Seemma Valluvar
Seemma Valluvar Jan 3, 2022

मैंने कभी पढा था ... "पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय, ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।" बहुत अथक प्रयास के बाद अब पता लगा ये ढाई अक्षर क्या है- ढाई अक्षर के ब्रह्मा और ढाई अक्षर की सृष्टि। ढाई अक्षर के विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी। ढाई अक्षर के कृष्ण .. ढाई अक्षर की दुर्गा .. ढाई अक्षर की शक्ति। ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति। ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान। ढाई अक्षर की तुष्टि और ढाई अक्षर की इच्छा। ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म। ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा। ढाई अक्षर का ग्रन्थ और ढाई अक्षर का सन्त। ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ। ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्या। ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि। ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड। ढाई अक्षर का मन्त्र और ढाई अक्षर का यन्त्र। ढाई अक्षर की श्वांस और ढाई अक्षर के प्राण। ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु। ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी। ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का युद्ध। ढाई अक्षर का मित्र और ढाई अक्षर का शत्रु। ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई अक्षर की घृणा। जन्म से लेकर मृत्यु तक हम बंधे हैं ढाई अक्षर में। हैं ढाई अक्षर ही वक़्त में , और ढाई अक्षर ही अन्त में। समझ न पाया कोई भी है रहस्य क्या ढाई अक्षर में।

मैंने कभी पढा था ...
"पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय,
ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।"

बहुत अथक प्रयास के बाद अब पता लगा ये ढाई अक्षर क्या है-

ढाई अक्षर के ब्रह्मा और ढाई अक्षर की सृष्टि।

ढाई अक्षर के विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी।

ढाई अक्षर के कृष्ण ..
ढाई अक्षर की दुर्गा .. ढाई अक्षर की शक्ति।

ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति।

ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान।

ढाई अक्षर की तुष्टि और ढाई अक्षर की इच्छा।

ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म।

ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा।

ढाई अक्षर का ग्रन्थ और ढाई अक्षर का सन्त।

ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ।

ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्या।

ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि।

ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड।

ढाई अक्षर का मन्त्र और ढाई अक्षर का यन्त्र।

ढाई अक्षर की श्वांस और ढाई अक्षर के प्राण।

ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु।

ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी।

ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का युद्ध।

ढाई अक्षर का मित्र और ढाई अक्षर का शत्रु।

ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई अक्षर की घृणा।

जन्म से लेकर मृत्यु तक हम बंधे हैं ढाई अक्षर में।

हैं ढाई अक्षर ही वक़्त में , और ढाई अक्षर ही अन्त में।

समझ न पाया कोई भी है रहस्य क्या ढाई अक्षर में।

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कामेंट्स

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Jan 3, 2022
🔱🚩ॐ नमः शिवाय 🚩🔱 🌹शुभ दोपहर वंदन दीदी🌹 👏आप सभी पर बाबा काशी विश्वनाथ जी का आशीर्वाद निरंतर बनी रहे 🛕 🙏🌹आपका दिन मंगलमय हो🌹🙏

Shivsanker Shukla Jan 3, 2022
ओम नमः शिवाय शुभ दोपहर आदरणीय बहन

Shivsanker Shukla Jan 3, 2022
हर हर महादेव जय भोलेनाथ की

kamala Maheshwari Jan 3, 2022
ऊँनमशिवायं🙏ऊँनमशिवायं🙏 जय माता दी जय श्री बाकेविहारी की माताँदी कीकानहाकी कृपाआप ओर आपकेपरिवार पर सदाबनीरहेजी आपकीखुशियोकी झोली हमैशा भरी रहेजी🙏 जय जय भोलेनाथ जय श्री कृष्ण जी🙏❣️🙏

NIMISHA Verma Jan 3, 2022
dhai Axchar ishk ka jo hum sab ka Radhe Rani se h Har har Mahadev

Runa Sinha Jan 3, 2022
Om Namah Shivay 🌹🙏🌹 Good afternoon. Bhagwan Bholenath ki kripa aap sapariwar par bani rahe,bahan💖 🙏

🥀 Suresh Kumar 🥀 Jan 3, 2022
हर हर महादेव 🙏 शुभ दोपहर वंदन मेरी बहन। भोले बाबा की कृपा आप पर व आपके परिवार पर सदा बनी रहे मेरी प्यारी बहन 🥀🙏🥀

Thakur Jan 3, 2022
Om namah shivay ji beautiful good evening ji my sister have a nice evening ji sister 🌷🙏🏻🌷

Manoj manu Jan 3, 2022
🚩🔔जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी शुभ संध्या मधुर मंगल जी दीदी 🌺🙏

💖Poonam Sharma💖 Jan 3, 2022
🌼🍄🌼🍄Jay shree krishna ji 🙏 Radhe Radhe good night ji 🙏🌼🍄🌼🍄🌼🍄

Anil Jan 3, 2022
good night 🌹🥀🌹🥀🌹

Anil Jan 3, 2022
good night 🌹🙏🌹🙏🌹

Anup Kumar Sinha Jan 3, 2022
ऊँ नमः शिवाय 🙏🙏 शुभ रात्रि वंदन, बहना 🙏🎉

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 Jan 3, 2022
जय भोले नाथ जी हर हर महादेव जी शुभ रात्री नमस्कार मेरी प्यारी बहना जी 🙏🔱🙏भोलेनाथ जी की असीम कृपा और आशीर्वाद से आपका जीवन हमेशा सुखी सम्पन्न और खुशहाल रहे मेरी प्यारी बहना जी 🙏🙌🕉️🌷🕉️🌷🕉️🌷🕉️🌷🕉️👌👌👌👌

Saumya sharma Jan 3, 2022
ओम् नमः शिवाय 🙏शुभ रात्रि विश्राम प्यारी बहना जी 🙏जिस तरह हर रात के बाद सुबह जरूर आती है, उसी तरह हर परेशानी, हर तकलीफ के बाद सुख जरूर आता है, बस पूरी श्रृद्धा से ईश्वर पर भरोसा करें,वह अवश्य ही सुख रूपी सुबह का आगाज़ करते हैं ☺ईश्वर की कृपा से आपके जीवन में सपरिवार सुख रूपी सुबह बनी रहे ☺🌹🙏

GOVIND CHOUHAN Jan 3, 2022
Om Shree Ganeshayah Namo Namah 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏 Om Gouri Shankaryah Namo Namah 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏 Shubh Raatri Vandan Jiii 🙏🙏

Rajesh Rajesh Jan 3, 2022
HAR HAR MAHADEV OM NAMAH SHIVAY SHUBH RATRI BEHENA BHAGVAN BHOLENATH KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA AANE WALA HAR PAL SHUBH OR MANGAL MAY HO BEHENA

Raghuram Pathak Jan 8, 2022
हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव

Raghuram Pathak Jan 8, 2022
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय शिव

Anju Mishra Jan 24, 2022

🙏🌹हर हर महादेव 🙏🌹 स्वयं को पहचानें - 👉 एक बार अकबर एक ब्राह्मण को दयनीय हालत में जब भिक्षाटन करते देखा तो बीरबल की ओर व्यंग्य कसकर बोला - 'बीरबल! ये हैं तुम्हारे ब्राह्मण! जिन्हें ब्रह्म देवता के रुप में जाना जाता है। ये तो भिखारी है'। बीरबल ने उस समय तो कुछ नहीं कहा। लेकिन जब अकबर महल में चला गया तो बीरबल वापिस आये और ब्राह्मण से पूछा कि वह भिक्षाटन क्यों करता है' ? ब्राह्मण ने कहा - 'मेरे पास धन, आभूषण, भूमि कुछ नहीं है और मैं ज्यादा शिक्षित भी नहीं हूँ। इसलिए परिवार के पोषण हेतू भिक्षाटन मेरी मजबूरी है'। बीरबल ने पूछा - 'भिक्षाटन से दिन में कितना प्राप्त हो जाता है'? ब्राह्मण ने जवाब दिया - 'छह से आठ अशर्फियाँ।' बीरबल ने कहा - 'आपको यदि कुछ काम मिले तो क्या आप भिक्षा मांगना छोड़ देंगे ?' ब्राह्मण ने पूछा - 'मुझे क्या करना होगा ?' बीरबल ने कहा - 'आपको ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके प्रतिदिन 101 माला गायत्री मन्त्र का जाप करना होगा और इसके लिए आपको प्रतिदिन भेंटस्वरुप 10 अशर्फियाँ प्राप्त होंगी।' बीरबल का प्रस्ताव ब्राह्मण ने स्वीकार कर लिया। अगले दिन से ब्राह्मण ने भिक्षाटन करना बन्द कर दिया और बड़ी श्रद्धा भाव से गायत्री मन्त्र जाप करना प्रारम्भ कर दिया और शाम को 10 अशर्फियाँ भेंटस्वरुप लेकर अपने घर लौट आता। ब्राह्मण की सच्ची श्रद्धा व लग्न देखकर कुछ दिनों बाद बीरबल ने गायत्री मन्त्र जाप की संख्या और अशर्फियों की संख्या दोनों ही बढ़ा दी। गायत्री मन्त्र की शक्ति के प्रभाव से ब्राह्मण को भूख, प्यास व शारीरिक व्याधि की तनिक भी चिन्ता नहीं रही। गायत्री मन्त्र जाप के कारण उसके चेहरे पर तेज झलकने लगा। लोगों का ध्यान ब्राह्मण की ओर आकर्षित होने लगा। दर्शनाभिलाषी उनके दर्शन कर मिठाई, फल, पैसे, कपड़े चढाने लगे। अब उसे बीरबल से प्राप्त होने वाली अशर्फियों की भी आवश्यकता नहीं रही। यहाँ तक कि अब तो ब्राह्मण को श्रद्धा पूर्वक चढ़ाई गई वस्तुओं का भी कोई आकर्षण नहीं रहा। बस वह सदैव मन से गायत्री जाप में लीन रहने लगा। ब्राह्मण सन्त के नित्य गायत्री जप की खबर चारों ओर फैलने लगी। दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन करने आने लगे। भक्तों ने ब्राह्मण की तपस्थली में मन्दिर व आश्रम का निर्माण करा दिया। ब्राह्मण के तप की प्रसिद्धि की खबर अकबर को भी मिली। बादशाह ने भी दर्शन हेतू जाने का फैंसला लिया और वह शाही तोहफे लेकर राजसी ठाठबाट में बीरबल के साथ सन्त से मिलने चल पड़ा। वहाँ पहुँचकर शाही भेंटे अर्पण कर ब्राह्मण को प्रणाम किया। ऐसे तेजोमय सन्त के दर्शनों से हर्षित हृदय सहित बादशाह बीरबल के साथ बाहर आ गए। तब बीरबल ने पूछा - 'क्या आप इस सन्त को जानतें हैं ?' अकबर ने कहा - 'नहीं, बीरबल मैं तो इससे आज पहली बार मिला हूँ।' फिर बीरबल ने कहा - 'महाराज ! आप इसे अच्छी तरह से जानते हो। यह वही भिखारी ब्राह्मण है,जिस पर आपने व्यंग्य कसकर एक दिन कहा था - 'ये हैं तुम्हारे ब्राह्मण ! जिन्हें ब्रह्म देवता कहा जाता है ?' आज आप स्वयं उसी ब्राह्मण के पैरों में शीश नवा कर आए हैं। अकबर के आश्चर्य की सीमा नहीं रही। बीरबल से पूछा - 'लेकिन यह इतना बड़ा बदलाव कैसे हुआ ?' बीरबल ने कहा - 'महाराज ! वह मूल रुप में ब्राह्मण ही है। परिस्थितिवश वह अपने धर्म की सच्चाई व शक्तियों से दूर था। धर्म के एक गायत्री मन्त्र ने ब्राह्मण को साक्षात् 'ब्रह्म' बना दिया और वह कैसे बादशाह को चरणों में गिरने के लिए विवश कर दिया। यही ब्राह्मण आधीन मन्त्रों का प्रभाव है। यह नियम सभी ब्राह्मणों पर सामान रुप से लागू होता है।

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एक सन्यासी एक घर के सामने से निकल रहा था। एक छोटा सा बच्चा घुटने टेक कर चलता था। सुबह थी और धूप निकली थी और उस बच्चे की छायाआगे पड़ रही थी।वह बच्चा छाया में अपने सिर को पकड़ने के लिए हाथ ले जाता है, लेकिन जब तक उसका हाथ पहुँचता है छाया आगे बढ़ जाती है। बच्चा थक गया और रोने लगा। उसकी माँ उसे समझाने लगी कि पागल यह छाया है, छाया पकड़ी नहीं जाती। लेकिन बच्चे कब समझ सकते हैं कि क्या छाया है और क्या सत्य है? जो समझ लेता है कि क्या छाया है और क्या सत्य,वह बच्चा नहीं रह जाता। वह प्रौढ़ होता है। बच्चे कभी नहीं समझते कि छाया क्या है, सपने क्या हैं झूठ क्या है।वह बच्चा रोने लगा।कहा कि मुझे तो पकड़ना है इस छाया को।वह सन्यासी भीख माँगनेआया था।उसने उसकी माँ को कहा,मैं पकड़ा देता हूँ। वह बच्चे के पास गया। उस रोते हुए बच्चे की आँखों में आँसू टपक रहे थे। सभी बच्चों की आँखों से आँसू टपकते हैंज़िन्दगी भर दौड़ते हैं और पकड़ नहीं पाते। पकड़ने की योजना ही झूठी है। बूढ़े भी रोते हैं और बच्चे भी रोते हैं। वह बच्चा भी रो रहा था तो कोई नासमझी तो नहीं कर रहा था। उस सन्यासी ने उसके पास जाकर कहा,बेटे रो मत।क्या करना है तुझे? छाया पकड़नी है न?उस सन्यासी ने कहा, जीवन भर भी कोशिश करके थक जायेगा, परेशान हो जायेगा। छाया को पकड़ने का यह रास्ता नहीं है। उस सन्यासी ने उस बच्चे का हाथ पकड़ा और उसके सिर पर हाथ रख दिया।इधर हाथ सिर पर गया, उधर छाया के ऊपर भी सिर पर हाथ गया। सन्यासी ने कहा,देख, पकड़ ली तूने छाया। छाया कोई सीधा पकड़ेगा तो नहीं पकड़ सकेगा। लेकिन अपने को पकड़ लेगा तो छाया पकड़ में आ जाती है। जो अहंकार को पकड़ने को लिए दौड़ता है वह अहंकार को कभी नहीं पकड़ पाता। अहंकार मात्र छाया है। लेकिन जो आत्मा को पकड़ लेता है, अहंकार उसकी पकड़ में आ जाता है।वह तो छाया है। उसका कोई मुल्य नहीं। केवल वे ही लोग तृप्ति को, केवल वे ही लोग आप्त कामना को उपलब्ध होते हैं जो आत्मा को उपलब्ध होते हैं।

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