🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷 🇮🇳🕉 *卐 सत्यराम सा 卐* 🕉🇮🇳 🌹🙏 *ॐ नमो नारायण* 🙏🌹 *⊱◈⊰✦मकरसंक्रांति की✦⊱◈⊰* *༺꧁अनंत शुभकामनाएं꧂༻* 🇮🇳🇮🇳🇮🇳.🇮🇳🇮🇳🇮🇳.🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *स्वर, संगीत ~* 🙏 *संत श्री @रामभजनदास जी महाराज* 🙏 🕉🌻🕉🌻🕉🌻🕉🌻🕉 . *शब्द समाना जो रहै, गुरु बाइक बीधा ।* *उनही लागा एक सौं, सोई जन सीधा ॥टेक॥* *ऐसी लागी मर्म की, तन मन सब भूला ।* *जीवत-मृतक ह्वै रहै, गह आत्म मूला ॥१॥* *चेतन चितहि न बीसरे, महारस मीठा ।* *शब्द निरंजन गह रह्या, उन साहिब दीठा ॥२॥* *एक शब्द जन ऊधरे, सुनि सहजैं जागे ।* *अंतर राते एक सौं, सर सन्मुख लागे ॥३॥* *शब्द समाना सन्मुख रहै, पर आतम आगे ।* *दादू सीझै देखतां, अविनाशी लागे ॥४॥* *(श्री दादूवाणी ~ पद. १६७)* https://youtu.be/1BTZ_Tgmrc8 https://youtu.be/1BTZ_Tgmrc8N

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷 🕉🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🕉 🌹🙏 *ॐ नमो नारायण* 🙏🌹 🌿🌷🌻 *शुभ~दिवस* 🌻🌷🌿 🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳 *स्वर, संगीत ~ @श्री दास जी* *सौजन्य : अखिल भारतीय श्रीदादू सेवक समाज* 🕉🌻🕉🌻🕉🌻🕉🌻🕉 . *प्राण हमारा पीव सौं, यों लागा सहिये ।* *पुहुप वास घृत दूध में, अब कासौं कहिये ॥३०३॥* टीका - हे जिज्ञासुओं ! श्री दयाल महाराज अपने को ही उपलक्षण करके, जिज्ञासुजनों के प्रति उपदेश करते हैं कि जैसे पुष्प में गंध और दूध में घृत एक रूप है, वैसे ही हमारा जीवात्मा एकाग्र होकर के अगर परमात्मा में निश्चल होवे तो पुनः यह बात किसको बतावें ? क्योंकि यह अवाच्य है ॥३०३॥ ईख मांझ गुड़ तेल तिलन में, पय मधि घी शुचि दार । यों आतम परमातमां, दीसै जुगति विचार ॥ *(#श्रीदादूवाणी ~ परिचय का अंग)* https://youtu.be/nZWp18UoCxc https://youtu.be/nZWp18UoCxc

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷 🕉🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🕉🇮🇳 🌹🙏 *ॐ नमो नारायण* 🙏🌹 🌿🌷🌻 *शुभ~दिवस* 🌻🌷🌿 🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳.🇮🇳🦚🇮🇳 *साभार ऑडियो ~ @Kamini Agarwal* . *जौ मन नारि की ओर निहारत,* *तौ मन होत है ताहि कौ रूपा ।* *जौ मन काहु सौं क्रोध करै जब,* *क्रोधमई हो जाइ तद्रूपा ॥* *जौ मन माया ही माया रटै नित,* *तौ मन डूबत माया के कूपा ।* *सुन्दर जौ मन ब्रह्म बिचारत,* *तौ मन होत है ब्रह्मस्वरूपा ॥१६॥* *ब्रह्मचिन्तक मन ब्रह्ममय : यह मन किसी नारी का रूप देखता है, तो यह उसी पर मुग्ध होता हुआ तन्मय हो जाता है ।* *यह(मन) किसी पर क्रोध करता है तो उस समय उसका रूप क्रोधमय हो जाता है ।* *यदि यह लोभ के वश में होकर धन की ही दिनरात तृष्णा करता है तो उसी में रम जाता है तब वह उस माया के कूप में डूबने उतराने लगता है ।* *श्री सुन्दरदास जी कहते हैं - यदि यह मन ब्रह्म का चिन्तन करने लगे तो इस को ब्रह्ममय(ब्रह्मरूप) होने में कोई विलम्ब नहीं लगेगा ॥१६॥* *(सवैया ग्रंथ ~ मन को अंग.११/१६)* https://youtu.be/6TEnLRLDRb8 https://youtu.be/6TEnLRLDRb8

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