+3 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+47 प्रतिक्रिया 17 कॉमेंट्स • 31 शेयर
Manoj manu Sep 21, 2021

🚩🔔जय सिया राम जी जय वीर बजरंग वली 🌹🙏 🌹🌹भक्ति की महिमा - श्री राम चरित मानस ज्ञान से :- कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई॥ राम भगति चिंतामनि सुंदर। बसइ गरुड़ जाके उर अंतर॥1 भावार्थ:-मैंने ज्ञान का सिद्धांत समझाकर कहा। अब भक्ति रूपी मणि की प्रभुता (महिमा) सुनिए। श्री रामजी की भक्ति सुंदर चिंतामणि है। हे गरुड़जी! यह जिसके हृदय के अंदर बसती है,॥1॥ *परम प्रकास रूप दिन राती। नहिं कछु चहिअ दिआ घृत बाती॥ मोह दरिद्र निकट नहिं आवा। लोभ बात नहिं ताहि बुझावा॥2॥ भावार्थ:-वह दिन-रात (अपने आप ही) परम प्रकाश रूप रहता है। उसको दीपक, घी और बत्ती कुछ भी नहीं चाहिए। (इस प्रकार मणि का एक तो स्वाभाविक प्रकाश रहता है) फिर मोह रूपी दरिद्रता समीप नहीं आती (क्योंकि मणि स्वयं धनरूप है) और (तीसरे) लोभ रूपी हवा उस मणिमय दीप को बुझा नहीं सकती (क्योंकि मणि स्वयं प्रकाश रूप है, वह किसी दूसरे की सहायता से प्रकाश नहीं करती)॥2॥ * प्रबल अबिद्या तम मिटि जाई। हारहिं सकल सलभ समुदाई॥ खल कामादि निकट नहिं जाहीं। बसइ भगति जाके उर माहीं॥3॥ भावार्थ:-(उसके प्रकाश से) अविद्या का प्रबल अंधकार मिट जाता है। मदादि पतंगों का सारा समूह हार जाता है। जिसके हृदय में भक्ति बसती है, काम, क्रोध और लोभ आदि दुष्ट तो उसके पास भी नहीं जाते॥3॥ * गरल सुधासम अरि हित होई। तेहि मनि बिनु सुख पाव न कोई॥ दब्यापहिं मानस रोग न भारी। जिन्ह के बस सब जीव दुखारी॥4॥ भावार्थ:-उसके लिए विष अमृत के समान और शत्रु मित्र हो जाता है। उस मणि के बिना कोई सुख नहीं पाता। बड़े-बड़े मानस रोग, जिनके वश होकर सब जीव दुःखी हो रहे हैं, उसको नहीं व्यापते॥4॥ * राम भगति मनि उर बस जाकें। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें॥ चतुर सिरोमनि तेइ जग माहीं। जे मनि लागि सुजतन कराहीं॥5॥ भावार्थ:-श्री रामभक्ति रूपी मणि जिसके हृदय में बसती है, उसे स्वप्न में भी लेशमात्र दुःख नहीं होता। जगत में वे ही मनुष्य चतुरों के शिरोमणि हैं जो उस भक्ति रूपी मणि के लिए भली-भाँति यत्न करते हैं॥5॥ * सो मनि जदपि प्रगट जग अहई। राम कृपा बिनु नहिं कोउ लहई॥ सुगम उपाय पाइबे केरे। नर हतभाग्य देहिं भटभेरे॥6॥ भावार्थ:-यद्यपि वह मणि जगत्‌ में प्रकट (प्रत्यक्ष) है, पर बिना श्री रामजी की कृपा के उसे कोई पा नहीं सकता। उसके पाने के उपाय भी सुगम ही हैं, पर अभागे मनुष्य उन्हें ठुकरा देते हैं॥6॥ * पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥ मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥7॥ भावार्थ:-वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्री रामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुंदर खानें हैं। संत पुरुष (उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले) मर्मी हैं और सुंदर बुद्धि (खोदने वाली) कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य ये दो उनके नेत्र हैं॥7॥ * भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥8॥ भावार्थ:-जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्ति रूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्री रामजी के दास श्री रामजी से भी बढ़कर हैं॥8॥ * राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा॥ सब कर फल हरि भगति सुहाई। सो बिनु संत न काहूँ पाई॥9॥ भावार्थ:-श्री रामचंद्रजी समुद्र हैं तो धीर संत पुरुष मेघ हैं। श्री हरि चंदन के वृक्ष हैं तो संत पवन हैं। सब साधनों का फल सुंदर हरि भक्ति ही है। उसे संत के बिना किसी ने नहीं पाया॥9॥ * अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा॥10॥ भावार्थ:-ऐसा विचार कर जो भी संतों का संग करता है, हे गरुड़जी उसके लिए श्री रामजी की भक्ति सुलभ हो जाती है॥10॥🌺🌿🌺जय श्री राम जी 🌺🌿🙏

+98 प्रतिक्रिया 29 कॉमेंट्स • 15 शेयर
Mamta Chauhan Sep 21, 2021

+142 प्रतिक्रिया 46 कॉमेंट्स • 45 शेयर

+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Harpal Sharma Thuker Sep 21, 2021

+25 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 39 शेयर
Neha Sharma Sep 21, 2021

!!🥀!! सुविचार !!🥀!!....."जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा, और सामर्थ्य को ध्यान में लिये बगैर, केवल अज्ञान की वजह से किया जाता है, वह तामसी कहा गया है।🌺🙏*जय श्री राधेकृष्णा*🙏*शुभ रात्रि नमन*🙏🌺👉*बहुत ही सुंदर कहानी......👍 "अनोखा कन्यादान".......✍️ *सुधा.... ये कया है बेटा ...तुम....सबकुछ ठीक तो है तेरे और मोहन के बीच मे ... *हां...मम्मी .....पर आप ये ...मतलब यूं अचानक बेटा तेरी सासूंमा का फोन आया था छ: महीने होने को आए अबतक कोई खुशखबरी .....उन्हें कुछ खटका तो उन्होंने मुझे फोन किया ...सच बता तेरे और मोहन के बीच सबकुछ ठीक तो है ना या कोई और परेशानी ... ऐसा कुछ नहीं है मम्मी जी ....मोहन ने अंदर आते हुए कहा अरे दामाद जी .....मोहन ने आगे बढकर चरण स्पर्श करते हुए कहा.... दरअसल मम्मी जी मैंने ही अभी परिवार को आगे बढाने से मना किया था सुधा को ....बस थोड़ा सा वक्त चाहिए था एक्चुअली गलती मेरी ही है मुझे मां को बता देना चाहिए था खमाखां आप और मम्मी दोनो परेशान हो गई ....माफ कीजियेगा मम्मी .... अरे ...मोहन तुम दामाद नहीं मेरे बेटे हो ....बेटा तुमदोनो को अपनी जिम्मेदारियों को निभाना है जैसा तुमदोनो को ठीक लगे ...अब बूढों को चिंता हुई तो ....खैर खुश रहो तुमदोनो ...ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहे ....दोनो के सिरपर हाथ रखकर मां बोली.... सुधा ने एकबारगी फिर से गुस्सैल नजरों से मोहन को देखा ....मगर मां की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा ...जी मम्मी .... मां के वापस चले जाने के बाद अकेले में बैठी सुधा को शादी की पहली रात का स्मरण हो उठा.... जब मोहन उसके समीप आया था तो सुधा ने खुदको समेटते हुए साफ इंकार करते हुए कहा था.... मे इसके लिए तैयार नहीं हूं..... तब मोहन ने कहा..... सुधा ....ये हमारे मिलन की रात है और दोनो और से जब समर्पण स्वीकृति हो तभी मिलन पूर्ण रूप से होता है मे तुम्हारे निर्णय का सम्मान करता हूं मगर एक पति के हक से जानना चाहता हूं वजह कया है .... वजह..... मोहनजी ....जानते है मे एक पढीलिखी लडकी हूं आपसे पहले भी मुझे दो लडके से मिलवाया गया था मैंने दोनो को रिजेक्ट कर दिया था और फिर आपसे मिलवाने पर मैंने आपको चुना जानते है कयो ....कयोंकि आपके विचारों ने मुझे आकर्षित किया था आपके दहेज प्रथा के विरुद्ध कहे शब्दों से मे बेहद प्रभावित थी ...और आपने तो साफ साफ दहेज के लिए मना किया था आपके मम्मी पापा ने भी ....जानते है उस वक्त मुझे आप किसी हीरो से कम नहीं लग रहे थे एक ऐसे इंसान की पत्नी बनने पर मुझे गर्व महसूस हो रहा था ....मगर कन्यादान के वक्त जब पापा ने आपको वो पच्चीस लाख का चेक दिया तो आपने माथे से लगाकर उसे आशिर्वाद के रुप मे तुरंत स्वीकार कर लिया ..... आप तो दोमुंहे वाले इंसान निकले ....और ऐसे इंसान के साथ मे कोई रिश्ता ....छी....आज आप हीरो नहीं ब्लकी वो विलेन जैसे दिखाई दे रहे है जो अपना बनकर पीठ मे छुरी घोप देता है .... ओह....तो ये बात है ..... हां....और मे सुबह होते ही यहां से चली जाऊंगी कहा.... कहीं भी ....पापा के घर नहीं जा सकती ....वरना लोगों के तानों से .... ....नहीं पढीलिखी हूं कहीं और चली जाऊंगी ..... अच्छा.... इतना सोचती हो अपने मम्मी पापा के लिए तो कभी सोचा तुम्हारे ऐसा करने पर उन्हें शाबाशी या तारीफें मिलेगी....सुधा ....मे तुम्हारे निर्णय लेने से नहीं रोक सकता ....तुम्हें मेरे साथ कोई सम्बंध नहीं बनाने तो मे तुम्हें बाध्य नहीं करूंगा मगर तुम शादी के बाद मेरी पत्नी स्वरूप मेरी जीवनसाथी हो ....तो एक सुझाव दूंगा.... तुम यही रहो .....एक पत्नी की तरह रिश्ता मत रखो मगर हम दोनो दोस्तों के जैसे तो रह सकते है ना.... यहां रहोगी तो ना केवल तुम्हारे मम्मी पापा ब्लकी मेरी मां को भी सुकून रहेगा ....देखो हमदोनों की ये दोस्ती दो परिवारों में सदैव सुकून और सम्मान बनाए रखेगी ... हां ....मे तुम्हें इसके लिए वचन देता हूं मे तुम्हें तुम्हारी स्वीकृति के बिना कभी भी छूने की कोशिश भी नहीं करूंगा ......सुधा ....बाहर दुनिया की नजरों में हमदोनों पति पत्नी का रुप बनाए रहेंगे मगर इस कमरे के अंदर केवल और केवल दो दोस्त बने रहेंगे जो एकदूसरे को बिना छुए बिना लडे अलग अलग रहेंगे ...मे वहां सोफे पर सोऊंगा तुम यहां बेड पर सो जाओ..... मगर.... मे ऐसे ..... सुधा ....कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने मम्मी पापा और मेरी मम्मी के बारे मे जरूर सोच लेना ....अन्यथा कल पछताने के आलावा कुछ नहीं बचेगा.... साल छ: महीने में दोनो परिवारों को समझा बुझा देगे हमारे बीच नहीं बन रही और ..... आगे तुम समझदार हो ....कहकर मोहन चादर तकिया लिए सोफे पर जा लेट गया था..... सुधा को भी उस वक्त मोहन की बातें सही लगी थी ....और उसने भी यही रहने का निर्णय ले लिया.... सचमुच मोहन अपने वचन पर अडिग रहा उसने कभी सुधा को छूने की कोशिश नहीं की .... ऐसे ही आज छ: महीने पूरे होने को आए थे दोनो ने अबतक कोई खुशखबरी नहीं दी थी तो मोहन की माता जी ने अपनी समधन सुधा की मम्मी से बातचीत की थी जिसके परिणाम स्वरूप वो सुधा से मिलने आई थी..... मगर अब सुधा ने निर्णय किया वो कल ही वकील से मिलकर मोहन से तलाक लेने की प्रक्रिया की शुरूआत करेगी ....अगले दिन वो एक वकील के पास पहुंची। सुधा अपने वकील के पास पहुंची और मोहन से तलाक के लिए बातचीत कर उसे नोटिस के जरिए सूचना देने की कार्यवाही में लग गई ...अचानक उसके मोबाइल पर बेल बजी....हैलो मम्मी...कया..... फोन हाथ से छूट गया ..... सुधा जी....सुधा जी .....कया हुआ ..... वकील साहब ....पापा ....पापा ....कहकर फूटफूटकर रोने लगी..... सुधा की माताजी ने फोन किया था उसके पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे .... सुधा तुरंत अपने घर पहुंची ....कुछ ही देर मे मोहन और उसकी माता जी भी वहां पहुंच गई .... इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा किया गया .....अभी पंद्रह दिन ही बीते थे की सुधा के भैया भाभी ने सुधा से कहा.... सुधा ....पापा तो रहे नहीं ....तो हम सोच रहे है मां को किसी वृद्ध आश्रम..... कया..... ये आप दोनो कैसी बातें कर रहे है ....भैया वो मां है आपकी जन्म देनेवाली ....और पापा के जाते ही आप दोनो ....छी....कितनी घटिया सोच है आपकी ....और हां मत भूलो पापा की संपत्ति मे उनकी पत्नी यानी मां का बराबर का हक है ..... कया ....हक...संपत्ति..... वो तो कबकी हमारे नाम पर हो गई थी खुद मां ने पापा से साइन करवाकर दिए थे ..... खैर..... तुम चाहो कोर्ट जाओ या जहन्नुम मे ....मगर अब ये घर हमारा है और कुछ दिन तक रह सकती हो मगर जल्द ही अपना इंतजाम कर लेना ......समझी ....मां की चमची ....कहकर दोनो दूसरे कमरे में चले गए.... अब सुधा को समझ नहीं आ रहा था वो कया करे ....पापा रहे नहीं मां को ऐसे कहा अकेले छोडें ...ऊपर से उसने मोहन से तलाक की कार्यवाही ....ओह नो.....तभी उसने वकील को फोन किया.... हैलो ....जी....मतलब आपने नोटिस..... उफ्फ..... ये मैंने कया किया .....अब मां को लेकर कहा जाऊंगी.... अचानक घरके बाहर गाडी आकर रुकी .....सुधा ने देखा.... ये ...ये तो मोहन की गाडी..... मोहन गाडी से उतरा और मां से आकर बोला.... मां ....अब सभी क्रियाओं की समाप्ति हो गई है आपकी इच्छाओं के लिए मे चुप था मगर अब आप मेरे साथ चलेगी बस ....जो जरूरी हो ले लीजिए .... मां अपने कुछ कपडो और पति के समान को समेटने लगी तबतक मोहन सुधा के पास आकर बोला.... सुधा.... ये लो तुम्हारे तलाक के पेपर्स .....चाहता तो नहीं था मगर .... इसके आगे कुछ बोल पाता तबतक मां आ गई.... चलो बेटा .... जी ....कहकर मां के हाथों से समान ले लिया.... वहीं सुधा सोच रही थी जब तलाक के पेपर्स पर मोहनजी ने साइन कर दिए तो फिर ये हमें कहा लेकर जा रहे है और कयो....मगर मां पर पहले ही पापा के चले जाने का दुख ...अगर कुछ कहा तो कहीं मां भी .....नहीं.... नहीं.... सोचकर उसने चुप्पी साधे रहने मे ही भलाई समझी.... मोहन ने घरके बाहर आकर गाडी रोकी ....सुधा मां को लिए जैसे ही घरमे घुसने लगी तो मोहन ने रोका .....सुधा.... वहां नहीं यहां .....मां अपने घरमे रहेगी... कया...... मगर हमारा घर तो ये है वो तो किसी और का.... सुधा ....वो हमारा घर है और हमारी दोनो मांओं का भी ....मगर ये .....ये घर केवल मां का है .... कहकर दरवाजा खोलकर मां को अंदर ले गया जहां पहले से सुधा के माता पिता की बडी से तस्वीर लगी थी ...मां को कमरे में बिठाकर मोहन सुधा संग दरवाजे के गेट पर आया और सुधा को देखकर बोला.... जानती हो सुधा....शादी की पहली रात तुमनें मुझसे वो पच्चीस लाख को लेकर...... सुधा मे शुरू से ही दहेज विरोधी रहा हूं आज भी उसपर अडिग हूं मगर शादी से दो दिन पहले तुम्हारे पापा मेरे पास आए थे और उन्होंने उसी वक्त मुझे तुम्हारे भैया भाभी के बारे मे उनके लालचवश घर कारोबार हथियाने की चल रहे षड्यंत्रों के बारे मे बताया.... मैंने उनसे उनपर ऐसा ना करने के लिए कोर्ट जाने की बात भी कहीं तो वह बोले..... बेटा ....हमारे बाद भी तो सबकुछ उसीका है मुझे अपनी फिक्र नहीं जबतक हूं ये दोनो कुछ नहीं कर सकते जानते है मे सबकुछ वापिस कैसे ले सकता हूं मगर मेरे बाद मेरी पत्नी ....वो सीधी है बेटे बहु ने उसे अपनी बातों से उलझा कर ....खैर ...वो ममता है उसकी ...मगर बेटा कल जब मे नहीं रहूंगा तो ये उसकी ममता का खयाल नहीं करेंगे उसे निकाल बाहर कर देगे.... तो आप मुझसे कया चाहते है पापा जी ..... बेटा ....शादी के वक्त एक अनोखे कन्यादान के रुप मे मेरे हाथों पच्चीस लाख रु ....ले लेना ....मेरे बाद मेरी पत्नी के भविष्य के लिए .....वो दरदर की ठोकरें ना खाए बेटा.... और हां....इसबात का मेरे मरने तक किसी से जिक्र मत करना तुम्हें इस बूढे बाप की कसम... सुधा ....ना चाहते हुए भी मुझे वो रु लेने पडे .....और इसीलिए ....मे तुम्हें कुछ बता भी नहीं पाया.... सुधा पापा की बातों को मानकर मैंने इसमें कुछ रकम जोडकर अपने साथ वाला घर खरीद लिया ....अब मां यहां बिना किसी के रौब के स्वेच्छा से जैसे चाहे रह सकती हैं ..... बाकी ....हमारा घर इनका अपना है .....और मुझे दोनो मांओं के साथ रहकर दोनो के प्यार और आशीर्वाद के साये में जीवन व्यतीत करना है..... मोहनजी..... दौडते हुए सुधा मोहन के पैरों में गिर गई... मुझे माफ कर दीजिए ...मुझे माफ ...... मगर तुम्हें तो.....मोहन बोला.... नहीं चाहिए .....नहीं चाहिए.... कहकर पेपर्स फाड दिए ...... सुधा .....पत्नी की जगह कदमों में नहीं पति के दिल मे होती है कहकर मोहन ने सुधा को सीने से लगा लिया... *एक सुंदर रचना......👍🌸 *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

+61 प्रतिक्रिया 16 कॉमेंट्स • 55 शेयर
Harpal Sharma Thuker Sep 21, 2021

+16 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 34 शेयर
Harpal Sharma Thuker Sep 21, 2021

+14 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 47 शेयर
Harpal Sharma Thuker Sep 21, 2021

+6 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 51 शेयर
Shudha Mishra Sep 21, 2021

+51 प्रतिक्रिया 21 कॉमेंट्स • 67 शेयर
PARMOD KUMAR GARG Sep 21, 2021

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर