indraj
indraj Aug 18, 2021

Om Shri Ganeshay namah 🙏 Shubh prabhat vandan Ram Ram ji putrada akadsi ki hardik shubhkamnaye ji 🙏🙏🌷🌷

Om Shri Ganeshay namah 🙏 Shubh prabhat vandan Ram Ram ji putrada akadsi ki hardik shubhkamnaye ji 🙏🙏🌷🌷

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Renu Singh Aug 27, 2021
Jai Mata Di 🌹🙏 Shubh Prabhat Vandan Bhai Ji Mata Rani ki kripa dristi Aap aur Aàpke Pariwar pr Sadaiv Bni rhe Aàpka Din Shubh Avam Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

❤राधे राधे❤ Aug 27, 2021
जय श्री राधे राधे जी 🙏🌴🍍🌼🌵🌿🌷🌹🌻🥀🌺💐शुभ प्रभात स्नेह वंदन जी 🙏🌴🍍🌹🌷💐🌿🌺🌵🥀🌼🌻

Seema Sharma (Himachal) Aug 27, 2021
*जायका अलग है, हमारे लफ़्जो का...* *कोई समझ नहीं पाता... कोई भुला नहीं पाता...* जय माता दी 🌹🙏🌹 शुभ प्रभात वंदन जी 🌷 *हंसते मुस्कुराते रहिए 😊🙏 thanks ji 🙏😊 bahut sundar post ji 🙏😊🙏

Mamta Chauhan Aug 27, 2021
Jai mata di 🙏🌹 Shubh dophar vandan bhai ji mata rani ki kripa sda aap or aapke priwar pr bni rhe aapka har pal mangalmay ho khushion bhra ho aapki sbhi manokamna puri ho🌹 Radhe radhe 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

🌷GEETA DEVI 🌷 Aug 27, 2021
RADHEY RADHEY...🙏🌹🌹 SUBH DOPEHAR... 🍀🍀🎉 🤗🤗🍹🍫🍫🍹🤗🤗 RADHEY RANI APNI KARUNAMAYE KIRPA DRISTI AAP OR APKE SAMST PARIWAR PAR SADA, BANAYE RAKHE BHAIYA JEE... 🙏🙏🍀🍀🌸🌸🍀🍀 SADAR NAMASKAR SNEH VANDAN MERE PYARE BADE AADRNIYE BHAIYA JEE... 🙏🙏🍀🍀🌹🌹🍀🍀

Anup Kumar Sinha Aug 27, 2021
जय माता दी 🙏🙏 शुभ संध्या वंंदन । माता रानी अपनी कृपा आप सपरिवार पर बनाए रखें। आपका हर दिन, हर पल मंगलमय हो 🙏🌹

Renu Singh Aug 27, 2021
Shubh Ratri Vandan Bhai Ji 🙏 Mata Rani Aapki Har Manokamna Puri Karein Aapka Har Pal Shubh Avam Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 27, 2021
🙏🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹🙏 🌹आप सभी को भादों माह के पहले शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री हरि विष्णु जी और माता रानी की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

Renu Singh Aug 28, 2021
Radhe Radhe Bhai Ji 🙏🌹 Aap aur Aàpki Family ko Halchhath Avam Baldau Jayanti ki Hardik Shubh Kamnayein Ji Aàpka Din Shubh Avam Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Anup Kumar Sinha Aug 28, 2021
जय श्री राम🙏🙏 शुभ दोपहर वंंदन, भाई जी । पवनपुत्र हनुमानजी एवं सूर्यपुत्र शनिदेव की कृपा से आपके सभी कार्य निर्विघ्न सम्पन्न हों । आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो 🙏🌹

Renu Singh Aug 28, 2021
Jai Shree Radhe Krishna 🙏 Shubh Ratri Vandan Bhai Ji 🌸 Aàpka Har Pal Shubh Avam Mangalmay ho Aap Hamesha Khush rahein Bhai ji 🙏🌸

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

Renu Singh Aug 29, 2021
Shubh Prabhat Vandan Bhai Ji 🙏 Surya Dev Aap Sapriwar ko sda Sukhi Swasth aur Nirog rakhein Aàpka Din Shubh Avam Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Anup Kumar Sinha Aug 29, 2021
जय श्री कृष्ण🙏🙏 ऊँ सूर्य देवाय नमः 🙏🙏 शुभ दोपहर वंंदन, भाई जी ।सारे जगत को प्रकाशित करने वाले भगवान भास्कर आपके जीवन को भी खुशियाँ रूपी प्रकाश से प्रकाशित कर दें 🙏🌹

Anup Kumar Sinha Aug 29, 2021
जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏 शुभ रात्रि वंंदन, भाई जी 🙏

Renu Singh Aug 29, 2021
Shubh Ratri Vandan Bhai Ji 🙏 Krishna Janmotsav ki Agrim Hardik Shubh Kamnayein Ji Kanha Ji Ka Aashirwad Aap Sapriwar Pr Sadaiv Bana Rahe Bhai Ji 🙏🌹

Renu Singh Aug 30, 2021
Krishna Janmotsav ki Anant Shubh Kamnayein Bhai Ji 🙏 Aàpka Din Khushiyon Bhara ho Kanha Ji ki kripa Aap Sapriwar Pr Sadaiv Bni rhe 🙏🌹

Anup Kumar Sinha Aug 30, 2021
जय श्री कृष्ण🙏🙏 सुप्रभात वंंदन, भाई जी ।आपको श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं । कान्हा आपके जीवन को इंद्रधनुष की भाँति खुशी के सभी रंगों से भर दें 🙏🌹

lakshminarayan Dubey Jan 19, 2022

एक धनी सेठ के सात बेटे थे। छः का विवाह हो चुका था। सातवीं बहू आयी, वह सत्संगी माँ-बाप की बेटी थी। बचपन से ही सत्संग में जाने से सत्संग बस गया था जीवन मैं |ससुराल मैं घर का सारा काम तो नौकर चाकर करते हैं, जेठानियाँ केवल खाना बनाती हैं उसमें भी खटपट होती रहती है। बहू को सुसंस्कार मिले थे कि अपना काम स्वयं करना चाहिए और प्रेम से मिलजुल कर रहना चाहिए। अपना काम स्वयं करने से स्वास्थ्य बढ़िया रहता है। उसने युक्ति खोज निकाली और सुबह जल्दी स्नान करके, शुद्ध वस्त्र पहनकर पहले ही रसोई में जा बैठी। जेठानियों ने टोका लेकिन फिर भी उसने बड़े प्रेम से रसोई बनायी और सबको प्रेम से भोजन कराया। सभी बड़े तृप्त व प्रसन्न हुए। दिन में सास छोटी बहू के पास जाकर बोलीः "बहू! तू सबसे छोटी है, तू रसोई क्यों बनाती है? तेरी छः जेठानियाँ हैं।" बहूः "माँजी! कोई भूखा अतिथि घर आ जाय तो उसको आप भोजन क्यों कराते हो?" "बहू! शास्त्रों में लिखा है कि अतिथि भगवान का स्वरूप होता है। भोजन पाकर वह तृप्त होता है तो भोजन कराने वाले को बड़ा पुण्य मिलता है।" "माँजी ! अतिथि को भोजन कराने से पुण्य होता है तो क्या घरवालों को भोजन कराने से पाप होता है? अतिथि में भगवान का स्वरूप है तो घर के सभी लोग भी तो भगवान का स्वरूप है क्योंकि भगवान का निवास तो जीवमात्र में है। और माँजी! अन्न आपका, बर्तन आपके सब चीजें आपकी हैं, मैं जरा सी मेहनत करके सबमें भगवदभाव रखके रसोई बनाकर खिलाने की थोड़ी-सी सेवा कर लूँ तो मुझे पुण्य होगा कि नहीं होगा? सब प्रेम से भोजन करके तृप्त होंगे, प्रसन्न होंगे तो कितना लाभ होगा! इसलिए माँजी! आप रसोई मुझे बनाने दो। कुछ मेहनत करूँगी तो स्वास्थ्य भी बढ़िया रहेगा।" सास ने सोचा कि ʹबहू बात तो ठीक कहती है। हम इसको सबसे छोटी समझते हैं पर इसकी बुद्धि सबसे अच्छी है।ʹ दूसरे दिन सास सुबह जल्दी स्नान करके रसोई बनाने बैठ गयी। बहुओं ने देखा तो बोलीं- "माँजी! आप परिश्रम क्यों करती हो?" सास बोलीः "तुम्हारी उम्र से मेरी उम्र ज्यादा है। मैं जल्दी मर जाऊँगी। मैं अभी पुण्य नहीं करूँगी तो फिर कब करूँगी?" बहुएँ बोलीं- "माँजी! इसमें पुण्य क्या है? यह तो घर का काम है।" सास बोलीः "घर का काम करने से पाप होता है क्या? जब भूखे व्यक्तियों को, साधुओं को भोजन कराने से पुण्य होता है तो क्या घरवालों को भोजन कराने से पाप होता है? सभी में ईश्वर का वास है।" सास की बातें सुनकर सब बहुओं को लगा कि ʹइस बात का तो हमने कभी ख्याल ही नहीं किया। यह युक्ति बहुत बढ़िया है!ʹ अब जो बहू पहले जग जाय वही रसोई बनाने बैठ जाये। पहले जो भाव था कि ʹतू रसोई बना....ʹतो छः बारी बँधी थीं लेकिन अब ʹमैं बनाऊँ, मैं बनाऊँ...ʹयह भाव हुआ तो आठ बारी बँध गयीं। दो और बढ़ गये सास और छोटी बहू। *काम करने में ʹतू कर, तू कर....ʹ इससे काम बढ़ जाता है और आदमी कम हो जाते हैं पर ʹमैं करूँ, मैं करूँ....ʹ इससे काम हल्का हो जाता है और आदमी बढ़ जाते हैं।* छोटी बहू उत्साही थी, सोचा कि ʹअब तो रोटी बनाने में चौथे दिन बारी आती है, फिर क्या किया जाय?ʹ घर में गेहूँ पीसने की चक्की पड़ी थी, उसने उससे गेहूँ पीसने शुरु कर दिये। मशीन की चक्की का आटा गर्म-गर्म बोरी में भर देने से जल जाता है, उसकी रोटी स्वादिष्ट नहीं होती लेकिन हाथ से पीसा गया आटा ठंडा और अधिक पौष्टिक होता है तथा उसकी रोटी भी स्वादिष्ट होती है। छोटी बहू ने गेहूँ पीसकर उसकी रोटी बनायी तो सब कहने लगे की ʹआज तो रोटी का जायका बड़ा विलक्षण है !ʹ सास बोलीः "बहू! तू क्यों गेहूँ पीसती है? अपने पास पैसों की कमी नहीं है।" "माँजी! हाथ से गेहूँ पीसने से व्यायाम हो जाता है और बीमारी नहीं आती। दूसरा, रसोई बनाने से भी ज्यादा पुण्य गेहूँ पीसने का है।" सास और जेठानियों ने जब सुना तो लगा कि बहू ठीक कहती है। उन्होंने अपने-अपने पतियों से कहाः ʹघर में चक्की ले आओ, हम सब गेहूँ पीसेंगी।ʹ रोजाना सभी जेठानियाँ चक्की में दो ढाई सेर गेहूँ पीसने लगीं। अब छोटी बहू ने देखा कि घर में जूठे बर्तन माँजने के लिए नौकरानी आती है। अपने जूठे बर्तन हमें स्वयं साफ करने चाहिए क्योंकि सबमें ईश्वर है तो कोई दूसरा हमारा जूठा क्यों साफ करे! अगले दिन उसने सब बर्तन माँज दिये। सास बोलीः "बहू! विचार तो कर, बर्तन माँजने से तेरा गहना घिस जायेगा, कपड़े खराब हो जायेंगे...।" "माँजी ! काम जितना छोटा, उतना ही उसका माहात्म्य ज्यादा। पांडवों के यज्ञ में भगवान श्रीकृष्ण ने जूठी पत्तलें उठाने का काम किया था।" दूसरे दिन सास बर्तन माँजने बैठ गयी। उसको देख के सब बहुओं ने बर्तन माँजने शुरु कर दिये। घर में झाड़ू लगाने नौकर आता था। अब छोटी बहू ने सुबह जल्दी उठकर झाड़ू लगा दी। सास ने पूछाः "बहू! झाड़ू तूने लगायी है?" "माँजी! आप मत पूछिये। आपको बोलती हूँ तो मेरे हाथ से काम चला जाता है।" "झाड़ू लगाने का काम तो नौकर का है, तू क्यों लगाती है?" "माँजी! ʹरामायणʹ में आता है कि वन में बड़े-बड़े ऋषि-मुनि रहते थे लेकिन भगवान उनकी कुटिया में न जाकर पहले शबरी की कुटिया में गये। क्योंकि शबरी रोज चुपके से झाड़ू लगाती थी, पम्पासरोवर का रास्ता साफ करती थी कि कहीं आते-जाते ऋषि-मुनियों के पैरों में कंकड़ न चुभ जायें।" सास ने देखा कि यह छोटी बहू तो सबको लूट लेगी क्योंकि यह सबका पुण्य अकेले ही ले लेती है। अब सास और सब बहुओं ने मिलके झाड़ू लगानी शुरू कर दी। *जिस घर में आपस में प्रेम होता है वहाँ लक्ष्मी बढ़ती है और जहाँ कलह होता है वहाँ निर्धनता आती है।* सेठ का तो धन दिनोंदिन बढ़ने लगा। उसने घर की सब स्त्रियों के लिए गहने और कपड़े बनवा दिये। अब छोटी बहू ससुर से मिले गहने लेकर बड़ी जेठानी के पास गयी और बोलीः "आपके बच्चे हैं, उनका विवाह करोगी तो गहने बनवाने पड़ेंगे। मेरे तो अभी कोई बच्चा है नहीं। इसलिए इन गहनों को आप रख लीजिये।" गहने जेठानी को देकर बहू ने कुछ पैसे और कपड़े नौकरों में बाँट दिये। सास ने देखा तो बोलीः "बहू! यह तुम क्या करती हो? तेरे ससुर ने सबको गहने बनवाकर दिये हैं और तूने वे जेठानी को दे दिये और पैसे, कपड़े नौकरों में बाँट दिये!" "माँजी! मैं अकेले इतना संग्रह करके क्या करूँगी? अपनी वस्तु किसी जरूरतमंद के काम आये तो आत्मिक संतोष मिलता है और दान करने का तो अमिट पुण्य होता ही है !" सास को बहू की बात लग गयी। वह सेठ के पास जाकर बोलीः "मैं नौकरों में धोती-साड़ी बाँटूगी और आसपास में जो गरीब परिवार रहते हैं उनके बच्चों को फीस मैं स्वयं भरूँगी। अपने पास कितना धन है, किसी के काम आये तो अच्छा है। न जाने कब मौत आ जाय और सब यहीं पड़ा रह जाय! जितना अपने हाथ से पुण्य कर्म हो जाये अच्छा है।" सेठ बहुत प्रसन्न हुआ कि पहले नौकरों को कुछ देते तो लड़ पड़ती थी पर अब कहती है कि ʹमैं खुद दूँगी।ʹ सास दूसरों को वस्तुएँ देने लगी तो यह देख के दूसरी बहुएँ भी देने लगीं। नौकर भी खुश हो के मन लगा के काम करने लगे और आस-पड़ोस में भी खुशहाली छा गयी। *ʹश्रेष्ठ मनुष्य जो-जो आचरण करता है, दूसरे मनुष्य वैसा-वैसा ही करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण कर देता है, दूसरे मनुष्य उसी के अनुसार आचरण करते हैं।ʹ* *छोटी बहू ने जो आचरण किया उससे उसके घर का तो सुधार हुआ ही, साथ में पड़ोस पर भी अच्छा असर पड़ा, उनके घर में भी सुधर गये। देने के भाव से आपस में प्रेम-भाईचारा बढ़ गया। इस तरह बहू को सत्संग से मिली सूझबूझ ने उसके घर के साथ अनेक घरों को खुशहाल कर दिया !* 🙏हर हर महादेव🙏

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Mohini Jan 17, 2022

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lakshminarayan Dubey Jan 18, 2022

एक बार भक्तिमति मीराबाई को किसी ने ताना माराः "मीरा ! तू तो राजरानी है। महलों में रहने वाली, मिष्ठान्न-पकवान खाने वाली और तेरे गुरु झोंपड़े में रहते हैं। उन्हें तो एक वक्त की रोटी भी ठीक से नहीं मिलती।" मीरा से यह कैसे सहन होता। मीरा ने पालकी मँगवायी और गुरुदर्शन के लिए चल पड़े। मायके से कन्यादान में मिला एक हीरा उसने गाँठ में बाँध लिया। रैदास जी की कुटिया जगह-जगह से टूटी हुई थी। वे एक हाथ में सूई और दूसरे में एक फटी-पुरानी जूती लेकर बैठे थे। पास ही एक कठोती पड़ी थी। हाथ से काम और मुख में नाम चल रहा था। ऐसे महापुरुष कभी बाहर से चाहे साधन-सम्पदा विहीन दिखें पर अंदर की परम सम्पदा के धनी होते हैं और बाहर की धन-सम्पदा उनके चरणों की दासी होती है। यह संतों का विलक्षण ऐश्वर्य है। मीरा ने गुरुचरणों में वह बहूमूल्य हीरा रखते हुए प्रणाम किया। उसके नेत्रों में श्रद्धा-प्रेम के आँसू उमड़ रहे थे। वह हाथ जोड़कर निवेदन करने लगीः "गुरुजी ! लोग मुझे ताने मारते हैं कि मीरा तू तो महलों में रहती है और तेरे गुरु को रहने के लिए अच्छी कुटिया भी नहीं है। गुरुदेव मुझसे यह सुना नहीं जाता। अपने चरणों में एक दासी की यह तुच्छ भेंट स्वीकार कीजिये। इस झोंपड़ी और कठौती को छोड़कर तीर्थयात्रा कीजिये और...." और आगे संत रैदासजी ने मीरा को बोलने का मौका नहीं दिया। वे बोलेः "गिरधर नागर की सेविका होकर तुम ऐसा कहती हो ! मुझे इसकी जरूरत नहीं है। बेटी ! मेरे लिए इस कठौती का पानी ही गंगाजी है, यह झोंपड़ी ही मेरी काशी है।" इतना कहकर रैदासजी ने कठौती में से एक अंजलि जल लेकर उसकी धार की और अनेकों सच्चे मोती जमीन पर बिखर गये। मीरा चकित-सी देखती रह गयी। ऐसो है मेरे गिरिधर गोपालों।। 🙏हर हर महादेव🙏

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. " तनाव प्रबंधन भगवान शंकर से सीखें " "1- जटा में गंगा और त्रिनेत्र में अग्नि (जल और आग की दुश्मनी)" "2- चन्द्रमा में अमृत और गले मे जहर (अमृत और जहर की दुश्मनी)" "3- शरीर मे भभूत और भूत का संग ( भभूत और भूत की दुश्मनी)" "4- गले मे सर्प और पुत्र गणेश का वाहन चूहा और पुत्र कार्तिकेय का वाहन मोर ( तीनो की आपस मे दुश्मनी )" "5- नन्दी (बैल) और मां भवानी का वाहन सिंह ( दोनों में दुश्मनी)" "6- एक तरफ तांडव और दूसरी तरफ गहन समाधि ( विरोधाभास)" "7- देवाधिदेव लेकिन स्वर्ग न लेकर हिमालय में तपलीन।" "8- भगवान विष्णु इन्हें प्रणाम करते हैं और ये भगवान विष्णु को प्रणाम करते हैं।" "इतने विरुद्ध स्वभाव के वाहन और गणों के बाद भी, सबको साथ लेकर चिंता से मुक्त रहते हैं। तनाव रहित रहते हैं।" "और हम लोग विपरीत स्वभाव वाले सास-बहू, दामाद-ससुर, बाप-बेटे , माँ-बेटी, भाई-बहन, ननद-भाभी इत्यादि की नोकझोंक में तनावग्रस्त हो जाते हैं। ऑफिस में विपरीत स्वभाव के लोगों के व्यवहार देखकर तनावग्रस्त हो जाते हैं। " "भगवान आशुतोष (शंकर )बड़े बड़े राक्षसों से लड़ते हैं और फिर समाधि में ध्यानस्थ हो जाते हैं, हम छोटी छोटी समस्या में उलझे रहते हैं और नींद तक नहीं आती।" " युगनिर्माण में आने वाली कठिनाई से डर जाते हैं, सँगठित विपरीत स्वभाव वाले एक उद्देश्य के लिए रह ही नहीं पाते हैं भगवान शंकर की पूजा तो करते हैं पर उनके गुणों को धारण नहीं करते.!!" ----------::;×:::---------- " हर हर महादेव" " कुमार रौनक कश्यप " ************************************************

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Rama Devi Sahu Jan 19, 2022

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' " सच्चा दोस्त " "एक दिन जंगल में सभी बड़े जानवरों ने मिलकर कुश्ती प्रतियोगिता करवाने का प्लान बनाया। जीतने वाले को इनाम दिया जाएगा, यह भी निर्णय लिया गया।" "तय हुआ कि पहले भालू और बघेरा कुश्ती के मैदान में आएंगे और हार-जीत का फैसला करेगा हाथी राजा।" "किन्नु गिलहरी बोली, “मैं भी कुश्ती लडंगी।” उसकी बात सुनकर सारे जानवर उसका मजाक उड़ाते हुए बोले, “तुम मक्खी से लड़ो कुश्ती।" "एक बोला, “बित्ता भर की जान, मगर देखो तो कैसे सबकी बराबरी करने की सोच रही है। यह क्या कर पाएगी?” यह सुनकर गिलहरी एक कोने में चुपचाप जाकर बैठ गई।" "तभी भालू की चीख सुनाई दी। सब उधर दौड़े। देखा कि कुश्ती लड़ते वक्त भालू का पैर एक मोटी रस्सी में फंस गया था। कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया।" "तभी गिलहरी दौड़ी हुई आई और उसने अपने तेज धारदार दांतों से रस्सी काट दी। भालू की जान में जान आई। तभी ईनाम देने की घोषणा हुई-: भालु आज का विजेता है। "भालु ने आगे बढ़कर ट्रॉफी ली और गिलहरी को देते हुए कहा, “विजेता मैं नहीं, किन्नू है, जिसने मेरी मदद की। सच्चा दोस्त वही होता है, जो मुसीबत में काम आए..!!" ----------:::×:::---------- " जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " **********************************************

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Mamta Chauhan Jan 19, 2022

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. " महर्षि विश्वामित्र की कथा " " वैदिक काल के एक महान ऋषि " " पोस्ट १\४ " ("विश्वामित्र वैदिक काल के विख्यात ऋषि (योगी) थे। ऋषि विश्वामित्र बड़े ही प्रतापी और तेजस्वी महापुरुष थे। ऋषि धर्म ग्रहण करने के पूर्व वे बड़े पराक्रमी और प्रजावत्सल नरेश थे ") " कथा आरंभ " " प्रजापति के पुत्र कुश, कुश के पुत्र कुशनाभ और कुशनाभ के पुत्र राजा गाधि थे। विश्वामित्र जी उन्हीं गाधि के पुत्र थे। विश्वामित्र शब्द विश्व और मित्र से बना है जिसका अर्थ है- सबके साथ मैत्री अथवा प्रेम। एक दिन राजा विश्वामित्र अपनी सेना को लेकर वशिष्ठ ऋषि के आश्रम में गये। विश्वामित्र जी उन्हें प्रणाम करके वहीं बैठ गये। वशिष्ठ जी ने विश्वामित्र जी का यथोचित आदर सत्कार किया और उनसे कुछ दिन आश्रम में ही रह कर आतिथ्य ग्रहण करने का अनुरोध किया। इस पर यह विचार करके कि मेरे साथ विशाल सेना है और सेना सहित मेरा आतिथ्य करने में वशिष्ठ जी को कष्ट होगा, विश्वामित्र जी ने नम्रतापूर्वक अपने जाने की अनुमति माँगी किन्तु वशिष्ठ जी के अत्यधिक अनुरोध करने पर थोड़े दिनों के लिये उनका आतिथ्य स्वीकार कर लिया।" "वशिष्ठ जी ने नंदिनी गौ का आह्वान करके विश्वामित्र तथा उनकी सेना के लिये छः प्रकार के व्यंजन तथा समस्त प्रकार के सुख सुविधा की व्यवस्था कर दिया। वशिष्ठ जी के आतिथ्य से विश्वामित्र और उनके साथ आये सभी लोग बहुत प्रसन्न हुये।" "नंदिनी गौ का चमत्कार देखकर विश्वामित्र ने उस गौ को वशिष्ठ जी से माँगा पर वशिष्ठ जी बोले राजन! यह गौ मेरा जीवन है और इसे मैं किसी भी कीमत पर किसी को नहीं दे सकता।" "वशिष्ठ जी के इस प्रकार कहने पर विश्वामित्र ने बलात् उस गौ को पकड़ लेने का आदेश दे दिया और उसके सैनिक उस गौ को डण्डे से मार मार कर हाँकने लगे। नंदिनी गौ ने क्रोधित होकर उन सैनिकों से अपना बन्धन छुड़ा लिया और वशिष्ठ जी के पास आकर विलाप करने लगी। वशिष्ठ जी बोले कि हे नंदिनी! यह राजा मेरा अतिथि है इसलिये मैं इसको शाप भी नहीं दे सकता और इसके पास विशाल सेना होने के कारण इससे युद्ध में भी विजय प्राप्त नहीं कर सकता। मैं स्वयं को विवश अनुभव कर रहा हूँ। उनके इन वचनोंको सुन कर नंदिनी ने कहा कि हे ब्रह्मर्षि! आप मुझे आज्ञा दीजिये, मैं एक क्षण में इस क्षत्रिय राजा को उसकी विशाल सेनासहित नष्ट कर दूँगी। और कोई उपाय न देख कर वशिष्ठ जी ने नंदिनी को अनुमति दे दी।" "आज्ञा पाते ही नंदिनी ने योगबल से अत्यंत पराक्रमी मारक शस्त्रास्त्रों से युक्त पराक्रमी योद्धाओं को उत्पन्न किया जिन्होंने शीघ्र ही शत्रु सेना को गाजर मूली की भाँति काटना आरम्भ कर दिया। अपनी सेना का नाश होते देख विश्वामित्र के सौ पुत्र अत्यन्त कुपित हो वशिष्ठ जी को मारने दौड़े। वशिष्ठ जी ने उनमें से एक पुत्र को छोड़ कर शेष सभी को भस्म कर दिया।" " अपनी सेना तथा पुत्रों के नष्ट हो जाने से विश्वामित्र बड़े दुःखी हुये। अपने बचे हुये पुत्र को राज सिंहासन सौंप कर वे तपस्या करने के लिये हिमालय की कन्दराओं में चले गये। कठोर तपस्या करके विश्वामित्र जी ने महादेव जी को प्रसन्न कर लिया ओर उनसे दिव्य शक्तियों के साथ सम्पूर्ण धनुर्विद्या के ज्ञान का वरदान प्राप्त कर लिया।" क्रमशः:- ----------::;×:::---------- "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " ************************************************

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Shuchi Singhal Jan 19, 2022

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Madhu Soni Jan 19, 2022

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