arvind sharma Jan 14, 2022

💫💫माया महा ठगिनि 💫💫 🌬माया से मोहित हो जानेपर मनुष्य विवश हो जाता है वह उन्ही कर्मोको करता है जिन्हे माया करवाती है तब मनुष्य दुष्कर्म-पर-दुष्कर्म करता जाता है उसका ज्ञानस्वरूप बिल्कुल ढक जाता है और वह असुरभावग्रस्त होकर इतना आदम बन जाता है कि भगवान की शरण ग्रहण करने के बाद भी सोच नहीं सकता फिरभी प्रेमरूप प्रभु हमे गले लगाता है - भगवान वे हमारी अधमता पर कोई ध्यान नही देते हमारे तीनो शरीरो के साथ प्रेम का खेल चालू रखते है १ 💫जाग्रदवस्था २ 💫स्वप्नावस्था ३💫 अन्यासक्त अंतः स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर के साथ जो खेल होता उसका सुख हमे नही ज्ञात हो पाता किन्तु सुषुप्ति -अवस्था मे हमारा मन पुरीतत नामक नाडीमे लीन रहता है अतः इस अवस्था मे भगवान के मिलनेका सुख हमे मिलता है सुषुप्ति मे अज्ञान के कारण हम नही जान पाते कि भगवान से हमारा मिलन हुआ है किन्तु इतना तो अनुभव करते है कि खूब सुख मिला है यही कारण है कि गाढी नीदसे उठनेके बाद हम नयी शक्ति नयी स्फूर्ति और नयी उमंग पाते है इसलिए वेदान्तने सुषुप्ति-अवस्था को आनन्दभोगावसर कहा है ||🌸🌺🌸🌺🌸🌺🌸🌺🌸🌺🌸🌺

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