PARKESH
PARKESH Oct 24, 2021

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कामेंट्स

PARKESH Oct 24, 2021
🙏🚩🚩👌👌💐💐🙏

🔹🌼🇮🇳हरि प्रिय पाठक🇮🇳🌼🔹 Oct 28, 2021
⛳ॐ माधवाय नमः⛳ 🌺 ❇️श्री कृष्णाय नमः❇️🌺 💮संध्या वंदनजी💮 :|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:|:| *एक पुरानी कहानी है कि एक पण्डित जी ने अपनी पत्नी की आदत बना दी थी कि घर में रोटी खाने से पहले कहना है कि "विष्णु अर्पण" अगर पानी पी ना हो तो पहले कहना है कि"विष्णु अर्पण" उस औरत की इतनी आदत पक्की हो गई* *की जो भी काम करती पहले मन में यह कहती की* " *विष्णु अर्पण*" " *विष्णुअर्पण*" फिर वह काम करती एक दिन उसने घर का कूड़ा इक्कठा किया और फेंकते हुए कहा की "*विष्णु अर्पण* ""विष्णु अर्पण" वहीँ पास से नारद मुनि जा रहे थे ,नारद मुनि ने जब यह सुना तो उस औरत को थप्पड़ मारा की विष्णु जी को कूड़ा अर्पण कर रही है फैक कूड़ा रही है और कह रही है कि "विष्णु अर्पण" वह औरत विष्णु जी के प्रेम में रंगी हुई थी कहने लगी नारद मुनि तुमने जो थप्पड़ मारा है वो थप्पड़ भी "विष्णु अर्पण" अब नारद जी ने दुसरे गाल पर थप्पड़ मारते हुए कहा कि बेकूफ़ औरत तू थप्पड़ को भी विष्णु अर्पण कह रही है । लेकिन उस औरत फिर यही कहा आपका मार यह थप्पड़ भी "विष्णु अर्पण"* " जब नारद मुनि विष्णु पूरी में गए तो क्या देखते है कि विष्णु जी के दोनों गालों पर उँगलियों के निशान बने हुए थे " , नारद पूछने लगे कि"भगवन यह क्या हो गया" ? आप जी के चेहरे पर यह निशान कैसे पड़े", विष्णु जी कहने लगे कि "नारद मुनि थप्पड़ मारे भी तू और पूछे भी तू" , नारद जी कहने लगे की "मैं आप को थप्पड़ कैसे मार सकता हूँ"?, विष्णु जी कहने लगे, "नारद मुनि जिस औरत ने कूड़ा फेंकते हुए यह कहा था की विष्णु अर्पण और तुने उस को थप्पड़ मारा था तो वह थप्पड़ सीधे मेरे को ही लगा था , क्योकि वह मुझे अर्पण था"... कथा सार :-जब आप कर्म करते समय कर्ता का भाव निकाल लेते है। और अपने हर काम में मै मेरी मेरा की भावना हटा कर अपने इष्ट या सतगुरु को आगे रखते है तो करमो का बोझ भी नहीं बढ़ता और वो काम आप से भी अच्छे तरीके से होता है !! 🌀श्री विष्णवे नमः🌀 🌲आप एवं आप के परिवार पर भगवान विष्णुजी की कृपा बनी रहे,आप स्वस्थ एवं प्रसन्न रहे यही कामना है भाई जी🌲 🌼‼️🙏‼️🌼

🌹Radha Sharma 🌹 Oct 28, 2021
राधे राधे जय श्री कृष्ण🙏🌹 शुभ रात्रि वंदन जी 🙏🌹आप का हर पल मंगलमय हो🙏🌹 जय माता दी🙏🌹

dhruvwadhwani Oct 28, 2021
जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी जयमातादी का माताजी का भजन माताजी का भजन

dhruvwadhwani Oct 28, 2021
जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा जय मां दुर्गा

dhruvwadhwani Oct 28, 2021
लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी जय मां लक्ष्मी

dhruvwadhwani Oct 28, 2021
जय मां सरस्वती जय मां सरस्वती जय मां सरस्वती जय मां सरस्वती जय मां सरस्वती जय मां सरस्वती जय मां सरस्वती

dhruvwadhwani Oct 28, 2021
जय मां संतोषी जय मां संतोषी जय मां संतोषी जय मां संतोषी जय मां संतोषी जय मां संतोषी जय मां संतोषी

charu sharma Oct 30, 2021
jai shree krishna ji 🙏🌹 shubh ratri vandan ji 🙏🌹

PARKESH Dec 20, 2021
🙏🌹🌹🌹🌻🌻🌻🙏🙏

snehalata Mishra Jan 27, 2022

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Babbu Bhai Jan 27, 2022

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*🌹षटतिला एकादशी महिमा व कथा* ➡ *28 जनवरी 2021 रात्रि 02:17 AM से 28 जनवरी रात्रि 11:35 PM तक (यानी 28 जनवरी, शुक्रवार को पुरा दिन) एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 28 जनवरी, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *🌹इस दिन तिल से स्नान-होम करे, तिल का उबटन लगाये, तिल मिलाया हुआ जल पीये, तिल का दान करे और तिल को भोजन के काम में ले ।’* *🌹इस प्रकार छ: कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षटतिला’ कहलाती है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है ।* *🌹युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा: भगवन् ! माघ मास के कृष्णपक्ष में कौन सी एकादशी होती है? उसके लिए कैसी विधि है तथा उसका फल क्या है ? कृपा करके ये सब बातें हमें बताइये ।* *🌹श्रीभगवान बोले: नृपश्रेष्ठ ! माघ (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार पौष) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी ‘षटतिला’ के नाम से विख्यात है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है । मुनिश्रेष्ठ पुलस्त्य ने इसकी जो पापहारिणी कथा दाल्भ्य से कही थी, उसे सुनो ।* *🌹दाल्भ्य ने पूछा: ब्रह्मन्! मृत्युलोक में आये हुए प्राणी प्राय: पापकर्म करते रहते हैं । उन्हें नरक में न जाना पड़े इसके लिए कौन सा उपाय है? बताने की कृपा करें ।* *🌹पुलस्त्यजी बोले: महाभाग ! माघ मास आने पर मनुष्य को चाहिए कि वह नहा धोकर पवित्र हो इन्द्रियसंयम रखते हुए काम, क्रोध, अहंकार ,लोभ और चुगली आदि बुराइयों को त्याग दे । देवाधिदेव भगवान का स्मरण करके जल से पैर धोकर भूमि पर पड़े हुए गोबर का संग्रह करे । उसमें तिल और कपास मिलाकर एक सौ आठ पिंडिकाएँ बनाये । फिर माघ में जब आर्द्रा या मूल नक्षत्र आये, तब कृष्णपक्ष की एकादशी करने के लिए नियम ग्रहण करें । भली भाँति स्नान करके पवित्र हो शुद्ध भाव से देवाधिदेव श्रीविष्णु की पूजा करें । कोई भूल हो जाने पर श्रीकृष्ण का नामोच्चारण करें । रात को जागरण और होम करें । चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेघ आदि सामग्री से शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले देवदेवेश्वर श्रीहरि की पूजा करें । तत्पश्चात् भगवान का स्मरण करके बारंबार श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़े, नारियल अथवा बिजौरे के फल से भगवान को विधिपूर्वक पूजकर अर्ध्य दें । अन्य सब सामग्रियों के अभाव में सौ सुपारियों के द्वारा भी पूजन और अर्ध्यदान किया जा सकता है । अर्ध्य का मंत्र इस प्रकार है:* *कृष्ण कृष्ण कृपालुस्त्वमगतीनां गतिर्भव ।* *संसारार्णवमग्नानां प्रसीद पुरुषोत्तम ॥* *नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन ।* *सुब्रह्मण्य नमस्तेSस्तु महापुरुष पूर्वज ॥* *गृहाणार्ध्यं मया दत्तं लक्ष्म्या सह जगत्पते ।* *🌹‘सच्चिदानन्दस्वरुप श्रीकृष्ण ! आप बड़े दयालु हैं । हम आश्रयहीन जीवों के आप आश्रयदाता होइये । हम संसार समुद्र में डूब रहे हैं, आप हम पर प्रसन्न होइये । कमलनयन ! विश्वभावन ! सुब्रह्मण्य ! महापुरुष ! सबके पूर्वज ! आपको नमस्कार है ! जगत्पते ! मेरा दिया हुआ अर्ध्य आप लक्ष्मीजी के साथ स्वीकार करें ।’* *🌹तत्पश्चात् ब्राह्मण की पूजा करें । उसे जल का घड़ा, छाता, जूता और वस्त्र दान करें । दान करते समय ऐसा कहें : ‘इस दान के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण मुझ पर प्रसन्न हों ।’ अपनी शक्ति के अनुसार श्रेष्ठ ब्राह्मण को काली गौ का दान करें । द्विजश्रेष्ठ ! विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह तिल से भरा हुआ पात्र भी दान करे । उन तिलों के बोने पर उनसे जितनी शाखाएँ पैदा हो सकती हैं, उतने हजार वर्षों तक वह स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है । तिल से स्नान होम करे, तिल का उबटन लगाये, तिल मिलाया हुआ जल पीये, तिल का दान करे और तिल को भोजन के काम में ले ।’* *🌹इस प्रकार हे नृपश्रेष्ठ ! छ: कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षटतिला’ कहलाती है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है ।* *🌹व्रत खोलने की विधि : द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए । ‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Thakur Sharma Billu Jan 27, 2022

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Rajesh urf Kale Jan 27, 2022

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