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यम-भय निवारण मंत्र - जब मन में अनहोनी का डर बैठ जाए तो... कभी आपके साथ ऐसा हुआ है? घर से कोई अपना बाहर निकला हो और मन में एक अजीब सा डर बैठ जाए... कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए। आज के समय में सड़क दुर्घटना, अचानक आई खबरें, इसी डर ने हम सबके मन को घेर रखा है। इसी भय को शांत करने के लिए हमारे शास्त्रों में एक दिव्य मंत्र दिया गया है - ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि। तन्नो यम: प्रचोदयात्॥ इस मंत्र का अर्थ बहुत गहरा है - हम सूर्यपुत्र यम को जानते हैं, उन महाकाल स्वरूप का ध्यान करते हैं, वे धर्मराज यमदेव हमारी बुद्धि को सत्मार्ग पर प्रेरित करें। यमदेव केवल मृत्यु के देवता नहीं हैं। वे सूर्य और छाया के पुत्र हैं, शनिदेव के बड़े भाई हैं और उन्हें धर्मराज कहा जाता है। वे दंड नहीं, न्याय देते हैं। वे हमें असमय, अचानक आने वाले संकटों से सावधान रहने की बुद्धि देते हैं। ये मंत्र क्या करता है? ये मृत्यु को नहीं टालता, ये मृत्यु के भय को टालता है। शास्त्रों में मान्यता है कि इसके नियमित जप से मन में एक अदृश्य सुरक्षा कवच और सतर्कता का भाव बनता है। जो व्यक्ति रोज भय में जी रहा है, उसे ये मंत्र निर्भय होकर जीना सिखाता है। जप की सरल विधि - 1. सुबह या संध्या के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक जला लें। 2. मन में अपने परिवार की कुशलता का संकल्प लें। 3. 11, 21 या 108 बार इस मंत्र का शांत मन से जप करें। विशेष रूप से जब घर का कोई सदस्य लंबी यात्रा पर जा रहा हो, तब इस मंत्र का स्मरण अवश्य करें। यदि आप भी इस अनजाने भय से मुक्त होकर अपने जीवन को निर्भय बनाना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को सेव कर लें और उन लोगों तक जरूर पहुंचाएं जो रोज अपनों की चिंता में रहते हैं। कमेंट में सच्चे मन से लिखें - जय श्री धर्मराज यमदेव आप सभी का कल्याण हो, आप सभी निर्भय हों। आचार्य अनंत शुक्ला

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