस्या हो सभी में फायदा करता है। वाद-विवाद, मुकदमे, बहस, समूह वार्तालाप, आपसी बातचीत में सामने वाला वश में हो, कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस उसके वश में हो, और जब चाहें उसे छुट्टी मिल जाए….. पत्नी सोचती है पति वश में रहें, यही सोच पति की भी होती है….. कोई सोचता है/सोचती है कि मेवैसा ही करें…… लड़कों को लड़कियों को वश में करे सभी दोस्त मेरे वश में हो, और जो मैं बोलूं सभी रना होता है और लड़कियों को लड़के अपने वश में चाहिए….. व्यापारी चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक मेरे वश में हो, और उसके ग्राहक पड़ोसियों के पास न जाएं….. प्रेम विवाह करने वाले सोचते है कि उनके घर वाले उनके वश में हो, और उनकी शादी में कोई रुकावट न डाले….. माता-पिता सोचते हैं कि उनकी संतान उनके कहने से बाहर न हो, और उनके बताए गये अच्छे रास्तों को छोड़कर गलत रास्ते पर न जाएं। सामान्यतः ऐसीे ही सोच सभी की होती है। लक्ष्मी शनि यन्त्र का मतलब होता है किसी को अपने अनुकूल कर लेना। अगर प्रेमी या प्रेमिका मन बदल गया हो, या विवाह करने को राजी न हो रहे हो। या कोई अधिकारी आपके विरोध में कार्य कर रहा हो। या परिवार में कोई सदस्य गलत रास्ते पर जा रहा हो, तो “Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़” के प्रयोग से उसका मन बदला जा सकता है। ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ #Astro Sunil Garg (Nail & Teeth) Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet:- ( Specialist in Alternative Medicine ) #Whatsapp no :- 9911020152, 7982311549 Paytm no:- 9911020152 ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *आप हमसे तभी संपर्क करे जब आप अपनी समस्याओं का समाधान कराते कराते पूरी तरह से थक चुके हो और आपको कही भी कोई रास्ता नजर नही आ रहा हो उसके बाद ही आप हमसे संपर्क करे* *अब घर बैठे सभी प्रकार कि नकारात्मक एनर्जी से 100% मुक्ति पाऐ जैसे तंत्र मंत्र जादु टोना भूत प्रेत गृह क्लेश तलाक होना मानसिक तनाव साइकिक अटैक डिप्रेशन सीजोफ्रोनीया अल्जाइमर असाध्य रोगों से घर बैठे मुक्ति पाऐ* 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *शुगर से यदि हड्डियों और नसों पर असर पड़ रहा है तो उसके लिए लीजिए जड़ी बुटियों से बनी यह दवाई।* *यदि शुगर की दवाई या इन्यसुलिन लेने पर भी शुगर ठीक नही हो रही तो इस दवाई के लेने से हड्डियों में दर्द, बालों का झड़ना, आँखो की रोशनी तेज, लीवर, किडनी संबंधी बीमारियों में लाभदायक और शुगर को भी कंट्रोल करती है।* *यदि किसी को जमीन पर बैठने में प्रॉबल्म है तो वह भी तीन - चार महीने के बाद बैठने लग सकते है।* 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *किसी भी प्रकार के तीसरे चरण के कैंसर का ईलाज खानपान के द्वारा 40 से 100% तक ठीक* *Any type of third stage cancer can cure by 40 to 100% only through diet.* *सिर्फ खानपान में परिवर्तन के द्वारा किडनी का इलाज में 50 से 100 % आराम* *Diseased kidney can cure to 50 to 100% only through diet* *खान पान के द्वारा बिना ऑपरेशन से घुटनों के इलाज में 60 से 100% तक आराम* *Knee cap replacement problem or joint pain can be cure to 60-100% only through diet* खान-पान शुरु करने के 72 घण्टे के बाद से ही आपको आराम मिलने लगेगा। अन्य किसी भी समस्या हेतु संपर्क करे:- *Diseased liver can cure to 40-80% only through diet* *Patients who are in coma for >= 10 days can be cure within 2 hours just through diet only.* *Those who lost their memory due to accident, can also cure to 90% through diet only* *In typhoid, after my prescribed treatment relief will be in 1 hour and person can easily eat food* *Patients who has a life of 2-4 days only, can also cured through diet within 2 hours to 1 week. Thereafter, they can live long life.* *Cancer, Kidney, Heart Problem , Joint Pain, Skin Disease, Stomach Problem, Piles, Neurology can also cure by diet only.* *In the old age, people have problem in walking, eating, doing activities ,etc. can also be cured only through special diet.* *In dengue, after my prescribed diet treatment relief will be in 10 minutes only.* *Dengue , Swine flu , Typhoid, and any other temperature will be cure by my prescribed diet treatment in 10 minutes only.* *In chickungunya, after my prescribed diet treatment relief will be in 2 hours and person will start walking and activities.* *Health Checkup by Nails & Teeth and Treatment can be done by Diet only.* *( Specialist in Alternative diet Medicine )* *{Loose your extra weight through diet only.* *नियमित आहार को ही बनाऐ आर्युवेदिक आहार* *सिर्फ खान-पान के द्वारा बिना किसी दवाई के बीमारी ठीक करे।* *केंसर,डेंगू,चिकनगुनिया,*त्वचा रोग,मिर्गी,पेट से संबंधित रोग, ल्यूकोरिया, बवासीर,किडनी,जोडो के दर्द, गंठिया भाव (भादी) ( जॉइंट पैन ,कमर दर्द ,और फुल बदन दर्द की शिकायत (शरीर मे अकडन) ) , दमा (Asthma) 💐💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *समस्सया चाहें केसी भी हो काम कारोबार में नुकसान job ना मिलना।पति पत्नी में लड़ाई अनबन Husband vashikarn speclist प्रेम विवाह Intercast Love marrige शादी विवाह में आने वाली रूकावटे Love vashikarn स्पेशलिस्ट,सौतन से छुटकारा, प्रमिका को मनाना, वस में करना।* *हस्ताक्षर से जाने अपना भविष्य .* *अपने_Thumb_Impression से जाने अपने घर, दफ्तर, फैक्टरी या गोदाम का वास्तु दोष और साथ ही उसका उपाय जानकर अपनी मुशिक्लों का हल* *मेरे व्याटसप नम्बर 9911020152 , 7982311549 , पर भेजें अपने Thumbs Impression किसी प्लेन पेपर पर* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet ( Specialist in Alternative Medicine ) अंक ज्योतिष & वास्तु विशेषज्ञ,वैदिक,तांत्रिक,तंन्त्र मंत्र, टोने टोटके एवं ज्योतिषी समाधान के लिए संपर्क करें:- 7982311549, 9911020152 जैसै किसी प्रेमी,प्रेमिका या पति,पत्नी ,स्त्री पुरुष को वश में करना हो या फिर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करना हो, प्रेम विवाह आ रहीं समस्या को दूर करना हो, शत्रु को अपने वश में करना हो, सौतन से छुटकारा किसी ने कुछ किया-कराया हो, गृहक्लेश हो, मनचाहा जीवन साथी पाने के लिये, बेरोजगारी की समस्या के लिये, व्यवसाय में सफलता ना मिल रहीं हो, संतान का ना होना या फिर होकर मर जाना, *Janiye apne Business, Career, & Life se judi har samasya ka Samadhan.* ज्योतिषी और हस्तरेखाविद मो. 9911020152, 7982311549 नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें। भारत के प्रसिद्ध वशीकरण स्पेशलिस्ट सुनील गर्ग जी Cont & wtsap No.+91-7982311549, Paytm 9911020152 11AM to 07 PM (प्रेम-विवाह ) (मनचाहा प्यार ) (काम-कारोबार)( पति - पत्नी में अनबन)"जैसी सभी समस्या के लिए सम्पर्क करे।( ईधर_उधर_न_भटके_विशवाश_है_तो_एक_बार_जरूर_फोनकरें) Get Ur All Problems Solution i So Contact Now.. +91-9911020152, 7982311549 11AM to 07 PM 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 सभी जगह से निराश प्रेमी-प्रेमिकाएं एक बार जरूर कॉल करें, आपका प्यार टूटने नहीं दिया जाएगा। NOTE-(वशीकरण_स्पेशलिस्ट_सुनील_गर्ग_जी) आगे पढ़ें- 1) Love_problem_solution, 2) Inter_caste_marriage_solution, 3) Husband_wife_disputes, 4) Child_problems, +91-9911020152, Paytm 9911020152 11AM to 07 PM 5) Diveroce_problem_solution, 6) Family_problem, 7) Business_problem, 8) Visa_problem, 9) Job Problem, नोट :-Note–उपरोक्त समस्याओं के अलावा भी कोई और समस्या हो जिसका निवारण तंत्र-मंत्र व एस्ट्रोलॉजी के रिलेटेड हो तो आप हमें कॉल करके बताइयेगा। आपकी सभी समस्याओं का समाधान घर बैठे फ़ोन पर आपके द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार किया जाता है -----अभी संपर्क करें :- सुनील गर्ग जी Sunil Garg ji +91-9911020152, 7982311549 Paytm 9911020152 11AM to 07 PM *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* *हस्ताक्षर से जाने अपना भविष्य ।* *अपने Thumb Impression से जाने अपने घर, दफ्तर, फैक्टरी या गोदाम का वास्तु दोष और साथ ही उसका उपाय जानकर अपनी मुशिक्लों का हल।* *मेरे व्याटसप नम्बर 9911020152, 7982311549 पर भेजें अपने Thumbs Impression किसी प्लेन पेपर पर* *Pay to Paytm Number :- 9911020152* *Mera A/C no* 🌹स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया🌹 State Bank of India, Sunil Kumar Garg SA/C no 10614925460, ( IFS Code: SBIN0000737 ) Pahar Ganj New Delhi 110055, mai Deposit karva sakte hain, Uski Receipt Whatsapp par dal kar pooch sakte hain Mera Whatsapp No hai 9911020152,. 7982311549 *Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet:-* *( Specialist in Alternative Medicine )* *New Kaushal Furniture House* *Godrej Home Safe* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *1/1,Panchkuian Road,* *Opposite metro pillar no.17, RK Ashram Marg metro station ,* *New Delhi-110001*

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अस्त ग्रहों के फल व उसके उपाय। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=5215299805167643&id=100000630247964 ज्योतिष शास्त्र में अस्त ग्रह के परिणामों की विशद व्याख्या मिलती है। अस्तग्रहों के बारे में यह कहा जाता है : “त्रीभि अस्तै भवे ज़डवत”,अर्थात् किसी जन्मपत्रिका में तीन ग्रहों के अस्त हो जाने पर व्यक्ति ज़ड पदार्थ के समान हो जाता है। ज़ड से तात्पर्य यहां व्यक्ति की निष्क्रियता और आलसीपन से है अर्थात् ऎसा व्यक्ति स्थिर बना रहना चाहता है, उसके शरीर, मन और वचन सभी में शिथिलता आ जाती है। कहा जाता है कि ग्रहों के निर्बल होने में उनकी अस्तंगतता सबसे ब़डा दोष होता है। अस्त ग्रह अपने नैसर्गिक गुणों को खो देते हैं, बलहीन हो जाते हैं और यदि वह मूल त्रिकोण या उच्चा राशि में भी हों तो भी अच्छे परिणम देने में असमर्थ रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में एक अस्त ग्रह की वही स्थिति बन जाती है जो एक बीमार, बलहीन और अस्वस्थ राजा की होती है। यदि कोई अस्त ग्रह नीच राशि, दु:स्थान, बालत्व दोष या वृद्ध दोष, शत्रु राशि या अशुभ ग्रह के प्रभाव में हो तो ऎसा अस्त ग्रह, ग्रह कोढ़ में खाज का काम करने लगता है। उसके फल और भी निकृष्ट मिलने लगते हैं अत: किसी कुण्डली के फल निरूपण में अस्तग्रह का विश्लेषण अवश्य कर लेना चाहिए।अस्त ग्रह की दशान्तर्दशा में कोई गंभीर दुर्घटना, दु:ख या बीमारी आदि हो जाती है। जब किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में कोई शुभ ग्रह यथा बृहस्पति, शुक्र, चंद्र, बुध आदि अस्त होते हैं तो अस्तंगतता के परिणाम और भी गंभीर रूप से मिलने लगते हैं। कई कुण्डलियों में तो देखने को मिलता है कि किसी एक शुभ ग्रह के पूर्ण अस्त हो जाने मात्र से व्यक्ति का संपूर्ण जीवन ही अभावग्रस्त हो जाता है और परिणाम किसी भी रूप में आ सकते हैं जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु हो जाना, किसी पैतृक संपत्ति का नष्ट हो जाना, शरीर का कोई अंग-भंग हो जाना या किसी परियोजना में भारी हानि होने के कारण भारी धनाभाव हो जाना आदि। यह भी देखा जाता है कि यदि कोई ग्रह अस्त हो परंतु वह शुभ भाव में स्थित हो जाए अथवा उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो अस्तग्रह के दुष्परिणामों में कमी आ जाती है। यदि किसी व्यक्ति की कुण्डली में लग्नेश अस्त हो और इस अस्त ग्रह पर से कोई पाप ग्रह संचार करे तो फल अत्यंत प्रतिकूल मिलते हैं। यदि कोई ग्रह अस्त हो और वह पाप प्रभाव में भी हो तो ऎसे ग्रह के दुष्परिणामों से बचने के लिए दान करना श्रेष्ठ उपाय होता है। किसी ग्रह के अस्त होने पर ऎसे ग्रह की दशा-अन्तर्दशा में अनावश्यक विलंब, किसी कार्य को करने से मना करना अथवा अन्य प्रकार के दु:खों का सामना करना प़डता है। यदि व्यक्ति की कुण्डली में कोई ग्रह सूर्य के निकटतम होकर अस्त हो जाता है तो ऎसा ग्रह बलहीन हो जाता है। उदाहरण के लिए विवाह का कारक ग्रह यदि अस्त हो जाए और नवांश लग्नेश भी अस्त हो तो ऎसा व्यक्ति चाहे अमीर हो या गरीब, सुंदर हो या कुरूप, ल़डका हो या ल़डकी निस्संदेह विवाह में विलंब कराता है। यदि इन ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा आ जाए तो व्यक्ति जीवन के यौवनकाल के चरम पर विवाह में देरी कर देता है और वैवाहिक सुखों (दांपत्य सुख) से वंचित हो जाता है जिसके कारण उसे समय पर संतान सुख भी नहीं मिल पाता और वैवाहिक जीवन नष्ट सा हो जाता है। डॉ0 विजय शंकर मिश्र: ग्रहों के अस्त अंश (1) चन्द्रमा, सूर्य से 12 अंश के भीतर रहने पर अस्त रहता है. (2) मंगल, सूर्य से 17 अंश के अंदर रहने पर अस्त होता है. (3) बुध, सूर्य से 13 अंश ( मतांतर से 14 अंश ) के भीतर रहने पर अस्त होता है. यदि वक्री है तो 12 अंश (4) गुरु, सूर्य से 11 अंश के भीतर अस्त होता है (5) शुक्र, सूर्य से 9 अंश के भीतर अस्त. मतांतर से 10 अंश. वक्री हो तो 8 अंश के भीतर अस्त. (6) शनि, सूर्य से 15 अंश के भीतर अस्त होता है. अस्त ग्रहों को सुचारू रूप से चलने के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता होती है तथा कुंडली में किसी अस्त ग्रह का स्वभाव देखने के बाद ही यह निर्णय किया जाता है कि उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है। यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त होने के साथ साथ स्वभाव से शुभ फलदायी है तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करने का सबसे आसान तथा प्रभावशाली उपाय है, कुंडली धारक को उस ग्रह विशेष का रत्न धारण करवा देना। रत्न का वजन अस्त ग्रह की बलहीनता का सही अनुमान लगाने के बाद ही तय किया जाना चाहिए। इस प्रकार उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल मिल जाता है जिससे वह अपना कार्य सुचारू रूप से करने में सक्षम हो जाता है। किन्तु यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त होने के साथ साथ अशुभ फलदायी है तो ऐसे ग्रह को उसके रत्न के द्वारा अतिरिक्त बल नही दिया जाता क्योंकि किसी ग्रह के अशुभ होने की स्थिति में उसके रत्न का प्रयोग सर्वथा वर्जित है, भले ही वह ग्रह कितना भी बलहीन हो। ऐसी स्थिति में किसी भी अस्त ग्रह को बल देने का सबसे बढ़िया तथा प्रभावशाली उपाय उस ग्रह के यंत्र तथा मंत्र बहुत अच्छे उपाय सिद्ध हो सकते हैं जिनके उचित प्रयोग से कुंडली के अशुभ ग्रहों को शांत किया जा सकता है तथा उनसे लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उस ग्रह के मंत्र का निरंतर जाप करने से या उस ग्रह के मंत्र से पूजा करवाने से ग्रह को अतिरिक्त बल तो मिलता ही है, साथ ही साथ उसका स्वभाव भी अशुभ से शुभ की ओर बदलना शुरू हो जाता है। मंत्रों के प्रयोग की प्रक्रिया कठोर नियमों तथा अनुशासन का पालन करने की मांग करती है जिसके चलते जन साधारण के लिए इस प्रक्रिया का अभ्यास अति कठिन है। वहीं दूसरी ओर यंत्रों का प्रयोग रत्नो की भांति ही सहज तथा सरल है जिसके कारण अधिकतर जातक यंत्रों के प्रयोग से लाभ ले सकते हैं। मंत्रों की तुलना में यंत्र कहीं कम नियम तथा अनुशासन की मांग करते हैं तथा इसके अतिरिक्त यंत्र, पूजा की तुलना में बहुत सस्ते भी होते हैं जिसके चलते सामान्य जातक के लिए इनका प्रयोग सुलभ है तथा इसी कारण यंत्रों का प्रचलन दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। अस्त ग्रहों के फल और उनकी दशा-अंतर्दशा के परिणाम चंद्रमा चंद्रमा के अस्त होने पर तमाम तरह की मानसिक समस्याएं होने लगती है. कभी-कभी मिर्गी या मानसिक दौरे की बीमारी हो जाती है. व्यक्ति को स्त्री और माता का सुख नहीं मिल पाता. महिलाओं में विशेष तरह के रोग हो जाते हैदि द्वादशेश का प्रभाव हो तो जातक किसी लंबी बीमारी या नशे . यदि जातक की जन्मकुंडली में चन्द्रमा अष्टमेश के पापों के प्रभाव में हो तो व्यक्ति दीर्घकाल तक अवसादग्रस्त रहता है और यइत्यादि का शिकार हो जाता है। चन्द्रमा के अस्त होने पर जातक की मां का अस्वस्थ होना, पैतृक संपत्ति का नष्ट होना, मानसिक अशांति आदि घटनाएं घटित होती रहती हैं। मंगल मंगल के अस्त होने पर उसकी अंतर्दशा में जातक को नसों में दर्द , उच्च अवसाद, खून का दूषित होना आदि बीमारियां हो सकती हैं। अस्त मंगल ग्रह पर षष्ठेश के पाप का प्रभाव होने पर जातक को कैंसर, विवाद में हानि चोटग्रस्त आदि कष्ट होते हैं और यदि अष्टमेश के पाप का प्रभाव हो तो जातक भ्र्ष्टाचारी, घोटाले करने वाला बन जाता है। अस्त मंगल पर राहु-केतु का प्रभाव होना जातक को किसी मुकदमें आदि में फंसा सकता है। मंगल के अस्त होने पर आत्मविश्वास और साहस में कमी आ जाती है. व्यक्ति के संबंध परिवारवालों के साथ अच्छे नहीं रहते. व्यक्ति के अंदर कभी-कभी अपराध की प्रवृति आ जाती है. अगर मंगल दोष है तो वो प्रभावहीन हो जाता है। बुध जातक की कुंडली में बुध अष्टमेश के पाप के प्रभाव में हो तो जातक को दमा, मानसिक अवसाद, किसी प्रिय की मृत्यु का दुःख आदि से गुजरना पड़ता है। अस्त बुध की अंतर्दशा में जातक को धोखे का शिकार होता है। जिससे वह तनावग्रस्त रहता है, मानसिक अशांति बनी रहती है तथा जातक को चर्म रोग आदि भी हो सकता है। बुध के अस्त होने पर व्यक्ति की बुद्धि तीव्र नहीं होती. व्यक्ति सही फैसला नहीं ले पाता. व्यक्ति हमेशा वहम और दुविधा से घिरा रहता है. व्यक्ति नकारात्मक विचार रखने लगता है। बृहस्पति अस्त बृहस्पति की अंतर्दशा आने पर जातक का मन अध्ययन में नहीं लगता वह लीवर की बीमारी से भी ग्रसित हो सकता है अन्य दूषित ग्रहों का प्रभाव होने पर जातक संतान सुख से वंचित रह जाता है। यदि कुंडली में अस्त बृहस्पति पर षष्ठेश के पाप का प्रभाव हो तो जातक को मधुमेह, ज्वर आदि हो सकता है वह किसी मुकदमें आदि में भी फंस सकता है। अष्टमेश का प्रभाव होने पर किसी प्रियजन का वियोग होता है और द्वादशेश के पाप का प्रभाव हो तो जातक अनैतिक संबंधों में फंस जाता है। बृहस्पति के अस्त होने पर व्यक्ति तामसिक वृतियों का शिकार हो जाता है. व्यक्ति को पेट की गंभीर समस्याएं हो सकती है. महिला है तो विवाह होने में और चलाने में बड़ी मुश्किल आती है। शुक्र कुंडली में अस्त शुक्र ग्रह की अंतर्दशा में जातक का जीवनसाथी रोगग्रस्त हो सकता है। जातक को किडनी आदि से सम्बंधित परेशानी हो सकती है। संतानहीन हो जाने का भय रहता है। अस्त शुक्र का राहु-केतु के प्रभाव में होना जातक की समाज में प्रतिष्ठा के कम होने का संकेत देता है। यदि अस्त शुक्र अष्टमेश के पाप के प्रभाव में दाम्पत्य जीवन में कटुता आती है। द्वादशेश के पाप के प्रभाव में हो तो नशे का आदि होता है। शुक्र के अस्त होने पर व्यक्ति को किसी भी प्रकार का सुख नहीं मिलता. दाम्पत्य सुख नहीं मिलता. व्यक्ति का व्यक्तित्व भी प्रभावशाली नहीं रहता. व्यक्ति को आँखों और मधुमेह की समश्या होने की सम्भावना बन जाती है। शनि अस्त शनि ग्रह का षष्ठेश की पापछाया में होना रीढ़ की हड्डी में परेशानी, जोड़ों में दर्द आदि समस्या उत्पन्न करता है। अष्टमेश के प्रभाव में रोजगार हीन हो जाता है और द्वादशेश के प्रभाव में जातक किसी भयंकर बीमारी से ग्रसित हो जाता है जिससे मानसिक अशांति रहती है। अस्त शनि ग्रह की अंतर्दशा आने पर जातक की सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी आती है, उसे अत्यधिक श्रम करना पड़ता है। उसका कार्य व्यवहार नीच प्रकृति के लोगों में रहता है। शनि के अस्त होने पर व्यक्ति के जीवन में कदम-कदम पर संघर्ष होता है. व्यक्ति को रोजगार के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ता है. व्यक्ति को कभी-कभी घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है। यदि जातक की कुंडली में कोई भी ग्रह अस्त होने के साथ-साथ अशुभ फलदायी हो तो जातक को उस ग्रह के अशुभ प्रभाव को थोड़ा कम करने हेतु उस ग्रह के ग्रह के यंत्र तथा मंत्र बहुत अच्छे उपाय सिद्ध हो सकते हैं जिनके उचित प्रयोग से कुंडली के अशुभ ग्रहों को शांत किया जा सकता है तथा उनसे लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है। ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *“Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़”* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* *Powerful All-in-One Tabiz* *This is Laxmi Shani Yantr & work for Good Health & Wealth full Life.* ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *“Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़”* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* *Powerful All-in-One Laxmi Shani Yantr Tabiz* *This is Laxmi Shani Yantr & work for Good Health & Wealth full Life.* इस लक्ष्मी शनि यन्त्र को बनाने में दस दिन का समय लगता है इस एक ही यन्त्र में दस यन्त्रो का मिश्रण है यह पूर्णत: धार्मिक कवच है किसी तान्त्रिक विद्या द्वारा नहीं बनाया जाता है और इसमें सभी धर्मो का समावेश है किसी विशेष जाति या धर्म को लेकर नहीं बनाया जाता है इसलिए इसे कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है। यह हर क्षेत्र में व्यक्ति को फायदा देता है। यदि किसी की कुंडली में मंगल दोष, कालसर्प दोष, गंडमूल दोष, अंगारक दोष, पितृदोष, ग्रहणदोष, या फिर विष योग, गुरु चाण्डाल योग है तो इसे धारण करने से उसका भी निवारण हो जाता है। यह आपके नाम और उम्र के हिसाब से बनाया जाता है। इसे धारण करने पर किसी विशेष नियम या परहेज का पालन नही करना होता है। यह बच्चों की पढ़ाई में व्यापार नौकरी में, कोई गृह क्लेश हो, कोई समस्या हो सभी में फायदा करता है। वाद-विवाद, मुकदमे, बहस, समूह वार्तालाप, आपसी बातचीत में सामने वाला वश में हो, कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस उसके वश में हो, और जब चाहें उसे छुट्टी मिल जाए….. पत्नी सोचती है पति वश में रहें, यही सोच पति की भी होती है….. कोई सोचता है/सोचती है कि मेवैसा ही करें…… लड़कों को लड़कियों को वश में करे सभी दोस्त मेरे वश में हो, और जो मैं बोलूं सभी रना होता है और लड़कियों को लड़के अपने वश में चाहिए….. व्यापारी चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक मेरे वश में हो, और उसके ग्राहक पड़ोसियों के पास न जाएं….. प्रेम विवाह करने वाले सोचते है कि उनके घर वाले उनके वश में हो, और उनकी शादी में कोई रुकावट न डाले….. माता-पिता सोचते हैं कि उनकी संतान उनके कहने से बाहर न हो, और उनके बताए गये अच्छे रास्तों को छोड़कर गलत रास्ते पर न जाएं। सामान्यतः ऐसीे ही सोच सभी की होती है। लक्ष्मी शनि यन्त्र का मतलब होता है किसी को अपने अनुकूल कर लेना। अगर प्रेमी या प्रेमिका मन बदल गया हो, या विवाह करने को राजी न हो रहे हो। या कोई अधिकारी आपके विरोध में कार्य कर रहा हो। या परिवार में कोई सदस्य गलत रास्ते पर जा रहा हो, तो “Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़” के प्रयोग से उसका मन बदला जा सकता है। ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ #Astro Sunil Garg (Nail & Teeth) Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet:- ( Specialist in Alternative Medicine ) #Whatsapp no :- 9911020152, 7982311549 Paytm no:- 9911020152 ऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँऊँ *आप हमसे तभी संपर्क करे जब आप अपनी समस्याओं का समाधान कराते कराते पूरी तरह से थक चुके हो और आपको कही भी कोई रास्ता नजर नही आ रहा हो उसके बाद ही आप हमसे संपर्क करे* *अब घर बैठे सभी प्रकार कि नकारात्मक एनर्जी से 100% मुक्ति पाऐ जैसे तंत्र मंत्र जादु टोना भूत प्रेत गृह क्लेश तलाक होना मानसिक तनाव साइकिक अटैक डिप्रेशन सीजोफ्रोनीया अल्जाइमर असाध्य रोगों से घर बैठे मुक्ति पाऐ* 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *शुगर से यदि हड्डियों और नसों पर असर पड़ रहा है तो उसके लिए लीजिए जड़ी बुटियों से बनी यह दवाई।* *यदि शुगर की दवाई या इन्यसुलिन लेने पर भी शुगर ठीक नही हो रही तो इस दवाई के लेने से हड्डियों में दर्द, बालों का झड़ना, आँखो 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Thereafter, they can live long life.* *Cancer, Kidney, Heart Problem , Joint Pain, Skin Disease, Stomach Problem, Piles, Neurology can also cure by diet only.* *In the old age, people have problem in walking, eating, doing activities ,etc. can also be cured only through special diet.* *In dengue, after my prescribed diet treatment relief will be in 10 minutes only.* *Dengue , Swine flu , Typhoid, and any other temperature will be cure by my prescribed diet treatment in 10 minutes only.* *In chickungunya, after my prescribed diet treatment relief will be in 2 hours and person will start walking and activities.* *Health Checkup by Nails & Teeth and Treatment can be done by Diet only.* *( Specialist in Alternative diet Medicine )* *{Loose your extra weight through diet only.* *नियमित आहार को ही बनाऐ आर्युवेदिक आहार* *सिर्फ खान-पान के द्वारा बिना किसी दवाई के बीमारी ठीक करे।* *केंसर,डेंगू,चिकनगुनिया,*त्वचा रोग,मिर्गी,पेट से संबंधित रोग, ल्यूकोरिया, बवासीर,किडनी,जोडो के दर्द, गंठिया भाव (भादी) ( जॉइंट पैन ,कमर दर्द ,और फुल बदन दर्द की शिकायत (शरीर मे अकडन) ) , दमा (Asthma) 💐💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 *समस्सया चाहें केसी भी हो काम कारोबार में नुकसान job ना मिलना।पति पत्नी में लड़ाई अनबन Husband vashikarn speclist प्रेम विवाह Intercast Love marrige शादी विवाह में आने वाली रूकावटे Love vashikarn स्पेशलिस्ट,सौतन से छुटकारा, प्रमिका को मनाना, वस में करना।* *हस्ताक्षर से जाने अपना भविष्य .* *अपने_Thumb_Impression से जाने अपने घर, दफ्तर, फैक्टरी या गोदाम का वास्तु दोष और साथ ही उसका उपाय जानकर अपनी मुशिक्लों का हल* *मेरे व्याटसप नम्बर 9911020152 , 7982311549 , पर भेजें अपने Thumbs Impression किसी प्लेन पेपर पर* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet ( Specialist in Alternative Medicine ) अंक ज्योतिष & वास्तु विशेषज्ञ,वैदिक,तांत्रिक,तंन्त्र मंत्र, टोने टोटके एवं ज्योतिषी समाधान के लिए संपर्क करें:- 7982311549, 9911020152 जैसै किसी प्रेमी,प्रेमिका या पति,पत्नी ,स्त्री पुरुष को वश में करना हो या फिर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करना हो, प्रेम विवाह आ रहीं समस्या को दूर करना हो, शत्रु को अपने वश में करना हो, सौतन से छुटकारा किसी ने कुछ किया-कराया हो, गृहक्लेश हो, मनचाहा जीवन साथी पाने के लिये, बेरोजगारी की समस्या के लिये, व्यवसाय में सफलता ना मिल रहीं हो, संतान का ना होना या फिर होकर मर जाना, *Janiye apne Business, Career, & Life se judi har samasya ka Samadhan.* ज्योतिषी और हस्तरेखाविद मो. 9911020152, 7982311549 नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें। भारत के प्रसिद्ध वशीकरण स्पेशलिस्ट सुनील गर्ग जी Cont & wtsap No.+91-7982311549, Paytm 9911020152 11AM to 07 PM (प्रेम-विवाह ) (मनचाहा प्यार ) (काम-कारोबार)( पति - पत्नी में अनबन)"जैसी सभी समस्या के लिए सम्पर्क करे।( ईधर_उधर_न_भटके_विशवाश_है_तो_एक_बार_जरूर_फोनकरें) Get Ur All Problems Solution i So Contact Now.. +91-9911020152, 7982311549 11AM to 07 PM 💐🌹🌹💐💐🌹🌹💐💐🌹 सभी जगह से निराश प्रेमी-प्रेमिकाएं एक बार जरूर कॉल करें, आपका प्यार टूटने नहीं दिया जाएगा। NOTE-(वशीकरण_स्पेशलिस्ट_सुनील_गर्ग_जी) आगे पढ़ें- 1) Love_problem_solution, 2) Inter_caste_marriage_solution, 3) Husband_wife_disputes, 4) Child_problems, +91-9911020152, Paytm 9911020152 11AM to 07 PM 5) Diveroce_problem_solution, 6) Family_problem, 7) Business_problem, 8) Visa_problem, 9) Job Problem, नोट :-Note–उपरोक्त समस्याओं के अलावा भी कोई और समस्या हो जिसका निवारण तंत्र-मंत्र व एस्ट्रोलॉजी के रिलेटेड हो तो आप हमें कॉल करके बताइयेगा। आपकी सभी समस्याओं का समाधान घर बैठे फ़ोन पर आपके द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार किया जाता है -----अभी संपर्क करें :- सुनील गर्ग जी Sunil Garg ji +91-9911020152, 7982311549 Paytm 9911020152 11AM to 07 PM *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* *हस्ताक्षर से जाने अपना भविष्य ।* *अपने Thumb Impression से जाने अपने घर, दफ्तर, फैक्टरी या गोदाम का वास्तु दोष और साथ ही उसका उपाय जानकर अपनी मुशिक्लों का हल।* *मेरे व्याटसप नम्बर 9911020152, 7982311549 पर भेजें अपने Thumbs Impression किसी प्लेन पेपर पर* *Pay to Paytm Number :- 9911020152* *Mera A/C no* 🌹स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया🌹 State Bank of India, Sunil Kumar Garg SA/C no 10614925460, ( IFS Code: SBIN0000737 ) Pahar Ganj New Delhi 110055, mai Deposit karva sakte hain, Uski Receipt Whatsapp par dal kar pooch sakte hain Mera Whatsapp No hai 9911020152,. 7982311549 *Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet:-* *( Specialist in Alternative Medicine )* *New Kaushal Furniture House* *Godrej Home Safe* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *1/1,Panchkuian Road,* *Opposite metro pillar no.17, RK Ashram Marg metro station ,* *New Delhi-110001*

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