🎎धर्मपत्नी के भाई को साला क्यों कहते हैं🎎 ************************************ 🚩🪔👣जय माता दी 👣🪔🚩 🌺🎇🍑शुभ शुक्रवार🍑🎇🌺 🌹🌴🌀शुभरात्रि🌀🌴🌹 🙏आप और आपके पूरे परिवार को भादो माह के पहले शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🌺आप और आपके पूरे परिवार पर माता रानी की आशीर्वाद निरंतर बनी रहेऔर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो 👏 🌀अपका का दिन शुभ और मंगलमय हो 🌀 🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇 🎎धर्मपत्नी के भाई को साला क्यों कहते हैं🎎 ************************************* 🧑कितना श्रेष्ठ और सम्मानित होता है🧑 🌹"साला" शब्द की रोचक जानकारी🌹 हम प्रचलन की बोलचाल में *साला* शब्द को एक *"गाली"* के रूप में देखते हैं साथ ही *"धर्मपत्नी"* के भाई/भाइयों को भी "साला", *"सालेसाहब"* के नाम से इंगित करते हैं। 🏵️"पौराणिक कथाओं"* में से एक *"#समुद्र_मंथन"* में हमें एक जिक्र मिलता है, मंथन से जो *14 दिव्य रत्न* प्राप्त हुए थे वो : कालकूट (हलाहल), ऐरावत, कामधेनु, उच्चैःश्रवा, कौस्तुभमणि, कल्पवृक्ष, रंभा (अप्सरा), महालक्ष्मी, शंख (जिसका नाम साला था!), वारुणी, चन्द्रमा, शारंग धनुष, गंधर्व, और अंत में अमृत। 🌺*"लक्ष्मीजी"* मंथन से *"स्वर्ण"* के रूप में निकली थी, इसके बाद जब *"साला शंख"* निकला, तो उसे *लक्ष्मीजी* का भाई कहा गया! *दैत्य और दानवों* ने कहा कि अब देखो लक्ष्मीजी का *भाई साला (शंख)* आया है .. तभी से ये प्रचलन में आया कि नव विवाहिता "बहु" या *धर्मपत्नी* जिसे हम *"गृहलक्ष्मी"* भी कहते है, उसके भाई को बहुत ही पवित्र नाम साला कह कर पुकारा जाता हैं। 🐚समुद्र *मंथन* के दौरान "#पांचजन्य साला शंख" *प्रकट* हुआ, इसे भगवान *विष्णु* ने अपने पास रख लिया। 🐚इस शंख को *"विजय का प्रतीक"* माना गया है, साथ ही इसकी ध्वनि को भी बहुत ही शुभ माना गया है। 🌋*विष्णु पुराण* के अनुसार *माता लक्ष्मी* समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका *सहोदर* भाई है। अतः यह भी मान्यता है कि जहाँ *शंख है*, वहीं *लक्ष्मी* का वास होता है। 🩸इन्हीं कारणों से *हिन्दुओं* द्वारा पूजा के दौरान *शंख* को बजाया जाता है। 🏵️जब भी *धन-प्राप्ति* के उपाय करो "*शंख" को कभी नजर अंदाज ना करे, *लक्ष्मीजी* का चित्र या प्रतिमा के नजदीक रखें। जब भी किसी जातक का साला या जातिका का भाई खुश होता है तो ये उनके यहाँ *"धन आगमन"* का शुभ सूचक होता है और इसके विपरीत साले से *संबंध बिगाड़ने पर जातक घोर दरिद्रता का जीवन जीने लगता है। 🎎अतः *साले* साहब को सदैव *प्रसन्न* रखें *लक्ष्मी* स्वयं चलकर आपके घर दस्तक देगी और है तो बनी रहेगी..... 🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗 🌹🙏 जय माता लक्ष्मी जी🙏🌹

🎎धर्मपत्नी के भाई को साला क्यों कहते हैं🎎
************************************
🚩🪔👣जय माता दी 👣🪔🚩
🌺🎇🍑शुभ शुक्रवार🍑🎇🌺
🌹🌴🌀शुभरात्रि🌀🌴🌹
🙏आप और आपके पूरे परिवार को भादो माह के पहले शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं🙏
🌺आप और आपके पूरे परिवार पर माता
रानी की आशीर्वाद निरंतर बनी रहेऔर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो 👏
🌀अपका  का दिन शुभ और मंगलमय हो 🌀
🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇🎇
🎎धर्मपत्नी के भाई को साला क्यों कहते हैं🎎
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  🧑कितना श्रेष्ठ और सम्मानित होता है🧑
🌹"साला" शब्द की रोचक जानकारी🌹
हम प्रचलन की बोलचाल में *साला* शब्द को एक *"गाली"* के रूप में देखते हैं साथ ही *"धर्मपत्नी"* के भाई/भाइयों को भी "साला", *"सालेसाहब"* के नाम से इंगित करते हैं। 
🏵️"पौराणिक कथाओं"* में से एक *"#समुद्र_मंथन"* में हमें एक जिक्र मिलता है, मंथन से जो *14 दिव्य रत्न* प्राप्त हुए थे वो :
कालकूट (हलाहल), ऐरावत, कामधेनु, उच्चैःश्रवा, कौस्तुभमणि, कल्पवृक्ष, रंभा (अप्सरा), महालक्ष्मी, शंख (जिसका नाम साला था!), वारुणी, चन्द्रमा, शारंग धनुष, गंधर्व, और अंत में अमृत। 

🌺*"लक्ष्मीजी"* मंथन से *"स्वर्ण"* के रूप में निकली थी, इसके बाद जब *"साला शंख"* निकला, तो उसे *लक्ष्मीजी* का भाई कहा गया!
*दैत्य और दानवों* ने कहा कि अब देखो लक्ष्मीजी का *भाई साला (शंख)* आया है ..
तभी से ये प्रचलन में आया कि नव विवाहिता "बहु" या *धर्मपत्नी* जिसे हम *"गृहलक्ष्मी"* भी कहते है, उसके भाई को बहुत ही पवित्र नाम साला कह कर पुकारा जाता हैं।

🐚समुद्र *मंथन* के दौरान "#पांचजन्य साला शंख" *प्रकट* हुआ, इसे भगवान *विष्णु* ने अपने पास रख लिया।
🐚इस शंख को *"विजय का प्रतीक"* माना गया है, साथ ही इसकी ध्वनि को भी बहुत ही शुभ माना गया है।
🌋*विष्णु पुराण* के अनुसार *माता लक्ष्मी* समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका *सहोदर* भाई है।
अतः यह भी मान्यता है कि जहाँ *शंख है*, वहीं *लक्ष्मी* का वास होता है।
🩸इन्हीं कारणों से *हिन्दुओं* द्वारा पूजा के दौरान *शंख* को बजाया जाता है।

🏵️जब भी *धन-प्राप्ति* के उपाय करो "*शंख" को कभी नजर अंदाज ना करे, *लक्ष्मीजी* का चित्र या प्रतिमा के नजदीक रखें।
जब भी किसी जातक का साला या जातिका का भाई खुश होता है तो ये उनके यहाँ *"धन आगमन"* का शुभ सूचक होता है और इसके विपरीत साले से *संबंध बिगाड़ने पर जातक घोर दरिद्रता का जीवन जीने लगता है।

🎎अतः *साले* साहब को सदैव *प्रसन्न* रखें
 *लक्ष्मी* स्वयं चलकर आपके घर दस्तक देगी और है तो बनी रहेगी.....
🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗🥗
       🌹🙏 जय माता लक्ष्मी जी🙏🌹

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🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@ranjukumari 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@indraj474 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@krisuuu 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@manojgupta178agra 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@muneshtyagi1 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@ramjisinghparmar 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@ramjisinghparmar 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@sohankalal 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@seemavalluvar1 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@gaurav 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@svchauhan 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@rk1294 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@charusharma6 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@rani547 🌹शुभरात्रि वंदन दीदी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@rajeshrajesh14 🌹शुभरात्रि वंदन भाई🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@नरेशश्रीहरि 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Aug 28, 2021
@seeta 🌹शुभरात्रि वंदन जी🌹 🙏आपको सपरिवार श्री बलराम जन्मोत्सव और भादों माह के पहले शनिवार की हार्दिक शुभकामनाएं🌹 👏आप और आपके पूरे परिवार पर श्री बलराम जी , हनुमान जीऔर शनिदेव की कृपा सदा बनी रहे जी🙏 🌸आपका रात्रि शुभ मंगलमय हो🌹

ILA SINHA Nov 27, 2021

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श्रीमद्भागवत महापुराणम् 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ सप्तम: स्कन्ध: अथैकादशोऽध्यायः मानवधर्म, वर्णधर्म और स्त्रीधर्म का निरूपण...(भाग 1) 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ श्रीशुक उवाच श्रुत्वेहितं साधुसभासभाजितं महत्तमाप्रण्य उरुक्रमात्मनः । युधिष्ठिरो दैत्यपतेर्मुदा युतः पप्रच्छ भूयस्तनयं स्वयम्भुवः ॥ १ युधिष्ठिर उवाच भगवज्छ्रोतुमिच्छामि नृणां धर्मं सनातनम्। वर्णाश्रमाचारयुतं यत् पुमान्विन्दते परम् ॥ २ भवान्प्रजापतेः साक्षादात्मजः परमेष्ठिनः । सुतानां सम्मतो ब्रह्मंस्तपोयोगसमाधिभिः ॥ ३ नारायणपरा विप्रा धर्मं गुह्यं परं विदुः । करुणा: साधवः शान्तास्त्वद्विधा न तथापरे ॥ ४ नारद उवाच नत्वा भगवतेऽजाय लोकानां धर्महेतवे । वक्ष्ये सनातनं धर्मं नारायणमुखाच्छ्रुतम् ॥ ५ योऽवतीर्यात्मनोंऽशेन दाक्षायण्यां तु धर्मतः । लोकानां स्वस्तयेऽध्यास्ते तपो बदरिकाश्रमे ॥६ धर्ममूलं हि भगवान्सर्ववेदमयो हरिः । स्मृतं च तद्विदां राजन्येन चात्मा प्रसीदति ॥७ श्लोकार्थ 〰️〰️〰️ श्रीशुकदेवजी कहते हैं- भगवन्मय प्रह्लादजी के साधुसमाज में सम्मानित पवित्र चरित्र सुनकर संतशिरोमणि युधिष्ठिर को बड़ा आनन्द हुआ। उन्होंने नारदजी से और भी पूछा।।१।। युधिष्ठिरजी ने कहा – भगवन् ! अब मैं वर्ण और आश्रमों के सदाचार के साथ मनुष्यों के सनातनधर्म का श्रवण करना चाहता हूँ, क्योंकि धर्म से ही मनुष्य को ज्ञान, भगवत् प्रेम और साक्षात् परम पुरुष भगवान्‌ की प्राप्ति होती है ॥ २ ॥ आप स्वयं प्रजापति ब्रह्माजी के पुत्र हैं और नारदजी ! आपकी तपस्या, योग एवं समाधि के कारण वे अपने दूसरे पुत्रों की अपेक्षा आपका अधिक सम्मान भी करते हैं ॥ ३ ॥ आपके समान नारायण-परायण, दयालु, सदाचारी और शान्त ब्राह्मण धर्म के गुप्त-से- गुप्त रहस्य को जैसा यथार्थरूप से जानते हैं, दूसरे लोग वैसा नहीं जानते ॥ ४ ॥ नारदजी ने कहा- युधिष्ठिर! अजन्मा भगवान् ही समस्त धर्मोकि मूल कारण हैं। वही प्रभु चराचर जगत् के कल्याण के लिये धर्म और दक्षपुत्री मूर्ति के द्वारा अपने अंश से अवतीर्ण होकर बदरिकाश्रम में तपस्या कर रहे हैं। उन नारायण भगवान्‌ को नमस्कार करके उन्हीं के मुख से सुने हुए सनातन धर्म का मैं वर्णन करता हूँ ॥ ५-६ ।। युधिष्ठिर ! सर्ववेदस्वरूप भगवान् श्रीहरि, उनका तत्त्व जानने वाले महर्षियों की स्मृतियाँ और जिससे आत्मग्लानि न होकर आत्मप्रसाद की उपलब्धि हो, वह कर्म धर्म के हैं मूल है ॥ ७ ॥ क्रमशः... शेष अलगे लेख में... 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

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श्रीमद्देवीभागवत (छठा स्कन्ध) 〰️〰️🌼〰️🌼🌼〰️🌼〰️〰️ अध्याय 8 (भाग 2) ॥श्रीभगवत्यै नमः ॥ देवताओं का बृहस्पतिजी से परामर्श, बृहस्पतिजी की सम्पति के अनुसार कार्य-सम्पादन, इन्द्राणी पर देवी की कृपा, नहुष का मुनियों की पालकी पर सवार होना और मुनि के शाप से नहुष का पतन तथा उसे सर्प-योनि की प्राप्ति... 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ व्यासजी कहते हैं - देवताओं की बात सुनकर बृहस्पतिजी ने उन्हें उत्तर दिया- "परम साध्वी शची मेरे यहाँ शरणार्थी बनकर आयी हैं। मैं इनका त्याग नहीं करूँगा। एक उपाय है- एक बार शची राजा नहुष के सामने जायँ और उससे कहें कि 'मैं तुम्हारी सेवा अवश्य करूँगी; परंतु पहले यह पता लगा लूँ कि मेरे पति जीवित तो नहीं हैं। सम्भव है, मेरे पतिदेव इन्द्र जीवित हों; ऐसी स्थिति में मैं दूसरे को कैसे स्वामी बना सकती हूँ। अतः उन महाभाग को खोजने के लिये एक बार मेरे लिये वापस लौटना आवश्यक है।' इन्द्राणी को चाहिये कि इस प्रकार कहकर नहुष को धोखे में डाल दे, फिर जैसा मैं बताऊँ, उसके अनुसार पतिदेव को ले आने का प्रयत्न करना चाहिये।" इस प्रकार आपस में परामर्श करके जितने भी देवता थे, वे सब-के-सब शची को साथ लेकर नहुष के पास पहुँचे। जब उस बनावटी इन्द्र नहुष ने देखा कि देवता आ गये और साथ में शची भी है, तब उसके हर्ष की सीमा न रही। वह ठहाका मारकर हँसा और शची से कहने लगा – 'प्रिये! चारुलोचने! इस समय मैं इन्द्र के पदपर प्रतिष्ठित हूँ। देवताओं ने मुझे यह गौरव प्रदान किया है। अखिल भूमण्डल का शासन-सूत्र मेरे हाथ में है। अतः अब तुम मेरी सेवा में आ जाओ।' नहुष के यों कहने पर इन्द्राणी के शरीर में कँपकँपी छूट गयी। उसका हृदय आतंकित हो गया। फिर सँभलकर वे उससे कहने लगीं- 'देवेश्वर के पद पर शोभा पाने वाले नरेश! आपसे मैं एक अभिलषित वर की याचना करती हूँ। उस समय तक आप प्रतीक्षा करें – जबतक कि मैं यह निर्णय न कर लूँ कि मेरे पति इन्द्र जीवित हैं या नहीं; क्योंकि इस बात का संदेह मेरे मन में बना हुआ है। अभीतक मुझे ठीक-ठीक पता ही नहीं कि उनका मरण हो गया अथवा वे कहीं चले गये।' शची ने जब इस प्रकार नहुष से कहा, तब उसके मुख पर प्रसन्नता छा गयी। 'बहुत ठीक है, ऐसा ही हो' कहकर बड़े उत्साह के साथ नहुष ने शची देवी को वहाँ से जाने की आज्ञा दे दी। उससे छुटकारा पाने पर इन्द्राणी तुरंत देवताओं के पास गयीं और उनसे कहा ‘आपलोग बड़े उद्यमशील पुरुष हैं। अब मेरे पतिदेव को यहाँ लौटा लाने का प्रयत्न कीजिये ।' शची देवी के इस पवित्र एवं मधुर वचन को सुनकर देवता बड़ी सावधानी के साथ इन्द्र के विषय में विचार करने लगे। जय माता जी की क्रमश... शेष अगले अंक में जय माता जी की 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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ILA SINHA Nov 26, 2021

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संक्षिप्त भविष्य पुराण 〰️〰️🌸🌸🌸〰️〰️ ★उत्तरपर्व (चतुर्थ खण्ड)★ (दोसौ उनसठवाँ दिन) ॐ श्री परमात्मने नमः श्री गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय हेमहस्त्तिरथ दान की विधि...(भाग 1) 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं – महाराज! अब इसके बाद मैं मङ्गलमय सुवर्णनिर्मित हस्तिरथदान का वर्णन कर रहा हूँ, जिससे मनुष्य विष्णुलोक में जाता है। किसी पुण्यतिथि के आने पर संक्रान्ति या ग्रहणकाल में बुद्धिमान् यजमान को मणियों से सुशोभित देवताओं के रथ के आकार का सुवर्णमय रथ, जो विचित्र तोरणों और चार पहियों से युक्त हो, बनवाना चाहिये। उसमें स्वर्णनिर्मित चार श्रेष्ठ हाथी भी रहने चाहिये। उस रथ को कृष्णमृगचर्म के ऊपर रखे गये एक द्रोण तिलपर स्थापित करना चाहिये। वह रथ आठों लोकपाल, ब्रह्मा, सूर्य और शिव की प्रतिमाओं से युक्त हो । उसके मध्यभाग में लक्ष्मी सहित विष्णुभगवान्‌ की भी मूर्ति होनी चाहिये। उसके ध्वज पर गरुड तथा जुआ के अग्रभाग पर विनायक को स्थापित करना चाहिये। वह नाना प्रकार के फलों से युक्त हो और उसके ऊपर चँदोवा तना हो। वह पँचरंगे रेशमी वस्त्र, विकसित पुष्पों से सुशोभित हो । नरोत्तम! अपनी शक्ति के अनुसार उस रथ को पाँच पल से ऊपर सौ पल सोने तक का बनवाना चाहिये । इस प्रकार वेदज्ञ ब्राह्मणों द्वारा माङ्गलिक शब्दों के उच्चारण के साथ स्नान कराया गया यजमान देवताओं और पितरों की अभ्यर्चना करे। अञ्जलि में फूल लेकर तीन बार रथ की प्रदक्षिणा करे तथा सम्पूर्ण सुखों को प्रदान करने वाले इन मन्त्रों का उच्चारण करे नमो नमः शङ्करपद्मजार्क लोकेशविद्याधरवासुदेवैः त्वं सेव्यसे वेदपुराणयज्ञै स्तेजोमयस्यन्दन पाहि तस्मात् ॥ यत्तत्पदं परमगुह्यतमं मुरारे रानन्दहेतुगुणरूपविमुक्तवन्तम् योगैकमानसदृशो मुनयः समाधौ पश्यन्ति तत्त्वमसि नाथ रथाधिरूढ ॥ यस्मात् त्वमेव भवसागरसम्प्लुताण्ड • मानन्दभारमृतमध्वरपानपात्रम् तस्मादघौघशमनेन कुरु प्रसादं चामीकरेभरथ माधव सम्प्रदानात् ॥ (उत्तरपर्व १८९ । ९-११) ‘तेजोमय स्यन्दन! शंकर, ब्रह्मा, सूर्य, लोकपाल, विद्याधर, वासुदेव, वेद, पुराण और यज्ञ तुम्हारी सेवा करते हैं, अतः तुम मेरी रक्षा करो। तुम्हें बारम्बार नमस्कार है। रथाधिरूढ स्वामिन् ! जो पद परम गुह्यतम, सनातन, आनन्द का हेतु और गुण एवं रूपसे परे है तथा एकमात्र योगरूप मानसिक दृष्टि वाले मुनिगण जिसका समाधिकाल में दर्शन करते हैं, वह आप ही हैं। माधव! चूँकि आप ही भवसागर में डूबने वालों के लिये आनन्द के पात्र, सत्यस्वरूप तथा यज्ञों में पानपात्र हैं, इसलिये आप इस सुवर्णमय हस्तिरथ के दान से मेरे पापपुञ्जों को नष्टकर मुझ पर कृपा कीजिये ।' जो मनुष्य इस प्रकार प्रणाम करके स्वर्णमय हस्तिरथ-दान करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और विद्याधर, देवगण एवं मुनीन्द्रगणों द्वारा सेवित इन्द्रियातीत भगवान् शिव के लोक को प्राप्त करता है तथा अपने बन्धुओं, पितरों, पुत्रों एवं सम्पूर्ण बान्धवों को विष्णुभगवान्‌ के शाश्वत लोक में ले जाता है। जय श्रीराम क्रमश... शेष अगले अंक में 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

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Archana Singh Nov 26, 2021

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संक्षिप्त योगवशिष्ठ (निर्वाण-प्रकरण-उत्तरार्ध) (दो सौ उन्नीसवाँ दिन) 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ श्री गणेशाय नमः ॐ श्रीपरमात्मनेनमः आत्मा या ब्रह्म को समता, सर्वरूपता तथा द्वैतशून्यता का प्रतिपादन; जीवात्मा की ब्रह्मभावना से संसार- निवृत्ति का वर्णन...(भाग 1) 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ श्रीवसिष्ठजी कहते हैं— रघुनन्दन ! सर्वत्र व्यापक परमात्मा एक होता हुआ ही सभी रूपों में विराजमान है। उसमें अज्ञानवश ही अनेकता की कल्पना हुई है । ज्ञान हो जाने पर तो न वह एक है और न अनेक या सर्वरूप ही; फिर उसमें नानात्व की कल्पना कैसे हो सकती है । आदि-अन्त से रहित सारा आकाश चित्तत्व – सच्चिदानन्द परब्रह्म परमात्मा से परिपूर्ण है । फिर शरीर की उत्पत्ति और विनाश होने पर भी उस चेतन तत्त्व का खण्डन कैसे हो सकता है । अमावास्या के बाद जब प्रतिपदा को चन्द्रमा की एक कला उदित होती है, तब समुद्र आनन्द के मारे उछलने लगता है और जब प्रलयकाल की प्रचण्ड वायु चलती है, तब वह सूख जाता है। परंतु आत्मतत्त्व कभी किसी अवस्था में न तो क्षुब्ध होता है और न क्षीण ही होता है । वह सदा समभाव से सौम्य बना रहता है। जैसे नाव पर यात्रा करने वाले पुरुष को स्थावर वृक्ष और पर्वत आदि चलते-से प्रतीत होते हैं तथा जैसे सीपी में लोगों को चाँदी का भ्रम होता है, उसी प्रकार चित्त को चिन्मय परमात्मा में देहादिरूप जगत् की प्रतीति होती है। यह शरीर आदि चित्त की कल्पना है और शरीर आदि की दृष्टि से चित्त की कल्पना हुई है। इसी प्रकार देह और चित्त दोनों की दृष्टि से जीवभाव की कल्पना हुई है । वास्तव में ये सब-के-सब परमपदस्वरूप परब्रह्म परमात्मा में बिना हुए हो प्रतीत होते हैं अथवा ये सब-के-सब चिन्मय परम तत्त्व से भिन्न नहीं हैं; ऐसी दशा में द्वैत कहाँ रहा: परब्रह्म परमात्मा का यथार्थ ज्ञान होने पर यह सब कुछ एकमात्र शान्त स्वरूप ब्रह्म ही सिद्ध होता है । अतः ब्रह्म के सिवा जगत् आदि दूसरा कोई पदार्थ नहीं है और न दूसरी कोई भ्रान्ति ही है । रघुनन्दन वासनायुक्त जीवात्मा की भावना से जगत् सम्पत्ति का प्रादुर्भाव होता है और वासनाशून्य जीवात्मा की ब्रह्मभावना से संसार को निवृत्ति होती है । जीवात्मा का जो वासनारहित विशुद्ध स्पन्दन (भावना ) है, उसे स्पन्दन माना ही नहीं गया है, जैसे समुद्र में भँवर आदि के द्वारा भीतर घुसती हुई तरङ्ग स्पन्दनशील होने पर भी स्पन्दनशून्य ही मानी जाती है। किंतु जन्म की कारणभूता जो जीवात्मा की दृश्यभावना है, उसके भीतर जो वासनारस विद्यमान है, वही अङ्कर प्रकट करता है; अतः उसी को असङ्गरूप अग्नि से जलाकर भस्म कर देना चाहिये। मनुष्य कर्म करता हो या न करता हो; परंतु शुभाशुभ कार्यों में वह जो मन से डूब नहीं जाता, उसकी इस अनासक्ति को ही विद्वान् पुरुष असङ्ग मानते हैं अथवा वासना को उखाड़ फेंकना ही असङ्ग कहा गया है । अहंभाव का त्याग करना ही संसार-सागर से पार होना है और उसी का नाम वासनाक्षय है । इसके लिये अपने पुरुषार्थ के सिवा दूसरी कोई गति नहीं है। श्रीराम ! तुम तो आत्माराम और पूर्णकाम हो ही । सारी इच्छाओं से रहित निश्शङ्क हो समस्त कार्य करते हुए भी केवल अपने चिन्मय स्वरूप में ही स्थित हो । भय तुमसे सदा दूर ही रहता है । अतः अपनी सहज शान्ति के द्वारा सबके मनोऽभिराम बने रहो। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय क्रमशः... शेष अलगे लेख में... 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

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Archana Singh Nov 26, 2021

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