Jasbir Singh nain
Jasbir Singh nain Nov 19, 2021

रोहिणी व्रत शुभ प्रभात जी 🪔🪴🙏🙏 जय बजरंगबली 🙏🙏 20 नवम्बर, 2021 (शनिवार) जैन समुदाय का सबसे खास व्रत रोहिणी व्रत होता है। आज के दिन जैन समुदाय के लोग रोहिणी व्रत करते हैं। इस व्रत का महत्व जैन समुदाय के लिए अत्याधिक माना गया है। यह व्रत रोहिणी नक्षत्र के दिन किया जाता है। यही कारण है कि इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। व्रत के पारण की बात करें तो यह तब किया जाता है जब रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होता है और मार्गशीर्ष नक्षत्र आता है। हर वर्ष 12 रोहिणी व्रत आते हैं। मान्यता है कि इस व्रत का पालन 3, 5 या 7 वर्षों तक लगातार किया जाता है। अगर उचित अवधि की बात करें तो यह 5 वर्ष और 5 महीने है। इस व्रत का समापन उद्यापन द्वारा ही किया जाता है। यह व्रत पुरुष और स्त्रियां दोनों कर सकते हैं। हालांकि, स्त्रियों के लिए यह व्रत अनिवार्य माना गया है। रोहिणी व्रत महत्व जैन समुदाय की मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से आत्मा के विकार दूर होते हैं। रोहिणी व्रत कर्म बंधन से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है। रोहिणी व्रत पूजा विधि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए और घर की साफ सफाई भी अच्छे से कर लेनी चाहिए। इसके बाद सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें और फिर व्रत का संकल्प लें। फिर आमचन कर अपने आप को शुद्ध करें। इसके बाद सबसे पहले सूर्य भगवान को जल का अर्घ्य दें। इस व्रत के दौरान जैन धर्म में रात का भोजन करने की मनाही होती है। ऐसे में इस व्रत को अगर आप कर रहे हैं तो आपको फलाहार सूर्यास्त से पूर्व कर लेना चाहिए। रोहिणी व्रत की पौराणिक कथा प्राचीन समय में चंपापुरी नगर में राजा माधवा और रानी लक्ष्‍मीपति रहते थे। उनके उनके 7 पुत्र और एक पुत्री रोहिणी थी। जब राहणी बड़ी हुई तो राजा ने निमित्‍तज्ञानी से पूछा कि मेरी पुत्री का वर कौन होगा? तो उन्‍होंने बताया कि आपकी पुत्री का विवाह हस्तिनापुर के राजकुमार अशोक के साथ होगा। यह सुनकर राजा ने स्‍वयंवर का आयोजन किया, जिसमें राजकुमार अशोक भी आए और रोहणी ने राजकुमार अशोक के गले में वरमाला डाली और दोनों का विवाह हो गया। एक दिन हस्तिनापुर में चारण मुनिराज पधारे थे तब राजा अपने प्रियजनों के साथ उनके दर्शन के लिए गए और उनके धर्म उपदेश सुने। इसके पश्‍चात राजा ने मुनिराज से पूछा कि मेरी रानी इतनी शांतचित्त क्‍यों है? तब गुरुवर ने कहा कि इसी नगर में वस्‍तुपाल नाम का राजा हुआ करता था और उसका धनमित्र नामक एक मित्र था। उस धनमित्र की एक कन्या हुई जिसके शरीर से हमेशा ही दुर्गंध आती रहती थी और यह सोच कर वह चिंतित होता था कि उसकी कन्या से कौन विवाह करेगा। धनमित्र ने धन का लोभ देकर अपने मित्र के पुत्र श्रीषेण से उसका विवाह कर दिया, लेकिन अत्‍यंत दुर्गंध के कारण वह दुर्गंधा को छोड़ कर चला गया। उसी समय अमृतसेन मुनिराज विहार करते हुए नगर में आए तो धनमित्र अपनी पुत्री दुर्गंधा के साथ वंदना करने गया और मुनिराज से पुत्री के भविष्य के बारे में पूछा। उन्‍होंने बताया कि गिरनार पर्वत के निकट एक नगर में राजा भूपाल राज्‍य करते थे। उनकी सिंधुमती नाम की रानी थी। एक दिन राजा, रानी सहित वनक्रीड़ा के लिए चले, सो मार्ग में मुनिराज को देखकर राजा ने रानी से घर जाकर मुनि के लिए आहार व्यवस्था करने को कहा। राजा की आज्ञा से रानी चली तो गई, परंतु क्रोधित होकर उसने मुनिराज को कड़वी तुम्‍बी का आहार दिया जिससे मुनिराज को अत्‍यंत वेदना हुई और तत्‍काल उन्‍होंने प्राण त्‍याग दिए। जब राजा को पता चला कि उनकी रानी के कारण ऐसा हुआ है तो उन्होंने अपनी रानी को नगर से निकाल दिया और रानी को किए पाप के कारण शरीर में कोढ़ उत्‍पन्‍न हो गया। अत्‍यधिक वेदना व दु:ख को भोगते हुए वो रौद्र भावों से मरकर नर्क में गई। वहां अनंत दु:खों को भोगने के बाद पशु योनि में उत्‍पन्न और फिर तेरे घर दुर्गंधा कन्‍या हुई। तब धनमित्र ने पूछा स्वामी मुझे इससे मुक्ति का उपाय बताएं। तब स्वामी ने कहा कि यदि परिवार के सभी सदस्य रोहिणी व्रत पालन करें तो इससे मुक्ति मिल सकती है। यह व्रत पांच साल और पांच मास लगातार हर महीने करना होगा। इसके बाद सभी ने ऐसा ही किया और दुर्गंधा के शरीर से बदबू आना बंद हो गई। दुर्गंधा ने श्रद्धापूर्वक व्रत धारण किया और आयु के अंत में संन्यास सहित मरण कर प्रथम स्‍वर्ग में देवी हुई। वहां से आकर तेरी परमप्रिया रानी हुई।

रोहिणी व्रत शुभ प्रभात जी 🪔🪴🙏🙏 जय बजरंगबली 🙏🙏
20 नवम्बर, 2021 (शनिवार)
जैन समुदाय का सबसे खास व्रत रोहिणी व्रत होता है। आज के दिन जैन समुदाय के लोग रोहिणी व्रत करते हैं।



इस व्रत का महत्व जैन समुदाय के लिए अत्याधिक माना गया है। यह व्रत रोहिणी नक्षत्र के दिन किया जाता है। यही कारण है कि इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। व्रत के पारण की बात करें तो यह तब किया जाता है जब रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होता है और मार्गशीर्ष नक्षत्र आता है। हर वर्ष 12 रोहिणी व्रत आते हैं। मान्यता है कि इस व्रत का पालन 3, 5 या 7 वर्षों तक लगातार किया जाता है। अगर उचित अवधि की बात करें तो यह 5 वर्ष और 5 महीने है। इस व्रत का समापन उद्यापन द्वारा ही किया जाता है। यह व्रत पुरुष और स्त्रियां दोनों कर सकते हैं। हालांकि, स्त्रियों के लिए यह व्रत अनिवार्य माना गया है।



रोहिणी व्रत महत्व
जैन समुदाय की मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से आत्मा के विकार दूर होते हैं। रोहिणी व्रत कर्म बंधन से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है।



रोहिणी व्रत पूजा विधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए और घर की साफ सफाई भी अच्छे से कर लेनी चाहिए। इसके बाद सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें और फिर व्रत का संकल्प लें। फिर आमचन कर अपने आप को शुद्ध करें। इसके बाद सबसे पहले सूर्य भगवान को जल का अर्घ्य दें। इस व्रत के दौरान जैन धर्म में रात का भोजन करने की मनाही होती है। ऐसे में इस व्रत को अगर आप कर रहे हैं तो आपको फलाहार सूर्यास्त से पूर्व कर लेना चाहिए।

रोहिणी व्रत की पौराणिक कथा
प्राचीन समय में चंपापुरी नगर में राजा माधवा और रानी लक्ष्‍मीपति रहते थे। उनके उनके 7 पुत्र और एक पुत्री रोहिणी थी। जब राहणी बड़ी हुई तो राजा ने निमित्‍तज्ञानी से पूछा कि मेरी पुत्री का वर कौन होगा? तो उन्‍होंने बताया कि आपकी पुत्री का विवाह हस्तिनापुर के राजकुमार अशोक के साथ होगा। यह सुनकर राजा ने स्‍वयंवर का आयोजन किया, जिसमें राजकुमार अशोक भी आए और रोहणी ने राजकुमार अशोक के गले में वरमाला डाली और दोनों का विवाह हो गया।



एक दिन हस्तिनापुर में चारण मुनिराज पधारे थे तब राजा अपने प्रियजनों के साथ उनके दर्शन के लिए गए और उनके धर्म उपदेश सुने। इसके पश्‍चात राजा ने मुनिराज से पूछा कि मेरी रानी इतनी शांतचित्त क्‍यों है? तब गुरुवर ने कहा कि इसी नगर में वस्‍तुपाल नाम का राजा हुआ करता था और उसका धनमित्र नामक एक मित्र था। उस धनमित्र की एक कन्या हुई जिसके शरीर से हमेशा ही दुर्गंध आती रहती थी और यह सोच कर वह चिंतित होता था कि उसकी कन्या से कौन विवाह करेगा। धनमित्र ने धन का लोभ देकर अपने मित्र के पुत्र श्रीषेण से उसका विवाह कर दिया, लेकिन अत्‍यंत दुर्गंध के कारण वह दुर्गंधा को छोड़ कर चला गया। उसी समय अमृतसेन मुनिराज विहार करते हुए नगर में आए तो धनमित्र अपनी पुत्री दुर्गंधा के साथ वंदना करने गया और मुनिराज से पुत्री के भविष्य के बारे में पूछा। उन्‍होंने बताया कि गिरनार पर्वत के निकट एक नगर में राजा भूपाल राज्‍य करते थे। उनकी सिंधुमती नाम की रानी थी। एक दिन राजा, रानी सहित वनक्रीड़ा के लिए चले, सो मार्ग में मुनिराज को देखकर राजा ने रानी से घर जाकर मुनि के लिए आहार व्यवस्था करने को कहा। राजा की आज्ञा से रानी चली तो गई, परंतु क्रोधित होकर उसने मुनिराज को कड़वी तुम्‍बी का आहार दिया जिससे मुनिराज को अत्‍यंत वेदना हुई और तत्‍काल उन्‍होंने प्राण त्‍याग दिए।

जब राजा को पता चला कि उनकी रानी के कारण ऐसा हुआ है तो उन्होंने अपनी रानी को नगर से निकाल दिया और रानी को किए पाप के कारण शरीर में कोढ़ उत्‍पन्‍न हो गया। अत्‍यधिक वेदना व दु:ख को भोगते हुए वो रौद्र भावों से मरकर नर्क में गई। वहां अनंत दु:खों को भोगने के बाद पशु योनि में उत्‍पन्न और फिर तेरे घर दुर्गंधा कन्‍या हुई। तब धनमित्र ने पूछा स्वामी मुझे इससे मुक्ति का उपाय बताएं। तब स्वामी ने कहा कि यदि परिवार के सभी सदस्य रोहिणी व्रत पालन करें तो इससे मुक्ति मिल सकती है। यह व्रत पांच साल और पांच मास लगातार हर महीने करना होगा। इसके बाद सभी ने ऐसा ही किया और दुर्गंधा के शरीर से बदबू आना बंद हो गई।

दुर्गंधा ने श्रद्धापूर्वक व्रत धारण किया और आयु के अंत में संन्यास सहित मरण कर प्रथम स्‍वर्ग में देवी हुई। वहां से आकर तेरी परमप्रिया रानी हुई।

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dhruvwadhwani Nov 20, 2021
jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram jai shree Ram

dhruvwadhwani Nov 20, 2021
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dhruvwadhwani Nov 20, 2021
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dhruvwadhwani Nov 20, 2021
Ram Bhakr Hanuman aur surya putar shanidev ki kripa se aapka din shubh mangalmai Ho

Janardan Mishra Nov 20, 2021
जय श्रीशनिदेव,जय बजरंगबली

Brajesh Sharma Nov 20, 2021
💥💘🙏🇮🇳🚩🌞🙏🇮🇳❤🙏🎋 राम सिया राम सिया राम जय जय राम श्री राम भक्त हनुमान लाल जी की जय ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव 🚩🌞🎋💥❤🇮🇳🙏🚩🎋❤🇮🇳

my mandir Nov 25, 2021

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Sajjan Singhal Nov 26, 2021

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Garima Gahlot Rajput Nov 25, 2021

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Ramesh agrawal Nov 25, 2021

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my mandir Nov 24, 2021

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Anju Mishra Nov 25, 2021

जय श्री राधे कृष्णा *हे कृष्ण.... 🌸* 🌸जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पर नाम तुम्हारा हो, जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पर नाम तुम्हारा हो 🌸चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, हृदय में वास तुम्हारा हो तन श्याम नाम की चादर हो, जब गहरी नींद में सोयी रहूँ कानो में मेरे गुंजित हो, कान्हा बस नाम तुम्हारा हो 🌸रस्ते में तुम्हारा मंदिर हो, जब मंजिल को प्रस्थान करूँ चौखट पे तेरी मनमोहन, अंतिम प्रणाम हमारा हो 🌸उस वक्त कन्हैया आ जाना, जब चिता पर जाके शयन करूँ मेरे मुख में तुलसी दल देना, इतना बस काम तुम्हारा हो 🌸गर सेवा की मैंने तेरी, तो उसका ये उपहार मिले इस तुच्छ भगत का साँवरिये, नहीं आना कभी भी दुबारा हो 🌸जब छोड़ चलु इस दुनिया को, होठों पर नाम तुम्हारा हो चाहे स्वर्ग मिले या नर्क मिले, ह्रदय में वास तुम्हारा हो. *⛅ राधे राधे*

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Jasbir Singh nain Nov 23, 2021

बुधवार को करें गणेशजी का व्रत शुभ प्रभात जी 🪔 जय श्री गणेश जी 🪔🪴🙏🙏🙏🙏🙏 हिन्दू ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बुधवार को अगर कोई व्यक्ति व्रत रखता है तो उसके ज्ञान में वृद्धि होती है। जो लोग व्यापार से जुड़े हैं और इस क्षेत्र में आने वाली बाधाओं से बचना चाहते हैं तो ऐसे लोगों के लिए भी यह व्रत बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है और इसके अच्छे परिणाम उनको नहीं मिलते तो ऐसे लोगों के लिए भी बुधवार का व्रत करना बहुत फलदायी माना जाता है। अगर कुंडली में बुध अशुभ भाव का स्वामी है तो ऐसे जातकों को भी बुधवार का व्रत रखना चाहिए। बुधवार व्रत का महत्व जो लोग बुधवार को सच्चे मन से व्रत लेते हैं उनको इसके कई अच्छे फल मिलते हैं। बुधवार को व्रत रखने से मनुष्य का बौद्धिक विकास होता है और साथ ही उन्हें सोचने-समझने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। बुधवार का व्रत बुध ग्रह के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए भी रखा जाता है। इसके अलावा इस व्रत को रखने से घर में धन और सुख समृद्धि आती है। बुध एक सौम्य ग्रह है जिसके अच्छे प्रभाव इंसान को कई उपलब्धियाँ दिलाते हैं इसलिए कई लोग इस व्रत का पालन करते हैं। बुध को मजबूत करने के लिए बुध यंत्र को बुध की होरा और बुध के नक्षत्र के समय करें स्थापित। बुधवार व्रत की संपूर्ण विधि बुधवार के दिन व्रत रखें और भगवान बुध की पूजा करें। इस दिन पूजा के वक्त बुधवार व्रत कथा का पाठ करें और उसके बाद आरती करें। उपवास में दिन के वक्त न सोए व किसी से वाद-विवाद करने से बचें। सूर्यास्त के बाद पूजा करें और भगवान बुध को दीप, धूप, गुड़ और दही चढ़ाएं। पूजा समाप्ति के बाद सबको प्रसाद बांटें और अंत में खुद प्रसाद का सेवन करें। बुधवार व्रत की पूजा सामग्री बुधवार व्रत की पूजा को करने के लिए कुछ चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं। जिनके बिना पूजा अधूरी रहती है। ये चीजें हैं:- भगवान बुध की मूर्ति कांस्य का एक पात्र हरा वस्त्र पंचामृत (गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद एवं शर्करा मिला हुआ) पान, सुपारी, लौंग, इलाइची कपूर और पूजा के पात्र गणेशजी की व्रत कथा एक बुढ़िया थी। वह बहुत ही ग़रीब और अंधी थीं। उसके एक बेटा और बहू थे। वह बुढ़िया सदैव गणेश जी की पूजा किया करती थी। एक दिन गणेश जी प्रकट होकर उस बुढ़िया से बोले- ‘बुढ़िया मां! तू जो चाहे सो मांग ले।’ बुढ़िया बोली- ‘मुझसे तो मांगना नहीं आता। कैसे और क्या मांगू?’ तब गणेशजी बोले - ‘अपने बहू-बेटे से पूछकर मांग ले।’ तब बुढ़िया ने अपने बेटे से कहा- ‘गणेशजी कहते हैं ‘तू कुछ मांग ले’ बता मैं क्या मांगू?’ पुत्र ने कहा- ‘मां! तू धन मांग ले।’ बहू से पूछा तो बहू ने कहा- ‘नाती मांग ले।’ तब बुढ़िया ने सोचा कि ये तो अपने-अपने मतलब की बात कह रहे हैं। अत: उस बुढ़िया ने पड़ोसिनों से पूछा, तो उन्होंने कहा- ‘बुढ़िया! तू तो थोड़े दिन जीएगी, क्यों तू धन मांगे और क्यों नाती मांगे। तू तो अपनी आंखों की रोशनी मांग ले, जिससे तेरी ज़िन्दगी आराम से कट जाए।’ इस पर बुढ़िया बोली- ‘यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता, दें और सब परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष दें।’ यह सुनकर तब गणेशजी बोले- ‘बुढ़िया मां! तुने तो हमें ठग दिया। फिर भी जो तूने मांगा है वचन के अनुसार सब तुझे मिलेगा।’ और यह कहकर गणेशजी अंतर्धान हो गए। उधर बुढ़िया माँ ने जो कुछ मांगा वह सबकुछ मिल गया। हे गणेशजी महाराज! जैसे तुमने उस बुढ़िया माँ को सबकुछ दिया, वैसे ही सबको देना।

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