parteek kaushik
parteek kaushik Sep 21, 2021

‼️ *❣️मीरा चरित्र❣️‼️* *🔆🔆💢 पोष्ट-0️⃣4️⃣💢 🔆🔆* ๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑۩๑๑۩ क्रमशः से आगे ......... 🌿 मीरा अभी भी तानपुरा ले गिरधर के सम्मुख श्याम कुन्ज में ही बैठी थी । वह दीर्घ कज़रारे नेत्र , वह मुस्कान , उनके विग्रह की मदमाती सुगन्ध और वह रसमय वाणी सब मीरा के स्मृति पटल पर बार बार उजागर हो रही थी । मेरे नयना निपट बंक छवि अटके । देखत रूप मदनमोहन को पियत पीयूख न भटके । बारिज भवाँ अलक टेढ़ी मनो अति सुगन्ध रस अटके॥ टेढ़ी कटि टेढ़ी कर मुरली टेढ़ी पाग लर लटके । मीरा प्रभु के रूप लुभानी गिरधर नागर नटके ॥ 🌿 मीरा को प्रसन्न देखकर मिथुला समीप आई और घुटनों के बल बैठकर धीमे स्वर में बोली - " जीमण पधराऊँ बाईसा ( भोजन लाऊँ )? " " अहा मिथुला ! अभी थोड़ा ठहर जा "। मीरा के ह्रदय पर वही छवि बार बार उबर आती थी । फिर उसकी उंगलियों के स्पर्श से तानपुरे के तार झंकृत हो उठे......... नन्दनन्दन दिठ (दिख) पड़िया माई, साँ.......वरो........ साँ......वरो । नन्दनन्दन दिठ पड़िया माई , छाड़या सब लोक लाज , साँ......वरो ......... साँ......वरो मोरचन्द्र का किरीट, मुकुट जब सुहाई । केसररो तिलक भाल, लोचन सुखदाई । साँ......वरो .....साँ....वरो । कुण्डल झलकाँ कपोल, अलका लहराई, मीरा तज सरवर जोऊ,मकर मिलन धाई । साँ......वरो ....... साँ......वरो । नटवर प्रभु वेश धरिया, रूप जग लुभाई, गिरधर प्रभु अंग अंग ,मीरा बलि जाई । साँ......वरो ....... साँ......वरो । 🌿 " अरी मिथुला ,थोड़ा ठहर जा । अभी प्रभु को रिझा लेने दे । कौन जाने ये परम स्वतंत्र हैं .....कब भाग निकले ? आज प्रभु आयें हैं तो यहीं क्यों न रख लें ?" 🌿 मीरा जैसे धन्यातिधन्य हो उठी । लीला चिन्तन के द्वार खुल गये और अनुभव की अभिव्यक्ति के भी । दिन पर दिन उसके भजन पूजन का चाव बढ़ने लगा । वह नाना भाँति से गिरधर का श्रृगांर करती कभी फूलों से और कभी मोतियों से । सुंदर पोशाकें बना धारण कराती । भाँति भाँति के भोग बना कर ठाकुर को अर्पण करती और पद गा कर नृत्य कर उन्हें रिझाती । शीत काल में उठ उठ कर उन्हें ओढ़ाती और गर्मियों में रात को जागकर पंखा झलती । तीसरे -चौथे दिन ही कोई न कोई उत्सव होता । 🌿 मीरा की भक्ति और भजन में बढ़ती रूचि देखकर रनिवास में चिन्ता व्याप्त होने लगी । एक दिन वीरमदेव जी (मीरा के सबसे बड़े काका ) को उनकी पत्नी श्री गिरिजा जी ने कहा ," मीरा दस वर्ष की हो गई है ,इसकी सगाई - सम्बन्ध की चिन्ता नहीं करते आप ? " वीरमदेव जी बोले ," चिन्ता तो होती है पर मीरा का व्यक्तित्व , प्रतिभा और रूचि असधारण है , फिर बाबोसा मीरा के ब्याह के बारे में कैसा सोचते है, पूछना पड़ेगा ।" 🌿 " ,बेटी की रूचि साधारण हो याँ असधारण - पर विवाह तो करना ही पड़ेगा " बड़ी माँ ने कहा । " पर मीरा के योग्य कोई पात्र ध्यान में हो तो ही मैं अन्नदाता हुक्म से बात करूँ ।" 🌿" एक पात्र तो मेरे ध्यान में है । मेवाड़ के महाराज कुँवर और मेरे भतीजे भोजराज।" "क्या कहती हो , हँसी तो नहीं कर रही ? अगर ऐसा हो जाये तो हमारी बेटी के भाग्य खुल जाये ।वैसे मीरा है भी उसी घर के योग्य ।" प्रसन्न हो वीरमदेव जी ने कहा । गिरिजा जी ने अपनी तरफ़ से पूर्ण प्रयत्न करने का आश्वासन दिया । 🌿 मीरा की सगाई की बात मेवाड़ के महाराज कुंवर से होने की चर्चा रनिवास में चलने लगी । मीरा ने भी सुना । वह पत्थर की मूर्ति की तरह स्थिर हो गई थोड़ी देर तक । वह सोचने लगी -माँ ने ही बताया था कि तेरा वर गिरधर गोपाल है-और अब माँ ही मेवाड़ के राजकुमार के नाम से इतनी प्रसन्न है , तब किससे पूछुँ ? " वह धीमे कदमों से दूदाजी के महल की ओर चल पड़ी । 🌿 पलंग पर बैठे दूदाजी जप कर रहे थे ।मीरा को यूँ अप्रसन्न सा देख बोले ," क्या बात है बेटा ?" " बाबोसा ! एक बेटी के कितने बींद होते है ?" 🌿 दूदाजी ने स्नेह से मीरा के सिर पर हाथ रखा और हँस कर बोले ," क्यों पूछती हो बेटी ! वैसे एक बेटी के एक ही बींद होता है ।एक बींद के बहुत सी बीनणियाँ तो हो सकती है पर किसी भी तरह एक कन्या के एक से अधिक वर नहीं होते ।पर क्यों ऐसा पूछ रही हो ?" 🌿" बाबोसा ! एक दिन मैंने बारात देख माँ से पूछा था कि मेरा बींद कौन है ? उन्होंने कहा कि तेरा बींद गिरधर गोपाल है । और आज...... आज...... ।" उसने हिलकियों के साथ रोते हुए अपनी बात पूरी करते हुये कहा"-" आज भीतर सब मुझे मेवाड़ के राजकुवंर को ब्याहने की बात कर रहे है ।" दूदाजी ने अपनी लाडली को चुप कराते हुए कहा-" तूने भाबू से पूछा नहीं ? " 🌿 " पूछा ! तो वह कहती है कि-" वह तो तुझे बहलाने के लिए कहा था । पीतल की मूरत भी कभी किसी का पति होती है ? अरी बड़ी माँ के पैर पूज । यदि मेवाड़ की राजरानी बन गई तो भाग्य खुल गया समझ । आप ही बताईये बाबोसा ! मेरे गिरधर क्या केवल पीतल की मूरत है ? संत ने कहा था न कि यह विग्रह (मूर्ति) भगवान की प्रतीक है । प्रतीक वैसे ही तो नहीं बन जाता ? कोई हो , तो ही उसका प्रतीक बनाया जा सकता है ।जैसे आपका चित्र कागज़ भले हो , पर उसे कोई भी देखते ही कह देगा कि यह दूदाजी राठौड़ है । आप है , तभी तो आपका चित्र बना है । यदि गिरधर नहीं है तो फिर उनका प्रतीक कैसा ?" 🌿 " भाबू कहती है-"भगवान को किसने देखा है ? कहाँ है ? कैसे है ? मैं कहती हूँ बाबोसा वो कहीं भी हों , कैसे भी हो , पर हैं , तभी तो मूरत बनी है , चित्र बनते है ।ये शास्त्र , ये संत सब झूठे है क्या ? इतनी बड़ी उम्र में आप क्यों राज्य का भार बड़े कुंवरसा पर छोड़कर माला फेरते है ? क्यों मन्दिर पधारते है ? क्यों सत्संग करते है ? क्यों लोग अपने प्रियजनों को छोड़ कर उनको पाने के लिए साधु हो जाते है ? बताईये न बाबोसा -" मीरा ने रोते रोते कहा । क्रमशः ........✍🏻🙏🏻 ◆ ▬▬▬▬▬❴✪❵▬▬▬▬▬ ◆ *🔲🔮🔲🔮🔲🔮

‼️ *❣️मीरा चरित्र❣️‼️*
*🔆🔆💢 पोष्ट-0️⃣4️⃣💢 🔆🔆*
๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑๑۩๑۩๑๑۩
क्रमशः से आगे .........

🌿 मीरा अभी भी तानपुरा ले गिरधर 
के सम्मुख श्याम कुन्ज में ही बैठी थी । 
वह दीर्घ कज़रारे नेत्र , वह मुस्कान , 
उनके विग्रह की मदमाती सुगन्ध और 
वह रसमय वाणी सब मीरा के स्मृति 
पटल पर बार बार उजागर हो रही थी ।
मेरे नयना निपट बंक छवि अटके ।

देखत रूप मदनमोहन को 

पियत पीयूख न भटके ।

बारिज भवाँ अलक टेढ़ी मनो अति 
सुगन्ध रस अटके॥

टेढ़ी कटि टेढ़ी कर मुरली टेढ़ी पाग लर 
लटके ।

मीरा प्रभु के रूप लुभानी गिरधर नागर 
नटके ॥

🌿 मीरा को प्रसन्न देखकर मिथुला 
समीप आई और घुटनों के बल बैठकर 
धीमे स्वर में बोली - " जीमण पधराऊँ 
बाईसा ( भोजन लाऊँ )? "

" अहा मिथुला ! अभी थोड़ा ठहर जा 
"। मीरा के ह्रदय पर वही छवि बार 
बार उबर आती थी । फिर उसकी 
उंगलियों के स्पर्श से तानपुरे के तार 
झंकृत हो उठे.........

नन्दनन्दन दिठ (दिख) पड़िया माई,

साँ.......वरो........ साँ......वरो ।

नन्दनन्दन दिठ पड़िया माई ,

छाड़या सब लोक लाज ,

साँ......वरो ......... साँ......वरो

मोरचन्द्र का किरीट, मुकुट जब सुहाई ।
केसररो तिलक भाल, लोचन सुखदाई ।
साँ......वरो .....साँ....वरो ।

कुण्डल झलकाँ कपोल, अलका लहराई,

मीरा तज सरवर जोऊ,मकर मिलन धाई ।

साँ......वरो ....... साँ......वरो ।

नटवर प्रभु वेश धरिया, रूप जग लुभाई,

गिरधर प्रभु अंग अंग ,मीरा बलि जाई ।
साँ......वरो ....... साँ......वरो ।

🌿 " अरी मिथुला ,थोड़ा ठहर जा ।
अभी प्रभु को रिझा लेने दे । कौन 
जाने ये परम स्वतंत्र हैं .....कब भाग 
निकले ? आज प्रभु आयें हैं तो यहीं 
क्यों न रख लें ?"

🌿 मीरा जैसे धन्यातिधन्य हो उठी ।
लीला चिन्तन के द्वार खुल गये और 
अनुभव की अभिव्यक्ति के भी । दिन 
पर दिन उसके भजन पूजन का चाव 
बढ़ने लगा । वह नाना भाँति से गिरधर 
का श्रृगांर करती कभी फूलों से और 
कभी मोतियों से । सुंदर पोशाकें बना 
धारण कराती । 

भाँति भाँति के भोग बना कर ठाकुर 
को अर्पण करती और पद गा कर नृत्य 
कर उन्हें रिझाती । शीत काल में उठ 
उठ कर उन्हें ओढ़ाती और गर्मियों में 
रात को जागकर पंखा झलती । तीसरे 
-चौथे दिन ही कोई न कोई उत्सव 
होता ।

🌿 मीरा की भक्ति और भजन में 
बढ़ती रूचि देखकर रनिवास में चिन्ता 
व्याप्त होने लगी । एक दिन वीरमदेव 
जी (मीरा के सबसे बड़े काका ) को 
उनकी पत्नी श्री गिरिजा जी ने कहा ," 
मीरा दस वर्ष की हो गई है 
,इसकी सगाई - सम्बन्ध की चिन्ता 
नहीं करते आप ? "

वीरमदेव जी बोले ," चिन्ता तो होती है 
पर मीरा का व्यक्तित्व , प्रतिभा और 
रूचि असधारण है , फिर बाबोसा मीरा 
के ब्याह के बारे में कैसा सोचते है, 
पूछना पड़ेगा ।"

🌿 " ,बेटी की रूचि साधारण हो याँ 
असधारण - पर विवाह तो करना ही 
पड़ेगा " बड़ी माँ ने कहा ।

" पर मीरा के योग्य कोई पात्र ध्यान में 
हो तो ही मैं अन्नदाता हुक्म से बात 
करूँ ।"

🌿" एक पात्र तो मेरे ध्यान में है ।
मेवाड़ के महाराज कुँवर और मेरे 
भतीजे भोजराज।"

"क्या कहती हो , हँसी तो नहीं कर 
रही ? अगर ऐसा हो जाये तो हमारी 
बेटी के भाग्य खुल जाये ।वैसे मीरा है 
भी उसी घर के योग्य ।" प्रसन्न हो 
वीरमदेव जी ने कहा ।

गिरिजा जी ने अपनी तरफ़ से पूर्ण 
प्रयत्न करने का आश्वासन दिया ।

🌿 मीरा की सगाई की बात मेवाड़ के 
महाराज कुंवर से होने की चर्चा 
रनिवास में चलने लगी । मीरा ने भी 
सुना । वह पत्थर की मूर्ति की तरह 
स्थिर हो गई थोड़ी देर तक । वह 
सोचने लगी -माँ ने ही बताया था कि 
तेरा वर गिरधर गोपाल है-और अब माँ 
ही मेवाड़ के राजकुमार के नाम से 
इतनी प्रसन्न है , 
तब किससे पूछुँ ? " वह धीमे कदमों 
से दूदाजी के महल की ओर चल पड़ी ।
🌿 पलंग पर बैठे दूदाजी जप कर रहे 
थे ।मीरा को यूँ अप्रसन्न सा देख 
बोले ," क्या बात है बेटा ?"

" बाबोसा ! एक बेटी के कितने बींद 
होते है ?"

🌿 दूदाजी ने स्नेह से मीरा के सिर 
पर हाथ रखा और हँस कर बोले ," 
क्यों पूछती हो बेटी ! वैसे एक बेटी के 
एक ही बींद होता है ।एक बींद के 
बहुत सी बीनणियाँ तो हो सकती है 
पर किसी भी तरह एक कन्या के एक 
से अधिक वर नहीं होते ।पर क्यों ऐसा 
पूछ रही हो ?"

🌿" बाबोसा ! एक दिन मैंने बारात 
देख माँ से पूछा था कि मेरा बींद कौन 
है ? उन्होंने कहा कि तेरा बींद गिरधर 
गोपाल है । और आज...... आज...... 
।" उसने हिलकियों के साथ रोते हुए 
अपनी बात पूरी करते हुये कहा"-" 
आज भीतर सब मुझे मेवाड़ के 
राजकुवंर को ब्याहने की बात कर रहे 
है ।"

दूदाजी ने अपनी लाडली को चुप 
कराते हुए कहा-" तूने भाबू से पूछा 
नहीं ? "

🌿 " पूछा ! तो वह कहती है कि-" 
वह तो तुझे बहलाने के लिए कहा था 
। पीतल की मूरत भी कभी किसी का 
पति होती है ? अरी बड़ी माँ के पैर 
पूज । यदि मेवाड़ की राजरानी बन गई 
तो भाग्य खुल गया समझ । आप ही 
बताईये बाबोसा ! मेरे गिरधर क्या 
केवल पीतल की मूरत है ? संत ने 
कहा था न कि यह विग्रह (मूर्ति) 
भगवान की प्रतीक है । 

प्रतीक वैसे ही तो नहीं बन जाता ? 
कोई हो , तो ही उसका प्रतीक बनाया 
जा सकता है ।जैसे आपका चित्र 
कागज़ भले हो , पर उसे कोई भी 
देखते ही कह देगा कि यह दूदाजी 
राठौड़ है । आप है , तभी तो आपका 
चित्र बना है ।
यदि गिरधर नहीं है तो फिर उनका 
प्रतीक कैसा ?"

🌿 " भाबू कहती है-"भगवान को 
किसने देखा है ? कहाँ है ? कैसे है ? 
मैं कहती हूँ बाबोसा वो कहीं भी हों , 
कैसे भी हो , पर हैं , तभी तो मूरत 
बनी है , चित्र बनते है ।ये शास्त्र , ये 
संत सब झूठे है क्या ? इतनी बड़ी उम्र 
में आप क्यों राज्य का भार बड़े 
कुंवरसा पर छोड़कर माला फेरते है ? 
क्यों मन्दिर पधारते है ? 

क्यों सत्संग करते है ? क्यों लोग अपने 
प्रियजनों को छोड़ कर उनको पाने के 
लिए साधु हो जाते है ? बताईये न 
बाबोसा -" मीरा ने रोते रोते कहा ।

क्रमशः ........✍🏻🙏🏻
◆ ▬▬▬▬▬❴✪❵▬▬▬▬▬ ◆
*🔲🔮🔲🔮🔲🔮

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कामेंट्स

R H BHAtt Sep 21, 2021
Jai Shri Radhe Krishna aapka Den magalmay our Shubh Ho ji Vandana ji Ram ram ji

SANTOSH YADAV Sep 21, 2021
जय श्री गणेश जय श्री राम जय श्री राधे राधे शुभ मंगलवार वंदन जी

Beena Sharma Sep 21, 2021
jai shri radhey krishna ji ki jai🥀🌲🌴🥀🌲🌴🥀🌲🌴🥀🌲🌴

🌻SB🌻 Sep 21, 2021
सुप्रभात राधे राधे जी 🙏🏻🌹🙏🏻

Rakesh Kumar Sharma Sep 21, 2021
Jai Sari Krishan radhe radhe ji🙏 aap ka din magalmay our Shubh ho ji🥀🌸🔱🇮🇳🕉🌹🌴🌷

Rajpal Singh Sep 21, 2021
Jai Shree Krishna Radhey Radhey ji good afternoon ji 🙏🙏🙏🙏🙏

kamlesh goyal Sep 21, 2021
बहुत सुंदर लिखा बहन मीरा का चरित्र राधे राधे जय श्री कृष्णा जी ठाकुर जी की कृपा राधे रानी का आशीर्वाद सदा आप पर आपके परिवार पर बना रहे शुभ दोपहर वंदन जी राधे राधे ठाकुर जी आपको सदा खुश रखे🥀🌹🥀🙏🙏🥀🌹🥀

संजीव शर्मा 9779584243 Sep 21, 2021
*इंसान के गुण* *नमक की तरह होना चाहिये,* *जो भोजन में रहता है* *मगर दिखाई नहीं देता* *और अगर ना हो तो* *उसकी बहुत कमी महसूस होती है* *किसी का* *सरल स्वभाव* *उसकी कमज़ोरी नहीं होता है।* *संसार में पानी से सरल* *कुछ भी नहीं है,* *किन्तु* *उसका बहाव* *बड़ी से बड़ी चट्टान* *को भी टुकड़े कर देता है* *ओम नमः शिवाय*

parteek kaushik Sep 21, 2021
@kamleshgoyal बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी आपका🙏 🙏जय श्री सीताराम जय श्री हनुमान🙏 शुभ संध्या नमन🙏ईश्वर की कृपा से आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो भाईजी🙏 🌺🙏जय-जय श्री राधेकृष्णा🙏🌺

kamlesh goyal Sep 21, 2021
क्षमा वीरों का आभूषण है आप मुझे क्षमा करें जाने अनजाने में मेरे द्वारा कोई गलती हुई हो भूल हुई हो कोई अपराध हुआ ही तो छोटा समझकर मुझे माफ करें क्षमा करें उत्तम क्षमा 🙏🙏🙏🙏

madan pal 🌷🙏🏼 Sep 21, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी शूभ रात्री वनदंन जी आपका हर पल शूभ मंगल हो जी 🌹🌹🌹🙏🏼🙏🏼🙏🏼

Babbu Bhai Oct 23, 2021

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Gopal Jalan Oct 25, 2021

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Shudha Mishra Oct 25, 2021

+87 प्रतिक्रिया 27 कॉमेंट्स • 186 शेयर
Babbu Bhai Oct 25, 2021

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Shudha Mishra Oct 25, 2021

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