भक्ति_और_ज्ञान

जपमाला की प्रतिष्ठा कैसे करें ? 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ पीपल के नौ पत्ते लाकर एक को बीच में और आठ को अगल-बगल इस ढंग से रके कि वह अष्ट-दल कमल-सा मालूम हो । बीचवाले पत्ते पर माला रखे और ‘ॐ अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं लृं ॡं एं ऐं ओं औं अं अः कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं’ का उच्चारण करके पञ्च-गव्य के द्वारा उसका प्रक्षालन करे और फिर ‘सद्योजात’ मन्त्र पढ़कर गंगाजल या जल से उसको धो दें। सद्योजात-मन्त्र 〰️〰️〰️〰️〰️ ॐ सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः । भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः । इसके पश्चात् वामदेव-मन्त्र से चन्दन, अगर, गन्ध आदि के द्वारा घर्षण करे। वामदेव-मन्त्र 〰️〰️〰️〰️ “ॐ वामदेवाय नमो ज्येष्ठाय नमः श्रेष्ठाय नमो रुद्राय नमः, कालाय नमः, कल-विकरणाय नमो बलाय नमो बल-प्रमथनाय नमः सर्व-भूत-दमनाय नमो मनोन्मनाय नमः ।” तत्पश्चात् ‘अघोर-मन्त्र’ से धूप-दान करे ‘ॐ अघोरेभ्योऽथ-घोरेभ्यो घोर-घोरतरेभ्यः । सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्तेऽअस्तु रुद्ररुपेभ्यः ।’ तदनन्तर ‘तत्-पुरुष-मन्त्र’ से लेपन करे “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महा-देवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ।” इसके पश्चात् एक-एक दाने पर एक-एक बार या सौ-सौ बार ‘ईशान-मन्त्र’ का जप करना चाहिये ‘ॐ ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदा शिवोम् ।’ फिर माला में अपने इष्ट-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा करें । तदनन्तर इष्ट-मन्त्र से सविधि पूजा करके प्रार्थना करनी चाहिये ‘माले माले महा-माले सर्वतत्त्वस्वरुपिणि । चतुर्वर्गस्त्वयि न्यस्तस्तस्मान्मे सिद्धिदा भव ।।’ यदि माला में शक्ति की प्रतिष्ठा की हो तो इस प्रार्थना के पहले ‘ह्रीं’ जोड़ लेना चाहिये और रक्तवर्ण के पुष्प से पूजा करनी चाहिये । वैष्णवों के लिये माला-पूजा का मन्त्र है 👉 ‘ॐ ऐं श्रीं अक्षमालायै नमः ।’ अ-कारादि-क्ष-कारान्त प्रत्येक वर्ण से पृथक्-पृथक् पुटित करके अपने इष्ट-मन्त्र का १०८ बार जप करना चाहिये । इसके पश्चात् १०८ आहुति हवन करे अथवा २१६ बार इष्ट-मन्त्र का जप कर ले । उस माला पर दूसरे मन्त्र का जप न करे । प्रार्थना करें ‘ॐ त्वं माले सर्वदेवानां सर्व-सिद्धि-प्रदा मता । तेन सत्येन मे सिद्धिं देहि मातर्नमोऽस्तु ते ।।’ इस प्रकार आपकी माला अब जप करने योग्य हो गई। अंगुष्ठ और मध्यमा के द्वारा जप करना चाहिये और तर्जनी से माला का कभी स्पर्श नहीं करना चाहिये। माला को गुप्त रखना चाहिये। जप के लिए गौमुखी अवश्य प्रयोग करनी चाहिए अन्यथा कपडा ढककर ही जप करना चाहिए। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️〰️〰️🌼〰️〰️

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काले घोड़े की नाल का प्रयोग 〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️ शत्रु एवं शनि पीड़ित लोग काले घोड़े की नाल के छल्ले का प्रयोग करें तो उत्तम लाभ होता है। यह छल्ला दाहिने हाथ की बीच की (मध्यमा) उंगुली में धारण करना चाहिए। लोगों की बुरी नजर से बचने का अत्यन्त सटीक उपाय है ध्यान रखेंना चाहिए वह छल्ला एकदम शुद्व एवं प्रमाणिक होना चाहिए। तभी इसका पूर्ण लाभ मिलता है घर तथा कार्य स्थान के मुख्य दरवाजे के ऊपर अन्दर की ओर u के आकार में लगाई गई काले घोड़े के नाल उस स्थान की सभी प्रकार तांत्रिक प्रभाव जादू-टोने, नजर आदि से रक्षा करती है। तंत्र क्रियाओं में अनेक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। काले घोड़े की नाल भी उन्हीं में से एक है। ऐसा मानते हैं कि तंत्र प्रयोग में यदि काले घोड़े की नाल का प्रयोग किया जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार वैसे तो किसी भी घोड़े की नाल बहुत प्रभावशाली होती है लेकिन यदि काले घोड़े के अगले दाहिने पांव की पुरानी नाल हो तो यह कई गुना अधिक प्रभावशाली हो जाती है।काले घोड़े की नाल एक ऐसी वास्तु है जो शनि समबधित किसी भी पीड़ा जैसे शनि की अशुभ दशा, ढैया, साढ़ेसाती शनि का कोई अशुभ योग आदि..हर पीड़ा में सामान रूप से चमत्कारी है बशर्ते यह पूर्ण रूपेण सिद्ध हो....यहाँ सिद्ध से आशय पहले काले घोड़े के प्रयोग में हो फिर शुभ महूर्त में शनि मंत्रो से व वैदिक प्रक्रिया द्वारा प्रतिष्ठित की गई हो।सिद्ध या उर्जावान काले घोड़े की नाल को परखने का एक बहुत ही प्रमाणिक तरीका है।उसे आप कुछ घंटो (कम से कम ५ से ८ घंटे) के लिए मक्के में रख दिया जाये और फिर जब कुछ समय बाद देखा जाये तो सही सिद्ध घोड़े की नाल उस मक्के को पका देंती है। १👉 काले वस्त्र में लपेट कर अनाज में रख दो तो अनाज में वृद्धि होती है। २👉 काले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रख दो तो धन में वृद्धि हो | ३👉 अंगूठी या छल्ला बनाकर धारण करे तो शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है। ४👉 द्वार पर सीधा लगाये तो दैवीय कृपा प्राप्त होती है। ५👉 द्वार पर उल्टा लगाओ तो भूत, प्रेत, या किसी भी तंत्र मंत्र से बचाव करेगी। ६👉 शनि के प्रकोप से बचाव हेतु काले घोड़े की नाल से बना छल्ला सीधे हाथ में धारण करें। ७👉 काले घोड़े की नाल से चार कील बनवाये और शनि पीड़ित व्यक्ति के पलंग में चारो पायो में लगा दे। ८👉 काले घोड़े की नाल से चार कील बनवाये और शनि पीड़ित व्यक्ति के घर के चारो कोने पे लगाये। ९👉 काले घोड़े की नाल से एक कील बनाकर सवा किलो उरद की दाल में रख कर एक नारियल के साथ जल में प्रवाहित करे। १०👉 काले घोड़े की नाल से एक कील या छल्ला बनवा ले, शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भर कर उसमे छल्ला या कील डाल कर अपना मुख देखे और पीपल के पेड़ के नीचे रख दे। 🖕उपरोक्त उपायो से अवश्य ही शनि से होने वाली पीड़ा में राहत मिलती है। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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