
Rama Devi Sahu
4 days ago
*🕉️ हवन में आहुति देते समय क्यों कहते हैं ‘स्वाहा’?* *🔥 अग्निदेव की दाहिकाशक्ति हैं 'स्वाहा'* *अग्निदेव में जो जलाने की तेजरूपा (दाहिका) शक्ति है, वह देवी स्वाहा का सूक्ष्मरूप है। हवन में आहुति में दिए गए पदार्थों को भस्म करके देवी स्वाहा ही उसे* *देवताओं तक आहार के रूप में पहुँचाती हैं। इसीलिए इन्हें ‘परिपाककरी’ भी कहा जाता है।* *सृष्टिकाल में परब्रह्म परमात्मा 'प्रकृति' और 'पुरुष' के रूप में प्रकट होते हैं। इन्हीं आदिशक्ति मूलप्रकृति के एक अंश से देवी स्वाहा का प्रादुर्भाव हुआ, जो* *यज्ञभाग ग्रहण कर देवताओं का पोषण करती हैं।* *🌺 स्वाहा के बिना देवताओं को नहीं मिलता था भोजन* *सृष्टि के आरम्भ में, ब्राह्मण यज्ञ में जो हवनीय सामग्री अर्पित करते थे, वह देवताओं तक नहीं पहुँच पाती थी। भूख से व्याकुल देवता ब्रह्माजी के पास गए। देवताओं की व्यथा सुनकर ब्रह्माजी ने भगवान* *श्रीकृष्ण का ध्यान किया और उनके आदेश पर देवी मूलप्रकृति की उपासना की। इससे प्रसन्न होकर देवी* *मूलप्रकृति की कला से देवी ‘स्वाहा’ प्रकट हुईं*। *ब्रह्माजी ने उनसे प्रार्थना की– "हे देवी! आप अग्निदेव की दाहिकाशक्ति बनें। आपके बिना अग्नि आहुतियों को भस्म करने में असमर्थ है। आप अग्निदेव की गृहस्वामिनी बनकर लोकोपकार करें।"* *✨ भगवान श्रीकृष्ण के लिए घोर तपस्या* *यह सुनकर भगवान श्रीकृष्ण में अनुरक्त देवी स्वाहा उदास हो गईं। उन्होंने कहा कि परब्रह्म श्रीकृष्ण के अलावा यह संसार मात्र एक भ्रम है और वे केवल उन्हीं को प्राप्त करना चाहती हैं। यह कहकर देवी स्वाहा तपस्या करने चली गईं और वर्षों तक एक पैर पर खड़े होकर घोर तप किया।* *🙏 श्रीकृष्ण का वरदान और अग्निदेव से विवाह* *उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए और वरदान दिया*– "*तुम वाराहकल्प में मेरी प्रिया बनोगी और तुम्हारा नाम ‘नाग्नजिती’ होगा। परन्तु इस समय तुम दाहिकाशक्ति से सम्पन्न होकर अग्निदेव की पत्नी बनो और देवताओं को तृप्त करो। जो मनुष्य मन्त्र के अंत में तुम्हारा नाम* (स्वाहा) *उच्चारित करके हवन सामग्री अर्पण करेगा, वह सहज ही देवताओं को प्राप्त हो जाएगा।"* *इसके पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा से अग्निदेव का देवी स्वाहा के साथ विवाह हुआ। तब से लेकर आज तक ऋषि, मुनि और ब्राह्मण मन्त्रों के साथ ‘स्वाहा’ का उच्चारण करके ही अग्नि में आहुति देते हैं। स्वाहाहीन मन्त्र से किया हुआ हवन कोई फल नहीं देता है!* *🌸 देवी स्वाहा के सिद्धिदायक 16 नाम* *जो मनुष्य देवी स्वाहा के इन 16 नामों का पाठ करता है, उसका कोई भी शुभ कार्य अधूरा नहीं रहता और वह समस्त सिद्धियाँ प्राप्त कर लेता है:* स्वाहा वह्निप्रिया वह्निजाया संतोषकारिणी शक्ति क्रिया कालदात्री परिपाककरी ध्रुवा गति नरदाहिका दहनक्षमा संसारसाररूपा घोरसंसारतारिणी देवजीवनरूपा देवपोषणकारिणी *🚩🔱🛕🔱🚩*

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