Babbu Bhai
Babbu Bhai Jan 6, 2022

Jai Mata Di Jai Shree Lakshmi Narayan Ji Shubh Prabhat Shubh Guruvar

Jai Mata Di
Jai Shree Lakshmi Narayan Ji
Shubh Prabhat
Shubh Guruvar

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Reena Singh Jan 6, 2022
Om namo bhagwate vasudevay namah good morning vandan bhai ji shree laxmi narayan ji ki kripa aap spariwar par sda bani rahe aapka har pal shubh mangalmay ho🌹🙏🌹

Rama Devi Sahu Jan 6, 2022
Om Shree Paramatmane Namah 🙏 Suprabhat Vandan Bhaiya Jii 🙏 Aap ka din Subh o Mangal Hoo 🙏🌹🌹

Gd Bansal Jan 6, 2022
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।। जय श्री लक्ष्मी नारायण ।।

sanjay rastogi Jan 6, 2022
Om shri Laxmi Narayan ji subh guruwar vandan ji ap ka din subh aur mangalmay ho

Sudha Mishra Jan 6, 2022
Jai Shri Hari vishnu ji🙏🌹 Shubh dophar vandan Bhai ji🌹Bhagwan Shri Hari vishnu ji aur mata Lakshmi ji ki kripa sda aap pr aapke parivar pr bni rahe Bhai ji 🙏🌹

PAWAN LUTHRA Jan 25, 2022

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Deva khatri bhai ji Jan 25, 2022

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. माघ माहात्म्य अध्याय - 08 यमदूत कहने लगा कि तुमने बड़ी सुन्दर वार्ता पूछी है। यद्यपि मैं पराधीन हूँ फिर भी तुम्हारे स्नेहवश अपनी बुद्धि के अनुसार बतलाता हूँ। जो प्राणी काया, वाचा और मनसा से कभी दूसरों को दुख नहीं देते वे यमलोक में नहीं जाते। हिंसा करने वाले, वेद, यज्ञ, तप और दान से भी उत्तम गति को नहीं पाते। अहिंसा सबसे बड़ा धर्म, तप और दान ऋषियों ने बताया है। जो मनुष्य जल या पृथ्वी पर रहने वाले जीवों को अपने भोजन के लिए मारते हैं वे कालसूत्र नामक नर्क में पड़ते हैं और वहाँ पर अपना माँस खाते हैं और रक्त-पीप पान करते हैं तथा पीप की कीच में उनको कीड़े काटते हैं। हिंसक, जन्मांध, काने-कुबड़े, लूले, लंगड़े, दरिद्र और अंगहीन होते हैं। इस कारण इस लोक तथा परलोक में सुख की इच्छा करने वाले को काया, वाचा तथा मन में दूसरों का द्रोह नहीं करना चाहिए। जो हिंसा नहीं करते उनको किसी प्रकार का भय नहीं होता। जिस तरह सीधी और टेढ़ी दोनों प्रकार की बहने वाली नदियाँ समुद्र में मिल जाती हैं वैसे ही सब धर्म अहिंसा में प्रवेश कर जाते हैं। ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थी तथा यति सभी अपने-अपने धर्म का पालन करने और जितेन्द्रिय रहने से ब्रह्मलोक को प्राप्त करते हैं। जो जलाशय आदि बनाते हैं और सदैव पांचों यज्ञ करते हैं वे यमपुरी में नहीं जाते। जो इंद्रियों के वशीभूत नहीं हैं, वेदवादी और नित्य ही अग्नि अर्थात हवन आदि का पूजन करते हैं वे स्वर्ग को जाते हैं। युद्ध भूमि में जो शूरवीर मर जाते हैं वे सूर्यलोक को प्राप्त होते हैं। जो अनाथ, स्त्री, शरण में आए हुए तथा ब्राह्मण की रक्षा के लिए प्राण देते हैं वे कभी स्वर्ग से नहीं लौटते। जो मनुष्य लूले-लंगड़े, वृद्ध, अनाथ तथा गरीबों का पालन करते हैं वह भी स्वर्ग में जाते हैं। जो मनुष्य गौओं के लिए पानी का आश्रय करते हैं तथा कुंआ, तालाब और बावड़ी बनवाते हैं वे सदैव स्वर्ग में निवास करते हैं। जैसे-जैसे जीव इनमें पानी पीते हैं वैसे ही उनका धर्म बढ़ता है। जल से ही मनुष्य के प्राण हैं इसलिए जो प्याऊ आदि लागते हैं वह अक्षय स्वर्ग को प्राप्त होते हैं। बड़े-बड़े यज्ञ भी वह फल नहीं देते जो अधिक छाया वाले वृक्ष मार्ग में लगाने से देते हैं। जो मनुष्य वृक्ष रोपण करता है वह सदैव दानी और यज्ञ करने वाला होता है। जो अच्छे फल और अच्छी छाया वाले मार्ग के वृक्षों को काटता है वह नर्कगामी होता है। तुलसी का पौधा लगाने वाला सब पापों से छूट जाता है। जिस घर में तुलसीवन है वह घर तीर्थ के समान है और उस घर में कभी यमदूत नहीं जाते। तुलसी की सुगंध से पितरों का चित्त आनंदित हो जाता है और वे विमान में बैठकर विष्णुलोक को जाते हैं। नर्मदा नदी का दर्शन, गङ्गा का स्नान और तुलसीदल का स्पर्श यह सब बराबर-बराबर फल देने वाले हैं। हर एक द्वादशी को ब्रह्मा भी तुलसी का पूजन करते हैं। रत्न, सोना, फूल तथा मोती की माला के दान का इतना पुण्य नहीं जितना तुलसी की माला के दान का है। जो फल आम के हजार और पीपल के सौ वृक्षों को लगाने से होता है वह तुलसी के एक पौधे के लगाने से होता है। पुष्कर आदि तीर्थ, गङ्गा आदि नदी, वासुदेव आदि देवता सब ही तुलसी में वास करते हैं। जो एक बार, दो या तीन बार रेवा नदी से उत्पन्न शिव मूर्त्ति की पूजा करता है अथवा स्फुटिक रत्न के पत्थर के आप से आप निकले हुए तीर्थ में पर्वत या वन में रखी हुई शिव की मूर्त्ति की पूजा करता है और सदैव “ऊँ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करता है, यमलोक की कथा भी नहीं सुनता। प्रसंग, शत्रुता, अभिमान से शिव पूजा के समान पापों को नष्ट करने वाला तथा कीर्त्ति देने वाला तीन लोक में और कोई काम नहीं हैं। जो शिवालय स्थापित करते हैं वे शिवलोक में जाते हैं। ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव का मंदिर बनाकर मनुष्य बैकुंठवासी होता है। जो भगवान की पूजा के लिए फूलों का बाग लगाते हैं वे धन्य हैं। जो माता-पिता, देवता और अतिथियों का सदैव पूजन करते हैं वे ब्रह्म लोक को प्राप्त होते हैं। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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