Kailash Chandra Vyas
Kailash Chandra Vyas Oct 6, 2021

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कामेंट्स

Anup Kumar Sinha Oct 6, 2021
श्री गणेशाय नमः🙏🏻🙏🏻 शुभ दोपहर वंंदन । प्रथम पूज्य भगवान गणेश आपके जीवन को खुशियों से भर दें । वे आपकी हर मनोकामना पूरी कर दें 🙏🏻🌹

Kailash Chandra Vyas Oct 6, 2021
@anupkumar38 अनूप जी.शुभ संध्या. वंदन। आपका हर पल मंंगलमय होः।जगणेशायनमः।

Kailash Chandra Vyas Oct 6, 2021
@seemavalluvar1 जय संध्या वंदन.सीमा जी। जय श्री गणेश ाय नमः। आपका हर पल मंगलमय. हो। आप आनंदित रहे ं।आपके एनेरजेटिक पावर में वृध्दि होती रहें।

Kailash Chandra Vyas Oct 6, 2021
@radhasharma शुभ संध्या. वंदन जी।आपके सरल सहयोग से शुभ दिन मे निरनंतर वृध्दि होती रहेगी।आप आनंदित रहें।

Kailash Chandra Vyas Oct 6, 2021
@radhasharma जय हो गणेशाय नम।शुभ व लाभ प्रतिदिन आपके साथ रहे।शुभ रात्रि वंदनजी।

Anup Kumar Sinha Oct 8, 2021
जय माता दी 🙏🏻🙏🏻शुभ दोपहर वंंदन जी । माता रानी के दूसरे स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा आप सपरिवार पर हमेशा बनी रहे। आपका दिन शुभ हो 🙏🏻🌷

Anup Kumar Sinha Oct 9, 2021
जय माता दी 🙏🏻🙏🏻 शुभ प्रभात वंंदन जी । माता चंद्रघंटा की कृपा से आपको सम्मान, समृद्धि, स्वास्थ्य एवं प्रसन्नता की प्राप्ति हो ।आपका दिन शुभ हो🙏🏻🌹

ILA SINHA Oct 9, 2021
🥀🌺 Jai Mata Di🌺🥀 🥀🌺 Jai Maa Chandraghanta🌺🥀 🥀🌺 Good night🌺🥀

Anup Kumar Sinha Oct 10, 2021
ऊँ सूर्य देवाय नमः 🙏🏻🙏🏻 जय माता दी 🙏🏻🙏🏻 शुभ संध्या वंंदन । माता रानी के तृतीय स्वरूप स्कंदमाता की कृपा आप सपरिवार को प्राप्त हो 🙏🏻🌹 स्कंदमाता आपको यश, समृद्धि और प्रसन्नता प्रदान करें🙏🏻🌹

Anup Kumar Sinha Oct 12, 2021
जय माता दी 🙏🏻🙏🏻 शुभ संध्या वंंदन जी । माता कालरात्रि आप सपरिवार को अपना आशीर्वाद प्रदान करें। आपका हर दिन, हर पल शुभ हो 🙏🏻🌹

Anup Kumar Sinha Oct 14, 2021
जय माता दी 🙏🏻🙏🏻 शुभ रात्रि वंंदन जी ।आपको नवरात्रि के अंतिम दिन की हार्दिक शुभकामनाएं । माँ सिद्धिदात्री आपको यश,वैभव, सुख, शांति और प्रसन्नता प्रदान करें 🙏🏻🌹

Anup Kumar Sinha Oct 15, 2021
जय श्री राम🙏🏻🙏🏻 सुप्रभात वंंदन जी । आप सपरिवार को पावन पर्व दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व आपके जीवन में नयी खुशियाँ लाये 🙏🏻🌺

Kailash Chandra Vyas Oct 15, 2021
@anupkumar38 असत्य पर सत्य कि व अज्ञा पर ज्ञान कि विजय दिवस कि शुभकामनाएं जी। इन 9 दिवस मे आपका अटूट सहयोग के लिए साधुवाद जी। शुभ रात्रि वंदन अनूपजी।

Anupam Mohanta Dec 6, 2021

गणपति साधना का महत्व;- 1- साधना के जरिए ईश्वर की कृपा प्राप्ति और साक्षात्कार के मुमुक्षुओं के लिए गणेश उपासना नितान्त अनिवार्य है। इसके बगैर न तो जीवन में और न ही साधना में कोई सफल हो सकता है। समस्त मांगलिक कार्यों के उद्घाटक एवं ऋद्धि-सिद्धि के अधिष्ठाता भगवान गणेश का महत्व वैदिक एवं पौराणिक काल से सर्वोपरि रहा है।भारतीय संस्कृति में गणेश ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो सर्वप्रथम पूजे जाते हैं। उन्हें ‘गणपति-गणनायक’ की पदवी प्राप्त है। ‘ग’ का अर्थ है- जीवात्मा, ‘ण’ का अर्थ है- मुक्तिदशा में ले जाना तथा ‘पति’ का अर्थ है- आदि और अंत से रहित परमात्मदशा में लीन होने तक की कृपा करने वाले देव। 2- 'रुद्रयामल तंत्र' में साधना-मार्ग पर बढ़ने वाले साधकों के निमित्त महागणपति साधना नितांत आवश्यक मानी गई है। महागणपति की साधना इष्ट सिद्धि, विघ्ननाश एवं द्रव्य प्राप्ति के लिए अत्यंत उपयोगी कही गई है। शास्त्रों में गणपति का सूक्ष्म रूप ‘ओंकार’ है तथा स्वास्तिक चिन्ह को गणपति का प्रतीक माना जाता है अर्थात स्वास्तिक उनका प्रतिरूप है। चूंकि ‘ग’ बीजाक्षर है, अतः यह समूचे स्वास्तिक चिन्ह का संक्षिप्त रूप है। इस प्रकार गणेश जी की मूर्ति अथवा चित्र तथा स्वस्तिक अथवा ‘ग’ बीज- किसी की भी पूजा की जाए, वह गणपति की ही पूजा होगी और उसका पूर्ण फल प्राप्त होगा। 3- गणपति साधना के तीन माध्यम हैं- मूर्ति (प्रतिमा या चित्र), यंत्र और मंत्र।श्रीमहागणपति मन्त्र में गणपति का ” गं ” बीज है और ” ग्लौं ” बीज भी है । गं बीज गणपति तत्व जागृत करता है और ग्लौं बीज …भूमि-वराह का कारक होने से वो जागतिक विश्व विस्तार का प्रतीक है।गणपति साधना अत्यंत महत्वपूर्ण है।ये एकमेव ऐसी श्रेष्ठ साधना है जो आपको भौतिक कर्मो से मुक्ति देने में सक्षम है क्योंकि बाकी कोई देवता कर्म नष्ट नही करते । साधक को आगे की साधना के पथ पर आरोहण करने के लिए , साधक के जो कुलदोष पितृदोष है ,गणपति उसका निवारण करते हैं।जिससे कुल-पितरो के आशीर्वाद मिलते हैं; बिना इनके आशीर्वाद कोई साधना आगे नही बढ़ती हैं । 4- श्री महागणपति साधना में बहुत सारे साधको को प्रथमतः शरीर के हड्डियों के सन्धियों , जोड़ो में सामान्य दर्द होता हैं ,आलस्य निद्रा भी आनी शुरू होती हैं , एक जड़त्व आना शुरू होता है ,अतः साधना में ये लक्षण शुरू होना आवश्यक हैं।क्योंकि , मनुष्य के शरीर की संधि जोड़ो में ही कुल-पितृदोष की नकारात्मक ऊर्जा समायी रहती हैं ;जिसको वो खींचना शुरू करते हैं।बहुत कम साधको को इसमे हवा में तैरने जैसे अनुभव आते हैं;या चैतन्यता का अनुभव होता हैं । 5- श्री महागणपति को तीन नेत्र है ,ये त्रैलोक्य ज्ञान आधिष्ठता रूप में दिखते हैं ,जैसे दसमहाविद्या और शिव।हात में अनार है , ये अनार अनेकों ब्रम्हांडो को अपने अंदर दाने दाने की तरह लेकर अपनी प्रतिष्ठा दिखाता है।मस्तक पर जो चन्द्रचूड़ामनी है वो 16 कलाओ युक्त है।दोनों कनपटियों से झरने वाले मद जल को पीने वाले भुंगो को वो अपने लंबे कान हिलाये ,दूर कर रहे हैं ।सूंड में अमृतकलश है , जो आपको मनचाहा वरदान तथा अमरत्व देने योग्य है।ये सब चिन्ह श्रीमहागणपति की उच्चतम श्रेष्ठता दिखाते है। 6- गणेशजी की कृपा प्राप्ति के लिए इच्छुक व्यक्ति को चाहिए कि वह गणेशजी के किसी भी छोटे से मंत्र या स्तोत्र का अधिक से अधिक जप करे तथा मूलाधार चक्र में गणेशजी के विराजमान होने का स्मरण हमेशा बनाए रखे। इससे कुछ ही दिन में गणेशजी की कृपा का स्वतः अनुभव होने लगेगा।गणेश प्रतिमाओं का दर्शन विभिन्न मुद्राओं में होता है लेकिन प्रमुख तौर पर वाम एवं दक्षिण सूण्ड वाले गणेश से आमजन परिचित हैं। इनमें सात्विक और सामान्य उपासना की दृष्टि से वाम सूण्ड वाले गणेश और तामसिक एवं असाधारण साधनाओं के लिए दांयी सूण्ड वाले गणेश की पूजा का विधान रहा है। 7- तत्काल सिद्धि प्राप्ति के लिए श्वेतार्क गणपति की साधना भी लाभप्रद है। ऐसी मान्यता है कि रवि पुष्य नक्षत्रा में सफेद आक की जड़ से बनी गणेश प्रतिमा सद्य फलदायी है।देश में गणेश उपासना के कई-कई रंग देखे जा सकते हैं। यहां की प्राचीन एवं चमत्कारिक गणेश प्रतिमाएं व मन्दिर दूर-दूर तक गणेश उपासना की प्राचीन धाराओं का बोध कराते रहे हैं। ● उच्छिष्ट गणपति साधना करने में अत्यन्त सरल, शीघ्र फल को प्रदान करने वाला, अन्न और धन की वृद्धि के लिए, वशीकरण को प्रदान करने वाला भगवान गणेश जी का ये दिव्य तांत्रिक साधना है । इसकी साधना करते हुए मुँह को जूठा रखा जाता है एवं सुबह दातुन भी करना वर्जित है । उच्छिष्ट गणपति साधना को जीवन की पूर्ण साधना कहा है। मात्र इस एक साधना से जीवन में वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है, जो अभीष्ट लक्ष्य होता है। अनेक इच्छाएं और मनोरथ पूरे होते हैं। इससे समस्त कर्जों की समाप्ति और दरिद्रता का निवारण,निरंतर आर्थिक-व्यापारिक उन्नति,लक्ष्मी प्राप्ति,रोजगार प्राप्ति,भगवान गणपति के प्रत्यक्ष दर्शनों की संभावना भी है। यह साधना प्रयोग किसी भी बुधवार को रात्री मे संपन्न किया जा सकता है। साधक निम्न सामग्री को पहले से ही तैयार कर लें, जिसमें जल पात्र, केसर, कुंकुम, चावल, पुष्प, माला, नारियल, दूध,गुड़ से बना खीर, घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, मोदक आदि हैं। इनके अलावा उच्छिष्ट गणपति यंत्र और मूंगे की माला की आवश्यकता होती ही है। सर्वप्रथम साधक, स्नान कर,लाल वस्त्र पहन कर,आसन भी लाल रंग का हो, पूर्व/उत्तर की ओर मुख कर के बैठ जाए और सामने उच्छिष्ट गणपति सिद्धि यंत्र को एक थाली में, कुंकुम से स्वस्तिक बनाकर, स्थापित कर ले और फिर हाथ जोड़ कर भगवान गणपति का ध्यान करें। विनियोग : ॐ अस्य श्री उच्छिष्ट गणपति मंत्रस्य कंकोलऋषि:, विराट छन्द : उच्छिष्टगणपति देवता सर्वाभीष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोग: । ध्यान मंत्र: सिंदुर वर्ण संकाश योग पट समन्वितं लम्बोदर महाकायं मुखं करि करोपमं अणिमादि गुणयुक्ते अष्ट बाहुत्रिलोचनं विग्मा विद्यते लिंगे मोक्ष कमाम पूजयेत। ध्यान मंत्र बोलने के बाद अपना कोइ भी एक इच्छा बोलकर यंत्र पर एक लाल रंग का पुष्प अर्पित करे। द्वादशाक्षर मन्त्र : ।। ॐ ह्रीं गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।। om hreeng gang hasti pishaachi likhe swaha मंत्र का नित्य 21 माला जाप 11 दिनो तक मूंगे की माला से करना है अंत में अनार का बलि प्रदान करें। बलि मंत्र:- ।। ॐ गं हं क्लौं ग्लौं उच्छिष्ट गणेशाय महायक्षायायं बलि: ।। अंत में शुद्ध घृत से भगवान गणपति की आरती संपन्न करें और प्रसाद वितरित करें। इस प्रकार से साधक की मनोवांछित कामनाएं निश्चय ही पूर्ण हो जाती हैं और कई बार तो यह प्रयोग संपन्न होते ही साधक को अनुकूल फल प्राप्त हो जाता है। कलियुग मे यह साधना शीघ्र फलदायीं होता हैं।

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Ammbika Dec 7, 2021

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rinku Dec 5, 2021

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