mahesh shukla
mahesh shukla Dec 6, 2021

हर हर महादेव जय महाकाल की ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय

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ILA SINHA Dec 6, 2021
🌺🥀Har har Mahadev🥀🌺 🌺🥀Om Namah Shivay🥀🌺 🌺🥀 Happy Monday 🥀🌺 🌺🥀 Good morning 🥀🌺

Ashok Shrivastava Jan 21, 2022

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*🚩 वृंदावन के बंदर चार चीजों को छीनते हैं पर, क्यूं छीनते हैं आइये एक भाव दृष्टिपात करें।🚩* 1. चप्पल-जूते – तो भैया वृंदावन में आए हो तो वृंदावन हमारे प्रियालालजू की नित्य क्रीडा स्थली है । नित्य विहार स्थली हैं। जहां श्यामा श्याम नंगे पैर विचरण करते हैं। अतः उस रज पर जूते चप्पल पहन कर नही चलना है यही संदेश बंदर देते हैं। 2. चश्मे को छीनते हैं – तो वृंदावन में पधारे प्यारे प्रेमियों वृंदावन को बाह्य नेत्रों से दर्शन करने की आवश्यकता नही है। बाह्य नेत्र से कहीं गंदगी देखोगे कहीं अपशिष्ट देखोगे और घृणा करोगे अपराध बनेगा। अतः उस दिव्यतम श्री धाम वृंदावन का दर्शन आँतरिक नेत्रों से करो। दिव्य यमुना रसरानी जी का दर्शन करो। 3. मोबाइल – भाव - अरे प्यारे भाइयों बडे-बडे योगी यति भी वृंदावन आने के लिए तरसते हैं। श्रीजी की चरण रज बृज रज के लिए बड़े-बड़े देव तरसते हैं। यथा पद में स्वामी हरिराम व्यास जी महाराज कहते हैं- "जो रज शिव सनकादिक याचत सो रज शीश चढाऊं।" तो वृंदावन मे आकर भी बाह्य जगत से संपर्क बनाने का क्या मतलब.? तन वृंदावन में और मन कहाँ मोबाइल में, अतः तन-मन दोनों को वृंदावन में केन्द्रित करें। 4, पर्स – भाव- माया को साथ लेकर चलने की आवश्यकता नहीं है। क्यूंकि यह भजन की भूमि है। यहां पर्स दिखाने की आवश्यकता नहीं। माला झोली पर्याप्त है। अधिक वैभव प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं। क्यूंकि ये शुद्ध माधुर्य लीला की भूमि है। प्रत्येक कण-कण प्रिया लाल जू के रस से आप्लावित है। चूंकि भाव बहुत से हैं। परंतु प्रमुख भावों पर चर्चा की। तो ये बंदर कुछ संदेश देते हैं, परंतु उनके साथ किसी प्रकार का बुरा बर्ताव, सर्वथा अनुचित एवं जघन्य अपराध है। 🌹👣जय श्री राधे कृष्णा जी 👣🌹 🌹 धन धन वृंदावन के बंदर 🌹 🌹जय जय श्री वृंदावन🌹

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Anita Rani Agarwal Jan 21, 2022

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Anita Rani Agarwal Jan 21, 2022

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. "बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े रहस्य* "1. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दो भागों में है। दाहिने भाग में शक्ति के रूप में मां भगवती विराजमान हैं। दूसरी ओर भगवान शिव वाम रूप (सुंदर) रूप में विराजमान हैं। इसीलिए काशी को मुक्ति क्षेत्र कहा जाता है।" "2. देवी भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से मुक्ति का मार्ग केवल काशी में ही खुलता है। यहां मनुष्य को मुक्ति मिलती है और दोबारा गर्भधारण नहीं करना होता है। भगवान शिव खुद यहां तारक मंत्र देकर लोगों को तारते हैं। अकाल मृत्यु से मरा मनुष्य बिना शिव अराधना के मुक्ति नहीं पा सकता।" "3. श्रृंगार के समय सारी मूर्तियां पश्चिम मुखी होती हैं। इस ज्योतिर्लिंग में शिव और शक्ति दोनों साथ ही विराजते हैं, जो अद्भुत है। ऐसा दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता है।" "4. विश्वनाथ दरबार में गर्भ गृह का शिखर है। इसमें ऊपर की ओर गुंबद श्री यंत्र से मंडित है। तांत्रिक सिद्धि के लिए ये उपयुक्त स्थान है। इसे श्री यंत्र-तंत्र साधना के लिए प्रमुख माना जाता है।" "5. बाबा विश्वनाथ के दरबार में तंत्र की दृष्टि से चार प्रमुख द्वार इस प्रकार हैं :- 1. शांति द्वार. 2. कला द्वार 3. प्रतिष्ठा द्वार 4. निवृत्ति द्वार "इन चारों द्वारों का तंत्र में अलग ही स्थान है। पूरी दुनिया में ऐसा कोई जगह नहीं है जहां शिवशक्ति एक साथ विराजमान हों और तंत्र द्वार भी हो।" "6. बाबा का ज्योतिर्लिंग गर्भगृह में ईशान कोण में मौजूद है। इस कोण का मतलब होता है, संपूर्ण विद्या और हर कला से परिपूर्ण दरबार। तंत्र की 10 महा विद्याओं का अद्भुत दरबार, जहां भगवान शंकर का नाम ही ईशान है।" "7. मंदिर का मुख्य द्वार दक्षिण मुख पर है और बाबा विश्वनाथ का मुख अघोर की ओर है। इससे मंदिर का मुख्य द्वार दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवेश करता है। इसीलिए सबसे पहले बाबा के अघोर रूप का दर्शन होता है। यहां से प्रवेश करते ही पूर्व कृत पाप-ताप विनष्ट हो जाते हैं।" "8. भौगोलिक दृष्टि से बाबा को त्रिकंटक विराजते यानि त्रिशूल पर विराजमान माना जाता है। मैदागिन क्षेत्र जहां कभी मंदाकिनी नदी और गौदोलिया क्षेत्र जहां गोदावरी नदी बहती थी। इन दोनों के बीच में ज्ञानवापी में बाबा स्वयं विराजते हैं। मैदागिन-गौदौलिया के बीच में ज्ञानवापी से नीचे है, जो त्रिशूल की तरह ग्राफ पर बनता है। इसीलिए कहा जाता है कि काशी में कभी प्रलय नहीं आ सकता।" "9. बाबा विश्वनाथ काशी में गुरु और राजा के रूप में विराजमान है। वह दिनभर गुरु रूप में काशी में भ्रमण करते हैं। रात्रि नौ बजे जब बाबा का श्रृंगार आरती किया जाता है तो वह राज वेश में होते हैं। इसीलिए शिव को राजराजेश्वर भी कहते हैं। "10. बाबा विश्वनाथ और मां भगवती काशी में प्रतिज्ञाबद्ध हैं। मां भगवती अन्नपूर्णा के रूप में हर काशी में रहने वालों को पेट भरती हैं। वहीं, बाबा मृत्यु के पश्चात तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं। बाबा को इसीलिए ताड़केश्वर भी कहते हैं।" "11. बाबा विश्वनाथ के अघोर दर्शन मात्र से ही जन्म जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। शिवरात्रि में बाबा विश्वनाथ औघड़ रूप में भी विचरण करते हैं। उनके बारात में भूत, प्रेत, जानवर, देवता, पशु और पक्षी सभी शामिल होते हैं।" ----------::;×:::---------- "जय जय श्री महाकाल" " कुमार रौनक कश्यप " ************************************************

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X7skr🇮🇳 Jan 21, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक - 22 जनवरी 2022* ⛅ *दिन - शनिवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2078* ⛅ *शक संवत -1943* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - शिशिर* ⛅ *मास - माघ (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार - पौष)* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - चतुर्थी सुबह 09:14 तक तत्पश्चात पंचमी* ⛅ *नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी सुबह 10:38 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी* ⛅ *योग - शोभन दोपहर 02:07 तक तत्पश्चात अतिगण्ड* ⛅ *राहुकाल - सुबह 10:04 से सुबह 11:27 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:19* ⛅ *सूर्यास्त - 18:21* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - 💥 *विशेष - *चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *पौष्टिक गुणों से युक्त तिल की बर्फी* 🌷 🍛 *१ – १ कटोरी तिल व मूँगफली अलग – अलग सेंकलें व एक सूखा नारियल – गोला किस लें | ५०० ग्राम गुड़ की दो तार की चाशनी बनाकर इन सबकी बर्फी जमालें |* 💪🏻 *स्वादिष्ट व पौष्टिक गुणों से युक्त यह बर्फी शीत ऋतु में बहुत लाभकारी है |* 🙏🏻 *स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *वात और पित्त सम्बन्धी बीमारियों में* 🌷 🌿 *३ नीम के पत्ते, २ बेल के पत्ते और २ काली मिर्च......उनको अच्छी तरह से पीसें और १ कप (७०-८० ml) पानी में घोल के सुबह शाम पिया करें .......तो वात और पित्त सम्बन्धी बीमारियाँ मिटेंगी और भूख भी अच्छी लगेगी l* 🙏🏻 *पूज्य पूज्य - Faridabad 1st Jan 2010* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *ग्रह दोष की शांति के लिए* 🌷 🙏🏻 *कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति हो तो दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। किसी एक ग्रह की वजह से भी हमारे कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। यहां जानिए ज्योतिष शास्त्र के कुछ ऐसे उपाय,जिनसे ग्रहों के दोष दूर होते हैं और बाधाएं दूर हो सकती हैं।* ▶ *सूर्य से संबंधित दोष को दूर करने के लिए शिवलिंग पर पीले फूल अर्पित करना चाहिए ।* ▶ *चंद्र से संबंधित दोष दूर करने के लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।* ▶ *मंगल दोष दूर करने के लिए शिवलिंग पर कुम -कुम और लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए ।* ▶ *बुद्ध संबंधित दोषों से मुक्ति के लिए शिवलिंग पर बिल्ब पत्र अर्पित करें ।* ▶ *गुरु के दोषों को दूर करने के लिए शिवलिंग पर चने की दाल और बेसन के लड्डू अर्पित करें।* ▶ *शुक्र के दोष दूर करने के लिए शिवलिंग पर हर रोज जल अर्पित करें ।* ▶ *शनि, राहु और केतु से संबंधित दोषों से मुक्ति के लिए शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करना चाहिए ।* 📖 *हिन्दू पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर* 📒 *हिन्दू पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻

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. " श्रीराम की परीक्षा " "श्रीराम का वनवास ख़त्म हो चुका था.एक बार श्रीराम ब्राम्हणों को भोजन करा रहे थे तभी भगवान शिव ब्राम्हण वेश में वहाँ आये. श्रीराम ने लक्ष्मण और हनुमान सहित उनका स्वागत किया और उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया. "भगवान शिव भोजन करने बैठे किन्तु उनकी क्षुधा को कौन बुझा सकता था ? बात हीं बात में श्रीराम का सारा भण्डार खाली हो गया. लक्ष्मण और हनुमान ये देख कर चिंतित हो गए और आश्चर्य से भर गए. एक ब्राम्हण उनके द्वार से भूखे पेट लौट जाये ये तो बड़े अपमान की बात थी.उन्होंने श्रीराम से और भोजन बनवाने की आज्ञा मांगी. " "श्रीराम तो सब कुछ जानते हीं थे, उन्होंने मुस्कुराते हुए लक्ष्मण से देवी सीता को बुला लाने के लिए कहा। सीता जी वहाँ आयी और ब्राम्हण वेश में बैठे भगवान शिव का अभिवादन किया. श्रीराम ने मुस्कुराते हुए सीता जी को सारी बातें बताई और उन्हें इस परिस्थिति का समाधान करने को कहा. " "सीता जी अब स्वयं महादेव को भोजन कराने को उद्धत हुई. उनके हाथ का पहला ग्रास खाते हीं भगवान शिव संतुष्ट हो गए।भोजन के उपरान्त भगवान शिव ने श्रीराम से कहा कि आकण्ठ भोजन करने के कारण वे स्वयं उठने में असमर्थ हैं इसी कारण कोई उन्हें उठा कर शैय्या पर सुला दे. " "श्रीराम की आज्ञा से हनुमान महादेव को उठाने लगे मगर आश्चर्य, एक विशाल पर्वत को बात हीं बात में उखाड़ देने वाले हनुमान, जिनके बल का कोई पार हीं नहीं था, महादेव को हिला तक नहीं सके. भला रुद्रावतार रूद्र की शक्ति से कैसे पार पा सकते थे ? हनुमान लज्जित हो पीछे हट गए. " "फिर श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण ये कार्य करने को आये. अब तक वो ये समझ चुके थे कि ये कोई साधारण ब्राम्हण नहीं हैं. अनंत की शक्ति भी अनंत हीं थी. परमपिता ब्रम्हा, नारायण और महादेव का स्मरण करते हुए लक्ष्मण ने उन्हें उठा कर शैय्या पर लिटा दिया." "लेटने के बाद भगवान शिव ने श्रीराम से सेवा करने को कहा. स्वयं श्रीराम लक्ष्मण और हनुमान के साथ भगवान शिव की पाद सेवा करने लगे. " "देवी सीता ने महादेव को पीने के लिए जल दिया. महादेव ने आधा जल पिया और बांकी जल का कुल्ला देवी सीता पर कर दिया. देवी सीता ने हाथ जोड़ कर कहा कि हे ब्राम्हणदेव, आपने अपने जूठन से मुझे पवित्र कर दिया. ऐसा सौभाग्य तो बिरलों को प्राप्त होता है. " "ये कहते हुए देवी सीता उनके चरण स्पर्श करने बढ़ी, तभी महादेव अपने असली स्वरुप में आ गए. महाकाल के दर्शन होते हीं सभी ने करबद्ध हो उन्हें नमन किया." "भगवान शिव ने श्रीराम को अपने ह्रदय से लगाते हुए कहा कि आप सभी मेरी परीक्षा में उत्तीर्ण हुए. ऐसे कई अवसर थे जब किसी भी मनुष्य को क्रोध आ सकता था किन्तु आपने अपना संयम नहीं खोया. " "इसी कारण संसार आपको मर्यादा पुरुषोत्तम कहता है. उन्होंने श्रीराम को वरदान मांगने को कहा किन्तु श्रीराम ने हाथ जोड़ कर कहा कि आपके आशीर्वाद से मेरे पास सब कुछ है. " "अगर आप कुछ देना हीं चाहते हैं तो अपने चरणों में सदा की भक्ति का आशीर्वाद दीजिये. महादेव ने मुस्कुराते हुए कहा कि आप और मैं कोई अलग नहीं हैं किन्तु फिर भी देवी सीता ने मुझे भोजन करवाया है इसीलिए उन्हें कोई वरदान तो माँगना हीं होगा. " "देवी सीता ने कहा कि हे भगवान, अगर आप हमसे प्रसन्न हैं तो कुछ काल तक आप हमारे राजसभा में कथावाचक बनकर रहें. उसके बाद कुछ काल तक भगवान शिव श्रीराम की सभा में कथा सुना कर सबको कृतार्थ करते रहे। ----------:::×:::---------- " जय जय सियाराम " " कुमार रौनक कश्यप " **********************************************

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