🙏🙏🌹ॐ श्री गणेशाय नमः 🌹🙏 🙏🌹🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🕉 🙏🌹🙏🌹🌹🌹जय सिया राम 🌹🙏🌹 🌹🙏🙏🙏 🌹🙏🌹जय बजरंगबली हनुमान 🙏 🙏🌹 🌹🙏मंगल कामनाओं के साथ शुभ प्रभात आप सभी भक्ततों को जी 🌷🙏🌷🙏 🌹🙏🌹!! श्रीहरि: !!🙏🌹 भक्तियोग में भगवान को हर समय याद रखना यह विशेष बात है । भगवान कहते हैं जो मेरा नित्य-निरन्तर स्मरण करता है । उसको में सहज में ही प्राप्त हो जाता हूँ ।। 🌹🙏🌹ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏 जब जगत ही मिथ्या है, तब सब मैं और मेरा मिथ्या है, तो कौन, कैसे, क्यों और किसकी कामना करे? मालूम पड़ गया कि रेत ही रेत है, जल है ही नहीं, तब क्यों दौड़ में पड़ें? जान लिया कि सीप है, चाँदी है ही नहीं, तो क्यों माथा पटकना? समस्त दृश्य जगत जिसे स्वप्नवत् हो गया, वह क्योंकर झूठी वस्तु, झूठे सुख के लिए मारा मारा फिरे? जो छोड़ा जाए वो त्याग है, जो छूट जाए वो वैराग्य। केवल तन से छूटा तो त्याग है, मन से छूटा तो वैराग्य। 🙏🙏 वस्तु में सार मालूम पड़े ,पर भोग न करें तो त्याग है, वस्तु असार-व्यर्थ मालूम पड़े तो वैराग्य। रागी और वैरागी में दशा का अंतर है, रागी और त्यागी में दिशा का। 🌹 रागी विचार करता है मैंने इतना जोड़ा, त्यागी विचार करता है मैंने इतना छोड़ा। वस्तु का मूल्य दोनों के मन में है। एक मुंह करके खड़ा है, दूसरा पीठ करके, हैं एक ही सिक्के के दो पहलू। एक वस्तु से सटना चाहता है, दूसरा हटना, एक उसकी ओर दौड़ रहा है, दूसरा उससे दूर दौड़ रहा है, दौड़ दोनों की जारी है। एक कहता है छोड़ेंगे नहीं, दूसरा कहता है छूएँगे नहीं। वैराग्य तो भाव दशा है।🙏🙏 राम जी कहते हैं, वैरागी बाहर से नहीं पहचाना जाएगा, उसे तो भीतर से पहचाना जाएगा। पहचान क्या है? जो तीन गुणों से और सिद्धियों से पार हो गया। जो तटस्थ रहे, जिसे राग न रहे, वस्तु छूट जाए, त्याग किया ऐसा विचार तक न रहे। मन के विचारों विकारों से तद् रूप न हो, उन्हें गुण से उत्पन्न जानता हो, असत्य जानता हो। जो असंग हो, वो वैराग्यवान है।🌹🙏🙏 🌹🙏जय गुरुदेव🌹🙏🙏 🌹🙏जय सच्चिदानंद 🌹🙏 🙏🌹🙏जय सिया राम 🌹🙏🌹 🌹🙏प्रभु श्री राम जी की कृपा से सभी सुखी रहे आनंदित रहें जी 🌷🙏🌷🙏

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Ansouya Mundram 🍁 Nov 30, 2021

🙏🙏ॐ श्री गणेशाय नमः 🌹🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏🙏जय सिया राम 🌹🙏🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏जय बजरंगबली हनुमान🙏🙏 🌹श्री हनुमान चालीसा🌹 🌻चौपाई :-(22)🌻 चौपाई :- सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डरना ।। --जो भी आपकी शरणमें आते है उन सभी को आनन्द एवं सुख प्राप्त होता है और आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता ।तुलसीदासजी यहाँ भगवान की शरणमें जाने के लिए कह रहें। शरणागति एक महान साधन है। किसी की शरण जाओ, किसी का बन जाओ। उसके बिना जीवन में आनंद नहीं है। शरणं यानी गति। भगवान हमारी गति हैं। मेरी रक्षा भगवान ही करते हैं । बचाव भी वही करते हैं तथा सहायता भी वही वही देते हैं । मेरी असली शरण भगवान ही हैं । मानव को अपना आश्रय निश्चित करना चाहिए तथा उसका जीवन गतिमान होना चाहिए ।🙏🙏 🌹🙏राम नाम माला 🙏🌹 राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम ==============================🙏 मंगल कामनाओं सहित जय सिया राम ।। शुभ प्रभात वनदन आप सभी भक्ततों को जी 🌷🙏🌷🙏 🌹🙏 🌹🙏 परमात्मा की समीपता🙏 परमात्मा के जितने ही समीप हम पहुँचते हैं उतनी ही श्रेष्ठताएँ हमारे अन्तःकरण में उपजती तथा बढ़ती हैं। उसी अनुपात से आन्तरिक शान्ति की भी उपलब्धि होती चलती है। हिमालय की ठण्डी हवाएँ उन लोगों को अधिक शीतलता प्रदान करती हैं जो उस क्षेत्र में रहते हैं। इसी प्रकार आग की भट्टियों के समीप काम करने वालों को गर्मी अधिक अनुभव होती है। जीव ज्यों-ज्यों परमात्मा के निकट पहुँचता जाता है, त्यों-त्यों उसे उन विभूतियों का अपने में अनुभव होने लगता है जो उस परम प्रभु में ओत प्रोत हैं। उपासना का अर्थ है—पास बैठना। परमात्मा के पास बैठने से ही ईश्वर उपासना हो सकती है। साधारण वस्तुएँ तथा प्राणी अपनी विशेषताओं की छाप दूसरों पर छोड़ते हैं तो परमात्मा के समीप बैठने वालों पर उन दैवी विशेषताओं का प्रभाव क्यों न पड़ेगा? पुष्प वाटिका में जाते ही फूलों की सुगन्ध से चित्त प्रसन्न होता है। चन्दन के वृक्ष अपने समीपवर्ती वृक्षों को सुगन्धित बनाते हैं। सज्जनों के सत्संग से साधारण व्यक्तियों की मनोभावनाएँ सुधरती हैं, फिर परमात्मा अपनी महत्ता की छाप उन लोगों पर क्यों न छोड़ेगा जो उसकी समीपता के लिए प्रयत्नशील रहते हैं🙏🙏 🙏🌹जय गुरुदेव🙏🌹🌹 🙏🌹🙏🌹🙏🙏🌹 🌹🙏सभी सुखी रहे आनंदित रहें जी 🌷🙏🌷🙏 🌹🙏🌹

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Ansouya Mundram 🍁 Nov 28, 2021

🙏🏻🙏🏻ॐ श्री गणेशाय नमः 🌹🙏 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻जय श्री राधे कृष्ण 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻ॐ घृणी सुर्याय नमः 🌹🙏 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻जय सिया राम 🌹🙏🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🙏🙏🏻मंगलमय शुभ प्रभात आप सभी भक्ततों को जी 🌷🙏🌷🙏 🙏🏻🙏🙏🙏🙏 आशा-निराशा, सुख-दुख, जन्म-मृत्यु जीवन का अभिन्न अंग हैं। ये सब कहने को विपरीत हैं पर क्रम में हैं। स्वांसों के भीतर की शक्ति की पहचान से इन सबका व्यक्ति के मन व आचरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी हर पल शांत रहता है। कोई ज्ञानी हो या अज्ञानी, विचारों का प्रवाह हर एक के भीतर एक जैसा चलता है। 🙏 विचारों के धक्के से कोई नहीं बच सका है। लेकिन, स्वांसों के सत्य ज्ञान की गहरी समझ रखने वाला व्यक्ति विचारों के प्रवाह के प्रति सचेत रहते हुए उनमें दिलचस्पी नहीं लेता है। जो विचारों के प्रवाह के पीछे चलता है वह ज्यादा परेशान और अशांत रहता है। स्वांस का आना-जाना, रात-दिन, सुबह-शाम ये सब कहने को विपरीत हैं पर क्रम में हैं। 🙏 विचार भी बिल्कुल ऐसे ही होते हैं जैसे नाम है तो बदनामी भी है और क्रम अनुसार हमारे मस्तिष्क में बहते रहते हैं। मन इतना ज्यादा चंचल है की यह एक विचार को छोड़ता है, दूसरे को पकड़ता है और दूसरे को छोड़ता है, तीसरे को पकड़ता है। इस तरह इसका विचारों को पकड़ने और छोड़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है। 🙏🏻 🙏🙏🏻जय सिया राम जी, आप सभी इश्वर के सानिध्य में सुखी रहे आनंदित रहें जी 🌷🙏🌷🙏 🙏🏻🙏🏻🙏🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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Ansouya Mundram 🍁 Nov 27, 2021

🙏🙏ॐ श्री गणेशाय नमः 🌹🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏जय श्री राधे कृष्ण 🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏जय सिया राम 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹जय बजरंगबली हनुमान 🙏 🙏🌹श्रीराम जय राम जय जय राम🌹 जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू॥ सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेईं पिय संग भवानी॥🌹।। -आदिकवि श्री वाल्मीकिजी रामनाम के प्रताप को जानते हैं, जो उल्टा नाम ('मरा', 'मरा') जपकर पवित्र हो गए। श्री शिवजी के इस वचन को सुनकर कि एक राम-नाम सहस्र नाम के समान है, पार्वतीजी सदा अपने पति (श्री शिवजी) के साथ राम-नाम का जप करती रहती है।। 🌹श्री हनुमान चालीसा🌹 🌻चौपाई :-(20)🌻 दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते :🙏🙏 संसार में जितने भी कठीन से कठीन काम हैं, वे सभी आपकी कृपा से सहज और सुलभ हो जाते हैं । तुलसीदासजी इस चौपाई्र द्वारा हमें दैवी प्रयत्नवाद समझाते हैं । प्रभु के उपर अटूट विश्वास, पुरुषार्थ और पराक्रम साथ में मिल जाएंगे तो कोई भी काम असंभव नही रह जाएगा, इसीलिए उन्होने लिखा है ‘दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते। हनुमानजी ने प्रभु पर अटूट विश्वास रखते हुए अपने पुरुषार्थ से कठिन से कठिन काम को भी सहजता से कर दीया। आदमी की कमजोरी यही है कि वह ‘अशक्य’ समझकर जीवन-विकास की अधिकतर बातें छोड देता है। तुलसीदासजी यह कहना चाहते हैं कि मनुष्य को प्रयत्न करना चाहिए,परन्तु प्रयत्न से ही काम होगा ऐसा मत समझें । प्रयत्न कर और भगवान को पुकार यह दैवी प्रयत्नवाद है । केवल प्रयत्न से ही सफलता मिलेगी ऐसा नहीं है उसके साथ प्रभु स्पर्श भी आवश्यक है । भगवान की कृपा से ही तुझे सफलता मिलेगी, ‘सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।’ जिसे भगवानपर विश्वास है,जो रोता नही, फरियाद नहीं करता है, वह भक्त है, फरियाद करनेवाला और रोनेवाला भक्त नहीं है । हमें अपना निश्चय पक्का करके भक्ति मार्ग में आगे बढना चाहिए क्योंकि रास्ते में कोई कठिनाई आई तो सहायता करने के लिए हनुमानजी तैयार हैं, इसीलिए तुलसीदासजी ने लिखा है, 'सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेेते’। इसलिए हमें प्रयत्नशील रहना चाहिए तथा भगवानपर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए यही बात तुलसीदासजी इस चौपाई द्वारा हमें समझाते हैं 🌹🙏जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🙏🙏🙏🚩राम नाम माला 🚩🙏🙏 राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम 🙏🌹सभी सुखी रहे आनंदित रहें जी 🌷🙏🌷🙏 आज का दिन शुभ और मंगलमय हो जी 🙏

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