पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं - 1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन 4. नकुल।      5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी । वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं - 1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह 4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम 7. सह            8. विंद         9. अनुविंद 10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण 13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण 16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान 19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र 22. चित्राक्ष     23. चारुचित्र 24. शरासन 25. दुर्मद।       26. दुर्विगाह  27. विवित्सु 28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ 31. नन्द।        32. उपनन्द   33. चित्रबाण 34. चित्रवर्मा    35. सुवर्मा    36. दुर्विमोचन 37. अयोबाहु   38. महाबाहु  39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग  42. भीमबल 43. बालाकि    44. बलवर्धन 45. उग्रायुध 46. सुषेण       47. कुण्डधर  48. महोदर 49. चित्रायुध   50. निषंगी     51. पाशी 52. वृन्दारक   53. दृढ़वर्मा    54. दृढ़क्षत्र 55. सोमकीर्ति  56. अनूदर    57. दढ़संघ 58. जरासंघ   59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक 61. उग्रश्रवा   62. उग्रसेन     63. सेनानी 64. दुष्पराजय        65. अपराजित 66. कुण्डशायी        67. विशालाक्ष 68. दुराधर   69. दृढ़हस्त    70. सुहस्त 71. वातवेग  72. सुवर्च    73. आदित्यकेतु 74. बह्वाशी   75. नागदत्त 76. उग्रशायी 77. कवचि    78. क्रथन। 79. कुण्डी 80. भीमविक्र 81. धनुर्धर  82. वीरबाहु 83. अलोलुप  84. अभय  85. दृढ़कर्मा 86. दृढ़रथाश्रय    87. अनाधृष्य 88. कुण्डभेदी।     89. विरवि 90. चित्रकुण्डल    91. प्रधम 92. अमाप्रमाथि    93. दीर्घरोमा 94. सुवीर्यवान     95. दीर्घबाहु 96. सुजात।         97. कनकध्वज 98. कुण्डाशी        99. विरज 100. युयुत्सु ( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था, जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था ) "श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में- ॐ . किसको किसने सुनाई? उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई। ॐ . कब सुनाई? उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई। ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई? उ.- रविवार के दिन। ॐ. कोनसी तिथि को? उ.- एकादशी ॐ. कहा सुनाई? उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में। ॐ. कितनी देर में सुनाई? उ.- लगभग 45 मिनट में ॐ. क्यू सुनाई? उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए। ॐ. कितने अध्याय है? उ.- कुल 18 अध्याय ॐ. कितने श्लोक है? उ.- 700 श्लोक ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है? उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है। ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगो ने सुना? उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था? उ.- भगवान सूर्यदेव को ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है? उ.- उपनिषदों में ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....? उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है। ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है? उ.- गीतोपनिषद ॐ. गीता का सार क्या है? उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है? उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574 अर्जुन ने- 85 धृतराष्ट्र ने- 1 संजय ने- 40. अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद अधूरा ज्ञान खतरना होता है। 33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ। कोटि = प्रकार। देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है, कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता। हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं... कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :- 12 प्रकार हैँ आदित्य , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...! 8 प्रकार हे :- वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष। 11 प्रकार है :- रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली। एवँ दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार। कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं। । 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 १ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है This is very good information for all of us ... जय श्रीकृष्ण ... अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाएँ ...... अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने. ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये. खासकर अपने बच्चो को बताए क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा... 📜😇  दो पक्ष- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष ! 📜😇  तीन ऋण - देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण ! 📜😇   चार युग - सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग , कलियुग ! 📜😇  चार धाम - द्वारिका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ पुरी , रामेश्वरम धाम ! 📜😇   चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ) ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , शृंगेरीपीठ ! 📜😇 चार वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद ! 📜😇  चार आश्रम - ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास ! 📜😇 चार अंतःकरण - मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार ! 📜😇  पञ्च गव्य - गाय का घी , दूध , दही , गोमूत्र , गोबर ! 📜😇  पञ्च देव - गणेश , विष्णु , शिव , देवी , सूर्य ! 📜😇 पंच तत्त्व - पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश ! 📜😇  छह दर्शन - वैशेषिक , न्याय , सांख्य , योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा ! 📜😇  सप्त ऋषि - विश्वामित्र , जमदाग्नि , भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप! 📜😇  सप्त पुरी - अयोध्या पुरी , मथुरा पुरी , माया पुरी ( हरिद्वार ) , काशी , कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पुरी ! 📜😊  आठ योग - यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समािध ! 📜😇 आठ लक्ष्मी - आग्घ , विद्या , सौभाग्य , अमृत , काम , सत्य , भोग ,एवं योग लक्ष्मी ! 📜😇 नव दुर्गा -- शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी , चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी , कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री ! 📜😇   दस दिशाएं - पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण , ईशान , नैऋत्य , वायव्य , अग्नि आकाश एवं पाताल ! 📜😇  मुख्य ११ अवतार - मत्स्य , कच्छप , वराह , नरसिंह , वामन , परशुराम , श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि ! 📜😇 बारह मास - चैत्र , वैशाख , ज्येष्ठ , अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन ! 📜😇  बारह राशी - मेष , वृषभ , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुंभ , मीन! 📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग - सोमनाथ , मल्लिकार्जुन , महाकाल , ओमकारेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम , विश्वनाथ , त्र्यंबकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर , भीमाशंकर , नागेश्वर ! 📜😇 पंद्रह तिथियाँ - प्रतिपदा , द्वितीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावास्या ! 📜😇 स्मृतियां - मनु , विष्णु , अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत , कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य , लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ ! ******************* *** इस पोस्ट को अधिकाधिक शेयर करें जिससे सबको हमारी संस्कृति का ज्ञान हो!

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*हिन्दू कौन है , क्या आप जानते है, नहीं जानते हैं तो जी मैने पढा़ उसे पढे़ और अगर, कोई त्रुटि हो तो अवगत कराये।* *"हिन्दू" शब्द की खोज -* *"हीनं दुष्यति इति हिन्दूः से हुई है।”* *अर्थात: जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं ।* *' हिन्दू ' शब्द, करोड़ों वर्ष प्राचीन, संस्कृत शब्द से है !* यदि संस्कृत के इस शब्द का सन्धि विछेदन करें तो पायेंगे .... *हीन + दू = हीन भावना + से दूर* *अर्थात : जो हीन भावना या दुर्भावना से दूर रहे , मुक्त रहे , वो हिन्दू है !* हमें बार - बार, सदा झूठ ही बतलाया जाता है कि *हिन्दू* शब्द मुगलों ने हमें दिया , जो " सिंधु " से " *हिन्दू* " हुआ l *हिन्दू* को गुमराह किया जा रहा है *हिन्दू शब्द की वेद से ही उत्पत्ति है !* *जानिए , कहाँ से आया हिन्दू शब्द और कैसे हुई इसकी उत्पत्ति ?* कुछ लोग यह कहते हैं कि *हिन्दू शब्द सिंधु से बना है औऱ यह फारसी शब्द है । परंतु ऐसा कुछ नहीं है ! ये केवल झुठ फ़ैलाया जाता है।* हमारे " वेदों " और " पुराणों " में *हिन्दू* शब्द का उल्लेख मिलता है । आज हम आपको बता रहे हैं कि हमें हिन्दू शब्द कहाँ से मिला है ! "ऋग्वेद" के " ब्रहस्पति अग्यम " में *हिन्दू* शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया हैं :- “ *हिमालयं समारभ्य* *यावद् इन्दुसरोवरं ।* *तं देवनिर्मितं देशं* *हिन्दुस्थानं प्रचक्षते ।"* *अर्थात : हिमालय से इंदु सरोवर तक , देव निर्मित देश को हिंदुस्तान कहते हैं !* *केवल " वेद " ही नहीं, बल्कि " शैव " ग्रन्थ में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया हैं :-* *" हीनं च दूष्यतेव् हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये ।”* *अर्थात :- जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं !* इससे मिलता जुलता लगभग यही श्लोक " कल्पद्रुम " में भी दोहराया गया है : *" हीनं दुष्यति इति हिन्दूः ।”* अर्थात : जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे *हिन्दू* कहते हैं । " पारिजात हरण " में *हिन्दू* को कुछ इस प्रकार कहा गया है :- ” *हिनस्ति तपसा पापां* *दैहिकां दुष्टं ।* *हेतिभिः श्त्रुवर्गं च* *स हिन्दुर्भिधियते ।”* अर्थात :- जो अपने तप से शत्रुओं का , दुष्टों का , और पाप का नाश कर देता है , वही *हिन्दू है !* " माधव दिग्विजय " में भी *हिन्दू* शब्द को कुछ इस प्रकार उल्लेखित किया गया है :- *“ ओंकारमन्त्रमूलाढ्य* *पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य: ।* *गौभक्तो भारत:* *गरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः ।"* अर्थात : वो जो " ओमकार " को ईश्वरीय धुन माने , कर्मों पर विश्वास करे , गौ-पालक रहे , तथा बुराइयों को दूर रखे, वो *हिन्दू है !* केवल इतना ही नहीं , हमारे *"ऋगवेद" (8:2:41) में हिन्दू* नाम के बहुत ही पराक्रमी और दानी राजा का वर्णन मिलता है , जिन्होंने 46,000 गौमाता दान में दी थी ! और "ऋग्वेद मंडल" में भी उनका वर्णन मिलता है l बुराइयों को दूर करने के लिए सतत प्रयासरत रहने वाले , सनातन धर्म के पोषक व पालन करने वाले हिन्दू हैं । " *हिनस्तु दुरिताम* जनमानस को अवशय अवगत कराएं। गर्व से कहो हम हिन्दू हैं।

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*स्विट्जरलैंड* नाम तो आपने सुना ही होगा 'स्विट्जरलैंड'। ऐसा देश जहाँ दुनियां का हर शादीशुदा जोड़ा अपना हनीमून मनाने के ख्वाब देखता हैं। बर्फीली वादियों से ढका ये देश सुंदरता की अद्भुत कृति है। हरियाली हो या बर्फ, आंखे जिधर भी जाये पलक झपकना भूल जाये। दुनिया का सबसे सम्पन्न देश हैं स्विट्जरलैंड! हर प्रकार से सम्पन्न इस देश की एक रोचक कहानी बताता हूँ। आज से लगभग 50 साल पहले स्विट्जरलैंड में एक प्राइवेट बैंक की स्थापना हुई जिसका नाम था 'स्विसबैंक'। इस बैंक के नियम दुनिया की अन्य बैंको से भिन्न थे। ये स्विसबैंक अपने ग्राहकों से उसके पैसे के रखरखाव और गोपनीयता के बदले उल्टा ग्राहक से पैसे वसूलती थी। साथ ही गोपनीयता की गारंटी। न ग्राहक से पूछना की पैसा कहां से आया ? न कोई सवाल न बाध्यता। सालभर में इस बैंक की ख्याति विश्वभर में फैल चुकी थी। चोर, बेईमान नेता, माफिया, तस्कर और बड़े बिजनेसमेन इन सबकी पहली पसंद बन चुकी थी स्विस बैंक। बैंक का एक ही नियम था। रिचार्ज कार्ड की तरह एक नम्बर खाता धारक को दिया जाता, साथ ही एक पासवर्ड दिया जाता बस। जिसके पास वह नम्बर होगा बैंक उसी को जानता था। न डिटेल, न आगे पीछे की पूछताछ होती। लेकिन *बैंक का एक नियम था कि अगर सात साल तक कोई ट्रांजेक्शन नही हुआ या खाते को सात साल तक नही छेड़ा गया तो बैंक खाता सीज करके रकम पर अधिकार जमा कर लेगा।* *सात वर्ष तक ट्रांजेक्शन न होने की सूरत में रकम बैंक की।* अब रोज दुनियाभर में न जाने कितने माफिया मारे जाते हैं। नेता पकड़े जाते हैं। कितने तस्कर पकड़े या मारे जाते है, कितनो को उम्रकैद होती है। ऐसी स्थिति में न जाने कितने ऐसे खाते थे जो बैंक में सीज हो चुके थे। सन् 2000 की नई सदी के अवसर पर बैंक ने ऐसे खातों को खोला तो उनमें मिला कालाधन पूरी दुनिया के 40% काले धन के बराबर था। *पूरी दुनियां का लगभग आधा कालाधन।* ये रकम हमारी कल्पना से बाहर हैं। शायद *बैंक भी नही समझ पा रहा था कि क्या किया जाए इस रकम का।* क्या करें, क्या करे। ये सोचते सोचते बैंक ने एक घोषणा की और *पूरे स्विट्जरलैंड के नागरिकों से राय मांगी की इस रकम का क्या करे।* साथ ही बैंक ने कहा कि *देश के नागरिक चाहे तो ये रकम बैंक उन्हें बांट सकता हैं* और प्रत्येक नागरिक को एक करोड़ की रकम मिल जाएगी। सरकार की तरफ से 15 दिन चले सर्वे में 99.2% लोगों की राय थी कि इस रकम को देश की सुंदरता बढ़ाने में और विदेशी पर्यटकों की सुख सुविधाओं और विकास में खर्च किया जाए। सर्वे के नतीजे हम भारतीयों के लिये चौंकाने वाले है लेकिन राष्ट्रभक्त स्विटरजरलैंड की जनता के लिये ये साधारण बात थी। *उन्होंने हराम के पैसों को नकार दिया। मुफ्त नही चाहिये ये स्पष्ट सर्वे हुआ।* चौंकाने वाला काम दूसरे दिन हुआ। 25 जनवरी 2000 को स्विट्जरलैंड की जनता बैनर लेकर सरकारी सर्वे चैनल के बाहर खड़ी थी। उनका कहना था जो 0.8% लोग हैं मुफ्त की खाने वाले, उनके नाम सार्वजनिक करो। ये समाज पर और स्विट्जरलैंड पर कलंक है। काफी मशक्कत के बाद सरकार ने मुफ्त की मांग करने वालो को दंडित करने का आश्वासन दिया, तब जनता शांत हुई। और हमारे भारत में सब कुछ मुफ्त चाहिए। इसके इलावा टैक्स चोरी, बिजली चोरी, कामचोरी,,,,,, मेरा भारत महान,,,,। 🤔🤔🤔🤔🤔 *VVV IMPORTANT...* *क्या भारत का सिस्टम* *आम जनता को धोखा देता है ?* आप खुद देखिये.... 1- नेता चाहे तो दो सीट से एक साथ चुनाव लड़ सकता है ! लेकिन.... आप दो जगहों पर वोट नहीं डाल सकते, 2-आप जेल मे बंद हो तो वोट नहीं डाल सकते..लेकिन नेता जेल मे रहते हुए चुनाव लड सकता है. 3-आप कभी जेल गये थे, तो अब आपको जिंदगी भर कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, लेकिन…… नेता चाहे जितनी बार भी हत्या या बलात्कार के मामले म जेल गया हो, फिर भी वो प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जो चाहे बन सकता है, 4-बैंक में मामूली नौकरी पाने के लिये आपका ग्रेजुएट होना जरूरी है.. लेकिन, नेता अंगूठा छाप हो तो भी भारत का फायनेन्स मिनिस्टर बन सकता है। 5-आपको सेना में एक मामूली सिपाही की नौकरी पाने के लिये डिग्री के साथ 10 किलोमीटर दौड़ कर भी दिखाना होगा, लेकिन.... नेता यदि अनपढ़-गंवार और लूला-लंगड़ा है तो भी वह आर्मी, नेवी और ऐयर फोर्स का चीफ यानि डिफेन्स मिनिस्टर बन सकता है और जिसके पूरे खानदान में आज तक कोई स्कूल नहीं गया.. वो नेता देश का शिक्षामंत्री बन सकता है और जिस नेता पर हजारों केस चल रहे हों.. वो नेता पुलिस डिपार्टमेंट का चीफ यानि कि गृह मंत्री बन सकता है. यदि आपको लगता है की इस सिस्टम को बदल देना चाहिये.. नेता और जनता, दोनो के लिये एक ही कानून होना चाहिये.. तो इस संदेश को फार्वड करके देश में जागरुकता लाने में अपना सहयोग दें.. अगर फोरवर्ड नहीं किया तो आप किसी भी नेता को दोषी मत कहना ...., नहीं किया तो नुकसान का जिम्मेदार आप खुद होगें सरकारी कर्मचारी 30 से 35 वर्ष की संतोष जनक सेवा करने के उपरांत भी पेशन का हकदार नहीं ? जब कि मात्र 5 वर्ष के लिए विधायक / सांसद को पेंशन यह कहाँ का न्याय है...? 🏤 🎓 श्री D. K. Srivastava मुख्य सरकारी वकील मुंबई उच्च न्यायालय. मुंबई..... इस मुहिम को आगे बढाए DON'T DELETE, WE ACTUALLY NEED TO CHANGE THIS SYSTEM.

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*एक जमाना था..* खुद ही स्कूल जाना पड़ता था... क्योंकि ऑटो- बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा... ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे... उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था. 🤪 पास/फेल यही हमको मालूम था... *%age* से हमारा कभी भी संबंध ही नहीं था... 😛 ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख समझा जा सकता था... 🤣🤣🤣 "किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं" ...ऐसी हमारी धारणाएं थी... ☺️☺️ कपड़े की थैली में...बस्तों में....किताब कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी.. .. 😁 हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले... किताब कापी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम एक वार्षिक उत्सव की तरह होता था..... 🤗 साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी.. क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम... 🤪 हमारे माताजी पिताजी को हमारी पढ़ाई बोझ है.. ऐसा कभी लगा ही नहीं...! 😞 किसी एक दोस्त को साइकिल के अगले डंडे पर और दूसरे दोस्त को पीछे कैरियर पर बिठाकर गली-गली में घूमना हमारी दिनचर्या थी....इस तरह हम ना जाने कितना घूमे होंगे....!!😊 🥸😎 स्कूल में मास्टर जी के हाथ से मार खाना, मुर्गा बन कर खड़े रहना, और कान लाल होने तक मरोड़े जाते वक्त हमारा ईगो कभी आड़े नहीं आता था.... सही बोले तो ईगो क्या होता है यह हमें मालूम ही नहीं था... 🧐😝 घर और स्कूल में दोनो जगह मार खाना भी हमारे दैनिक जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी....! 😁 हमने पॉकेट मनी कभी भी मांगी ही नहीं और पिताजी ने कभी दी भी नहीं.....इसलिए हमारी आवश्यकता भी छोटी छोटी सी ही थीं....महीने में कभी-कभार दो चार बार लैला की उंगलियां या संतरे वाली टॉफी खा लिया तो बहुत होता था......उसमें भी हम बहुत खुश हो लेते थे...! 😲 छोटी मोटी जरूरतें तो घर में ही कोई भी पूरी कर देता था क्योंकि परिवार संयुक्त होते थे ..! 🥱 दिवाली में लाल पटाखों की लड़ी को छुट्टा करके एक एक पटाखा फोड़ते रहने में हमको कभी अपमान नहीं लगा... 😁 हम....हमारे मां बाप को कभी बता ही नहीं पाए कि हम आपको कितना प्रेम करते हैं.. क्योंकि हमको *आई लव यू* कहना ही नहीं आता था... 😀 स्कूल के बाहर उस हाफ पेंट मैं रहकर गोली, टाॅफी बेचने वाले की दुकान पर दोस्तों द्वारा खिलाए पिलाए जाने की कृपा हमें आज भी याद है...!! 😜 बिना चप्पल जूते के और किसी भी गेंद के साथ... लकड़ी के पटियों से.. कहीं पर भी..नंगे पैर दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने में क्या सुख था वह हमको ही पता है...!😊 *वह दोस्त कहां खो गए ?* *वह बेर वाली कहां खो गई....?* *वह चूरन बेचने वाली कहां खो गई...??* *पता नहीं.....*🤔 😌 आज हम दुनिया के असंख्य धक्के और टाॅन्ट खाते हुए....और संघर्ष करती हुई दुनिया का एक हिस्सा है....किसी दोस्त को जो चाहिए था.. वह मिला और किसी को कुछ मिला कि नहीं..क्या पता..?? 😇 हम दुनिया में कहीं भी रहे.. पर यह सत्य है कि हम वास्तविक दुनिया में बड़े हुए हैं हमारा वास्तविकता से सामना वास्तव में ही हुआ है...!! 😀 हम अपने नसीब को दोष नहीं देते....जो जी रहे हैं वह आनंद से जी रहे हैं और यही सोचते हैं....और यही सोच हमें जीने में मदद कर रही है.. जो जीवन हमने जिया...उसकी वर्तमान से तुलना हो ही नहीं सकती...! 😌 *हम अच्छे थे या बुरे थे ... नहीं मालूम , पर हमारा भी एक जमाना था*

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*ज्ञान वर्धक कहानी* *हमारे जीवन में हमारा सच्चा मार्गदर्शक कौन है, जिसकी सहायता से हम हर पल सही निर्णय ले सकते हैं?*_ *सलाह के तीन टुकड़े* आदमी अपने भीतर के रडार, जो कि उसका दिल है, के माध्यम से चीजों को चुनता या अपने निर्णय लेता है। एक बार एक युवा नवविवाहित दंपत्ति दूर एक छोटे से खेत में रहते थे। वे गरीब थे और उन दोनों के पास अपनी आजीविका कमाने का कोई साधन नहीं था। एक दिन उस नवविवाहित पुरुष ने उस खेत को छोड़ कर कहीं दूर जाकर नौकरी खोजने की सोची। उसने अपनी पत्नी से कहा- "प्रिय, मैं पैसे कमाने के लिए कहीं दूर जाना चाहता हूँ और मैं वादा करता हूँ कि वहाँ से बहुत सारा पैसा कमा के लौटूंगा, ताकि हम उन सभी सुख-सुविधाओं के साथ रह सकें, जिनके हम हकदार हैं। मुझे नहीं पता कि मैं कब तक आऊँगा, लेकिन कृपया मेरी प्रतीक्षा करना और मेरे प्रति वफादार रहना और मैं भी आपके प्रति वफादार रहूँगा।" अब, वह युवक काम की तलाश में दूर-दूर के कई गाँवों और शहरों में जाता है। तब एक गाँव में उसे एक सेठ मिलता है जो काम के लिए एक मेहनती व्यक्ति की तलाश में था। वह युवा उस सेठ के साथ काम करने की इच्छा ज़ाहिर करता है और वह सेठ भी आसानी से उसे अपने पास काम करने के लिए रख लेता है। हालाँकि, अपना काम शुरू करने से पहले, वह युवा अपनी कुछ शर्तें रखता है, "जब तक मैं चाहूँगा, तभी तक मैं काम करूँगा और जब भी मुझे लगेगा कि मुझे घर जाना है, तो कृपया मुझे मेरे कर्तव्यों से मुक्त कर दें। मैं अपने काम के समय के दौरान कोई वेतन नहीं लूँगा। जब तक मैं आपके पास काम करता हूँ, मेरे वेतन को आप अपने पास सम्भाल कर रखें। जिस दिन मैं जाऊँगा, कृपया उस दिन आप मेरे सारे पैसे मुझे सौंप देना।” सेठ उस युवक की सभी शर्तों से सहमत हो गया। युवक ने लगन से काम करना शुरू कर दिया। बीस वर्षों के लंबे समय के बाद, एक दिन वही युवक अपने सेठ के पास आया और कहा, “श्रीमान, मैं अब यहाँ से जाना चाहता हूँ। मुझे अब घर लौटना है। क्या मुझे मेरी मजदूरी मिल सकती है?" सेठ ने उत्तर दिया, "बिल्कुल, लेकिन तुम्हारे जाने से पहले मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ। मैं या तो तुम्हें जितने साल तुमने काम किया है, उतने सालों की मजदूरी दे कर तुम्हें भेज सकता हूँ, या फिर तुम्हें तुम्हारे जीवन के लिए तीन सलाह दे कर बिना पैसे के तुम्हें भेज सकता हूँ। इनमें से तुम्हें क्या चाहिए ये चुनाव तुम्हें करना है।" उस व्यक्ति ने सोचने के लिए कुछ समय मांगा। उसने दो दिनों तक बहुत विचार किया और अपने वेतन की जगह तीन सलाहों को चुना। सेठ ने उसे याद दिलाया कि अगर वह सलाह मांगेगा तो उसे कोई पैसा नहीं मिलेगा। आदमी ने जवाब दिया- “मैंने आपके साथ बहुत समय तक काम किया है। आपके साथ काम करते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा है और नई-नई चीजों में कौशलता हासिल की है। यह अनुभव मुझे जीवन में आगे ले जाएगा और इसलिए मुझे केवल तीन सलाह चाहिए।" तब सेठ ने उसे तीन सलाहें दीं : 1. अपने जीवन में कभी भी अनुचित रास्ता या शोर्ट्कट न अपनाएँ। ऐसे रास्ते आपकी जान भी ले सकते हैं। 2. कभी भी किसी वस्तु के लिए ज्यादा व्याकुल या अधीर न हों, क्योंकि बुरी चीजों के प्रति ऐसी अधीरता घातक हो सकती है। 3. क्रोध या दर्द के क्षणों में कभी भी निर्णय न लें क्योंकि यह आपको ग़लत निर्णय की ओर ले जा सकता है और फिर अपनी गलती पर पश्चाताप करना पड़ सकता है।" इसके बाद मालिक ने उसे तीन रोटियाँ थमा दीं और कहा- “तुम्हारे पास तीन रोटियाँ हैं। तुम अपनी यात्रा के दौरान इनमें से दो का सेवन कर सकते हो और आखरी रोटी को घर पहुँचने तक अपने पास रखना और अपनी पत्नी के साथ साझा कर के खाना।" उस व्यक्ति ने अपने सेठ को धन्यवाद दिया और बहुत सालों के बाद अपनी पत्नी से मिलने के लिए अपनी यात्रा शुरू की। अपनी यात्रा के पहले दिन, वह एक बूढ़े व्यक्ति से मिलता है जो उसका अभिवादन करता है और पूछता है, "तुम कहाँ जा रहे हो?" जिस पर वह व्यक्ति जवाब देता है, "मैं जहाँ जा रहा हूँ वहाँ पहुँचने के लिए 20 दिनों तक चलने की जरूरत है।" इसके लिए बूढ़ा व्यक्ति उस व्यक्ति को एक छोटा रास्ता अपनाने की सलाह देता है और कहता है, "ये रास्ता अपनाने से तुम अपनी मंजिल तक सिर्फ पाँच दिनों में ही पहुँच जाओगे।" वह व्यक्ति जल्द से जल्द अपने घर पहुँचना चाहता था इसलिए वह छोटा रास्ता अपनाने के बारे में सोचने लगा, लेकिन तभी उसे अपने सेठ की पहली सलाह याद आ गई। उसने सेठ की सलाह का पालन करते हुए लंबे रास्ते पर चल कर घर पहुँचना चुना। कुछ दिनों बाद उसे पता चला कि लुटेरे लोगों को छोटा रास्ता अपनाने के लिए बरगलाया करते हैं और जब यात्री छोटा रास्ता अपना कर आगे बढ़ता है तो उन पर घात लगाकर हमला करते हैं और उनका सारा सामान लूट लेते हैं। उस व्यक्ति ने सोचा कि सेठ की पहली सलाह ने उसे एक विपत्ति से बचा लिया। कुछ और दिन इसी तरह से यात्रा करने के बाद, वह सड़क के किनारे एक सराय में रुक गया और अंधेरा होने के कारण उसने पूरी रात वहीं आराम करने के बारे में सोचा। वह हाथ पैर धोकर बिस्तर पर सोने के लिए चला गया। लेकिन कुछ ही समय के बाद वह एक भयानक चीख सुन कर जाग गया। वह दरवाजा खोल कर बाहर जाने ही वाला था, तभी उसे सेठ की सलाह का दूसरा भाग याद आया और वह वापस अपने बिस्तर पर जाकर सो गया। अगले दिन सुबह उसने सराय के मालिक को इस घटना के बारे में बताया तो उसने बहुत ही चौंकाने वाला जवाब दिया। सराय के मालिक ने कहा, "आप भाग्यशाली हैं कि आप ने अन्य मेहमानों की तरह उत्सुकता में आकर दरवाज़ा नहीं खोला। और इसलिए आप जीवित भी हैं। हमने सुना है कि रात के समय एक राक्षस राहगीरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए चिल्लाता है और जब जिज्ञासु मेहमान बाहर आकर देखते हैं तो वह उन्हें खींच कर, जंगल में ले जा कर मार डालता है।" उस व्यक्ति ने भगवान को धन्यवाद दिया और सोचा कि सेठ की दूसरी सलाह के कारण आज मैं जिंदा हूँ। उस व्यक्ति ने अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए फिर से अपनी यात्रा प्रारंभ कर दी। कुछ दिनों तक चलने के बाद आखिरकार अब वह अपने घर के बहुत करीब पहुँच गया था। जैसे ही वह अपने घर के पास आया उसने खिड़की से देखा कि उसकी पत्नी अकेली नहीं थी और उसके साथ एक आदमी था जिसके बालों को वह धीरे से सहला रही थी। उस व्यक्ति का हृदय क्रोध और बदले की भावना से भर गया और उस के मन में उन दोनों को मारने के विचार आने लगे। लेकिन तभी उसको अपने सेठ की दी हुई तीसरी और अंतिम सलाह याद आती है और वह एक गहरी सांस के साथ खुद को सांत्वना देता है, और सोचता है कि वह इस घटना पर शान्ति से बैठ कर विचार करेगा। वह उस रात पास की झाड़ी में ही सो जाता है। सुबह होने पर जब वह शांत मन से उस घटना पर विचार करता, तो इस निर्णय पर पहुँचता है कि वह अपनी पत्नी और उसके प्रेमी को नहीं मारेगा। वह वापस अपने सेठ के पास चला जाएगा और जीवन भर वहीं काम करेगा। उसने सोचा कि जाने से पहले उसे एक बार अपनी पत्नी से मिलकर उसे बताना चाहिए कि इतने सालों में वह उसके प्रति कितना वफादार रहा है। उस व्यक्ति ने दरवाज़े पर पहुँच कर दस्तक दी। जब पत्नी ने दरवाज़ा खोला तो अपने पति को सामने देखकर बहुत उत्साहित हो गई और खुशी से उसकी आँखों से आंसु बहने लगे। जब उसकी पत्नी उसे खुशी से गले लगाती है तो वह व्यक्ति उसे दूर धकेल देता है और उस व्यक्ति की आँखें आसुओं से भर जाती हैं। वह पूछता है, "वह आदमी कौन है जिसके साथ तुम कल रात थीं ?" वह जवाब देती है- "वह आपका बेटा है। जब आप चले गए थे, तब मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूँ। अब आपका बेटा बीस साल का हो गया है।" यह सुनकर वह व्यक्ति रोने लगा और उसने अपने सेठ को सही सलाह देने के लिए मन ही मन अपने हृदय से धन्यवाद दिया। फिर उस व्यक्ति ने अपने बेटे को गले लगा लिया। उन सब ने बैठ कर बहुत सारी बातें कीं, अपने अनुभवों को एक दूसरे के साथ साझा किया। अंत में उस व्यक्ति ने अपने सेठ की तीन सलाह के बारे में भी बताया। फिर उसने आखरी रोटी को मेज पर रख दिया और कहा, "यह सब मैंने पिछले बीस वर्षों में कमाया है।" फिर रात के खाने के समय सबने मिलकर ईश्वर से प्रार्थना की और तीनों मिलकर उस आखिरी रोटी को खाने लगे। पत्नी ने जैसे ही रोटी का आखरी टुकड़ा तोड़ा तो पाया कि उसमें सोने के सिक्के थे जो उसकी बीस साल की कमाई से कहीं अधिक थे। यह सब उस व्यक्ति की सच्चाई, ईश्वर में विश्वास, व कड़ी मेहनत का ही फल था। दिल की सुनें और इसे अपना आंतरिक मार्गदर्शक बनने दें। दिल हमेशा सच बताएगा और सही मार्गदर्शन करेगा। ♾️ *" हृदय एक पवित्र स्थान है, और यह हमें विशाल आंतरिक ब्रह्मांड का द्वार, आश्चर्य और ज्ञान का रास्ता दिखाता है। हृदय के ज्ञान के माध्यम से, हम सरलता और आनंद से जी सकते हैं।"* Heartfulness Meditation 💌

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