आज शुक्रवार है माता दुर्गा माता लक्ष्मी माता सरस्वती माता संतोषी का शुभ वार है जो भी सच्चे मन से ध्यावे उसका बेड़ा पार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़.... सभी संतोषी माता भक्तों को जय संतोषी माता..... जय संतोषी माता..... ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी दोस्तों मित्रों साथियों की तरफ से शुभ शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई जय संतोषी माता ➖➖➖शुक्रवार व्रत ➖➖➖ सृष्टि के सभी प्राणियों का कल्याण करने वाले भगवान शंकर के पुत्र श्री गणेश महाराज और माता ऋद्धि-सिद्धि की पुत्री संतोषी माता विश्व के सभी उपासक स्त्री-पुरुषों का कल्याण करती है। अपना व्रत करने तथा कथा सुनने वाले स्त्री-पुरुषों के धन-सम्पत्ति से भण्डार भरकर संतोषी माता उन्हें पृथ्वीलोक के सबसे बड़े सुख यानी "संतोष" धन से आनंदित करती हैं । व्यवसाय में दिन दूना और रात चौगुना लाभ होता है। शोक-विपत्ति नष्ट होती है और मनुष्य चिंता मुक्त होकर जीवन-यापन करता है। संतोषी माता का विधिवत् व्रत करने, गुड़ और चने का प्रसाद ग्रहण करने से कन्याओं को सुयोग्य वर मिलता है। स्त्रियाँ सदा सुहागन रहती हैं। नि:संतानों को पुत्र की प्राप्ति होती है। जीवन में सभी मनोकामनाएँ संतोषी माता के व्रत से पूरी होती है।➖ प्रस्तुतीकरण ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ -

आज शुक्रवार है माता दुर्गा माता लक्ष्मी माता सरस्वती माता संतोषी का शुभ वार है जो भी सच्चे मन से ध्यावे उसका बेड़ा पार है ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़....
सभी संतोषी माता भक्तों को जय संतोषी माता..... जय संतोषी माता..... ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी दोस्तों मित्रों साथियों की तरफ से शुभ शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई जय संतोषी माता
➖➖➖शुक्रवार व्रत ➖➖➖
सृष्टि के सभी प्राणियों का कल्याण करने वाले भगवान
शंकर के पुत्र श्री गणेश महाराज और माता ऋद्धि-सिद्धि
की पुत्री संतोषी माता विश्व के सभी उपासक स्त्री-पुरुषों
का कल्याण करती है। अपना व्रत करने तथा कथा
सुनने वाले स्त्री-पुरुषों के धन-सम्पत्ति से भण्डार भरकर
संतोषी माता उन्हें पृथ्वीलोक के सबसे बड़े सुख यानी
"संतोष" धन से आनंदित करती हैं । व्यवसाय में दिन
दूना और रात चौगुना लाभ होता है। शोक-विपत्ति नष्ट
होती है और मनुष्य चिंता मुक्त होकर जीवन-यापन
करता है। संतोषी माता का विधिवत् व्रत करने, गुड़ और
चने का प्रसाद ग्रहण करने से कन्याओं को सुयोग्य वर
मिलता है। स्त्रियाँ सदा सुहागन रहती हैं। नि:संतानों को
पुत्र की प्राप्ति होती है। जीवन में सभी मनोकामनाएँ
संतोषी माता के व्रत से पूरी होती है।➖ प्रस्तुतीकरण ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
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