dalipjotwani
dalipjotwani Nov 25, 2021

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dalipjotwani Jan 26, 2022

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myjbjvala Jan 24, 2022

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dalipjotwani Jan 26, 2022

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Deepak Desai Jan 26, 2022

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shiv Charan Bhulwana Jan 26, 2022

ॐ आध्यात्मिक ज्ञान ॐ श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 ॐ यावत्सन्जायते किश्चित्सत्वं स्थावरजड्गमम्! क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्धि भरतर्षभ!! 26 !! हे अर्जुन! यावनमात्र जितने भी स्थावर- जड्गम प्राणी उत्पन्न होतें है उन सबको तू क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के संयोगसे ही उत्पन्न जान!! 26 !! साथियों चार तरह से होने वाली रचना! अंडज, ( जो अन्डा से उत्पन्न है) जरायुज, ( जो जेर में लिपटी होती है जैसे गाय, भैस और मनुष्यादि) उद्भिज, (जो धरती फोडकर होते हैं, वृक्ष वनस्पति आदि) चौथी है स्वदेस्जि, ( जैसे शुकला, सिप्पी, जोक, गीझांई, तितली आदि) और भी जितने प्राणी है सभी क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के संयोगसे उत्पन्न हैं ऐसा जाने! धन्यवाद जी शिवचरण परमार भुलवाना श्रीराधे जय श्री राधे राधे जी

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