पंचांग

*🎪🕉️ॐ श्री दुर्गायै नमः🕉️🎪* *🎪🎪वैदिक पंचांग🎪🎪* 🌤️ *दिनांक - 01 अक्टूबर 2022* 🌤️ *दिन - शनिवार* 🌤️ *विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)* 🌤️ *शक संवत -1944* 🌤️ *अयन - दक्षिणायन* 🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु* 🌤️ *मास - अश्विन* 🌤️ *पक्ष - शुक्ल* 🌤️ *तिथि - षष्ठी रात्रि 08:46 तक तत्पश्चात सप्तमी* 🌤️ *नक्षत्र - जेष्ठा 02 अक्टूबर रात्रि 03:11 तक तत्पश्चात मूल* 🌤️ *योग - आयुष्मान शाम 07:59 तक तत्पश्चात सौभाग्य* 🌤️ *राहुकाल - सुबह 09:29 से सुबह 10:59 तक* 🌞 *सूर्योदय - 06:30* 🌦️ *सूर्यास्त - 18:25* 👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* 🚩 *व्रत पर्व विवरण* - 🔥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🎪🎪वैदिक पंचांग🎪🎪* 🌷 *घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय* 🌷 👉🏻 *02 अक्टूबर 2022 रविवार को (सूर्योदय से शाम 06:48 तक) रविवारी सप्तमी है।* 🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-* 🌷 *"जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।"* 💥 *नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।* *🎪🎪वैदिक पंचांग🎪🎪* 🌷 *मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि* 🙏🏻 *सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।* 🌷 *इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।* 🙏🏻 *(शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याया (10)* *🎪🎪वैदिक पंचांग🎪🎪* 🌷 *रविवार सप्तमी* 🌷 🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन जप/ध्यान करने का वैसा ही हजारों गुना फल होता है जैसा की सूर्य/चन्द्र ग्रहण में जप/ध्यान करने से होता |* 🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन अगर कोई नमक मिर्च बिना का भोजन करे और सूर्य भगवान की पूजा करे , तो उसकी घातक बीमारियाँ दूर हो सकती हैं , अगर बीमार व्यक्ति न कर सकता हो तो कोई और बीमार व्यक्ति के लिए यह व्रत करे | इस दिन सूर्यदेव का पूजन करना चाहिये |* 🌞 *सूर्य भगवान पूजन विधि* 🌞 🙏🏻 *१) सूर्य भगवान को तिल के तेल का दिया जला कर दिखाएँ , आरती करें |* 🙏🏻 *२) जल में थोड़े चावल ,शक्कर , गुड , लाल फूल या लाल कुम कुम मिला कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें |* 🌞 *सूर्य भगवान अर्घ्य मंत्र* 🌞 🌷 *1. ॐ मित्राय नमः।* 🌷 *2. ॐ रवये नमः।* 🌷 *3. ॐ सूर्याय नमः।* 🌷 *4. ॐ भानवे नमः।* 🌷 *5. ॐ खगाय नमः।* 🌷 *6. ॐ पूष्णे नमः।* 🌷 *7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।* 🌷 *8. ॐ मरीचये नमः।* 🌷 *9. ॐ आदित्याय नमः।* 🌷 *10. ॐ सवित्रे नमः।* 🌷 *11. ॐ अर्काय नमः।* 🌷 *12. ॐ भास्कराय नमः।* 🌷 *13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।* 🙏🏻 *सुरेशनंदजी महाराज* *🎪🎪वैदिक पंचांग🎪🎪* 🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷 🙏🏻 *नवरात्रि की सप्तमी तिथि यानी सातवें दिन माता दुर्गा को गुड़ का भोग लगाएं ।इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है।* *🎪🎪वैदिक पंचांग🎪🎪* 🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷 🙏🏻 *शत्रुओं का नाश करती हैं मां कालरात्रि* *महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि। मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थित करना चाहिए। इस आराधना के फलस्वरूप भानु चक्र की शक्तियां जागृत होती हैं। मां कालरात्रि की भक्ति से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है। जीवन की हर समस्या को पल भर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है। शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं ।* *🎪🎪वैदिक पंचांग🎪🎪* *पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप*। *राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप*।। *सुमिरि पवन सुत पावन नामू*। *अपने बस कर राखे रामू*।। *नहि कलि करम न भगत विवेकू*। *राम नाम अवलम्बन एकू*।। *🚩सियावर राम चन्द्र की जय🚩* 🕉🕉🎪🎪🔥🙏🙏🔥🎪🎪🕉🕉

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mymandir Sep 30, 2022

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@mahaveer1698 Oct 1, 2022

. ।। 🕉 ।। 🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩 📜««« *आज का पञ्चांग*»»»📜 कलियुगाब्द..........................5124 विक्रम संवत्.........................2079 शक संवत्............................1944 मास...................................अश्विन पक्ष.....................................शुक्ल तिथी....................................षष्ठी रात्रि 08.45 पर्यंत पश्चात सप्तमी रवि..............................दक्षिणायन सूर्योदय.............प्रातः 06.18.00 पर सूर्यास्त.............संध्या 06.14.42 पर सूर्य राशि.............................कन्या चन्द्र राशि...........................वृश्चिक गुरु राशी...............................मीन नक्षत्र.................................ज्येष्ठा रात्रि 03.03 पर्यंत पश्चात मूल योग.............................आयुष्मान संध्या 07.54 पर्यंत पश्चात सौभाग्य करण...............................कौलव प्रातः 09.41 पर्यंत पश्चात तैतिल ऋतु...................................शरद दिन...............................शनिवार 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार :-* 01 अक्तूबर सन 2022 ईस्वी । 🚩 *षष्ठं कात्यायनी मातापूजन (षष्ठं दिवस) :-* *कात्यायनी माता :* मां दुर्गा का छठा स्वरूप :- भगवती माँ दुर्गा जी के छठवें स्वरुप का नाम कात्यायनी है ! इनका कात्यायनी नाम पड़ने की कथा इस प्रकार है - कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे ! उनके पुत्र - ऋषि कात्य हुए ! इन्ही कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे ! इन्होने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी ! उनकी इच्छा थी की माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें ! माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली थी ! कुछ काल पश्चात जब दानव महिसासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत बढ़ गया तब भगवान् ब्रह्मा , विष्णु , महेश तीनो ने अपने - २ तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया ! महर्षि कात्यायन ने सर्व प्रथम इनकी पूजा की ! इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाई ! ऐसी भी कथा मिलती है कि ये महर्षि कात्यायन के यहाँ पुत्री रूप से उत्पन्न भी हुई थी ! आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्ल सप्तमी , अष्टमी , तथा नवमी तक तीन - दिन इन्होने कात्यायन ऋषि कि पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था ! माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी है ! भगवान् कृष्ण को पतिरूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्ही की पूजा कालिंदी - यमुना के तट पर की थी ! ये ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित है ! इनका स्वरुप अत्यंत ही भव्य और दिव्य है ! ☸ शुभ अंक...........................1 🔯 शुभ रंग.........................नीला ⚜️ *अभिजीत मुहूर्त :-* दोप 11.52 से 12.39 तक । 👁‍🗨 *राहुकाल :-* प्रात: 09.18 से 10.47 तक । 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त -* *कन्या* 05:21:30 07:32:10 *तुला* 07:32:10 09:46:47 *वृश्चिक* 09:46:47 12:02:57 *धनु* 12:02:57 14:08:35 *मकर* 14:08:35 15:55:42 *कुम्भ* 15:55:42 17:29:15 *मीन* 17:29:15 19:00:27 *मेष* 19:00:27 20:41:11 *वृषभ* 20:41:11 22:39:49 *मिथुन* 22:39:49 24:53:31 *कर्क* 24:53:31 27:09:41 *सिंह 27:09:41 29:21:30 🚦 *दिशाशूल :-* पूर्व दिशा - यदि आवश्यक हो तो अदरक या उड़द का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें । ✡ *चौघडिया :-* प्रात: 07.49 से 09.18 तक शुभ दोप. 12.15 से 01.44 तक चर दोप. 01.44 से 03.12 तक लाभ दोप. 03.12 से 04.41 तक अमृत संध्या 06.10 से 07.41 तक लाभ रात्रि 09.12 से 10.44 तक शुभ । 📿 *आज का मंत्र :-* ।। ॐ ह्रीं कात्यायन्यै स्वाहा ।। *॥ ध्यान मंत्र ॥* चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना । कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥ 📢 *संस्कृत सुभाषितानि -* काते कान्ता धन गतचिन्ता, वातुल किं तव नास्ति नियन्ता। त्रिजगति सज्जनसं गतिरैका, भवति भवार्णवतरणे नौका॥१३॥ अर्थात : तुम्हें पत्नी और धन की इतनी चिंता क्यों है, क्या उनका कोई नियंत्रक नहीं है| तीनों लोकों में केवल सज्जनों का साथ ही इस भवसागर से पार जाने की नौका है॥१३॥ 🍃 *आरोग्यं सलाह :-* *धनिये का पानी पीने के फायदे -* *3. खराब पाचन सही करे धनिया का पानी -* खराब पाचन को दूर करने के लिए धनिया बीज का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि धनिया के बीज बोर्नियोल और लिनालूल यौगिक हैं जो पाचन प्रक्रिया में मदद करते हैं। धनिया बीज डायरिया से मुकाबला करने के लिए उपयोगी हो सकता है, जो बैक्टीरिया के कारण होता हैं, क्योंकि इसमें जीवाणुरोधी गुण हैं। इसके अलावा धनिए के ताजे पत्तों को छाछ में मिलाकर पीने से बदहजमी, मतली, पेचिश और कोलाइटिस में राहत मिलती है। इसके अलावा आप पेट की बीमारी में दो कप पानी में धनिये के बीज, जीरा, चाय पत्ती और शक्कर डालकर अच्छे से मिला ले। आपको एसिडिटी से आराम मिलेगा। ⚜ *आज का राशिफल :-* 🐐 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* धनार्जन सुगम होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता अर्जित करेगा। पठन-पाठन में मन लगेगा। दूर यात्रा की योजना बन सकती है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। बेचैनी रहेगी। .🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी के व्यवहार से क्लेश हो सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। पारिवारिक चिंता में वृद्धि होगी। आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलेगी। तनाव रहेगा। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* शत्रु नतमस्तक होंगे। विवाद को बढ़ावा न दें। प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बाधा संभव है। फालतू खर्च होगा। मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* शत्रु नतमस्तक होंगे। विवाद को बढ़ावा न दें। प्रयास सफल रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय के स्रोतों में वृद्धि हो सकती है। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बाधा संभव है। फालतू खर्च होगा। मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। सट्टे व लॉटरी से दूर रहें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। कोई बड़ी समस्या से छुटकारा मिल सकता है। आय में वृद्धि होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। किसी विवाद में उलझ सकते हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। जोखिम न उठाएं। घर-बाहर असहयोग मिलेगा। अपेक्षाकृत कार्यों में विलंब होगा। आय में कमी हो सकती है। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में लाभ होगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। बेचैनी रहेगी। थकान महसूस होगी। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* नई आर्थिक नीति बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। कारोबारी अनुबंधों में वृद्धि हो सकती है। समय का लाभ लें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। कानूनी बाधा आ सकती है। विवाद न करें। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* बेचैनी रहेगी। चोट व रोग से बचें। काम का विरोध होगा। तनाव रहेगा। कोर्ट व कचहरी के काम अनुकूल होंगे। पूजा-पाठ में मन लगेगा। तीर्थयात्रा की योजना बनेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। सुख के साधनों पर व्यय हो सकता है। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। प्रमाद न करें। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। विवाद से क्लेश संभव है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। अपेक्षित कार्यों में अप्रत्याशित बाधा आ सकती है। तनाव रहेगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। राज्य के प्रतिनिधि सहयोग करेंगे। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* कष्ट, भय, चिता व बेचैनी का वातावरण बन सकता है। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। मातहतों से संबंध सुधरेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। जल्दबाजी न करें। कुबुद्धि हावी रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* धन प्राप्ति सुगम होगी। ऐश्वर्य के साधनों पर बड़ा खर्च हो सकता है। भूमि, भवन, दुकान व फैक्टरी आदि के खरीदने की योजना बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। अपरिचितों पर अतिविश्वास न करें। प्रमाद न करें। ☯ *आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो |* *।। शुभम भवतु ।।* 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩

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🌞 *~ आज का हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌤️ *दिनांक - 01 अक्टूबर 2022* 🌤️ *दिन - शनिवार* 🌤️ *विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)* 🌤️ *शक संवत -1944* 🌤️ *अयन - दक्षिणायन* 🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु* 🌤️ *मास - अश्विन* 🌤️ *पक्ष - शुक्ल* 🌤️ *तिथि - षष्ठी रात्रि 08:46 तक तत्पश्चात सप्तमी* 🌤️ *नक्षत्र - जेष्ठा 02 अक्टूबर रात्रि 03:11 तक तत्पश्चात मूल* 🌤️ *योग - आयुष्मान शाम 07:59 तक तत्पश्चात सौभाग्य* 🌤️ *राहुकाल - सुबह 09:29 से सुबह 10:59 तक* 🌞 *सूर्योदय - 06:30* 🌦️ *सूर्यास्त - 18:25* 👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* 🚩 *व्रत पर्व विवरण - 🔥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~🌞 🌷 *घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय* 🌷 👉🏻 *02 अक्टूबर 2022 रविवार को (सूर्योदय से शाम 06:48 तक) रविवारी सप्तमी है।* 🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-* 🌷 *"जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।"* 💥 *नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि* 🙏🏻 *सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।* 🌷 *इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।* 🙏🏻 *(शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याया (10)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *रविवार सप्तमी* 🌷 🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन जप/ध्यान करने का वैसा ही हजारों गुना फल होता है जैसा की सूर्य/चन्द्र ग्रहण में जप/ध्यान करने से होता |* 🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन अगर कोई नमक मिर्च बिना का भोजन करे और सूर्य भगवान की पूजा करे , तो उसकी घातक बीमारियाँ दूर हो सकती हैं , अगर बीमार व्यक्ति न कर सकता हो तो कोई और बीमार व्यक्ति के लिए यह व्रत करे | इस दिन सूर्यदेव का पूजन करना चाहिये |* 🌞 *सूर्य भगवान पूजन विधि* 🌞 🙏🏻 *१) सूर्य भगवान को तिल के तेल का दिया जला कर दिखाएँ , आरती करें |* 🙏🏻 *२) जल में थोड़े चावल ,शक्कर , गुड , लाल फूल या लाल कुम कुम मिला कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें |* 🌞 *सूर्य भगवान अर्घ्य मंत्र* 🌞 🌷 *1. ॐ मित्राय नमः।* 🌷 *2. ॐ रवये नमः।* 🌷 *3. ॐ सूर्याय नमः।* 🌷 *4. ॐ भानवे नमः।* 🌷 *5. ॐ खगाय नमः।* 🌷 *6. ॐ पूष्णे नमः।* 🌷 *7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।* 🌷 *8. ॐ मरीचये नमः।* 🌷 *9. ॐ आदित्याय नमः।* 🌷 *10. ॐ सवित्रे नमः।* 🌷 *11. ॐ अर्काय नमः।* 🌷 *12. ॐ भास्कराय नमः।* 🌷 *13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।* 🙏🏻 *सुरेशनंदजी महाराज* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷 🙏🏻 *नवरात्रि की सप्तमी तिथि यानी सातवें दिन माता दुर्गा को गुड़ का भोग लगाएं ।इससे हर मनोकामना पूरी हो सकती है।* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *शारदीय नवरात्रि* 🌷 🙏🏻 *शत्रुओं का नाश करती हैं मां कालरात्रि* *महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं कालरात्रि। मां कालरात्रि काल का नाश करने वाली हैं, इसी वजह से इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की आराधना के समय भक्त को अपने मन को भानु चक्र जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थित करना चाहिए। इस आराधना के फलस्वरूप भानु चक्र की शक्तियां जागृत होती हैं। मां कालरात्रि की भक्ति से हमारे मन का हर प्रकार का भय नष्ट होता है। जीवन की हर समस्या को पल भर में हल करने की शक्ति प्राप्त होती है। शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि अपने भक्तों को हर परिस्थिति में विजय दिलाती हैं ।* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 *🙏🌹 जय श्री राधे राधे🌹🙏*

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