ज्ञानवर्षा

Deepak Jan 25, 2022

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*⚜️ आज का प्रेरक प्रसंग ⚜️* *!! ज्ञान का अहंकार !!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ एक समय की बात है. एक घमंडी व्यक्ति शहर से पढ़ लिख कर अपने पुराने गांव आया. गांव और शहर के बीच में एक नदी पड़ती थी जिसको पार करने के बाद ही वह अपने गांव जा सकता था. इसलिए उसने एक नाव वाले को बुलाया और उसके नाव में सवार होकर अपने गांव की ओर चल दिया. कुछ देर चलने के बाद वह घमंड में भरकर नाविक से पूछना लगा– क्या तुमने कभी व्याकरण पढ़ा है..? नाविक कुछ देर के लिए सोच में पड़ गया और फिर बोला ‘नहीं’ साहब मैंने नहीं पढ़ा है. घमंड और अहंकार से भरे हुए व्यक्ति ने हंसते हुए कहा फिर तो तुमने अपनी आधी जिंदगी व्यर्थ में गंवा दी. थोड़ी देर बाद अपनी पढ़ाई का और घमंड दिखाने के लिए उस व्यक्ति ने नाभिक से फिर पूछा, तुमने इतिहास और भूगोल पढ़ा है? नाविक ने ना में सिर हिलाते हुए कहा ‘नहीं’ साहब. अहंकारी व्यक्ति ने फिर जोर से ठहाका लगाकर नाविक का मजाक उड़ाते हुए कहा फिर तो तुमने अपना पूरा जीवन व्यर्थ कर दिया. नाविक को इस बात पर बहुत क्रोध आया लेकिन वह मन मार कर रह गया और उस व्यक्ति से कुछ नहीं बोला चुपचाप नाव चलाने लगा. कुछ दूर नाव चलाने के बाद अचानक नदी में उफ़ान आ गया और नाव जोर-जोर से हिचकोले खाने लगी. यह देख कर नाविक ने चेहरे पर छोटी सी मुस्कान के साथ ऊंचे स्वर में उस व्यक्ति से पूछा– ‘साहब’ आपको तैरना भी आता है या नहीं…? व्यक्ति ने कहा– ‘नहीं’ मुझे तैरना नहीं आता है. नाविक ने कहा फिर तो आपको अपने इतिहास भूगोल और व्याकरण को सहायता के लिए बुलाना पड़ेगा, वरना आपकी सारी उम्र बर्बाद हो जाएगी. क्योंकि यह नाव डूबने वाली है. यह कहकर नाविक नदी में कूद तैरता हुआ किनारे की ओर चला गया. *शिक्षा:-* कभी भी अपने ज्ञान पर व्यर्थ का अहंकार प्रदर्शित नहीं करना चाहिए और किसी को अपने ज्ञान के बल पर नीचा नहीं दिखाना चाहिए. *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

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radha Jan 23, 2022

सभी महिलाओं को समर्पित 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 रसायनशास्त्र से शायद ना पड़ा हो पाला पर सारा रसोईघर प्रयोगशाला दूध में साइटरीक एसिड डालकर पनीर बनाना या सोडियम बाई कार्बोनेट से केक फूलाना चम्मच से सोडियम क्लोराइड का सही अनुपात तोलती रोज कितने ही प्रयोग कर डालती हैं पर खुद को कोई वैज्ञानिक नही बस गृहिणी ही मानती हैं रसोई गैस की बढ़े कीमते या सब्जी के बढ़े भाव पैट्रोल डीजल महँगा हो या तेल मे आए उछाल घर के बिगड़े हुए बजट को झट से सम्हालती है अर्थशास्त्री होकर भी खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं मसालों के नाम पर भर रखा आयूर्वेद का खजाना गमलो मे उगा रखे हैं तुलसी गिलोय करीपत्ता छोटी मोटी बीमारियों को काढ़े से भगाना जानती है पर खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं। सुंदर रंगोली और मेहँदी में नजर आती इनकी चित्रकारी सुव्यवस्थित घर में झलकती है इनकी कलाकारी ढोलक की थाप पर गीत गाती नाचती है कितनी ही कलाए जानती है पर खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं समाजशास्त्र ना पढ़ा हो शायद पर इतना पता है कि परिवार समाज की इकाई है परिवार को उन्नत कर समाज की उन्नति में पूरा योगदान डालती है पर खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं। मनो वैज्ञानिक भले ही ना हो पर घर में सबका मन पढ लेती है रिश्तों के उलझे धागों को सुलझाना खूब जानती है पर खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं। योग ध्यान के लिए समय नहीं है ऐसा अक्सर कहती हैं और प्रार्थना मे ध्यान लगाकर घर की कुशलता मांगती है खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं। ये गृहणियां सच में महान है कितने गुणों की खान है सर्वगुण सम्पन्न हो कर भी अहंकार नहीं पालती है खुद को बस गृहिणी ही मानती हैं।।🍁🍂🥀 सुश्री बीना चौधरी, राजस्थान

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devilakshmi Jan 22, 2022

🚩*दुर्योधन ने उस अबला स्त्री को दिखा कर अपनी जंघा ठोकी थी, तो उसकी जंघा तोड़ी गयी। दु:शासन ने छाती ठोकी तो उसकी छाती फाड़ दी गयी।* 🚩*महारथी कर्ण ने एक असहाय स्त्री के अपमान का समर्थन किया, तो श्रीकृष्ण ने असहाय दशा में ही उसका वध कराया।* 🚩 *भीष्म ने यदि प्रतिज्ञा में बंध कर एक स्त्री के अपमान को देखने और सहन करने का पाप किया, तो असँख्य तीरों में बिंध कर अपने पूरे कुल को एक-एक कर मरते हुए भी देखा...।* 🚩*भारत का कोई बुजुर्ग अपने सामने अपने बच्चों को मरते देखना नहीं चाहता, पर भीष्म अपने सामने चार पीढ़ियों को मरते देखते रहे। जब-तक सब देख नहीं लिया, तब-तक मर भी न सके... यही उनका दण्ड था।* 🚩 *धृतराष्ट्र का दोष था पुत्रमोह, तो सौ पुत्रों के शव को कंधा देने का दण्ड मिला उन्हें। सौ हाथियों के बराबर बल वाला धृतराष्ट्र सिवाय रोने के और कुछ नहीं कर सका।* 🚩 *दण्ड केवल कौरव दल को ही नहीं मिला था। दण्ड पांडवों को भी मिला।* 🚩 *द्रौपदी ने वरमाला अर्जुन के गले में डाली थी, सो उनकी रक्षा का दायित्व सबसे अधिक अर्जुन पर था। अर्जुन यदि चुपचाप उनका अपमान देखते रहे, तो सबसे कठोर दण्ड भी उन्ही को मिला। अर्जुन पितामह भीष्म को सबसे अधिक प्रेम करते थे, तो कृष्ण ने उन्ही के हाथों पितामह को निर्मम मृत्यु दिलाई।* 🚩*अर्जुन रोते रहे, पर तीर चलाते रहे... क्या लगता है, अपने ही हाथों अपने अभिभावकों, भाइयों की हत्या करने की ग्लानि से अर्जुन कभी मुक्त हुए होंगे क्या ? नहीं... वे जीवन भर तड़पे होंगे। यही उनका दण्ड था।* 🚩 *युधिष्ठिर ने स्त्री को दाव पर लगाया, तो उन्हें भी दण्ड मिला। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ने वाले युधिष्ठिर ने युद्धभूमि में झूठ बोला, और उसी झूठ के कारण उनके गुरु की हत्या हुई। यह एक झूठ उनके सारे सत्यों पर भारी रहा... धर्मराज के लिए इससे बड़ा दण्ड क्या होगा ?* 🚩 *दुर्योधन को गदायुद्ध सिखाया था स्वयं बलराम ने। एक अधर्मी को गदायुद्ध की शिक्षा देने का दण्ड बलराम को भी मिला। उनके सामने उनके प्रिय दुर्योधन का वध हुआ और वे चाह कर भी कुछ न कर सके...* 🚩 *उस युग में दो योद्धा ऐसे थे जो अकेले सबको दण्ड दे सकते थे, कृष्ण और बर्बरीक। पर कृष्ण ने ऐसे कुकर्मियों के विरुद्ध शस्त्र उठाने तक से इनकार कर दिया, और बर्बरीक को युद्ध में उतरने से ही रोक दिया।* 🚩*लोग पूछते हैं कि बर्बरीक का वध क्यों हुआ? यदि बर्बरीक का बध नहीं हुआ होता तो द्रौपदी के अपराधियों को यथोचित दण्ड नहीं मिल पाता। कृष्ण युद्धभूमि में विजय और पराजय तय करने के लिए नहीं उतरे थे, कृष्ण कृष्णा के अपराधियों को दण्ड दिलाने उतरे थे।* 🚩 *कुछ लोगों ने कर्ण का बड़ा महिमामण्डन किया है। पर सुनिए! कर्ण कितना भी बड़ा योद्धा क्यों न रहा हो, कितना भी बड़ा दानी क्यों न रहा हो, एक स्त्री के वस्त्र-हरण में सहयोग का पाप इतना बड़ा है कि उसके समक्ष सारे पुण्य छोटे पड़ जाएंगे। द्रौपदी के अपमान में किये गये सहयोग ने यह सिद्ध कर दिया कि वह महानीच व्यक्ति था, और उसका वध ही धर्म था।* 🚩 *स्त्री कोई वस्तु नहीं कि उसे दांव पर लगाया जाय। कृष्ण के युग में दो स्त्रियों को बाल से पकड़ कर घसीटा गया।* 🚩*देवकी के बाल पकड़े कंस ने, और द्रौपदी के बाल पकड़े दु:शासन ने। श्रीकृष्ण ने स्वयं दोनों के अपराधियों का समूल नाश किया। किसी स्त्री के अपमान का दण्ड अपराधी के समूल नाश से ही पूरा होता है, भले वह अपराधी विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति ही क्यों न हो...।* 🙏 *जय जय श्री राधे*🙏

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