Bindu Singh
Bindu Singh Sep 20, 2021

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कामेंट्स

rakesh dubey Sep 20, 2021
Om Namah shivay🚩🚩 Har Har mahadev ji🌿🌷🌿 GOOD evening ji🍀🌻🍀

संजीव शर्मा 9779584243 Sep 20, 2021
जिंदगी सभी के लिए रंगीन किताब है फर्क है तो बस इतना कि कोई हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है, और कोई बस पन्ने पलट रहा है...!!!🙏🏻 #जय_जय_सियाराम🙏🏻🙏🏻🚩

GOVIND CHOUHAN Sep 20, 2021
Jai Ho Har Har Mahadev Jii Ki 🌺 Jai Ho Baba Bholenath Jii ki 🌺🙏🙏 Good Evening Jiii 🙏🙏 Pitar Paksh Ki Hardik Subh Kamnaye jiii 🙏🙏

🔴 Suresh Kumar 🔴 Sep 20, 2021
हर हर महादेव 🙏 शुभ संध्या वंदन मेरी बहन। 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

parteek kaushik Sep 20, 2021
🌺🙏🌺🙏पितृ श्राद्ध पक्ष🙏🌺🙏🌺 ॐ नमः शिवाय 🌺🙏🌺 शुभ संध्या नमन 🌺🙏ईश्वर की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी। आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो बहना जी🙏🌺 🌺🙏जय-जय श्री राधेकृष्णा🙏🌺

Shyam Pandit0174gmailcom Sep 20, 2021
ओम नम शिवाय राम राम ज़ी ईश्वर आप सभी को खुश रेख जी

kamala Maheshwari Sep 20, 2021
सर्वपितृ को सादर नमन जय भोलेनाथ की जयश्री बाकैविहरीकी कान्हा की कृपादृष्टि सदैवआपपर और आपके परिवार बनी रहे आपका दिन मंगलमय हो जय श्री कृष्णा जी 💠♦️💠♦️💠♦️💠♦️💠♦️💠♦️💠

B L Yadav.(CMO) Sep 20, 2021
OM NAMO SHIVAAY 🙏🙏🙏 Har Har Mahadev 🙏🙏🙏 shubh Sandhya Vandan 🙏🙏🙏

......j Sep 20, 2021
jai shree radhe Krishna ji beautiful good night ji sweet dremes ji

......j Sep 20, 2021
beautiful post ji 👌👌👌

Bhagat ram Sep 20, 2021
🌹🌹🕉️ नमः शिवाय हर हर महादेव जी 🙏🙏🌺🌿💐🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन जी 🙏🙏🌺🌿💐🌹🌹

R H BHAtt Sep 20, 2021
Har mahadav Har har mahadav om namah shivaya Shubh ratri ji Vandana ji Jai matage

Lalita Sep 20, 2021
हर हर महादेव

my mandir Oct 25, 2021

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Jasbir Singh nain Oct 25, 2021

शुभ रात्रि जी *भक्तों की दरिद्रता* 🔸🔸🔹🔸🔸 जगत−जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया। वह दौड़ी−दौड़ी ओघड़दानी शंकर के पास गयीं और कहने लगीं−”भगवन्! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पसीजता। कम−से−कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।” महादेव ने हँसते हुए कहा- “शुभे! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” माँ भवानी अचरज से बोलीं- “तो क्या आपके भक्तों को उद्रपूर्ति के लिए भोजन को आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती?” श्री शिव जी ने कहा- “परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।” भगवान शंकर के आदेश को देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाकर भर्तृहरि के पास पहुँचीं और बोली- ”बेटा! मैं पिछले कई दिन से भूखी हूँ। क्या मुझे भी कुछ खाने को देगा?” “अवश्य" भर्तृहरि ने केवल चार रोटियाँ सेंकी थीं उनमें से दो बुढ़िया माता के हाथ पर रख दीं। शेष दो रोटियों को खाने के लिए आसन लगा कर उपक्रम करने लगे। भिखारिन ने दीन भाव से निवेदन किया- "बेटा! इन दो रोटियों से कैसे काम चलेगा? मैं अपने परिवार में अकेली नहीं हूँ एक बुड्ढा पति भी है उसे भी कई दिन से खाने को नहीं मिला है।” भर्तृहरि ने वे दोनों रोटियाँ भी भिखारिन के हाथ पर रख दीं। उन्हें बड़ा सन्तोष था कि इस भोजन से मुझसे से भी अधिक भूखे प्राणियों का निर्वाह हो सकेगा। उन्होंने कमण्डल उठाकर पानी पिया। सन्तोष की साँस ली और वहाँ से उठकर जाने लगे। तभी आवाज सुनाई दी- "वत्स! तुम कहाँ जा रहे हो?" भर्तृहरि ने पीछे मुड़ कर देखा। माता पार्वती दर्शन देने के लिए पधारी हैं। माता बोलीं- "मैं तुम्हारी साधना से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें जो वरदान माँगना हो माँगो।" प्रणाम करते हुए भर्तृहरि ने कहा- "अभी तो अपनी और अपने पति की क्षुधा शाँत करने हेतु मुझसे रोटियाँ माँगकर ले गई थीं। जो स्वयं दूसरों के सम्मुख हाथ फैला कर अपना पेट भरता है वह क्या दे सकेगा। ऐसे भिखारी से मैं क्या माँगू।" पार्वती जी ने अपना असली स्वरूप दिखाया और कहा- "मैं सर्वशक्ति मान हूँ। तुम्हारी परदुःख कातरता से बहुत प्रसन्न हूँ जो चाहो सो वर माँगो।" भर्तृहरि ने श्रद्धा पूर्वक जगदम्बा के चरणों में शिर झुकाया और कहा- "यदि आप प्रसन्न हैं तो यह वर दें कि जो कुछ मुझे मिले उसे दीन−दुखियों के लिए लगाता रहे और अभावग्रस्त स्थिति में बिना मन को विचलित किये शान्त पूर्वक रह सकूँ।" पार्वती जी 'एवमस्तु' कहकर भगवान् शिव के पास लौट गई। त्रिकालदर्शी शम्भु यह सब देख रहे थे उन्होंने मुसकराते हुए कहा- "भद्रे, मेरे भक्त इसलिए दरिद्र नहीं रहते कि उन्हें कुछ मिलता नहीं है। परंतु भक्ति के साथ जुड़ी उदारता उनसे अधिकाधिक दान कराती रहती हैं और वे खाली हाथ रहकर भी विपुल सम्पत्तिवानों से अधिक सन्तुष्ट बने रहते है।" 🌻हर-हर महादेव🕉 ओम नमः शिवाय

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DINESH D NIMAVAT Oct 25, 2021

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Renu Singh Oct 25, 2021

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Shiva Kumar Oct 26, 2021

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Shiva Kumar Oct 26, 2021

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