Neha Sharma
Neha Sharma Oct 6, 2021

"श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।हेनाथ नारायण वासुदेवाय।। 🙇*ॐ ‌श्री गणेशाय नमः*🙇*जय श्री राधेकृष्णा*🙇 🙏*जय माता की*🌺🙏🌺*शुभ प्रभात् नमन*🙏 *अमावस्या सर्वपितृ श्राद्ध विशेष..... *( 6 अक्टूबर 2021 दिन : बुधवार )..... ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ *पितृपक्ष के सोलह दिनों में अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध करने से सात पीढियों के सभी पितरों की पूजा हो जाती है और गोत्र देवताओं सहित सर्व पितृलोक से आशीर्वाद बरसाता है। आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। इस दिन सभी जाने और अनजाने पितरों हेतु निश्चित ही श्राद्ध किया जाना चाहिए। *ब्रह्मांड बाराह राशीयों से बंधा हुआ है। मेष राशि ब्रह्मांड का प्रवेश द्वार है। मीन राशि का द्वार देवलोक (सूर्यलोक) की ओर है। कन्या राशि का द्वार पितृलोक (चंद्रलोक) की ओर है। जब किसी की मृत्यु होती है, तब जीव कर्मानुसार इनमें से एक द्वार की ओर गति करता है। सद कर्म, सदाचार और परोपकारी जीव अपने पुण्यबल से सूर्यलोक जाता है। बाकी जीव पितृयान (चन्द्र लोक) में गति करते हैं। चंद्र सूक्ष्म सृष्टि का नियमन करते हैं। *सूर्य जब कन्या राशि में प्रवेश करते है तब पाताल ओर पितृलोक की सृष्टि का जागरण हो जाता है । चंद्र की 16 कला है । पूर्णिमा से अमावस्या तक कि 16 तिथि सोलह कला है । जिस दिन मनुष्य की मृत्यु होती है उस दिन जो तिथि हो वो कला खुली होती है इसलिए वो जीव को उस कला मे स्थान मिलता है । भाद्रपद की पूर्णिमा से पितृलोक जागृत हो जाता है और जिस दिन जो कला खुली होती है उस दिन उस कला में रहे जीव पृथ्वी लोक में अपने स्नेही स्वजन, पुत्र, पौत्रादिक के घर आते है । उस दिन परिवार द्वारा उनके लिए श्रद्धापूर्वक जो भी पूजा, नैवेद्य, दान, पुण्य हो रहा हो वो देखकर तृप्त होते है और आशीर्वाद देते हैं । कुल के आराध्य देवी देवता मृतक जीवों को तृप्त देखकर प्रसन्न होते है और परिवार को सुख संपदा प्रदान करते हैं । ऐसे ही जिस घर में श्राद्ध पूजा कुछ नहीं होता ये देखकर पितृ व्यथित होकर चले जाते है और कुल के आराध्य देवी-देवता उन जीवात्माओं के व्यथित होने से खिन्न होते हैं । जीवात्मा की गति का ये सूक्ष्म विज्ञान को समझकर हमारे ऋषि मुनियों ने मनुष्य की सुखकारी के लिए ये धर्म परम्परा स्थापित की है । *अमावस्या के दिन चंद्र की सभी 16 कला खुली रहती है इसलिए उस दिन भूले बिसरे सभी पितर पृथ्वीलोक पर आते है । इसलिए उस दिन के श्राद्ध कार्य अति महत्वपूर्ण है । चंद्र देव का दूध पर आधिपत्य है इसलिए श्राद्ध में दुधपाक या क्षीर (खीर) भोजन बनाकर पितृयों को नैवेद्य भोग लगाया जाता है । श्राद्ध पूजा में ये सब किया जा सकता है। *पितरों की स्तुति के लिए रचे गए इन 5 पाठों को पढ़ेंगे तो आपके पितृ प्रसन्न होंगे। 1. पितृ-सूक्तम् : - पितृ-सूक्तम् अत्यंत चमत्कारी मंत्र-पाठ है। श्राद्ध पक्ष में पितृ-सूक्त का पाठ संध्या के समय तेल का दीपक जलाकर करने से पितृदोष की शांति होती है, शुभ फल की प्राप्ति होती है और सर्वबाधा दूर होकर उन्नति की प्राप्ति होती है। इसे ही पितृ शांति पाठ भी कहते हैं। 2. रुचि कृत पितृ स्तोत्र : - संपूर्व श्राद्ध पक्ष या सर्वपितृ अमावस्या को रूचि कृत पित्र स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। इसे ही पितृ स्तोत्र का पाठ भी कहते हैं। अथ पितृस्तोत्र। 3. पितृ गायत्री पाठ : - इस पाठ को पढ़ने से भी पितरों को मुक्ति मिलती है और वे हमें आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान पितृ गायत्री मंत्र और ब्रह्म गायत्री मंत्र का भी जप करना चाहिए। 4. पितृ कवच का पवित्र पाठ : - पितृ कवच पढ़ने से पितरों के आशीर्वाद के साथ ही उनकी सुरक्षा भी मिलती है। अपने पितरों को प्रसन्न करके उनका आशी‍ष पाना है तो श्राद्ध पक्ष के दिनों में अवश्य पढ़ें सर्व पितृ दोष निवारण 'पितृ कवच' का यह पावन पाठ। 5. पितृ देव चालीसा और आरती : - हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद। यह पितृ चालीसा पढ़ने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध के अन्य तथ्य ~~~~~~~~~~~ ब्राह्मण के पास पिंडदान तर्पण पूजा। दुधपाक क्षीर का नैवेद्य बनाकर घरमे पितृदेव को भोग लगाना। पितरों के नाम ब्राह्मण, भिक्षु, बटुक, धेवता, कन्या को भोजन करवाना चाहिए। कौवे ओर पक्षियो को भोजन देना। गाय, कुते ओर पशुओं को भोजन देना। जलचर जीव ओर किट पतंगे जैसे जीवों को भोजन। पितरों के नाम दान दक्षिणा जैसे पुण्यकार्य। शिवमन्दिर मे पूजा कर पितरों की दिव्यगति के लिए प्रार्थना करना। इनमे से जो भी शक्य हो वो करना चाहिए। पितृ पूर्वजों के आशीर्वाद से परिवार सुख सम्पति धन धान्य सुआरोग्य संतति और सन्मान प्राप्त करता है। कुलगोत्र के देवी देवता सह अनेकों आराध्य देवी-देवता, पितृ पूर्वजों की प्रसन्नता देखकर ही कृपा करते है। मनुष्य जीवन को सफल और सुखी बनाने और स्वआत्मा की दिव्य गति प्राप्त करने के लिए हिन्दू धर्म शास्त्रों की ये सर्वश्रेष्ठ भाव पूजा है। जीव की सूक्ष्म गति को समझने वाले अनेक साधक प्रतिमास अमावस्या को ये भावपूजा अवश्य ही करते है। जगत के पालनहार नारायण इस पूजा से अति प्रसन्न होते है। पितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की पूर्ण विधि ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सर्वपितृ अमावस्या को प्रात: स्नानादि के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिये। इसके पश्चात घर में श्राद्ध के लिये बनाये गये भोजन से पंचबलि अर्थात गाय, कुत्ते, कौए, देव एवं चीटिंयों के लिये भोजन का अंश निकालकर उन्हें देना चाहिये। इसके पश्चात श्रद्धापूर्वक पितरों से मंगल की कामना करनी चाहिये। ब्राह्मण या किसी गरीब जरूरतमंद को भोजन करवाना चाहिये व सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा भी देनी चाहिये। संध्या के समय अपनी क्षमता अनुसार दो, पांच अथवा सोलह दीप भी प्रज्जवलित करने चाहियें। इस दिन विशेष लाभ हेतु कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय किए जा सकते हैं .... पितरों के निमित्त विधिवत श्राद्ध, तर्पण, विदाई एवं ब्राह्मण भोजन। काक, गौ, कुत्ता, पिपीलिका व अतिथि को भोजन। पीपल के वृक्ष पर काली तिलसहित जल अर्पण एवं तेल का दीपक लगाएं। पंडित को वस्त्र दान करें। गीता के 7वें व 11वें अध्याय का पाठ करें। सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें। *परम कृपालु परमात्मा श्री हरि नारायण आप सभी का ओर आप सभी के पितरों - पूर्वजों का कल्याण करे, यही प्रार्थना करती हूँ। 🙇*ॐ नमो भगवते वसुदेवाय*🙇 🌺🙏*जय-जय श्री राधे कृष्णा*🙏🌺 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~`~~~~~

"श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।हेनाथ नारायण वासुदेवाय।।
🙇*ॐ ‌श्री गणेशाय नमः*🙇*जय श्री राधेकृष्णा*🙇 
🙏*जय माता की*🌺🙏🌺*शुभ प्रभात् नमन*🙏

*अमावस्या सर्वपितृ श्राद्ध विशेष.....
*( 6 अक्टूबर 2021 दिन : बुधवार ).....
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*पितृपक्ष के सोलह दिनों में अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध करने से सात पीढियों के सभी पितरों की पूजा हो जाती है और गोत्र देवताओं सहित सर्व पितृलोक से आशीर्वाद बरसाता है। आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। इस दिन सभी जाने और अनजाने पितरों हेतु निश्चित ही श्राद्ध किया जाना चाहिए। 

*ब्रह्मांड बाराह राशीयों से बंधा हुआ है। मेष राशि ब्रह्मांड का प्रवेश द्वार है। मीन राशि का द्वार देवलोक (सूर्यलोक) की ओर है। कन्या राशि का द्वार पितृलोक (चंद्रलोक) की ओर है। जब किसी की मृत्यु होती है, तब जीव कर्मानुसार इनमें से एक द्वार की ओर गति करता है। सद कर्म, सदाचार और परोपकारी जीव अपने पुण्यबल से सूर्यलोक जाता है। बाकी जीव पितृयान (चन्द्र लोक) में गति करते हैं। चंद्र सूक्ष्म सृष्टि का नियमन करते हैं। 

*सूर्य जब कन्या राशि में प्रवेश करते है तब पाताल ओर पितृलोक की सृष्टि का जागरण हो जाता है । चंद्र की 16 कला है । पूर्णिमा से अमावस्या तक कि 16 तिथि सोलह कला है । जिस दिन मनुष्य की मृत्यु होती है उस दिन जो तिथि हो वो कला खुली होती है इसलिए वो जीव को उस कला मे स्थान मिलता है । भाद्रपद की पूर्णिमा से पितृलोक जागृत हो जाता है और जिस दिन जो कला खुली होती है उस दिन उस कला में रहे जीव पृथ्वी लोक में अपने स्नेही स्वजन, पुत्र, पौत्रादिक के घर आते है । उस दिन परिवार द्वारा उनके लिए श्रद्धापूर्वक जो भी पूजा, नैवेद्य, दान, पुण्य हो रहा हो वो देखकर तृप्त होते है और आशीर्वाद देते हैं । कुल के आराध्य देवी देवता मृतक जीवों को तृप्त देखकर प्रसन्न होते है और परिवार को सुख संपदा प्रदान करते हैं । ऐसे ही जिस घर में श्राद्ध पूजा कुछ नहीं होता ये देखकर पितृ व्यथित होकर चले जाते है और कुल के आराध्य देवी-देवता उन जीवात्माओं के व्यथित होने से खिन्न होते हैं । जीवात्मा की गति का ये सूक्ष्म विज्ञान को समझकर हमारे ऋषि मुनियों ने मनुष्य की सुखकारी के लिए ये धर्म परम्परा स्थापित की है । 

*अमावस्या के दिन चंद्र की सभी 16 कला खुली रहती है इसलिए उस दिन भूले बिसरे सभी पितर पृथ्वीलोक पर आते है । इसलिए उस दिन के श्राद्ध कार्य अति महत्वपूर्ण है । चंद्र देव का दूध पर आधिपत्य है इसलिए श्राद्ध में दुधपाक या क्षीर (खीर) भोजन बनाकर पितृयों को नैवेद्य भोग लगाया जाता है । श्राद्ध पूजा में ये सब किया जा सकता है। 

*पितरों की स्तुति के लिए रचे गए इन 5 पाठों को पढ़ेंगे तो आपके पितृ प्रसन्न होंगे।

1. पितृ-सूक्तम् : - पितृ-सूक्तम् अत्यंत चमत्कारी मंत्र-पाठ है। श्राद्ध पक्ष में पितृ-सूक्त का पाठ संध्या के समय तेल का दीपक जलाकर करने से पितृदोष की शांति होती है, शुभ फल की प्राप्ति होती है और सर्वबाधा दूर होकर उन्नति की प्राप्ति होती है। इसे ही पितृ शांति पाठ भी कहते हैं।

2. रुचि कृत पितृ स्तोत्र : - संपूर्व श्राद्ध पक्ष या सर्वपितृ अमावस्या को रूचि कृत पित्र स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। इसे ही पितृ स्तोत्र का पाठ भी कहते हैं। अथ पितृस्तोत्र।

3. पितृ गायत्री पाठ : - इस पाठ को पढ़ने से भी पितरों को मुक्ति मिलती है और वे हमें आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान पितृ गायत्री मंत्र और ब्रह्म गायत्री मंत्र का भी जप करना चाहिए।

4. पितृ कवच का पवित्र पाठ : - पितृ कवच पढ़ने से पितरों के आशीर्वाद के साथ ही उनकी सुरक्षा भी मिलती है। अपने पितरों को प्रसन्न करके उनका आशी‍ष पाना है तो श्राद्ध पक्ष के दिनों में अवश्य पढ़ें सर्व पितृ दोष निवारण 'पितृ कवच' का यह पावन पाठ।

5. पितृ देव चालीसा और आरती : - हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद। यह पितृ चालीसा पढ़ने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं।

श्राद्ध के अन्य तथ्य 
~~~~~~~~~~~
ब्राह्मण के पास पिंडदान तर्पण पूजा। 
दुधपाक क्षीर का नैवेद्य बनाकर घरमे पितृदेव को भोग लगाना। 
पितरों के नाम ब्राह्मण, भिक्षु, बटुक, धेवता, कन्या को भोजन करवाना चाहिए। 
कौवे ओर पक्षियो को भोजन देना। 
गाय, कुते ओर पशुओं को भोजन देना। 
जलचर जीव ओर किट पतंगे जैसे जीवों को भोजन। 
पितरों के नाम दान दक्षिणा जैसे पुण्यकार्य।
शिवमन्दिर मे पूजा कर पितरों की दिव्यगति के लिए प्रार्थना करना।

इनमे से जो भी शक्य हो वो करना चाहिए। पितृ पूर्वजों के आशीर्वाद से परिवार सुख सम्पति धन धान्य सुआरोग्य संतति और सन्मान प्राप्त करता है। कुलगोत्र के देवी देवता सह अनेकों आराध्य देवी-देवता, पितृ पूर्वजों की प्रसन्नता देखकर ही कृपा करते है। मनुष्य जीवन को सफल और सुखी बनाने और स्वआत्मा की दिव्य गति प्राप्त करने के लिए हिन्दू धर्म शास्त्रों की ये सर्वश्रेष्ठ भाव पूजा है। जीव की सूक्ष्म गति को समझने वाले अनेक साधक प्रतिमास अमावस्या को ये भावपूजा अवश्य ही करते है। जगत के पालनहार नारायण इस पूजा से अति प्रसन्न होते है। 

पितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की पूर्ण विधि
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
सर्वपितृ अमावस्या को प्रात: स्नानादि के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिये। इसके पश्चात घर में श्राद्ध के लिये बनाये गये भोजन से पंचबलि अर्थात गाय, कुत्ते, कौए, देव एवं चीटिंयों के लिये भोजन का अंश निकालकर उन्हें देना चाहिये। इसके पश्चात श्रद्धापूर्वक पितरों से मंगल की कामना करनी चाहिये। ब्राह्मण या किसी गरीब जरूरतमंद को भोजन करवाना चाहिये व सामर्थ्य अनुसार दान दक्षिणा भी देनी चाहिये। संध्या के समय अपनी क्षमता अनुसार दो, पांच अथवा सोलह दीप भी प्रज्जवलित करने चाहियें।

इस दिन विशेष लाभ हेतु कुछ महत्त्वपूर्ण उपाय किए जा सकते हैं ....

पितरों के निमित्त विधिवत श्राद्ध, तर्पण, विदाई एवं ब्राह्मण भोजन। 
काक, गौ, कुत्ता, पिपीलिका व अतिथि को भोजन।
पीपल के वृक्ष पर काली तिलसहित जल अर्पण एवं तेल का दीपक लगाएं।
पंडित को वस्त्र दान करें।
गीता के 7वें व 11वें अध्याय का पाठ करें।
सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें।

*परम कृपालु परमात्मा श्री हरि नारायण आप सभी का ओर आप सभी के पितरों - पूर्वजों का कल्याण करे, यही प्रार्थना करती हूँ।

   🙇*ॐ नमो भगवते वसुदेवाय*🙇
🌺🙏*जय-जय श्री राधे कृष्णा*🙏🌺
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कामेंट्स

Suman Lata Oct 6, 2021
🙏🙏Jai Shri Ganeshay Namah shubh parbhaat vandan meri piyari behena ji Ganesh ji ki kirpa aap v aapki pariwar pr Hamesha bani rahe 🙏

Archana Singh Oct 6, 2021
🙏🌹ॐ श्री गणेशाय नमः🌹🙏 सात लोकों में स्थित समस्त पितरों का शुभ आशीर्वाद आपके परिवार के साथ सदैव बना रहे🙏🏵️ पित्र विसर्जन ,श्राद्ध अमावस्या की आप सभी भाई बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं🙏🌹🌹🙏

🌹🌼Rakesh Kumar Sharma🌼🌹 Oct 6, 2021
🌹🙏Jai Shree ganesh ji🙏 Shubh Prabhat vandan ji my sweet sister god bless you and your family have a nice day🙏🌹 🇮🇳🔱🕉🌼🧩🌷🌴🔔

MADHUBEN PATEL Oct 6, 2021
ॐ श्री गणेशाय नमः माह के पहले बुधवार का स्नेहभर्या नमस्कार प्यारी बहना जी आपको सपरिवार पितृश्राद्ध अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं

R.K.SONI (Ganesh Mandir) Oct 6, 2021
शुभ पितृमोक्ष अमावश्या ग🙏हर हर महादेव जी🙏जय गणेश देवा जी आपको खुश वस्वस्थ रखे।बहुत सुन्दर पोस्ट👌👌💐🙏

R.K.SONI (Ganesh Mandir) Oct 6, 2021
शुभ पितृमोक्ष अमावश्या ग🙏हर हर महादेव जी🙏जय गणेश देवा जी आपको खुश वस्वस्थ रखे।बहुत सुन्दर पोस्ट👌👌💐🙏

VarshaLohar Oct 6, 2021
shubh dophar vandan jai shree krishna radhey radhey🙏

Gd Bansal Oct 6, 2021
जय श्री गणेश जी ।।

Aruna🙏🙏 Oct 6, 2021
🙏🌹जय श्री गणेशाय नमः जय श्री हरि विष्णु जी🌹🙏 आप सभी बहन भाईयों को श्राद्ध अमावस्या पितृ विसजर्न की हार्दिक शुभकामनाएं आप सबको आप के पितरों का आशीर्वाद सदा प्राप्त हो आप का हर पल मंगलमय हो जय श्री हरि विष्णु जी🌹🙏 🌺🌺🌺🌺

laltesh kumar sharma Oct 6, 2021
🌹🌿🌹 jai shree radhe krishan ji 🌹🌿🌹 good afternoon ji 🌹🌿🌹🙏🙏

Hemant Kasta Oct 6, 2021
Shree Ganeshay Namah, Om Gan Ganpataye Namah, Shree Brahma Vishnu Mahesh Devtay Namah, Jai Shree Navdurga Matay Namah, Beautiful Post, Anmol Massage, Gyanvarsha Mahiti, Dhanywad Vandaniy Gyani Bahena Ji Pranam, Aap Aur Aapka Parivar Har Din Har Pal Khushiyo Se Bhara Rahe, Aap Sadaiv Hanste Muskurate Rahiye, Vandan Sister Ji, Jai Shree Radhe Krishna Ji, Shubh Dopahar.

Anup Kumar Sinha Oct 6, 2021
श्री गणेशाय नमः🙏🏻🙏🏻 शुभ दोपहर वंंदन । प्रथम पूज्य भगवान गणेश आपके जीवन को खुशियों से भर दें । वे आपकी हर मनोकामना पूरी कर दें 🙏🏻🌹

Ravi Kumar Taneja Oct 6, 2021
*Ravikumar Taneja * ने आपको एक 🙏🌹🙏 *मजेदार* संदेश भेजा है, इस खास *संदेश* ✉ को देखने के लिए दिये गए *लिंक* को टच करो 👇 👇 *click-it.me/?n=Ravikumar_Taneja_* 🌷👣जय माता दी 👣🌷 🌷👣जय माँ अम्बे जय जय जगदम्बे 👣🌷 🕉परम कृपालु माता जगदम्बे की असीम कृपा दृष्टि आप पर परिवार सहित हमेशा बनी रहे 🙏🌹🙏 🕉माँ अम्बे की कृपा से आप हमेशा स्वस्थ रहे,मस्त रहे,सदा मुस्कुराते रहे!!!🙏🌹🙏 🙏शुभ संध्या स्नेह वंदन जी 🙏 🕉🔱🙏🌷🙏🌷🙏🔱🕉

M.....S....👉🌹 Oct 6, 2021
*यूँ तो कन्यादान और रक्तदान* *आज के जमाने मे सर्वश्रेष्ठ है* *मगर आने वाले समय में...* *रिश्तों को बचाने के लिए* *" वक्त दान " अपनों के लिए सबसे* *कीमती दान होगा .....* 🙏 जय राधे कृष्णा जी 🙏

💖Poonam Sharma💖 Oct 6, 2021
🌱🌷🌱🌷JAY MATA DI🌷 JAY SHREE RADHE KRISHNA 🌷GOOD NIGHT JI🌱🌷🌱🌷🌱🌷🌱

Som Dutt Sharma Oct 6, 2021
Sri Radhey 🙏 Radhey g very very sweet good night and sweet dreams take care g thanks 👍⛲👌

Suraj Bisen Dec 7, 2021

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Kanta Kamra Dec 7, 2021

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दादाजी Dec 8, 2021

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Satish Khare Dec 8, 2021

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Satish Khare Dec 8, 2021

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