🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉 🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻बुधवार, २२ सितंबर २०२१🌻 सूर्योदय: 🌄 ०६:११ सूर्यास्त: 🌅 ०६:१३ चन्द्रोदय: 🌝 १९:१४ चन्द्रास्त: 🌜०७:०४ अयन 🌕 दक्षिणायने (दक्षिणगोलीय ऋतु: ❄️ शरद शक सम्वत: 👉 १९४३ (प्लव) विक्रम सम्वत: 👉 २०७८ (राक्षस) मास 👉 आश्विन पक्ष 👉 कृष्ण तिथि 👉 द्वितीया (पूर्ण रात्रि) नक्षत्र 👉 रेवती (पूर्ण रात्रि) योग 👉 वृद्धि (१३:५५ तक) प्रथम करण 👉 तैतिल (१८:१८ तक) द्वितीय करण 👉 गर (पूर्ण रात्रि) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 कन्या चंद्र 🌟 मीन मंगल 🌟 कन्या (अस्त, पश्चिम, मार्गी) बुध 🌟 तुला (अस्त, पूर्व, मार्गी) गुरु 🌟 कुम्भ (उदय, पूर्व, वक्री) शुक्र 🌟 तुला (उदय, पश्चिम, मार्गी) शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, वक्री) राहु 🌟 वृष केतु 🌟 वृश्चिक 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ 〰〰〰〰〰〰〰 अभिजित मुहूर्त 👉 ❌❌❌ अमृत काल 👉 २८:१० से २९:५३ विजय मुहूर्त 👉 १४:११ से १४:५९ गोधूलि मुहूर्त 👉 १८:०१ से १८:२५ निशिता मुहूर्त 👉 २३:४६ से २४:३३ राहुकाल 👉 १२:०९ से १३:४० राहुवास 👉 दक्षिण-पश्चिम यमगण्ड 👉 ०७:३६ से ०९:०७ होमाहुति 👉 मंगल दिशाशूल 👉 उत्तर अग्निवास 👉 पाताल चन्द्रवास 👉 उत्तर शिववास 👉 सभा में 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ☄चौघड़िया विचार☄ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - लाभ २ - अमृत ३ - काल ४ - शुभ ५ - रोग ६ - उद्वेग ७ - चर ८ - लाभ ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - उद्वेग २ - शुभ ३ - अमृत ४ - चर ५ - रोग ६ - काल ७ - लाभ ८ - उद्वेग नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभ यात्रा दिशा 🚌🚈🚗⛵🛫 उत्तर-पश्चिम (गुड़ अथवा दूध का सेवन कर यात्रा करें) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️〰️〰️〰️ तिथि विशेष 🗓📆🗓📆 〰️〰️〰️〰️ रविदक्षिण गोलीय गति आरम्भ, द्वितीया तिथि का श्राद्ध आदि। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ आज ३०:११ तक जन्मे शिशुओ का नाम रेवती नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (दे, दो, च, ची) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 उदय-लग्न मुहूर्त कन्या - २९:४५ से ०८:०३ तुला - ०८:०३ से १०:२४ वृश्चिक - १०:२४ से १२:४३ धनु - १२:४३ से १४:४७ मकर - १४:४७ से १६:२८ कुम्भ - १६:२८ से १७:५४ मीन - १७:५४ से १९:१७ मेष - १९:१७ से २०:५१ वृषभ - २०:५१ से २२:४६ मिथुन - २२:४६ से २५:०१ कर्क - २५:०१ से २७:२२ सिंह - २७:२२ से २९:४१ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 पञ्चक रहित मुहूर्त शुभ मुहूर्त - ०६:०५ से ०८:०३ मृत्यु पञ्चक - ०८:०३ से १०:२४ अग्नि पञ्चक - १०:२४ से १२:४३ शुभ मुहूर्त - १२:४३ से १४:४७ रज पञ्चक - १४:४७ से १६:२८ शुभ मुहूर्त - १६:२८ से १७:५४ चोर पञ्चक - १७:५४ से १९:१७ रज पञ्चक - १९:१७ से २०:५१ शुभ मुहूर्त - २०:५१ से २२:४६ चोर पञ्चक - २२:४६ से २५:०१ शुभ मुहूर्त - २५:०१ से २७:२२ रोग पञ्चक - २७:२२ से २९:४१ शुभ मुहूर्त - २९:४१ से ३०:०६ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज का राशिफल 🐐🐂💏💮🐅👩 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आपका आज का दिन मध्यम लाभदायक रहेगा। परिश्रम की अधिकता रहने से थकान अनुभव करेंगे। सरकारी कार्यो में भाग-दौड़ के बाद सफलता मिल ही जायेगी। व्यापारिक गतिविधियों की व्यस्तता के चलते परिवार की अनदेखी करनी पड़ेगी। कार्यो में थोड़े परिश्रम से अधिक सफलता पा लेंगे। आत्मविश्वाश कल की तुलना में बढ़ा हुआ रहेगा। परंतु आपको कोई ना कोई कमी भी अनुभव होगी। बड़बोले पन के कारण मुसीबत में फस सकते है सतर्क रहें। मध्यान के बाद स्थिति में सुधार आने से आर्थिक आयोजन कर पाएंगे धन का आगमन होने से थकान भूल जाएंगे। मित्र परिजनों के साथ सामाजिक अथवा धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होने के अवसर टालेंगे। संतानों पर ध्यान दें। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज का दिन आपके लिये शुभ फलदायी रहेगा आज आपको घर एवं बाहर अन्य दिनों की तुलना में कम परिश्रम करना पड़ेगा धन की आमद तो आज अनिश्चित रहेगी लेकिन सार्वजिनक क्षेत्र पर मान सम्मान में वृद्धि अवश्य होगी। महिलाए घरेलू कार्यो को जल्दी पूरा कर बाहर घूमने की योजना में रहेंगी लेकिन कोई ने काम आने से समय नही मिल सकेगा। काम-धंधा सामान्य रहेगा धन प्राप्ति की संभावना बनते बनते आगे के लिये टलेगी। लेकिन आवश्यकता पूर्ति लायक हो ही जाएगी। आज मन चंचल भी रहेगा संगीत कला आदि में रुचि दिखाएंगे। धर्म कर्म करते समय मन एकाग्र नही रहेगा। बाहरी आकर्षण के बाद भी घरेलू वातावरण में अधिक सहज अनुभव करेंगे। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज के दिन आपकी इच्छापूर्ति होने वाली है परंतु इसके लिए दृढ़संकल्प शक्ति की अधिक आवश्यकता पड़ेगी। काल्पनिक दुनिया को छोडे लाभ-हानि आपकी मानसिकता के ऊपर निर्भर करेंगे। संकीर्णता त्याग दिल खोल जिम्मेदारी के साथ कार्य करें बेझिझक आर्थिक व्यवहार करें आगे के लिए फायदेमंद साबित होगा। बड़े बुजुर्गों अथवा अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलने से इच्छित सफलता पा लेंगे। मित्र परिचितों से नए सुझाव मिलेंगे। खान-पान में भी संयम बरते पेट सम्बंधित समस्या हो सकती है। प्रेम प्रसंगों को लेकर असमंजस रहेगा स्त्री वर्ग से आकर्षण बढेगा परंतु ज्यादा खुलापन मान हानि करा सकता है सतर्क रहें। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज का दिन पिछले कुछ दिनों से बेहतर रहेगा। शारीरिक स्फूर्ति रहने से कार्यो में उत्साह रहेगा। रुके हुए कार्य थोड़े से प्रयास से पूर्ण होंगे। आज बनाई नई योजनाएं संध्या के समय अधिक फलीभूत होंगी। सामाजिक कारणों के लिए भी समय निकालना पड़ेगा। सरकारी कार्य आज करना ठीक रहेगा निश्चित सफलता मिलेगी। संध्या के समय धन की आमद होने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी। व्यवहार कुशलता से बिगड़े काम बना लेंगे। आप में थोड़ी स्वार्थ सिद्धि की भावना भी रहेगी। मित्र रिश्तेदारो के साथ लंबी यात्रा की योजना बनेगी घर मे किसी की जिद पूरी करने के कारण छोटा मोटा खर्च भी लगा रहेगा। संध्या बाद सेहत में थोड़ा उतार चढ़ाव रहेगा। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज के दिन आप लापरवाह अधिक रहेंगे फिर भी लाभ आज किसी ना किसी रूप में अवश्य हो जाएगा। कार्य व्यवसाय में अव्यवस्था सुधारने में मध्यान तक व्यस्त रहेंगे सहकर्मीयो की मनमानी व्यवहार के कारण क्रोध आएगा फिर भी स्थिति बिगड़ने नही देंगे। आर्थिक रूप से दिन शुभ रहेगा परन्तु हाथ खुला होने से ज्यादा देर टिकेगा नही। उधारी के व्यवहार ज्यादा ना बढ़ाएं अन्यथा उलझने बढ़ेंगी। सामाजिक व्यवहार दिखावा मात्र ही रहेंगे। परिवार में सुख शान्ति की अनुभूति होगी लेकिन महिला वर्ग का स्वभाव अचानक बदल सकता है सतर्क रहें। घर मे शान्ती बनाये रखने के लिए परिजनों की आवश्यकता पूर्ति करनी पड़ेगी। कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज का दिन भी आपका सामान्य से अधिक उत्तम रहेगा। आपकी महात्त्वकांक्षाओ की पूर्ती होने से दिन भर आनंदित रहेंगे। बस सेहत को लेकर आज थोड़ा आशंकित रहेंगे सर्दी लगने का भय है सावधान रहें। नौकरी पेशा एवं व्यापारियों को अनुकूल वातावरण मिलने से निसंकोच होकर निर्णय ले पाएंगे जिसका फल शीघ्र ही देखने को मिलेगा। मध्यान के बाद का समय आमदनी में बढ़ोतरी कराएगा। सामाजिक सम्मान बढेगा। परिजनों एवं मित्रो के प्रति अत्यधिक दयालुता परेशानी में डाल सकती है सोच समझ कर ही कोई निर्णय लें। धन लाभ के अवसर रुक रुक कर मिलते रहेंगे इनको हाथ से ना जाने दें। संध्या के बाद मौज-शौक में वृद्धि होगी। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज के दिन आप मध्यान तक किसी बहु प्रतीक्षित कार्यो को लेकर उलझन में रहेंगे स्वभाव में व्यवहारिकता थोड़ी कम रहेगी जिसके कारण अपने कार्य निकालने में परेशानी आएगी आज आपको सभी से मीठा व्यवहार करने की सलाह है तभी कामना पूर्ति सम्भव है अन्यथा बाद में पछताना पड़ेगा। संध्या के बाद का समय कार्य सिद्धि वाला है धन की थोड़ी बहुत आमद थोड़े प्रयास से अवश्य हो जाएगी इसको बढ़ाने के लिये स्वभाव में मिठास रखें। कार्य क्षेत्र पर अधिकारी वर्ग आपके ऊपर भरोसा रखेंगे लेकिन अतिरिक्त कार्य भी सौप कर दुविधा में डालेंगे। घर के सदस्यों की कम ही बनेगी एक दूसरे की गलतियां निकालेंगे आरोग्य बना रहेगा। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज के दिन आपकी वैचारिक स्थिति प्रखर रहेगी सार्वजनिक कार्यो में सम्मानित होंगे आपकी छवि भी बुद्धिमानो जैसी बनेगी। परन्तु आर्थिक रूप से इसका लाभ नही ले पाएंगे। कार्य व्यवसाय मंदा रहने से उदासीनता आएगी। आज आपका मन भी एक जगह केंद्रित नही रहेगा। धैर्य से कार्य करते रहें संध्या तक संतोषजक लाभ अवश्य मिलेगा पारिवार में भी आपके विचारो की प्रशंसा होगी लेकिन केवल व्यवहार मात्र के लिए ही। आर्थिक विषयो को लेकर किसी से विवाद ना करें धन डूबने की आशंका है। गृहस्थ में प्रेम स्नेह तो मिलेगा परन्तु स्वार्थ सिद्धि की भावना भी अधिक रहेगी। महिलाये अधिक बोलने की समस्या से ग्रस्त रहेंगी। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज का दिन आपको धैर्य से बिताने की सलाह है। आज आप निरंतर मिल रही असफलता अथवा कलह-क्लेश के वातावरण से क्षुब्ध होकर अनुचित कदम उठा सकते है जिसका स्वयं एवं पारिवारिक प्रतिष्ठा पर गलत प्रभाव पड़ेगा। परिजनों की असंतोषी प्रवृति के कारण घरेलू वातावरण आज लगभग अशांत ही रहेगा। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा अन्य लोगो के आश्रित रहना पड़ेगा फिर भी जरूरत के अनुसार लाभ अवश्य हो जायेगा। किसी भी महत्त्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले एक बार लाभ हानि की समीक्षा अवश्य करें।महिलाये आज व्यवहार संयमित रखें मान हानि की संभावना है। आडम्बर के ऊपर खर्च होगा। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज के दिन आपको धन लाभ के योग बन रहे है लेकिन आज आपके बनते कार्यो में टांग अड़ाने वालो का भी सामना करना पड़ेगा। व्यवसायी वर्ग आज निवेश का जोखिम ले सकते है अवश्य लाभ होगा। शेयर सट्टे आदि कार्यो में धन दुगुना होकर मिलेगा। परिवार में सुख के साधनों की वृद्धि होगी इसपर खर्च भी अधिक रहेगा। आध्यत्म अथवा साधना क्षेत्र से जुड़े जातको को साधना में सिद्धि की दिव्य अनुभूति होगी। नौकरी पेशा लोगो का आज काम के समय भी मन इधर उधर ज्यादा भटकेगा। मन में चल रही कामना अतिशीघ्र पूर्ण होने के योग है। ध्यान रहे आज किसी भी कार्य में आलस्य किया तो दोबारा अवसर नही मिल सकेगा। कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज आपका संतोषी स्वभाव आपको बेवजह की उलझनों से दूर रखेगा फिर भी आज किसी के दबाव में आकर आपको कोई अप्रिय कार्य करना पड़ेगा मन में इसका पश्चाताप भी रहेगा। आमदनी आज स्थिर रहेगी संचित कोष से खर्च चलाने पड़ेंगे। मित्र परिचितों के साथ संध्या के समय मौज शौक पूरे करेंगे परन्तु रंग में भंग पड़ने वाली स्थिति बन सकती है सतर्क रहें। विपरीत लिंगीय वर्ग से आकर्षण बढेगा। प्रेम प्रसंगों में नजदिकी आएगी। संताने जिद पर अड़ेंगी जिससे घर मे अशांति फैलेगी। असंयमित दिनचार्य के कारण स्वास्थ्य प्रतिकूल होने की संभावना है। बुजुर्गो की चिंता रहेगी। मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज का दिन आपको मिला जुला फल देगा। मन आज मनोरंजन की ओर अधिक आकर्षित रहेगा इसपर फिजूल खर्ची करने से पीछे नही हटेंगे। कार्य व्यवसाय से आर्थिक लाभ पाने के लिये ज्यादा परिश्रम करना पड़ेगा। स्वास्थ्य में कमी रहेगी कमजोरी अथवा पेट संबंधित व्याधि परेशान करेगी। घर एवं व्यवसाय में तालमेल बैठाने के कारण दुविधा में रहेंगे। एक कार्य को करने के चक्कर मे अन्य आयवश्यक कार्य अधूरे रहेंगे। सरकारी अथवा किसी भी प्रकार के जमीन-जायदाद संबंधित कार्य मे उलझने पड़ेंगी यथा संभव आज टालें। आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेने से थोड़ी मानसिक शांति मिलेगी। धन के व्यवहारों में जबरदस्ती ना करें। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 〰〰〰〰〰〰️

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सम्पूर्ण गरुड़ पुराण (हिन्दी में) {पहला अध्याय} 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ (भगवान विष्णु तथा गरुड़ के संवाद में गरुड़ पुराण – पापी मनुष्यों की इस लोक तथा परलोक में होने वाली दुर्गति का वर्णन, दश गात्र के पिण्डदान से यातना देह का निर्माण।) धर्म ही जिसका सुदृढ़ मूल है, वेद जिसका स्कन्ध(तना) है, पुराण रूपी शाखाओं से जो समृद्ध है, यज्ञ जिसका पुष्प है और मोक्ष जिसका फल है, ऎसे भगवान मधुसूदन रूपी पादप – (जैसे वृक्ष सबको आश्रय देता है, वैसे ही भगवान भी अपने चरणारविन्द में आश्रय देकर सबकी रक्षा करते हैं इसीलिए भगवान मधूसूदन को यहां पादप – वृक्ष की उपमा दी गई है) कल्पवृक्ष की जय हो। देव – क्षेत्र नैमिषारण्य में स्वर्ग लोक की प्राप्ति की कामना से शौनकादि ऋषियों ने एक बार सहस्त्रवर्ष में पूर्ण होने वाला यज्ञ प्रारम्भ किया। एक समय प्रात:काल के हवनादि कृत्यों का सम्पादन कर के उन सभी मुनियों ने सत्कार किए गये आसनासीन सूत जी महाराज से आदरपूर्वक यह पूछा –   ऋषय ऊचु: ऋषियों ने कहा – हे सूत जी महाराज्! आपने सुख देने वाले देवमार्ग का सम्यक निरूपण किया है। इस समय हम लोग भयावह यममार्ग के विषय में सुनना चाहते हैं। आप सांसारिक दुखों को और उस क्लेश के विनाशक साधन को तथा इस लोक और परलोक के क्लेशों को यथावत वर्णन करमें समर्थ है, अत: उस का वर्णन कीजिए।   सूत उवाच सूतजी बोले – हे मुनियों! आप लोग सुनें! मैं अत्यन्त दुर्गम यममार्ग के विषय में कहता हूँ, जो पुण्यात्मा जनों के लिए सुखद और पापियों के लिए दु:खद है। गरुड़ जी के पूछने पर भगवान विष्णु ने उनसे जैसा कुछ कहा था, मैं उसी प्रकार आप लोगों के संदेह की निवृत्ति के लिए कहूँगा। किसी समय वैकुण्ठ में सुखपूर्वक विराजमान परम गुरु श्रीहरि से विनतापुत्र गरुड़ जी ने विनय से झुककर पूछा –   गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे देव! आपने भक्ति मार्ग का अनेक प्रकार से मेरे समक्ष वर्णन किया है और भक्तों को प्राप्त होने वाली उत्तम गति के विषय में भी कहा है। अब हम भयंकर यम मार्ग के विषय में सुनना चाहते हैं। हमने सुना है कि आपकी भक्ति से विमुख प्राणी वहीं नरक में जाते हैं। भगवान का नाम सुगमतापूर्वक लिया जा सकता है, जिह्वा प्राणी के अपने वश में है तो भी लोग नरक में जाते हैं, ऎसे अधम मनुष्यों को बार-बार धिक्कार है। इसलिए हे भगवान! पापियों को जो गति प्राप्त होती है तथा यम मार्ग में जैसे वे अनेक प्रकार के दु:ख प्राप्त करते हैं, उसे आप मुझसे कहें।   श्रीभगवानुवाच श्रीभगवान बोले – हे पक्षीन्द्र! सुनो, मैं उस यममार्ग के विषय में कहता हूँ, जिस मार्ग से पापीजन नरक की यात्रा करते हैं और जो सुनने वालों के लिये भी भयावह है।    हे तार्क्ष्य! जो प्राणी सदा पाप परायण है, दया और धर्म से रहित हैं, जो दुष्ट लोगों की संगति में रहते हैं, सत्-शास्त्र और सत्संगति से विमुख है, जो अपने को स्वयं प्रतिष्ठित मानते हैं, अहंकारी हैं तथा धन और मान के मद से चूर हैं, आसुरी शक्ति को प्राप्त हैं तथा दैवी सम्पत्ति से रहित हैं, जिनका चित्त अनेक विषयों में आसक्त होने से भ्रान्त हैं, जो मोह के जाल में फंसे हैं और कामनाओं के भोग में ही लगे हैं, ऎसे व्यक्ति अपवित्र नरक में गिरते हैं. जो लोग ज्ञानशील हैं, वे परम गति को प्राप्त होते हैं। पापी मनुष्य दु:खपूर्वक यम यातना प्राप्त करते हैं। पापियों को इस लोक में जैसे दु:ख की प्राप्ति होती है और मृत्यु के पश्चात वे जैसी यम यातना को प्राप्त होते हैं, उसे सुनो। यथोपार्जित पुण्य और पाप के फलों को पूर्व में भोगकर कर्म के सम्बन्ध से उसे कोई शारीरिक रोग हो जाता है। आधि (मानसिक रोग) और व्याधि (शारीरिक रोग) – से युक्त तथा जीवन धारण करने की आशा से उत्कण्ठित उस व्यक्ति की जानकारी के बिना ही सर्प की भाँति बलवान काल उसके समीप आ पहुँचता है। उस मृत्यु की सम्प्राप्ति की स्थिति में भी उसे वैराग्य नहीं होता. उसने जिनका भरण-पोषण किया था, उन्हीं के द्वारा उसका भरण-पोषण होता है, वृद्धावस्था के कारण विकृत रूप वाला और मरणाभिमुख वह व्यक्ति घर में अवमाननापूर्वक दी हुई वस्तुओं को कुत्ते की भाँति खाता हुआ जीवन व्यतीत करता है। वह रोगी हो जाता है, उसे मन्दाग्नि हो जाती है और उसका आहार तथा उसकी सभी चेष्टाएँ कम हो जाती हैं। प्राण वायु के बाहर निकलते समय आँखें उलट जाती हैं, नाड़ियाँ कफ से रुक जाती हैं, उसे खाँसी और श्वास लेने में प्रयत्न करना पड़ता है तथा कण्ठ से घुर-घुर से शब्द निकलने लगते हैं। चिन्तामग्न स्वजनों से घिरा हुआ तथा सोया हुआ वह व्यक्ति कालपाश के वशीभूत होने के कारण बुलाने पर भी नहीं बोलता। इस प्रकार कुटुम्ब के भरण-पोषण में ही निरन्तर लगा रहने वाला, अजितेन्द्रिय व्यक्ति अन्त में रोते बिलखते बन्धु-बान्धवों के बीच उत्कट वेदना से संज्ञाशून्य होकर मर जाता है। हे गरुड़ ! उस अन्तिम क्षण में प्राणी को व्यापक दिव्य दृष्टि प्राप्त हो जाती है, जिससे वह लोक-परलोक को एकत्र देखने लगता है। अत: चकित होकर वह कुछ भी नहीं कहना चाहता। यमदूतों के समीप आने पर भी सभी इन्द्रियाँ विकल हो जाती हैं, चेतना जड़ीभूत हो जाती है और प्राण चलायमान हो जाते हैं। आतुरकाल में प्राण वायु के अपने स्थान से चल देने पर एक क्षण भी एक कल्प के समान प्रतीत होता है और सौ बिच्छुओं के डंक मारने जैसी पीड़ा होती है, वैसी पीड़ा का उस समय उसे अनुभव होने लगता है। वह मरणासन व्यक्ति फेन उगलने लगता है और उसका मुख लार से भर जाता है। पापीजनों के प्राणवायु अधोद्वार (गुदामार्ग) से निकलते हैं। उस समय दोनों हाथों में पाश और दण्ड धारण किये, नग्न, दाँतों को कटकटाते हुए क्रोधपूर्ण नेत्र वाले यम के दो भयंकर दूत समीप में आते हैं। उनके केश ऊपर की ओर उठे होते हैं, वे कौए के समान काले होते हैं और टेढ़े मुख वाले होते हैं तथा उनके नख आयुध की भाँति होते हैं। उन्हें देखकर भयभीत हृदयवाला वह मरणासन्न प्राणी मल-मूत्र का विसर्जन करने लगता है। अपने पाँच भौतिक शरीर से हाय-हाय करते हुए निकलता हुआ तथा यमदूतों के द्वारा पकड़ा हुआ वह अंगुष्ठमात्र प्रमाण का पुरुष अपने घर को देखता हुआ यमदूतों के द्वारा यातना देह से ढक कर के गले में बलपूर्वक पाशों से बाँधकर सुदूर यममार्ग यातना के लिए उसी प्रकार ले जाया जाता है, जिस प्रकार राजपुरुष दण्डनीय अपराधी को ले जाते हैं। इस प्रकार ले जाये जाते हुए उस जीव को यम के दूत तर्जना कर के डराते हैं और नरकों के तीव्र भय का पुन: – पुन: वर्णन करते हैं – (सुनाते हैं)। यमदूत कहते हैं – रे दुष्ट ! शीघ्र चल, तुम यमलोक जाओगे। आज तुम्हें हम सब कुम्भीपाक आदि नरकों में शीघ्र ही ले जाएँगे। इस प्रकार यमदूतों की वाणी तथा बन्धु-बान्धवों का रुदन सुनता हुआ वह जीव जोर से हाहाकार करके विलाप करता है और यमदूतों के द्वारा प्रताड़ित किया जाता है। यमदूतों की तर्जनाओं से उसका हृदय विदीर्ण हो जाता है, वह काँपने लगता है, रास्ते में कुत्ते काटते हैं और अपने पापों का स्मरण करता हुआ वह पीड़ित जीव यममार्ग में चलता है। भूख और प्यास से पीड़ित होकर सूर्य, दावाग्नि एवं वायु के झोंको से संतृप्त होते हुए और यमदूतों के द्वारा पीठ पर कोड़े से पीटे जाते हुए उस जीव को तपी हुई बालुका से पूर्ण तथा विश्राम रहित और जल रहित मार्ग पर असमर्थ होते हुए भी बड़ी कठिनाई से चलना पड़ता है। थककर जगह-जगह गिरता और मूर्च्छित होता हुआ वह पुन: उठकर पापीजनों की भाँति अन्धकारपूर्ण यमलोक में ले जाया जाता है। दो अथवा तीन मुहूर्त्त में वह मनुष्य वहाँ पहुँचाया जाता है और यमदूत उसे घोर नरक यातनाओं को दिखाते हैं। मुहूर्त मात्र में यम को और नारकीय यातनाओं के भय को देखकर वह व्यक्ति यम की आज्ञा से आकाश मार्ग से यमदूतों के साथ पुन: इस लोक (मनुष्यलोक) में चला आता है। मनुष्य लोक में आकर अबादि वासना से बद्ध वह जीव देह में प्रविष्ट होने की इच्छा रखता है, किंतु यमदूतों द्वारा पकड़कर पाश में बाँध दिये जाने से भूख और प्यास से अत्यन्त पीड़ित होकर रोता है। हे तार्क्ष्य ! वह पातकी प्राणि पुत्रों से दिए हुए पिण्ड तथा आतुर काल में दिए हुए दान को प्राप्त करता है तो भी उस नास्तिक को तृप्ति नहीं होती। पुत्रादि के द्वारा पापियों के उद्देश्य से किए गये श्राद्ध, दान तथा जलांजलि उनके पास ठहरती नहीं। अत: पिण्डदान का भोग करने पर भी वे क्षुधा से व्याकुल होकर यममार्ग में जाते हैं। जिनका पिण्डदान नहीं होता, वे प्रेतरूप में होकर कल्पपर्यन्त निर्जन वन में दु:खी होकर भ्रमण करते रहते हैं। सैकड़ो करोड़ कल्प बीत जाने पर भी बिना भोग किए कर्म फल का नाश नहीं होता और जब तक वह पापी जीव यातनाओं का भोग नहीं कर लेता, तब तक उसे मनुष्य शरीर भी प्राप्त नहीं होता। हे पक्षी! इसलिए पुत्र को चाहिए कि वह दस दिनों तक प्रतिदिन पिण्डदान करे। हे पक्षिश्रेष्ठ! वे पिण्ड प्रतिदिन चार भागों में विभक्त होते हैं। उनमें दो भाग तो प्रेत के देह के पंचभूतों की पुष्टि के लिए होते हैं, तीसरा भाग यमदूतों को प्राप्त होता है और चौथे भाग से उस जीव को आहार प्राप्त होता है। नौ रात-दिनों में पिण्ड को प्राप्त करके प्रेत का शरीर बन जाता है और दसवें दिन उसमें बल की प्राप्ति होती है। हे खग! मृत व्यक्ति के देह के जल जाने पर पिण्ड के द्वारा पुन: एक हाथ लंबा शरीर प्राप्त होता है, जिसके द्वारा वह प्राणी यमलोक के रास्ते में शुभ और अशुभ कर्मों के फल को भोगता है। पहले दिन जो पिण्ड दिया जाता है, उससे उसका सिर बनता है, दूसरे दिन के पिण्ड से ग्रीवा – गरदन और स्कन्ध(कन्धे) तथा तीसरे पिण्द से हृदय बनता है। चौथे पिण्ड से पृष्ठभाग (पीठ), पाँचवें से नाभि, छठे तथा सातवें पिण्द से क्रमश: कटि (कमर) और गुह्यांग उत्पन्न होते हैं। आठवें पिण्द से ऊरु (जाँघें) और नवें पिण्ड से जानु (घुटने) तथा पेर बनते हैं। इस प्रकार नौ पिण्डों से देह को प्राप्त कर के दसवें पिण्द से उसकी क्षुधा और तृषा – (भूख-प्यास) ये दोनों जाग्रत होती हैं। इस पिण्डज शरीर को प्राप्त कर के भूख और प्यास से पीड़ित जीव ग्यारहवें तथा बारहवें – दो दिन भोजन करता है। तेरहवें दिन यमदूतों के द्वारा बन्दर की तरह बँधा हुआ वह प्राणी अकेला उस यममार्ग में जाता है। हे खग! मार्ग में मिलने वाली वैतरणी को छोड़कर यमलोक के मार्ग की दूरी का प्रमाण छियासी हजार योजन है। वह प्रेत प्रतिदिन रात-दिन में दो सौ सैंतालीस योजन चलता है। मार्ग में आये हुए इन सोलह पुरों (नगर) को पार कर के पातकी व्यक्ति धर्मराज के भवन में जाता है। 1👉 सौम्यपुर, 2👉 सौरिपुर, 3👉 नगेन्द्र भवन, 4👉 गन्धर्वपुर, 5👉 शैलागम, 6👉 क्रौंचपुर, 7👉 क्रूरपुर, 8👉 विचित्रभवन, 9👉 बह्वापदपुर, 10👉 दु:खदपुर, 11👉 नानाक्रन्दपुर, 12👉 सुतप्तभवन, 13👉 रौद्रपुर, 14👉 पयोवर्षणपुर, 15👉 शीताढ्यपुर तथा 16👉 बहुभीतिपुर को पार करके इनके आगे यमपुरी में धर्मराज का भवन स्थित है। यमराज के दूतों के पाशों से बँधा हुआ पापी जीव रास्ते भर हाहाकार करता – रोता हुआ अपने घर को छोड़ करके यमपुरी को जाता है। ।।इस प्रकार गरुड़पुराण के अन्तर्गत सारोद्धार में “पापियों के इस लोक तथा परलोक के दु:ख का निरुपण” नामक पहला अध्याय पूर्ण हुआ।। क्रमश... अगले लेख में श्री गरुड़ पुराण का द्वितीय अध्याय 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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रामायण में जाने जाबालि ऋषि 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ राम-जाबालि संवाद बाल्मीकिकृत रामायण में ऋषि जाबालि एवं श्रीराम के बीच एक संवाद का जिक्र है जो रोचक लगा । प्रसंग है वनवास के लिए जा चुके श्रीराम को मनाने श्रीभरत का उनके पास नागरिकों के साथ जाना । श्रीभरत चाहते हैं कि वे अयोध्या लौटें और राजकाज सम्हालें । वे चाहते हैं कि उनकी अनुपस्थिति में राज्य को लेकर जो अवांछित घटा उसे श्रीराम भूल जायें । राम-भरत के उस मिलाप के समय वहां ऋषि जाबालि भी मौजूद रहते हैं । श्रीराम इस बात पर जोर देते हैं कि वे अपने स्वर्गीय पिता को दिये गये वचन को तोड़कर उनकी आत्मा को कष्ट नहीं दे सकते । ऋषि जाबालि श्रीराम को समझाते हैं कि उन वचनों की अब कोई सार्थकता नहीं रह गयी और उन्हें व्यावहारिक उपयोगिता तथा जनसमुदाय की भावना को महत्त्व देना चाहिए । दोनों के बीच चल रहे तर्क-वितर्कों के दौरान एक समय ऋषि जाबालि कहते हैं कि मनुष्य दिवंगत आत्माओं के प्रति भ्रमित रहता है । वह भूल जाता है कि मृत्यु पर जीवधारी अपने समस्त बंधनों को तोड़ देता है । उसकी मृत्यु के साथ ही सबके संबंध समाप्त हो जाते हैं । न कोई किसी का पिता रह जाता है और न ही कोई किसी का पुत्र । संसार में छूट चुके व्यक्ति के कर्म दिवंगत आत्मा के लिए अर्थ हीन हो जाते हैं । उन कर्मों से न उसे सुख हो सकता है और न ही दुःख । पर आम मानुष्य फिर भी भ्रम में जीता है । संवाद के दौरान वे कहते हैं, देखो क्या विडंबना है कि:- अष्टकापितृदेवत्यमित्ययं प्रसृतो जनः। अन्नस्योपद्रवं पश्य मृतो हि किमशिष्यति ।।14।। (बाल्मीकिविरचित रामायण, अयोध्याकाण्ड, सर्ग 108) अष्टकादि श्राद्ध पितर-देवों के प्रति समर्पित हैं यह धारणा व्यक्ति के मन में व्याप्त रहती है, इस विचार के साथ कि यहां समर्पित भोग उन्हें उस लोक में मिलेंगे । यह तो सरासर अन्न की बरबादी है । भला देखो यहां किसी का भोगा अन्नादि उनको कैसे मिल सकता है वे पूछते हैं, और आगे तर्क देते हैं:- यदि भुक्तमिहान्येन देहमन्यस्य गच्छति । दद्यात् प्रवसतां श्राद्धं तत्पथ्यमशनं भवेत् ।15। (पूर्वोक्त संदर्भ स्थल) वास्तव में यदि यहां भक्षित अन्न अन्यत्र किसी दूसरे के देह को मिल सकता तो अवश्य ही परदेस में प्रवास में गये व्यक्ति की वहां भोजन की व्यवस्था आसान हो जाती यहां उसका श्राद्ध कर दो और वहां उसकी भूख शांत हो जाये । मुझे लगता है कि प्राचीन भारत में दर्शन एवं अध्यात्म के विषय में मनीषियों-चिंतकों का अपना स्वतंत्र मत होता था । उनके मतों में विविधता रहती थी, कदाचित् फिर भी उनके बीच गंभीर संघर्ष की स्थिति पैदा नहीं होती थी । जिसको जो मत भा जाये वह उसी को स्वीकार लेता था । यही कारण है कि इस देश में ईश्वरवादी और अनीश्वरवादी एक साथ देखने को मिल जाते थे और हैं । वैमत्य तब तक घातक नहीं होता जब तक कि व्यक्ति असहमत व्यक्ति को कष्ट देना आरंभ न कर दे । संघर्ष की शुरुआत वस्तुतः तब होती है जब हम दूसरों पर अपने विचार थोपने लगते हैं, जैसा कि आज समाज में हो रहा है । मैं समझता हूं कि ऋषि जाबालि की आस्तिकता आम लोगों की आस्तिकता से भिन्न थी । (अष्टकादि श्राद्ध - कृष्णपक्ष की सप्तमी, अष्टमी, एवं नवमी की सम्मिलित संज्ञा अष्टक है । इन तीन दिनों के पितर-तर्पण आदि अष्टकादि श्राद्ध कहे जाते हैं ।) 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जाप करने लगा कि.. "मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।" पंडितजी के पूछने पर उस फकीर ने कहा कि... जब आपके चढाये जल और भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा. इस पर पंडितजी बहुत लज्जित हुए।" यह मनगढंत कहानी सुनाकर एक इंजीनियर मित्र जोर से ठठाकर हँसने लगे और मुझसे बोले कि - "सब पाखण्ड है जी..!" शायद मैं कुछ ज्यादा ही सहिष्णु हूँ... इसीलिए, लोग मुझसे ऐसी बकवास करने से पहले ज्यादा सोचते नहीं है क्योंकि, पहले मैं सामने वाली की पूरी बात सुन लेता हूँ... उसके बाद ही उसे जबाब देता हूँ. खैर... मैने कुछ कहा नहीं .... बस, सामने मेज पर से 'कैलकुलेटर' उठाकर एक नंबर डायल किया... और, अपने कान से लगा लिया. बात न हो सकी... तो, उस इंजीनियर साहब से शिकायत की. इस पर वे इंजीनियर साहब भड़क गए. और, बोले- " ये क्या मज़ाक है...??? 'कैलकुलेटर' में मोबाइल का फंक्शन भला कैसे काम करेगा..???" तब मैंने कहा.... तुमने सही कहा... वही तो मैं भी कह रहा हूँ कि.... स्थूल शरीर छोड़ चुके लोगों के लिए बनी व्यवस्था जीवित प्राणियों पर कैसे काम करेगी ??? इस पर इंजीनियर साहब अपनी झेंप मिटाते हुए कहने लगे- "ये सब पाखण्ड है , अगर ये सच है... तो, इसे सिद्ध करके दिखाइए" इस पर मैने कहा.... ये सब छोड़िए और, ये बताइए कि न्युक्लीअर पर न्युट्रान के बम्बारमेण्ट करने से क्या ऊर्जा निकलती है ? वो बोले - " बिल्कुल ! इट्स कॉल्ड एटॉमिक एनर्जी।" फिर, मैने उन्हें एक चॉक और पेपरवेट देकर कहा, अब आपके हाथ में बहुत सारे न्युक्लीयर्स भी हैं और न्युट्रांस भी...! अब आप इसमें से एनर्जी निकाल के दिखाइए...!! साहब समझ गए और तनिक लजा भी गए एवं बोले- "जी , एक काम याद आ गया; बाद में बात करते हैं " कहने का मतलब है कि..... यदि, हम किसी विषय/तथ्य को प्रत्यक्षतः सिद्ध नहीं कर सकते तो इसका अर्थ है कि हमारे पास समुचित ज्ञान, संसाधन वा अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं है , इसका मतलब ये कतई नहीं कि वह तथ्य ही गलत है. क्योंकि, सिद्धांत रूप से तो हवा में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों मौजूद है.. फिर , हवा से ही पानी क्यों नहीं बना लेते ??? अब आप हवा से पानी नहीं बना रहे हैं तो... इसका मतलब ये थोड़े ना घोषित कर दोगे कि हवा में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ही नहीं है. उसी तरह... हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म दान आदि भी आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं. इसीलिए, व्यर्थ के कुतर्को मे फँसकर अपने धर्म व संस्कार के प्रति कुण्ठा न पालें...! और हाँ... जहाँ तक रह गई वैज्ञानिकता की बात तो.... क्या आपने किसी भी दिन पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं...या, किसी को लगाते हुए देखा है? क्या फिर पीपल या बरगद के बीज मिलते हैं ? इसका जवाब है नहीं.... ऐसा इसीलिए है क्योंकि... बरगद या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु वह नहीं लगेगी. इसका कारण यह है कि प्रकृति ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है. जब कौए इन दोनों वृक्षों के फल को खाते हैं तो उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं. उसके पश्चात कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं. और... किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं है कि पीपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन (O2) देता है और वहीं बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है. साथ ही आप में से बहुत लोगों को यह मालूम ही होगा कि मादा कौआ भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है. तो, इस नयी पीढ़ी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है... शायद, इसलिए ऋषि मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी होगी. जिससे कि कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये...... इसीलिए.... श्राघ्द का तर्पण करना न सिर्फ हमारी आस्था का विषय है बल्कि यह प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है. साथ ही... जब आप पीपल के पेड़ को देखोगे तो अपने पूर्वज तो याद आएंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं. अतः.... सनातन धर्म और उसकी परंपराओं पे उंगली उठाने वालों से इतना ही कहना है कि.... उस समय भी हमारे ऋषि मुनियों को मालूम था कि धरती गोल है और हमारे सौरमंडल में 9 ग्रह हैं. साथ ही... हमें ये भी पता था कि किस बीमारी का इलाज क्या है... कौन सी चीज खाने लायक है और कौन सी नहीं...? अपनी संस्कृति और आस्था बनाये रखें। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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