Renu Singh
Renu Singh Oct 15, 2021

🙏🌹🌹🙏🌹 Jai Shree Ram 🌹🙏🌹🌹🙏 🌹🌹🙏 Shubh Ratri Vandan Ji 🙏🌹🌹🙏🌹🌹🍀🍀🙏🌹🌹🍀🍀🙏🌹🌹🍀🍀🙏

🙏🌹🌹🙏🌹 Jai Shree Ram 🌹🙏🌹🌹🙏
🌹🌹🙏 Shubh Ratri Vandan Ji 🙏🌹🌹🙏🌹🌹🍀🍀🙏🌹🌹🍀🍀🙏🌹🌹🍀🍀🙏

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कामेंट्स

GOVIND CHOUHAN Oct 16, 2021
🌺Jai Shree Radhe Radhe Krishan Mohan Murari Jiii 🌺🌺🌺🙏🙏 Shubh Raatri Vandan Pranaam Jiii Didi 👏👏

Anilkumar Marathe Oct 16, 2021
जय श्रीकृष्ण नमस्कार खुशियो की सदाबहार आदरणीय प्यारी रेनु जी !! 🌹आपकी जिन्दगी में खुशियो का दीप सदा झगमगाता रहे, हर कदम पर मिले कामयाबी आपको, कभी ना हो कांटों का सामना, आपके घर आंगन में सुख, समृद्धि और धन की निरंतर बरसात हो ओर चारो तरफ आपका आदर सन्मान हो ऐवम आपके कदम जहाँ भी पड़े वहाँ सिर्फ खुशियों की बरसात हो यही है दिल से दुआ मेरी !! 🌹शुभ रात्री स्नेह वंदन जी !!

Reena Singh Oct 16, 2021
Jai shri ram🙏 good night vandan pyari bahan ji 🌹🌹🙏🙏

नरेश श्रीहरि 🙏 Oct 16, 2021
जय सिया राम बहिन जी 🙏 ठाकुर जी की कृपा से आप हमेशा स्वस्थ रहें शुभ रात्रि वंदन बहिन जी

Mamta Soni Oct 16, 2021
🙏🌹jai shree krishna🌹🙏 Radhe radhe🙏 shubh ratri vandan dear sister ji🙏bhagwan ji aap ko hamesha khush rakhe🌹🌹 🙏

Renu Singh Oct 16, 2021
@reenasingh3 Jai Shree Ram 🌹🙏 Shubh Ratri Meri Pyari Bahena Ji 🙏 Aàpka Har Pal Shubh Avam Mangalmay ho 🌸🙏

Renu Singh Oct 16, 2021
@mamtasoni3 Jai Shree Radhe Krishna 🙏🌹 Shubh Ratri Meri Pyari Bahana Ji 🙏 Thakur Ji ki kripa Aap aur Aàpke Pariwar pr hamesha Bni rhe 🙏🌹

किशन तिवारी Oct 16, 2021
🌹🌷🌹राम राम बहन जय श्री माता की बहन🌸🌼🌸 चरण छूकर सादर प्रणाम करता हूँ मेरी प्यारी बहना,🌹🌼🌹श्रीमाता की कृपा आप पर सदैव बनी रहे बहन,🌹 हमेशा हँसती मुस्कराती रहो,हम प्रार्थना करते हैं हे जगतजननी माँ मेरी बहन को सदैव निरोग रखना दीर्घायु करना🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌿खुशियों रूपी फूल सदा आपको महकाते रहें बहारें कभी आपका दामन ना छोड़ें🌿🌾🌹आपके माँथे की बिंदिया सदा चमकती रहे, हाँथों में चूड़ियां  सिर पै चुनरिया सजती रहें🌹श्रीमाता की कृपा से सदा सुहागिन रहो बहन जुग जुग जियो बहना🌷🌹शुभरात्रि वन्दन बहन🙏🏼🌹🌹🙏🏼🌹🌹

Hemant Kasta Oct 16, 2021
Jai Shree Ram Ji Namah, Jai Shree Radhe Krishna Ji Namah, Radhe Radhe Ji, Beautiful Post, Anmol Massage, Dhanywad Vandaniy Bahena Ji Pranam, Aapke Aanewala Har Pal Khushiya Bhara Ho, Aap Sada Swasth Raho, Khush Raho, Suraskhit Raho, Aap Par Sadaiv Khushiya Barasati Rahe. Shubh Ratri Vandan.

💥Radha Sharma💥 Oct 16, 2021
Jai shri radhe krishna ji good night ji dear sister. Jai shri santoshi mata ji 🙏🌷🙏

Jawahar lal bhargava Oct 16, 2021
🚩 Jai Shree Radhe Krishna ji 🌹🌹🌿🌿🙏🙏🌿🌿🌹🌹 Shubh ratri Sister ji 🙏🙏

Rajesh Rajesh Oct 17, 2021
OM SHREE SURYAY NAMAH SHUBH PRABHAT BEHENA BHAGVAN SHREE SURYA NARAYAN DEV KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGAL MAY HO AAP OR AAP KA PARIVAR HAMESA KHUS RAHE SWATH RAHE SUKHI RAHE BEHENA PRANAM

Mamta Chauhan Oct 17, 2021
Om suryay namah🌹🙏 Shubh prabhat vandan meri pyari bahan ji aapka din shubh ho mamgalmay ho aapki sbhi manokamna puri ho🌹 Radhe radhe 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

किशन तिवारी Oct 17, 2021
🌹🌷🌹राम राम बहन जय श्री माता की बहन🌸🌼🌸 चरण छूकर सादर प्रणाम करता हूँ मेरी प्यारी बहना,🌹🌼🌹श्रीमाता की कृपा आप पर सदैव बनी रहे बहन,🌹 हमेशा हँसती मुस्कराती रहो,हम प्रार्थना करते हैं हे जगतजननी माँ मेरी बहन को सदैव निरोग रखना दीर्घायु करना🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌿खुशियों रूपी फूल सदा आपको महकाते रहें बहारें कभी आपका दामन ना छोड़ें🌿🌾🌹आपके माँथे की बिंदिया सदा चमकती रहे, हाँथों में चूड़ियां  सिर पै चुनरिया सजती रहें🌹श्रीमाता की कृपा से सदा सुहागिन रहो बहन जुग जुग जियो बहना🌷🌹शुभप्रभात वन्दन बहन🙏🏼🌹🌹🙏🏼🌹🌹

किशन तिवारी Oct 17, 2021
🌹🌷🌹राम राम बहन जय श्री माता की बहन🌸🌼🌸 चरण छूकर सादर प्रणाम करता हूँ मेरी प्यारी बहना,🌹🌼🌹श्रीमाता की कृपा आप पर सदैव बनी रहे बहन,🌹 हमेशा हँसती मुस्कराती रहो,हम प्रार्थना करते हैं हे जगतजननी माँ मेरी बहन को सदैव निरोग रखना दीर्घायु करना🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌿खुशियों रूपी फूल सदा आपको महकाते रहें बहारें कभी आपका दामन ना छोड़ें🌿🌾🌹आपके माँथे की बिंदिया सदा चमकती रहे, हाँथों में चूड़ियां  सिर पै चुनरिया सजती रहें🌹श्रीमाता की कृपा से सदा सुहागिन रहो बहन जुग जुग जियो बहना🌷🌹शुभप्रभात वन्दन बहन🙏🏼🌹🌹🙏🏼🌹🌹

Ranjit chavda Dec 7, 2021

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Sudha Mishra Dec 7, 2021

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आचमन तीन बार ही क्यों? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पूजा, यज्ञ आदि आरंभ करने से पूर्व शुद्धि के लिए मंत्र पढ़ते हुए जल पीना ही आचमन कहलाता है। इससे मन और हृदय की शुद्धि होती है। धर्मग्रंथों में तीन बार आचमन करने के संबंध में कहा गया है। प्रथमं यत् पिवति तेन ऋग्वेद प्रीणाति । यद् द्वितीयं तेन यजुर्वेदं प्रीणाति यद् तृतीयं तेन सामवेदं प्रीणाति ॥ अर्थात् तीन बार आचमन करने से तीनों वेद यानी-ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मनु महाराज के मतानुसार त्रिराचामेदपः पूर्वम् । -मनुस्मृति 2/60 अर्थात् सबसे पहले तीन बार आचमन करना चाहिए। इससे कंठशोषण दूर होकर, कफ़ निवृत्ति के कारण श्वसन क्रिया में व मंत्रोच्चारण में शुद्धता आती है। इसीलिए प्रत्येक धार्मिक कृत्य के शुरू में और संध्योपासन के मध्य बीच-बीच में अनेक बार तीन की संख्या में आचमन का विधान बनाया गया है। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि इससे कायिक, मानसिक और वाचिक तीनों प्रकार के पापों की निवृत्ति होकर न दिखने वाले फल की प्राप्ति होती है। अंगूठे के मूल में ब्रह्मतीर्थ, कनिष्ठा के मूल प्रजापत्यतीर्थ, अंगुलियों के अग्रभाग में देवतीर्थ, तर्जनी और अंगूठे के बीच पितृतीर्थ और हाथ के मध्य भाग में सौम्यतीर्थ होता है, जो देवकर्म में प्रशस्त माना गया है। आचमन हमेशा ब्रह्मतीर्थ से करना चाहिए। आचमन करने से पहले अंगुलियां मिलाकर एकाग्रचित्त यानी एकसाथ करके पवित्र जल से बिना शब्द किए 3 बार आचमन करने से महान फल मिलता है। आचमन हमेशा 3 बार करना चाहिए। आचमन के मंत्र 〰️〰️〰️〰️〰️ जल लेकर तीन बार निम्न मंत्र का उच्चारण करते हैं:- हुए जल ग्रहण करें- ॐ केशवाय नम: ॐ नाराणाय नम: ॐ माधवाय नम: ॐ ह्रषीकेशाय नम:, बोलकर ब्रह्मतीर्थ (अंगुष्ठ का मूल भाग) से दो बार होंठ पोंछते हुए हस्त प्रक्षालन करें (हाथ धो लें)। उपरोक्त विधि ना कर सकने की स्थिति में केवल दाहिने कान के स्पर्श मात्र से ही आचमन की विधि की पूर्ण मानी जाती है। आचमन करने के बारे में मनुस्मृति में भी कहा गया है कि ब्रह्मतीर्थ यानी अंगूठे के मूल के नीचे से इसे करें अथवा प्राजापत्य तीर्थ यानी कनिष्ठ उंगली के नीचे से या देवतीर्थ यानी उंगली के अग्रभाग से करें, लेकिन पितृतीर्थ यानी अंगूठा व तर्जनी के मध्य से आचमन न करें, क्योंकि इससे पितरों को तर्पण किया जाता है, इसलिए यह वर्जित है। आचमन करने की एक अन्य विधि बोधायन में भी बताई गई है, जिसके अनुसार हाथ को गाय के कान की तरह आकृति प्रदान कर तीन बार जल पीने को कहा गया है। आचमन के बारे में स्मृति ग्रंथ में लिखा है की :- प्रथमं यत् पिबति तेन ऋग्वेद प्रीणाति। यद् द्वितीयं तेन यजुर्वेद प्रीणाति। यत् तृतीयं तेन सामवेद प्रीणाति। पहले आचमन से ऋग्वेद और द्वितीय से यजुर्वेद और तृतीय से सामवेद की तृप्ति होती है। आचमन करके जलयुक्त दाहिने अंगूठे से मुंह का स्पर्श करने से अथर्ववेद की तृप्ति होती है। आचमन करने के बाद मस्तक को अभिषेक करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं। दोनों आंखों के स्पर्श से सूर्य, नासिका के स्पर्श से वायु और कानों के स्पर्श से सभी ग्रंथियां तृप्त होती हैं। माना जाता है कि ऐसे आचमन करने से पूजा का दोगुना फल मिलता है। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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Runa Sinha Dec 7, 2021

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Babbu Bhai Dec 7, 2021

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SONU NAREDA Dec 7, 2021

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