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🌹अध्याय 1 का श्लोक 1🌹 🌹(धृतराष्ट्र उवाच)🌹 🌹धर्मक्षेत्रो, कुरुक्षेत्रो, समवेताः,🌹 🌹युयुत्सवः🌹, मामकाः, पाण्डवाः, च, एव, किम्, अकुर्वत, सज्य।।1।।🌹 🌹अनुवाद: (सज्य) हे संजय! (धर्मक्षेत्रो) धर्मभूमि (कुरुक्षेत्रो) कुरुक्षेत्रमें (समवेताः) एकत्रित (युयुत्सवः) युद्धकी इच्छावाले (मामकाः) मेरे (च) और (एव) यहाँ (पाण्डवाः) पाण्डुके पुत्रोंने (किम्) क्या (अकुर्वत) किया? (1)🌹 🌹हिन्दी: हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित युद्धकी इच्छावाले मेरे और यहाँ पाण्डुके पुत्रों ने क्या किया? (1)🌹 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

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