🔔Ⓜ️🅿️💱 करती हूं तुम्हारा व्रत मैं स्वीकार करो मां मझधार में ,, मैं*#..........🌸👣🌷👣🌈🚩 🙏🌷👣 प्रभात जय माता दी माता जी की कृपा सदैव बनी रहे 🌹🌷👣🌈 👣🌷प्रेम से बोलो जय माता दी माता रानी जी की सदा ही जय हो जय अंबे जय जगदंबे जय मां दुर्गा सरस्वती🥀 माता जी,का,, आशीर्वाद सदैव बना रहे।।@🙏‼️ 🌷🔔 शुभ शुक्रवार स्पेशल 🔔🌷 👣🙏🙏🙏🙏🙏👣

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Janardan Mishra Nov 26, 2021
जै माता दी ,सुप्रभात वंदन जी

Ramesh agrawal Dec 6, 2021

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Jasbir Singh nain Dec 6, 2021

विनायक चतुर्थी विशेष शुभ प्रभात जी 🌅🌅🙏 जय श्री गणेश जी 🪔🪔🪴🙏🙏🙏🙏🙏 7 दिसंबर, 2021 (मंगलवार) हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक चन्द्र मास में दो चतुर्थी होती है और हर चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की तिथि है। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इसी के साथ विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें भगवान से अपनी किसी भी मनोकामना की पूर्ति के आशीर्वाद को वरद कहते हैं जो श्रद्धालु विनायक चतुर्थी का उपवास करते हैं भगवान गणेश उसे ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। ज्ञान और धैर्य दो ऐसे नैतिक गुण है जिसका महत्व सदियों से मनुष्य को ज्ञात है। जिस मनुष्य के पास यह गुण हैं वह जीवन में काफी उन्नति करता है और मनवान्छित फल प्राप्त करता है। विनायक चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त 7 दिसंबर को सुबह 11:10 से दोपहर 13:15 तक। पूजा विधि इस दिन शाम के समय गणेश जी की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा-पाठ करने से अति लाभदायक फल की प्राप्ति होती है। विनायकी चतुर्थी के दिन सबसे पहले जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और स्नान करें। इसके बाद लाल रंग के कपड़े पहने और अगर आपने व्रत करने का मन बनाया है तो व्रत का संकल्प भी लें। इसके बाद शाम को शुभ मुहूर्त में गणेश जी की पूजा करें। पूजन के समय सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल, तांबा या मिट्टी से बनी गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद श्री गणेश जी को सिंदूर लगाएं और ॐ गं गणपतयै नम: मंत्र बोलते हुए दूर्वा अर्पित करें। पूजन के दौरान श्री गणेश स्तोत्र का पाठ करें। भोग में लड्डू की थाली गणेश जी के सामने रखें। फिर पहले लड्डुओं का भोग वितरित कर दें। इसके बाद आप अपना उपवास खोले सकते हैं। विनायक चतुर्थी के दिन करें ये उपाय शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति मानसिक कष्टों से मुक्ति पाना चाहता है तो वो गणपति बप्पा को शतावरी चढ़ाएं। इससे शांति मिलती है। अगर घर में कलेश बढ़ गया हैं तो गणपति बप्पा पर चढ़ाई गई सफेद फूलों की माला को घर के मुख्य द्वार पर बांधें। इससे घर के लड़ाई-झगड़े कम हो जाते हैं। संपत्ति को लेकर अगर घर में विवाद चल रहा है तो बप्पा को चौकोर चांदी का टुकड़ा चढ़ाएं। इससे विवाद खत्म हो जाता है। प्रेम जीवन में सफल होने के लिए गणेश जी को 5 इलायची और 5 लौंग चढ़ाएं। अगर जीवन में आर्थिक उन्नति चाहिए तो गणेश जी को 8 मुखी रुद्राक्ष चढ़ाएं। विनायक चतुर्थी के दिन क्या ना करें विनायकी चतुर्थी के दिन भूलकर भी भगवान गणेश की पूजा में तुलसी का प्रयोग ना करें। इस दिन किसी भी रुप में चंद्र का दर्शन नहीं करें। किसी भी रुप में विनायक चतुर्थी के दिन भूलकर भी भगवान गणेश की पीठ का दर्शन नहीं करना चाहिए। यदि आप विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की कोई मूर्ति लाते हैं तो किसी भी विषम संख्या में ना लायें। विनायक चतुर्थी के दिन भूलकर भी आपको बड़ों का अपमान नहीं करना चाहिए। यदि आप विनायक चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं तो इस दिन आपको अपने घर में किसी भी प्रकार का क्लेश नहीं करना चाहिए। विनायक चतुर्थी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को भूलकर भी किसी को अपशब्द या गंदे शब्द नहीं बोलना चाहिए। विनायक चतुर्थी का व्रत सभी विघ्नों को हर्ता है। इसीलिए इस दिन किसी भी जानवर को ना मारें। विनायक चतुर्थी के दिन घर में मांसाहार और तामसिक चीजों का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। विनायक चतुर्थी की व्रत कथा एक दिन भगवान भोलेनाथ स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगवती गए। महादेव के प्रस्थान करने के बाद मां पार्वती ने स्नान प्रारंभ किया और घर में स्नान करतो हुए अपने मैल से एक पुतला बनाकर और उस पुतले में जान डालकर उसको सजीव किया गया। पुतले में जान आने के बाद देवी पार्वती ने पुतले का नाम गणेश रखा। पार्वती जी ने बालक गणेश को स्नान करते जाते वक्त मुख्य द्वार पर पहरा देने के लिए कहा। माता पार्वती ने कहा कि जब तक में स्नान करके न आ जाऊं किसी को भी अंदर नहीं आने देना। भोगवती में स्नान कर जब श्रीगणेश अंदर आने लगे तो बाल स्वरूप गणेश ने उनको द्वार पर रोक दिया। भगवान शिव के लाख कोशिश के बाद भी गणेश ने उनको अंदर नहीं जाने दिया। गणेश द्वारा रोकने को उन्होंने अपना अपमान समझा और बालक गणेश का सर धड़ से अलग कर वो घर के अंदर चले गए। शिवजी जब घर के अंदर गए तो वह बहुत क्रोधित अवस्था में थे। ऐसे में देवी पार्वती ने सोचा कि भोजन में देरी की वजह से वो नाराज हैं, इसलिए उन्होंने दो थालियों में भोजन परोसकर उनसे भोजन करने का निवेदन किया। दो थालियां लगी देखकर शिवजी ने उनसे पूछा कि दूसरी थाली किसके लिए है? तब शिवजी ने जवाब दिया कि दूसरी थाली पुत्र गणेश के लिए है, जो द्वार पर पहरा दे रहा है। तब भगवान शिव ने देवी पार्वती से कहा कि उसका सिर मैने क्रोधित होने की वजह से धड़ से अलग कर दिया। इतना सुनकर पार्वतीजी दुखी हो गई और विलाप करने लगी। उन्होंने भोलेनाथ से पुत्र गणेश का सिर जोड़कर जीवित करने का आग्रह किया। तब महादेव ने एक हाथी के बच्चे का सिर धड़ काटकर गणेश के धड़ से जोड़ दिया। अपने पुत्र को फिर से जीवित पाकर माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुई। कहा जाता है कि जिस तरह शिव ने श्रीगणेश को नया जीवन दिया था, उसी तरह भगवान गणेश भी नया जीवन अर्थात आरम्भ के देवता माने जाते हैं।

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