RANJAN ADHIKARI
RANJAN ADHIKARI Nov 10, 2021

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कामेंट्स

Anil Nov 12, 2021
good morning 🌹🙏🌹

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sn vyas Jan 21, 2022

🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🚩 *"सनातन परिवार"* 🚩 *की प्रस्तुति* 🔴 *आज का प्रात: संदेश* 🔴 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘️ *भारतीय सनातन संस्कृति सदैव से पूरे विश्व के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती आई है | समस्त विश्व भारतीय आदर्शों को अपनाकर प्रत्येक क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रहा है | परंतु आज हम भारतीय अपनी संस्कृति और अपने आदर्शों को भूलते जा रहे हैं | पुरातन काल में जब घर में कोई वैवाहिक कार्यक्रम होता था तब घर की सारी व्यवस्थाएं महिलाओं के ऊपर निर्भर होती थी | और वह महिलाएं पूरी जिम्मेदारी के साथ विवाह की सारी व्यवस्था संपन्न करती थीं | भोजन से लेकर के अन्य व्यवस्थाएं सब उन्हीं के हाथ में होती थी उस समय का भोजन बहुत ही स्वादिष्ट एवं सुपाच्य होता था | इन बैबाहिक कार्यक्रमों में बाजे के ऊपर नाचने वाले और नाचने वालियाँ बाहर से बुलाए जाते थे | घर के महिलाओं की एक मर्यादा होती थी जो कि अपनी लक्ष्मण रेखा के अंदर रह कर के एक मर्यादित आदर्श प्रस्तुत करती थी | परंतु आज आधुनिकता के नाम पर जो नाच नाचा जा रहा है वह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या आदर्श प्रस्तुत करेगा यह शायद हम भी नहीं जानते हैं | आज भोजन बनाने की जिम्मेदारी बाहर वालियों के ऊपर है और बैंड बाजे पर नाचने की जिम्मेदारी घर की बहू और बेटियों ने ले ली है | जो गाने हम घर परिवार में बैठकर सुन नहीं सकते ऐसे गानों पर आज घर की महिलायें भरे समाज में नाचती हैं और हम मूकदर्शक बनकर आनंद उठाते हैं | विचार कीजिए हम किस संस्कृति का पोषण कर रहे हैं |* *आज के कार्यक्रमों की अपेक्षा पहले भोजन कम बर्बाद होते थे , क्योंकि घर की महिलाएं पूरी जिम्मेदारी के साथ भोजन बनाती थी और परोसती थी | जिससे भोजन की बर्बादी ना के बराबर होती थी | परंतु आज हम ऐसे युग में आ गए हैं जहां की महिलाएं एवं पुरुष इतने आधुनिक हो गए हैं कि वे ना तो भोजन बनाना चाहती हैं और ना ही हम परोसना चाहते हैं | एक कैटर्स को जिम्मेदारी देकर ही हम सारी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं | और कै्टर्स इतनी सामग्रियां लिख देता है जितने लोग आपके यहां आने वाले भी नहीं होते हैं | पहले भोजन जब परोसा जाता था तब आदमी न मन रहते हुए भी थोड़ा ज्यादा खाता था | क्योंकि परोसने वालों के द्वारा प्रेम खिलाया जाता है | परंतु आजकल अपने हाथ से परोसना और अपने हाथ से खाना , जब से यह नियम लागू हुआ है तब से भोजन की बर्बादी बढ़ गई है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देखता हूँ कि आज जहां भोजन व्यवस्था होती है अनेक प्रकार के व्यंजनों के पात्र रखे रहते हैं | और समस्या यह है कि भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि मनुष्य सोचता है कि जिस व्यंजन के पास है उसको अधिक से अधिक अपनी थाली में रख ले दोबारा पता नहीं मौका मिले ना मिले | फिर थोड़ा थोड़ा करके थाली में भोजन इतना ज्यादा हो जाता है कि खाने वाला आधा खाता है और आधा फेंक देता है |भारतीय वांग्मय में अन्न को देवता कहा गया है और वहीं अन्न जब बर्बाद होता है फेका जाता है तो उसका दुष्परिणाम भी देखने को मिलता है | एक तो अनेक प्रकार की बीमारियां फैलती हैं दूसरे वह अन्न भी श्राप देता है | आज भारतीयों की बहुत दुर्दशा हो गई है जिससे और रोते तो हैं लेकिन हंसते हंसते रोना पड़ता है | एक दूसरे को देख कर के अपने कार्यक्रम को विशालता प्रदान करने के लिए आज हम सारी मर्यादाओं का उल्लंघन करते हुए अपने कार्यक्रम संपन्न कराते हैं |* *विचार कीजिए कि हम कहां थे और कहां चले आए | समय के साथ बहना अच्छी बात है लेकिन उसके साथ-साथ अपनी संस्कृति और अपनी मर्यादा का ध्यान रखना भी उससे ज्यादा आवश्यक है , अन्यथा भारतीय संस्कृति विलुप्त होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है |* 🌺💥🌺 *जय श्री हरि* 🌺💥🌺 🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 सभी भगवत्प्रेमियों को आज दिवस की *"मंगलमय कामना"*----🙏🏻🙏🏻🌹 ♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵️ *सनातन धर्म से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा (सतसंग) करने के लिए हमारे व्हाट्सऐप समूह----* *‼ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼ से जुड़ें या सम्पर्क करें---* आचार्य अर्जुन तिवारी प्रवक्ता श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा संरक्षक संकटमोचन हनुमानमंदिर बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी (उत्तर-प्रदेश) 9935328830 🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟

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uma sood Jan 20, 2022

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