Krishna Mishra
Krishna Mishra Jan 23, 2022

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Asha Bakshi Jan 23, 2022
हर हर महादेव 🙏🌹🙏 ओम नमः शिवाय 🙏🌹🙏शुभ संध्या वंदन आदरणीय भाई जी🙏🙏🙏🙏🙏🙏

A mishra ji Jan 23, 2022
Om namah Shivay 🕉 नमः शिवाय हर हर महादेव जी 🙏 नमो नमः

Jitendra Singh May 26, 2022

#भोलेनाथ_की_कृपा सिंहकेतु पांचाल देश का एक राजा था। राजा बहुत बड़ा शिवभक्त था। शिव आराधना और शिकार उसके दो चीजें प्यारी थीं। वह शिकार खेलने रोज जंगल जाता था। एक दिन घने जंगल में सिंहकेतु को एक ध्वस्त मंदिर दिखा। राजा शिकार की धुन में आगे बढ गया पर सेवक भील ने ध्यान से देखा तो वह शिव मंदिर था जिसके भीतर लता, पत्रों में एक शिवलिंग था। भील का नाम चंड था। सिंहकेतु के सानिध्य और उसके राज्य में रहने से वह भी धार्मिक प्रवृत्ति का हो गया था. चबूतरे पर स्थापित शिवलिंग जो कि अपनी जलहरी से लगभग अलग ही हो गया था वह उसे उखाड़ लाया। चंड ने राजा से कहा- महाराज यह निर्जन में पड़ा था। आप आज्ञा दें तो इसे मैं रख लूं, पर कृपा कर पूजन विधि भी बता दें ताकि मैं रोज इसकी पूजा कर पुण्य कमा सकूं। राजा ने कहा कि चंड भील इसे रोज नहला कर इसकी फूल-बेल पत्तियों से सजाना, अक्षत, फल मीठा चढाना। जय भोले शंकर बोल कर पूजा करना और उसके बाद इसे धूप-दीप दिखाना। राजा ने कुछ मजाक में कहा कि इस शिवलिंग को चिता भस्म जरूर चढ़ाना और वो भस्म ताजी चिता राख की ही हो। फिर भोग लगाकर बाजा बजाकर खूब नाच-गाना किया करना। शिकार से राजा तो लौट गया पर भील जो उसी जंगल में रहता था, उसने अपने घर जाकर अपनी बुद्धि के मुताबिक एक साफ सुथरे स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की और रोज ही पूजा करने का अटूट नियम बनाया। भीलनी के लिए यह नयी बात थी। उसने कभी पूजा-पाठ न देखी थी। भील के रोज पूजा करने से ऐसे संस्कार जगे की कुछ दिन बाद वह खुद तो पूजा न करती पर भील की सहायता करने लगी। कुछ दिन और बीते तो भीलनी पूजा में पर्याप्त रुचि लेने लगी. एक दिन भील पूजा पर बैठा तो देखा कि सारी पूजन सामग्री तो मौजूद है पर लगता है वह चिता भस्म लाना तो भूल ही गया। वह भागता हुआ जंगल के बाहर स्थित श्मशान गया. आश्चर्य आज तो कोई चिता जल ही नहीं रही थी. पिछली रात जली चिता का भी कोई नामो निशान न था जबकि उसे लगता था कि रात को मैं यहां से भस्म ले गया हूं। भील भागता हुआ उलटे पांव घर पहुंचा। भस्म की डिबिया उलटायी पलटाई पर चिता भस्म तनिक भी न थी। चिंता और निराशा में उसने अपनी भीलनी को पुकारा जिसने सारी तैयारी की थी। पत्नी ने कहा- आज बिना भस्म के ही पूजा कर लें, शेष तो सब तैयार है। पर भील ने कहा नहीं राजा ने कहा था कि चिता भस्म बहुत ज़रूरी है। वह मिली नहीं. क्या करूं ! भील चिंतित हो बैठ गया। भील ने भीलनी से कहा- प्रिये यदि मैं आज पूजा न कर पाया तो मैं जिंदा न रहूंगा, मेरा मन बड़ा दुःखी है और चिन्तित है। भीलनी ने भील को इस तरह चिंतित देख एक उपाय सुझाया। भीलनी बोली, यह घर पुराना हो चुका है। मैं इसमें आग लगाकर इसमें घुस जाती हूं। आपकी पूजा के लिए मेरे जल जाने के बाद बहुत सारी भस्म बन जायेगी। मेरी भस्म का पूजा में इस्तेमाल कर लें। भील न माना बहुत विवाद हुआ। भीलनी ने कहा मैं अपने पतिदेव और देवों के देव महादेव के काम आने के इस अवसर को न छोड़ूंगी। भीलनी ने स्नान किया। घर में आग लगायी। घर की तीन बार परिक्रमा की। भगवान का ध्यान किया और भोलेनाथ का नाम लेकर जलते घर में घुस गयी। ज्यादा समय न बीता कि शिव भक्ति में लीन वह भीलनी जलकर भस्म हो गई। भील ने भस्म उठाई। भली भांति भगवान भूतनाथ का पूजन किया। शिवभक्ति में घर सहित घरवाली खो देने का कोई दुःख तो भील के मन में तो था नहीं सो पूजा के बाद बड़े उत्साह से उसने भीलनी को प्रसाद लेने के लिये आवाज दी। क्षण के भीतर ही उसकी पत्नी समीप बने घर से आती दिखी। जब वह पास आयी तो भील को उसको और अपने घर के जलने का ख्याल आया। उसने पूछा यह कैसे हुआ। तुम कैसे आयीं ? यह घर कैसे वापस बन गया ? भीलनी ने सारी कथा कह सुनायी। जब धधकती आग में घुसी तो लगा जल में घुसती जा रही हूं और मुझे नींद आ रही है। जगने पर देखा कि मैं घर में ही हूं और आप प्रसाद के लिए आवाज लगा रहे हैं। वे यह सब बातें कर ही रहे थे कि अचानक आकाश से एक विमान वहां उतरा, उसमें भगवान के चार गण थे। उन्होंने अपने हाथों से उठा कर उन्हें विमान में बैठा लिया। गणों का हाथ लगते ही दोनों के शरीर दिव्य हो गए। दोनों ने शिव-महिमा का गुणगान किया और फिर वे अत्यंत श्रद्धायुक्त भगवान की आराधना का फल भोगने शिव लोक चले गये। जय जय भोलेनाथ जय महाकाल

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X7skr May 26, 2022

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Madhu Soni May 26, 2022

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X7skr May 26, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @*🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞* *⛅दिनांक 27 मई 2022* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत - 2079* *⛅शक संवत - 1944* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वादशी सुबह 11:47 तक तत्पश्चात त्रयोदशी* *⛅नक्षत्र - आश्विनी रात्रि 12:39 तक तत्पश्चात भरणी* *⛅योग - सौभाग्य रात्रि 10:09 तक तत्पश्चात शोभन* *⛅राहुकाल - सुबह 10:56 से दोपहर 12:37 तक* *⛅सूर्योदय - 05:55* *⛅सूर्यास्त - 07:19* *⛅दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:30 से 05:12 तक* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12.16 से 12:58 तक* *⛅व्रत पर्व विवरण- प्रदोष व्रत* *⛅ विशेष - द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *⛅स्कंद पुराण के अनुसार द्वादशी के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।* *🔹प्रदोष व्रत🔹* *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 27 मई, शुक्रवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…* 👉🏻 *ऐसे करें व्रत व पूजा* *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।* *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।* *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।* *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।* *- भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।* 👉🏻 *ये उपाय करें* *सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।* *🔹विद्यार्थी ऐसा संकल्प करें🔹* *सुबह उठकर संकल्प करोः 'आज के दिन मैं समय का सदुपयोग करूँगा। खेलने के समय मन लगाकर खेलूँगा, पढ़ने के समय मन लगाकर पढूँगा, काम करने के समय दिल लगाकर काम करूँगा और दिल लगाकर दाता (भगवान) का सुमिरन व ध्यान करूँगा।'*

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Anju swami May 26, 2022

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Sanjeev Adhoya May 26, 2022

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Anju swami May 26, 2022

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