Arvind sharma Dec 1, 2021

जयश्रीराम जयश्रीराम जयश्रीराम जयश्रीराम :-🏹 🍂🍂🍁🍁लंका अभियान के लिए सेतु का बनाने का काम चल रहा था कार्य बहुत जोर-शोर से चल रहा था सभी व्यस्त थे नल-नील तो मानो अपनी सारी सुध -बुध भुल चुके थे ऊबड-खबड पत्थरो पर राम के पवित्र शब्दो को अंकित करते और फिर पत्थरो को पास खडे साथी वानरो को थमा देते वानर उन पत्थरो को अधबने सेतु के ऊपरी भाग पर तैरते जाते थे :-■■■■■■■■■🏹🏹 सभी वानर भूख-प्यास भुल सेतु निर्माण जुटे हुए थे उन्हे तो लंका के उस पार पहुँचना था और लंकापति रावण की नीचता का उत्तर देना था माता सीता को उस केद से छुडना था :-■■■■■■■🏹🏹 पास ही एक वृक्ष की छाया मे बैठे भगवान राम करोडो वानर की व्यस्तता देख रहे थे उनकी दृष्टि अचानक एक गिलहरी पर पडी वह छोटा सा प्राणी उनके सन्मुख बहुत देर से फुदक रहा था उन्होने देखा गिलहरी समुद्र के किनारे जाती और बालूरेत छिपकाकर ले आती प्रभु श्रीराम ने कहा के दृष्ट जीव तू क्यो मेरे कार्य मे बाधा उत्पन्न कर रही है :-■■■■■■🏹🏹 गिलहरी ने कहा:- प्रभुमै बाधा उत्पन्न नही कर रही हू मै तो आपके कार्य मे एक छोटा -सा सहयोग प्रदान कर रही हू :- मै अपने शरीर मे रेत छीपकाकर पत्थरो मे डाल देती हू इससे ऊबड- खबड पत्थरो के बीच डाल देती हू इससे आपकी सेना और आपको इन पत्थरो की तीखी नोक आपके पेरो मे नही चुभेगी ■■■■■🏹🏹 श्रीराम गिलहरी कि बाते सुनकर बडे प्रसन्न हुये गिलहरी से कहा - गिलहरी समय बडा बलवान है जैसे तू मेरे लिए उदासीमे भी मुस्कुराहट ले आई || 🌺🌸🌺🌸🌺🌸🌺🌸🌺🌸🌺🌸

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Arvind sharma Nov 30, 2021

|| 🎯मानव के लिए सबसे बडा खतरा मानव🎯 || 🏹🏹मानव के लिए सबसे बडा खतरा आज परमाणु बम या हाइडोजन बम नही स्वयं मानव है आज चारो और विज्ञान का चमत्कार दिखाई दे रहा है मनुष्य का दावा है - कि रोगो को जीतता और मृत्यु को- दुर करता जा रहा है भौतिक जन-जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे इसपर विज्ञान अवश्य गर्व कर सकता है परंन्तु क्या उसने मानव को सुधारने की और भी कुछ किया है अपने यहा के शास्त्रो मे भी यह कहा गया है कि प्रत्येक वनस्पति ओषधि है" प्रत्येक वर्ण मन्त्र है" आवश्यकता है केवल योग्य तथा उपयुक्त प्रयोक्ता की सब कार्यो का प्रयोक्ता मानव ही है पर उसे सच्चे अर्थ मे मानव बनाने के लिए क्या किया जा रहा है विश्व के अनेक विचारक गम्भीरतापूर्वक यह सोच रहे है कि मानव पृथ्वी को जिस तेजी से बर्बाद कर रहा है वायुमण्डल को विषाक बना रहा है उसे देखते हुए क्या किसी समय पृथ्वी पर कोई भी पशु - पक्षी वनस्पति या स्वयं मानव भी प्राण धारण करने मे समर्थ होगा जनसंख्या बढती जा रही है और जीवन - निर्वाह के साधन कम होते जा रहे यदि जनसंख्या इसी तरह बढती गयी तो किसी दिन भूमि पर मनुष्य के लिए बसने की भी जगह नही रहेगी हिसाब - लगाकर देखा जाये तो केवल ""ढाई करोड वर्गमील बसने योग्य भूमि है"" पृथ्वीका लगभग" तीन चौथाई भाग जलाच्छादित है "शेष भागो मे भी" मरूस्थल" और हिम से ढके हुए" भू-खण्ड है "जो थोडी बहुत भूमि खाघ उपजाने के लिए उपलब्ध है उसमे भी" काट-छांट" हो रही है इतना ही नही औद्योगिक प्रगति भी मानव जाति के लिए एक "अभिशाप" सिद्ध हो रही है कूड़े कि समस्या देखने मे साधारण जान पडती है पर यदि गम्भीरतापूर्वक देखा जाये तो उसके द्वारा होनेवाले खतरो का अनुमान लगाया जा सकता है मनुष्य ने मशीनो का अविष्कार किया कारखानो का धुआ वायुमे विष बनकर घुलता है वायुमण्डल और जल को विषाक्त बनाकर हम स्वयं एक नवीन खतरा उत्पन्न कर रहे है उसमे पशु पक्षी भी सुरक्षित नही रहे सकते फिर मानव क्या सुरक्षित रहेगा अब तो पशु -पक्षी एवं मानव मे भी नये - नये रोग देखने मे आ रहे है धीरे-धीरे शहरो का विस्तार हो रहा और गाव उनके पेट मे समाते जा रहे है इन सबसे यही उदाहरण" सिद्ध होता है- कि मानव स्वयं ही अपने ""विनाश ""कि और-- अग्रसर हो रहा है सचमुच आज मानव अस्तित्व के लिए सबसे बडा खतरा मानव ही🎯🎯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯

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