Arjun.no.9879770109 Jul 11, 2022

🌹श्रीराम. जन्म हेतु पार्वती जी, और महादेव का विषेष विस्तृत सवांद|| पार्वती जी ने पूंछा, हे देवो का देव महादेव, आप मु़झे कृपा करके बताईए कि."अखंड अविनाशी श्रीराम के अवतार का कारण क्या है?" महादेव (शिवजी) बोले प्रिय परमात्मा को ईश धरती पर आनेका कारण है, १,जब जब होय इश धरती पर धरम की हानी ||२,बढ्हि,असुर अधम अभिमानी||३,अर्थांत धर्म रक्षा हेतु राम अवतार होता हैं || पार्वती जी ने कहा माफ किजिये, उसके लिए तो, भरतजी मौजुद है, राम के आनेकी क्या जरुरत थी? होत न जो जग जनम भरत को| सफल धरम धूरी धरती धरत को || महादेव जी ने पु:न कहा कि प्रभु असुरों को मारने के लिए आए पार्वती जी बोली ये काम तो लक्ष्मणजी कर शकते थे | जग महूं सखा निशाचर जे ते| लक्ष्मण हनही निमिष मंहुं ते ते|| महादेव जी बोले, परमपिता परमेस्वर साधु संतो के लिए आए, पार्वती जी बोली उनके लिए हनुमानजी है| "साधु सन्त के तुम रखबारे" अंत में महादेव बोले, हे पार्वती तो सुनो धर्म के लिए "भरत आ शकते हैं" निशाचरो के लिए लक्ष्मण हो शकते हैं, साधु संतो के लिए हनुमान जी हो सकते है, लेकिन सिर्फ और सिर्फ भक्तो के लिए ही उस परमपिता परमात्मा का अवतार होता हैं "सो केवल भक्तन हित लागी" अर्थात राम जनम का एक ही मकसद होता हैं, वो, भक्त वत्सल भगवान सिर्फ अपने भक्तो के लिए अवतार लेते है| 🔱🕉️हर हर महादेव🙏 बोलो भक्त वत्सल भगवान राम की जय हो🙏🕉️🕉️🕉️⚛️🔱🌹 🌹ज्ञानवर्षा🌹धर्मभक्ती🌹 धार्मिक बोधकथा🌹 🌹🕉️अर्जुनभाई,खाणदर, देव भुमी द्वारका, गुजरात, मों. न. ९८७९७७०१०९.भारत.

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Arjun.no.9879770109 Jun 29, 2022

🔱🌹देवो का देव महादेव 🌹🔱 🌷जयश्री मर्यादा पुरुषोत्तम राम🙏 %%%%%%🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️%%%%% मूल धर्मतरोविर्वेकजलधे:पूर्णे न्दुमानंददं वैरागायां-बुजभास्करं ह्यघघनध्वांतापहं तापहम्|| मोहांभोधरपूगपाटनविधौ खेसंभव शंकर वंदे ब्ह्मकुलं कलंकशमनं श्रीरामभूपप्रियम् ||१|| *जो धर्मरुपवृक्षका मूल कारण, विवेक अर्थात् प्रकृति पुरुष के ज्ञानरुप समुद्र की वृद्धि के लिये पूर्णचन्द्ररुप,आनंद को देनवाले, वैराग्यरुप कमलको प्रफुल्लित करनेमेंं सूर्यरुप,अतएव पापरुप बडेभारी अमधकारका नाश करनेवाले,अध्यात्मआदि तीन प्रकार के ताप दूर करनेवाले, मोहरुप मेघोंके समुहोंके उडानोमें पवन और ब्हभकुलके पालक और कलंकके नाशक ऐसे जो श्री राजा रामचंन्द्र के प्रिय अथवा राम प्रिय हैं जिन्होंके ऐसे शंकरजी की मैं बंदना करता हूं|| जो सघन आनंदमय मेघकी तुल्य श्याम सुंदर शरीर जिनका और पीकाम्बरको धारण किये, सुंदर ,हाथमें धनुष बाण और कमरमें तरकस शोभ रही हैं और कमल के तुल्य ब़डे सुंदर नेत्र और धारण किया जो जटाजूट तिस करके शोभित और सीतालक्ष्मणसंयुक्त,रास्तेमेमें प्राप्त,ऐसे मनोहर राम को मैं भजता हूं || 🌷धर्मभक्ति🔱धार्मिक भावना🕉️ ज्ञानवर्षा 🙏 👌तुलसीदासकृतरामायणे🙏 राम राम 🙏🕉️ 🔱🔱देवो का देव महादेव की जय हो🔱🔱 🕉️ अर्जुन भाई,देव भुमी द्वारका गुजरात, भारत मो. न. 9१ 9879770109.

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🌿शिव, हर हर महादेव 🙏 🌹शिवजी का मोह और मोहिनी रुप देखने के लिए पार्वती जी को साथ ले, नंदिश्वर में, सवार हो, चले || दो,शिव *बिरंचि- कहँ मोहई, को है बपुरा आन अस जिय जानि भजहिं मुनि, मायापतिभगवान सारांश >>शिवजी को मोह हुआ सो कहते हैं. एक समय देवता और दैत्य मिलकर समुद्र मथन करनेलगे. मथते 2अमृत पैदा हुआ. तब देव बोले कि यह अमृत हम लेंगे और दैत्य बोले कि हम लेंगे, तब भगवान् ने परम सुंदरी मनो मोहिनी नवलबधू होके, दैत्यों को मोहकर, देवताओंको अमृत पिला दिया. यह सुन शंकरजी भी मोहिनीरुप देखनेको पार्वतीजी को साथ ले, नंदिश्वर में सवार हो, चले.निदान,चलते2 नारायण के पास पहुंच, बिनय कर, शंकरजी ने कहा कि हे प्रभु! मुझे अपना मोहिनीरुप दिखावो. यह सुन, नारायण ने कहा कि यह माया है. जब शंकरनेे न माना, तब भगवान ने वही मोहिनी रुप दिखाया कि जिसके देखतेही शंकरजी मोहित हो पीछे दौडे, यह अचरज पार्वतीजी भी देखती थी. निदान, दौड्डते 2उनका वीर्य स्खलीत होगया जिससे चांदी हुई. तब शंकरजी को ग्यान पैदा हुआ कि यह माया हैं. 🌹धर्मभक्ति 🌹ग्यानवर्षा 🌹रामायण 🌹 ⛳तुलसीदासकृतरामायणे 🙏🙏🌹⛳⛳ श्री अर्जुनभाई, देव भुमी द्वारका, गुजरात, भारत ||मो न, 9879770109.

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🌹 श्री शंकरजी 🙏🙏 💐💐💐💐💐 मित्रवरुण की तपस्या "रंभा "नामक अप्सरा का आगमन और "कुंभज "का उत्पन्न होना | ¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤¤ अगस्त्यजीकी होनी -कीसी समयमें अगस्त्यजीने शंकर से कहा कि -मेरे पिता मित्रावरुण तपस्या करते थे इतनेमें "रंभा " नाम एक अप्सरा श्रृंगार किये आकाशमें देख पडी:,तब तो उनका वीर्य स्खलीत हुआ वह उन्होंने कुंभमें रखदिया, उसीसे मैं उत्पन्न हुआ :,इसीसे मेरा नाम "कुंभज है. ऐसे नीचभावसे उत्पन्न होनेपर भी मैं सत्संगके प्रभावसे ऐसी महात्मा ञषियोंकी दशाको प्राप्त हुआ. ऐसा सत्संग होता है. तुम भी कुछ भगवद्रुणानुवाद कहोगे तुम्हारा आत्मा संतुष्ट होगा. ऐसे सुन, व्यासजीने श्रीमद्भगवत बनाया. | 🌹जय श्री वेद व्यासजी, जय शंकर जी 🙏 ⛳धर्मभक्ति 🌹धार्मिक झान 🌹झानवर्षा. ££££££££££££££££££££££££££ अर्जुन भाई, देव भुमि द्वारका, गुजरात. मोन. 9879770109.

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Arjun.no.9879770109 Apr 11, 2022

🌿हर हर महादेव, भोलेनाथ 🙏 🌹⛳शिव स्तुति ⛳💐 :###################: नयावत्उमानाथपादारविन्दं, भजंतीहलोकेपरेवानराणाम् नतावत्सुुखंशांतिसंतापनाशं, प्रसीदप्रसिदप्रभोसर्वभूतधिवासं, 🌹शाराश >>हे शंकर जी! मैं जप योग वा पूजा कुछ नहीं जानता. सब कालमें आपको केवक नमस्कार ही करता हूं, क्यो की मैं वृद्घावस्था, जन्म इत्यादिके दु:खोंके प्रवाहसे जलरहा हूं सो आपकी शरण में प्राप्त हुएं मुझको आप दोषोंसे रक्षण करो || नजानामियोगंजपंनैवपुजांनतोहंसदासर्वदाशंभुतुभियं जराजन्मदु:खौघतातप्यमान,प्रभोपाहिआपन्नमामीशशंभो|| 🌹शाराशं >>इसप्रकार यह रुद्राष्टक ब्रह्मणने शंकरजीकी प्रसन्नता के लिए कहा है कि, सो इसको जो कोई पढते है उनके उपर शिवजी प्रसन्न होते हैं || 🌹घर्म भक्ति 🌹धार्मिक झान 🙏झान वर्षा 🌹 🙏हर हर महादेव 🙏

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Arjun.no.9879770109 Apr 11, 2022

🌿हर हर महादेव, भोलेनाथ 🙏 🌹⛳शिव स्तुति ⛳💐 :###################: नयावत्उमानाथपादारविन्दं, भजंतीहलोकेपरेवानराणाम् नतावत्सुुखंशांतिसंतापनाशं, प्रसीदप्रसिदप्रभोसर्वभूतधिवासं, 🌹शाराश >>हे शंकर जी! मैं जप योग वा पूजा कुछ नहीं जानता. सब कालमें आपको केवक नमस्कार ही करता हूं, क्यो की मैं वृद्घावस्था, जन्म इत्यादिके दु:खोंके प्रवाहसे जलरहा हूं सो आपकी शरण में प्राप्त हुएं मुझको आप दोषोंसे रक्षण करो || नजानामियोगंजपंनैवपुजांनतोहंसदासर्वदाशंभुतुभियं जराजन्मदु:खौघतातप्यमान,प्रभोपाहिआपन्नमामीशशंभो|| 🌹शाराशं >>इसप्रकार यह रुद्राष्टक ब्रह्मणने शंकरजीकी प्रसन्नता के लिए कहा है कि, सो इसको जो कोई पढते है उनके उपर शिवजी प्रसन्न होते हैं || 🌹घर्म भक्ति 🌹धार्मिक झान 🙏झान वर्षा 🌹 🙏हर हर महादेव 🙏

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Arjun.no.9879770109 Apr 11, 2022

🌿हर हर महादेव, भोलेनाथ 🙏 🌹⛳शिव स्तुति ⛳💐 :###################: नयावत्उमानाथपादारविन्दं, भजंतीहलोकेपरेवानराणाम् नतावत्सुुखंशांतिसंतापनाशं, प्रसीदप्रसिदप्रभोसर्वभूतधिवासं, 🌹शाराश >>हे शंकर जी! मैं जप योग वा पूजा कुछ नहीं जानता. सब कालमें आपको केवक नमस्कार ही करता हूं, क्यो की मैं वृद्घावस्था, जन्म इत्यादिके दु:खोंके प्रवाहसे जलरहा हूं सो आपकी शरण में प्राप्त हुएं मुझको आप दोषोंसे रक्षण करो || नजानामियोगंजपंनैवपुजांनतोहंसदासर्वदाशंभुतुभियं जराजन्मदु:खौघतातप्यमान,प्रभोपाहिआपन्नमामीशशंभो|| 🌹शाराशं >>इसप्रकार यह रुद्राष्टक ब्रह्मणने शंकरजीकी प्रसन्नता के लिए कहा है कि, सो इसको जो कोई पढते है उनके उपर शिवजी प्रसन्न होते हैं || 🌹घर्म भक्ति 🌹धार्मिक झान 🙏झान वर्षा 🌹 🙏हर हर महादेव 🙏

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