Bindu Singh
Bindu Singh Nov 25, 2021

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कामेंट्स

Neha Sharma Nov 25, 2021
🙏🌺*:::::::::हरी बोल::::::::*🌺🙏 *'''जब वाणी मौन होती है*…...*तब मन बोलता है''''''* *::'::::जब मन मौन होता है**""तब बुद्धि बोलती है''''* *जब बुद्धि मौन होती है**,,,,,तब आत्मा बोलती है* *और जब आत्मा मौन होती है* *'',,,तब परमात्मा से,,,,'''* *साक्षात्कार होता है:::*🌺🙏 🙇🌺*जय श्री राधेकृष्णा*🌺🙇

Vijay Pandey Nov 25, 2021
ऊं नमो भगवते वासुदेवाय ‌🚩💓🙏 शुभ संध्या मंगलमय हो। ठाकुर जी का आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहे ‌💓🙌

Anil Nov 25, 2021
good night 🌺🌺🙏🌺🌺

Anup Kumar Sinha Nov 25, 2021
जय श्री हरि विष्णु 🙏🏻🙏🏻 शुभ रात्रि वंदन, बहना 🙏🏻🌻

Runa Sinha Nov 25, 2021
💖🍭Radhe Radhe 🍭💖 🍭🍭Good night 🍭🍭

संजीव 9779584243 Nov 26, 2021
One thing you should always understand. If you want see change around you. You must change yourself first.* *एक बात हमेशा समझनी चाहिए। अगर आप अपने आसपास बदलाव देखना चाहते हैं। आपको पहले खुद को बदलना होगा।* *💠🙏🏻💠सुप्रभात। आपका दिन मंगलमय हो।💠🙏🏻💠*

Bindu Singh Jan 20, 2022

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Jitendra Singh Jan 20, 2022

*ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌼💕🌼💕🌼💕🌼💕🌼💕🌼 शुभ रात्रि विश्राम ‼️गोकुल में एक मोर रहता था वह रोज़ भगवान कृष्ण के दरवाजे पर बैठकर एक भजन गाता था-‼️* *“मेरा कोई ना सहारा बिना तेरे, गोपाल सांवरिया मेरे... और रोज आते-जाते भगवान के कानों में उसका भजन तो पड़ता था लेकिन कोई खास ध्यान न देते। मोर भगवान के विशेष स्नेह की आस में रोज भजन गाता रहा। एक-एक दिन करते एक साल बीत गया। मोर प्रतिदिन भजन गाता रहा। प्रभु सुनते भी रहे लेकिन कभी कोई खास तवज्जो नहीं दिया। बस वह मोर का गीत सुनते उसकी ओर एक नजर देखते और एक प्यारी सी मुस्कान देकर निकल जाते। इससे ज्यादा साल भर तक कुछ न हुआ तो उसकी आस टूटने लगी। साल भर की भक्ति पर भी प्रभु प्रसन्न न हुए तो मोर रोने लगा। वह भगवान को याद करते हुए जोर से रोने लगा कि उसी समय वहां से एक मैना उड रही थी। उसने मोर को रोता हुआ देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ. आश्चर्य इस बात का नहीं था कि कोई मोर रो रहा है अचंभा इसका था कि श्रीकृष्ण के दरवाजे पर भी कोई रो रहा है। मैना सोच रही थी कितना अभागा है यह मोर जो उस प्रभु के द्वार पर रो रहा है जहां सबके कष्ट अपने आप दूर हो जाते हैं। मैना मोर के पास आई और उससे पूछा कि तू क्यों रो रहा है? मोर ने बताया कि पिछले एक साल से बांसुरी वाले छलिये को रिझा रहा हूँ उनकी प्रशंसा में गीत गा रहा हूँ लेकिन उन्होंने आज तक मुझे पानी भी नही पिलाया। यह सुन मैना बोली- मैं बरसाने से आई हूं। तुम भी मेरे साथ वहीं चलो। वे दोनों उड़ चले और उड़ते-उड़ते बरसाने पहुंच गए। मैना बरसाने में राधाजी के दरवाजे पर पहुंची और उसने अपना गीत गाना शुरू किया।श्री राधे-राधे-राधे, बरसाने वाली राधे...मैना ने मोर से भी राधाजी का गीत गाने को कहा। मोर ने कोशिश तो की लेकिन उसे बांके बिहारी का भजन गाने की ही आदत थी। उसने बरसाने आकर भी अपना पुराना गीत गाना शुरू कर दिया- मेरा कोई ना सहारा बिना तेरे गोपाल सांवरिया मेरे...राधाजी के कानों में यह गीत पड़ा. वह भागकर मोर के पास आईं और उसे प्रेम से गले लगाकर दुलार किया। राधाजी मोर के साथ ऐसा बर्ताव कर रही थीं जैसे उनका कोई पुराना खोया हुआ परिजन वापस आ गया है। उसकी खातिरदारी की और पूछा कि तुम कहां से आए हो? मोर इससे गदगद हो गया। उसने कहना शुरू किया- जय हो राधा रानी आज तक सुना था कि आप करुणा की मूर्ति हैं लेकिन आज यह साबित हो गया। राधाजी ने मोर से पूछा कि वह उन्हें करुणामयी क्यों कह रहा है। मोर ने बताया कि कैसे वह सालभर श्याम नाम की धुन रमता रहा लेकिन कन्हैया ने उसे कभी पानी भी न पिलाया। राधाजी मुस्कराईं वह मोर के मन का टीस समझ गई थीं। राधाजी ने मोर से कहा कि तुम गोकुल जाओ लेकिन इस बार पुराने गीत की जगह यह गाओ- जय राधे राधे बरसाने वाली राधे...मोर का मन तो नहीं था करुणामयी को छोडकर जाने का फिर भी वह गोकुल आया राधाजी के कहे मुताबिक राधे-राधे गाने लगा। भगवान श्रीकृष्ण के कानों में यह भजन पड़ा और वह भागते हुए मोर के पास आए और उसे गले से लगा लिया और उसका हाल-चाल पूछने लगे। श्रीकृष्ण ने पूछा कि मोर तुम कहां से आए हो। इतना सुनते ही मोर भड़क गया। मोर बोला- वाह छलिये एक साल से मैं आपके नाम की धुन रम रहा था लेकिन आपने तो कभी पानी भी नहीं पूछा। आज जब मैंने दल बदला तो आप भागते चले आए। भगवान मुस्कुराने लगे उन्होंने मोर से फिर पूछा कि तुम कहां से आए हो। मोर सांवरिए से मिलने के लिए बहुत तरसा था। आज वह अपनी सारी शिकवा-शिकायतें दूर कर लेना चाहता था। उसने प्रभु को याद दिलाया- मैं वही मोर हूं जो पिछले एक साल से आपके द्वार पर “मेरा कोई ना सहारा बिना तेरे गोपाल सांवरिया मेरे...गाया करता था। सर्दी-गर्मी सब सहकर एक साल तक आपके द्वार पर पड़ा रहा। भगवान श्रीकृष्ण ने मोर से कहा- तुमने राधा का नाम लिया यह तुम्हारे लिए वरदान साबित हुआ। मैं वरदान देता हूं कि जब तक यह सृष्टि रहेगी तुम्हारा पंख सदैव मेरे शीश पर विराजमान होगा।* *पुनि पुनि कहति हैं ब्रज नारी,* *धन्य बड़ भागिनी राधा तेरैं बस गिरिधारी ॥* *‼️करूणामयी सरकार मेरी राधा प्यारी‼️**

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Meena Sharma Jan 20, 2022

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Meena Sharma Jan 20, 2022

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Kanta Kamra Jan 20, 2022

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Jitendra Singh Jan 20, 2022

🌹🙏,, राधे का नाम अनमोल,,🙏🌹 🙏,,हम भगवान को रुपया पैसा चढ़ाते हैं और चीज जो उनकी ही बनाई है उन्हें भेंट करते हैं लेकिन मन में भाव रखते हैं कि यह चीज मैं भगवान को दे रहा हूं आप सोचते हैं कि ईश्वर खुश हो जाएगा ऐसा करना और सोचना मूर्खता पूर्ण है हम यह नहीं समझते यह सब उनका ही है और उनको इन सब चीजों की कोई जरूरत भी नहीं अगर उन्हें कुछ देना चाहते हैं तो अपनी श्रद्धा दीजिए अपना विश्वास दीजिए अपनी हर एक स्वास में याद करो तभी प्रभु जरूर खुश होंगे भाव से किया गया सत्संग सत्कर्म प्रभु को अपनी तक पहुंचाने का द्वार है ll 🌹 🌺जय जय श्री राधे जय श्री कृष्णा,,🌺 भरतपुर राजस्थान में बिहारी जी के दर्शन 20/01/2022

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