जब जब मैं बुरे हालातों से घबराता हूँ..... तब तब श्री साईं जी की आवाज आती है...! "रुक मैं आता हुँ"

जब जब मैं बुरे हालातों से घबराता हूँ.....
तब तब श्री साईं जी की आवाज आती है...!
"रुक मैं आता हुँ"

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Amarnath Patel May 18, 2022

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🌷 OM ❤ SAI ❤ RAM 🌷 इसमें कोई सन्देह नहीं कि अब बाबा का साकार स्वरुप लुप्त हो गया है, परन्तु उनका निराकार स्वरुप तो सदैव ही विघमान रहेगा । उनके समाधिस्थ होने के पश्चात् भी अनेक लीलाएँ हो चुकी है और अभी भी देखने में आ रही है, जिनसे यह सिदृ होता है कि बाबा अभी भी विघमान है और 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 पूर्व की ही भाँति अपने भक्तों को 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 सहायता पहुँचाया करते है । 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 बाबा के जीवन-काल में जिन व्यक्तियों को उनका सानिध्य या सत्संग प्राप्त हुआ, यथार्थ में उनके भाग्य की सराहना कौन कर सकता है । यदि किसी को फिर भी ऐंद्रिक और सांसारिक सुखों से वैराग्य प्राप्त नहीं हो सका तो इस दुर्भाग्य के अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है । जो उस समय आचरण में लाया जाना चाहिये था और अभी भी लाया जाना चाहिये, वह है अनन्य भाव से बाबा की भक्ति । समस्त चेतनाओं, इन्द्रिय-प्रवृतियों और मन को एकाग्र कर बाबा के पूजन और सेवा की ओर लगाना चाहिये । कृत्रिम पूजन से क्या लाभ । यदि पूजन या ध्यानादि करने की ही अभिलाषा है तो वह शुदृ मन और अन्तःकरण से होनी चाहिये । ( From -- Sri Sai Satcharitra ) 🌷 SRI SATCHIDANANDA SADGURU SAINATH MAHARAJ KI JAI 🌷

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lokesh Jhanjra May 18, 2022

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lokesh Jhanjra May 18, 2022

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lokesh Jhanjra May 18, 2022

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🌷 OM ❤ SAI ❤ RAM 🌷 इसमें कोई सन्देह नहीं कि अब बाबा का साकार स्वरुप लुप्त हो गया है, परन्तु उनका निराकार स्वरुप तो सदैव ही विघमान रहेगा । उनके समाधिस्थ होने के पश्चात् भी अनेक लीलाएँ हो चुकी है और अभी भी देखने में आ रही है, जिनसे यह सिदृ होता है कि बाबा अभी भी विघमान है और 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 पूर्व की ही भाँति अपने भक्तों को 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 सहायता पहुँचाया करते है । 🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 बाबा के जीवन-काल में जिन व्यक्तियों को उनका सानिध्य या सत्संग प्राप्त हुआ, यथार्थ में उनके भाग्य की सराहना कौन कर सकता है । यदि किसी को फिर भी ऐंद्रिक और सांसारिक सुखों से वैराग्य प्राप्त नहीं हो सका तो इस दुर्भाग्य के अतिरिक्त और क्या कहा जा सकता है । जो उस समय आचरण में लाया जाना चाहिये था और अभी भी लाया जाना चाहिये, वह है अनन्य भाव से बाबा की भक्ति । समस्त चेतनाओं, इन्द्रिय-प्रवृतियों और मन को एकाग्र कर बाबा के पूजन और सेवा की ओर लगाना चाहिये । कृत्रिम पूजन से क्या लाभ । यदि पूजन या ध्यानादि करने की ही अभिलाषा है तो वह शुदृ मन और अन्तःकरण से होनी चाहिये । ( From -- Sri Sai Satcharitra ) 🌷 SRI SATCHIDANANDA SADGURU SAINATH MAHARAJ KI JAI 🌷

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