' " *[१२२ - शत्रुनिवारण सूक्त (११७)]*" [ *ऋषि* - अथर्वाङ्गिरा। *देवता* - इन्द्र। *छन्द* - पथ्याबृहती।] "२०२९. आ मन्द्रैरिन्द्र हरिंभिर्याहि मयूररोमभिः। मा त्वा के चिद् वि यमन विं न पाशिनोऽति धन्वेव ताँ इहि॥१॥" "हे इन्द्रदेव ! आप अपने मोरपंखी वर्ण वाले अश्वों (सतरंगी किरणों) के साथ यहाँ आएँ। बहेलिया जैसे पक्षी को जाल में फँसा लेता है, वैसे आपको कोई (वाग् जाल में ) न फँसा सके। ऐसे ( कुटिलों) को आप रेतीले क्षेत्र की तरह लाँघकर यहाँ पधारें॥१॥" (क्रमशः) "अथर्ववेद संहिता [सरल हिन्दी भावार्थ सहित]" - वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं० श्रीराम शर्मा आचार्य" ----------:::×:::---------- " जय माता दी " " कुमार रौनक कश्यप " **********************************************

'           " *[१२२ - शत्रुनिवारण सूक्त (११७)]*"

[ *ऋषि* - अथर्वाङ्गिरा। *देवता* - इन्द्र। *छन्द* - पथ्याबृहती।] 

"२०२९. आ मन्द्रैरिन्द्र हरिंभिर्याहि मयूररोमभिः।
मा त्वा के चिद् वि यमन विं न पाशिनोऽति धन्वेव ताँ इहि॥१॥"

          "हे इन्द्रदेव ! आप अपने मोरपंखी वर्ण वाले अश्वों (सतरंगी किरणों) के साथ यहाँ आएँ। बहेलिया जैसे पक्षी को जाल में फँसा लेता है, वैसे आपको कोई (वाग् जाल में ) न फँसा सके। ऐसे ( कुटिलों) को आप रेतीले क्षेत्र की तरह लाँघकर यहाँ पधारें॥१॥"

(क्रमशः)

              "अथर्ववेद संहिता [सरल हिन्दी भावार्थ सहित]"
                 - वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं० श्रीराम शर्मा आचार्य"
                       ----------:::×:::----------

                           " जय माता दी "
                      " कुमार रौनक कश्यप "
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