arvind sharma Oct 15, 2021

🌷जय श्रीराम🌷 ⚖⚖🦋🦋🪴🪴 एकनाथजी ने रामयण मे लिखा है-⚔ कि रावण कि भक्ति शत्रुभक्ति विरोधीभक्ति थी रावण ने सोचा यदि मैं अकेला ही राम की भक्ति करता रहूं तो मात्र मेरा ही उद्धार होगा मेरे यह राक्षस तो कभी प्रभु का नाम लेंगे ही नहीं सो यदि मै राम से शत्रुता करूं तो राम के साथ युद्ध भूमि में सभी राक्षस मरते समय भगवान के दर्शन पा सकेंगे और उनका उध्दार होगा इस प्रकार सारे राक्षस-समुदाय के उध्दार के हेतु ही रावण ने श्रीराम से शत्रुता मोल ली रावण ने कुम्भकर्ण से यही कारण बताया था राम से अपनी शत्रुता का 🙏🙏⚔⚔ रामायण श्रीराम का रामस्वरूप है रामयण का एक-एक काण्ड रामजी का अंग है 🩸🩸🩸🩸🩸🩸🩸 ⚖बालकाण्ड श्रीराम जी का 📚चरण है📚 अयोध्याकाण्ड श्रीराम की📚जंघा है📚 अरण्यकाण्ड श्रीराम का📚उदर है📚 किष्किन्धाकाण्ड श्रीराम का 📚ह्रदय है📚 सुन्दरकाण्ड श्रीराम का 📚कंठ है📚 लंकाकाण्ड श्रीराम का 📚मुख है📚 उत्तरकाण्ड श्रीराम का📚मस्तक है 📚

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arvind sharma Oct 14, 2021

उल्टे ही चलते है दीवाने इस्क करते है | बंद आंखों के दीदार के लिए ||🦢🦢 🎑✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨ किसी गांव में एक मिय्यारानी जी का" भक्त" नियम से "चूरमे और हलवा लड्डू "और "दही का कटोरा "लेकर" मिय्यारानी" के स्थान पर जाता और उन्हें भोग" चढ़ाकर कहता =🌼🌼 || 🌾मे देवू तरणापै मे तू देई बुढापै मे 🌾|| अर्थात मैं तुझे जीवन में बहुत चढ़ाता मानता हूं - तो तू मुझे बुढ़ापे "में वह" भोजन "देना - इसी प्रकार अधिक समय "व्यतीत" हो गया और वह ,,बूढ़ा,, हो गया अब वह "मिय्यारानी" जी के स्थान पर जाने से भी "असमर्थ "था उसके बेटों ने उसे भोजन करने के लिए कहा तो वह यह कहकर" नेट" गया कि उसके"" इष्ट देवी"" को भोग ,,चढ़ाए,, बिना भोजन नहीं कर सकता | इस प्रकार वह "भूखा "ही लेटा रहा तब" देवी" वहां स्वयं "प्रकट" हुए - और भक्त का "चूरमा "का "हलवा" लड्डू "तथा दही "भरा "कटोरा" देते हुए कहा--" ||🌾 तू " दिया तरणापै मै देवू बुढापै मे 🌾|| तब भक्त ने मिय्याजी का दिया हुआ वह प्रसाद ग्रहण किया इसी प्रकार मिय्याजी प्रतिदिन भक्त के सामने प्रकट होकर उसे पैसा देने लगे पड़ोसियों ने यह देखकर भक्त के बेटे बहुओं से शिकायत की तब मिय्याजी प्रगट होना बंद कर दिया भक्त ने फिर अनशन धारण किया जिसे मिय्यारानी पुनः प्रकट हुई इस बार उन्होंने भक्त का घर सब प्रकार से संपन्न कर दिया उसे धन-धान्य की कोई भी कमी ना रही ||जय माता दी|| 🍃🌺🌸🍃🌸🍃🌺🌸🍃🌸🌺🍃🌸🌺🍃

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arvind sharma Oct 13, 2021

*🚩कर्मो का फल🚩* *एक बार शंकर जी पार्वती जी भ्रमण पर निकले। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक तालाब में कई बच्चे तैर रहे थे, लेकिन एक बच्चा उदास मुद्रा में बैठा था।* *पार्वती जी ने शंकर जी से पूछा, यह बच्चा उदास क्यों है? शंकर जी ने कहा, बच्चे को ध्यान से देखो।* *पार्वती जी ने देखा, बच्चे के दोनों हाथ नही थे, जिस कारण वो तैर नही पा रहा था।* *पार्वती जी ने शंकर जी से कहा कि आप शक्ति से इस बच्चे को हाथ दे दो ताकि वो भी तैर सके।* *शंकर जी ने कहा, हम किसी के कर्म में हस्तक्षेप नही कर सकते हैं क्योंकि हर आत्मा अपने कर्मो के फल द्वारा ही अपना काम अदा करती है।* *पार्वती जी ने बार-बार विनती की। आखिकार शंकर जी ने उसे हाथ दे दिए। वह बच्चा भी पानी में तैरने लगा।* *एक सप्ताह बाद शंकर जी पार्वती जी फिर वहाँ से गुज़रे। इस बार मामला उल्टा था, सिर्फ वही बच्चा तैर रहा था और बाकी सब बच्चे बाहर थे।* *पार्वती जी ने पूछा यह क्या है ? शंकर जी ने कहा, ध्यान से देखो।* *देखा तो वह बच्चा दूसरे बच्चों को पानी में डुबो रहा था इसलिए सब बच्चे भाग रहे थे।* *शंकर जी ने जवाब दिया- हर व्यक्ति अपने कर्मो के अनुसार फल भोगता है। भगवान किसी के कर्मो के फेर में नही पड़ते हैं।* *उसने पिछले जन्मो में हाथों द्वारा यही कार्य किया था इसलिए उसके हाथ नहीं थे।* *हाथ देने से पुनः वह दूसरों की हानि करने लगा है।* *प्रकृति नियम के अनुसार चलती है, किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं।* *आत्माएँ जब ऊपर से नीचे आती हैं तब सब अच्छी ही होती हैं,* *कर्मों के अनुसार कोई अपाहिज है तो कोई भिखारी, तो कोई गरीब तो कोई अमीर लेकिन सब परिवर्तनशील हैं।* *अगर महलों में रहकर या पैसे के नशे में आज कोई बुरा काम करता है तो कल उसका भुगतान तो उसको करना ही पड़ेगा।* *कर्म तेरे अच्छे तो किस्मत तेरी दासी* *नियत तेरी अच्छी तो घर मे मथुरा काशी*

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arvind sharma Oct 11, 2021

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