🥀 Preeti Jain 🥀
🥀 Preeti Jain 🥀 Sep 23, 2022

🌹प्रेम ही आत्मा का ईंधन है 🌹 प्रेम आत्मा में छिपी परमात्मा की एक असीम ऊर्जा है । प्रेम परमात्मा तक पहुंचने का आसान मार्ग है। प्रेम के बिना जो जीता है, वह एक लाश के समान है। प्रेम के बिना उसकी आत्मा का कोई अस्तित्व ही नही है । उसे आत्मा का कोई अनुभव भी नहीं होता। उसके लिए आत्मा केवल एक सुना गया, पढ़ा गया एक शब्द ही बनकर रह जाता है । लेकिन वह शब्द बिलकुल अर्थहीन ही होता है। क्योंकि बिना प्रेम के किसी को भी ज्ञात नही रहता कि वह कौन है। बिना प्रेम के तो मनुष्य बाहर बाहर ही भटकता रहता है।वह अपने घर को उपलब्ध नहीं हो पाता।अतंस के भीतर जाने का एक ही द्वार है और वह प्रेम है। जैसे प्रतिपल शरीर को श्वास की जरूरत होती है।वैसे ही आत्मा को प्रेम की जरुरत होती है।श्वास ना मिले तो शरीर का जीवन से संबंध टूट जाता है। श्वास सेतु है। उससे हमारा शरीर से अस्तित्व जुड़ा रहता है। श्वास दिखाई नहीं देती, सिर्फ उसके परिणाम ही दिखाई देता हैं कि मनुष्य जीवित है।जब श्वास चली जाती है तभी परिणाम ही दिखाई देता हैं ।श्वास का जाना तो दिखाई नहीं देता है।यह दिखाई देता है कि मनुष्य की मृत्यु हो गयी है। प्रेम और भी गहरी श्वास है। और भी अदृश्य अहसास है। प्रेम आत्मा और परमात्मा के बीच का जोड़ है।एक सेतु है।जैसे शरीर और अस्तित्व को श्वास जोड़ा कर रखती है।वैसे ही प्रेम की तरंगें जब बहती हैं तभी मनुष्य परमात्मा से जुड़ता है। इसलिए प्रेम से महत्वपूर्ण और कोई दूसरा शब्द है ही नहीं। प्रेम से गहरी दूसरी कोई अनुभूति नहीं है।

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कामेंट्स

Bindu Singh Sep 23, 2022
jai shree Krishna ji radhe radhe ji good evening ji sister good 🙏👌🌷

@mahaveer1698 Sep 23, 2022
🌹जय माता दी🌹 शुभ शुक्रवार शुभ संध्या वंदन प्रीति जी सा राम राम सा🙏🏻 आप का हर पल मंगलमय हो और आप हमेशा खुश व मुस्कुराते रहे सा माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे सा Good Evening sa 🌹🙏🏻👉☕🌹

@mahaveer1698 Sep 23, 2022
🙏🏻🙏🏻जय जिनेद्र जय महवीर 🙏🏻🙏🏻

मदन पाल सिंह Sep 23, 2022
जय श्री राधे कृष्णा जी शूभ सध्या वंदन जी राघा रानी जी कि कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌷🌷🌷🚩

Alka Devgan Sep 23, 2022
Jai Mata Di 🙏 Matarani bless you and your family apka har pal mangalmay n shubh ho meri pyari bahna ji atti sunder post di 👌👌👌👌👌 Matarani aap ko kushiyan pradhan karein di aap sabhi par sada kirpa karein shubh sandhya vandan bahna ji Jai Mata Di 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Alka Devgan Sep 23, 2022
Jai Shri Radhey Radhey ji 🙏🌹🌹🌹🌹

Anup Kumar Sinha Sep 23, 2022
जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏 शुभ संध्या वंदन, मेरी बहना 🙏🌹

shivshankershukla Sep 23, 2022
शुभ रात्रि आदरणीय बहन जय माता दी

Runa Sinha Sep 23, 2022
जय श्री राधे-राधे बहना जी🙏🙏

Runa Sinha Sep 23, 2022
Jai Mata Di 🌹🙏🌹 Good night. Mata Rani ki divya kripa aap aur aapke pariwar par bani rahe bahna ji🌴🙏🌴

🥀 Preeti Jain 🥀 Sep 23, 2022
@ranveersoni Jay Shri 🌹👌👌👌Krishna Radhe Radhe ji 🌺🙏 Shri 🌺Radhe Rani ka Aseem 🌺kripa aap aur🌺 aap ke family pe bana r🌺ahe aap ka har pal 🌺shub aur mangalmay ho shubh🌺 ratri 🌹ji jai jinendra om shanti ji 🌹aane wala har ek pal bahut 🚩 sari khushi lekar aaye ji 🌹🌹🌺🙏🙏🍨

navin patel Sep 23, 2022
🌹jai shree radhe krishna ji 🌹🙏🌃

BABU TRILOCHAN Sep 23, 2022
HARI BOLA HARI HARI BOLA HARI HARI BOLA 👏 OMM NAMO BHAGWATE VASUDEVAY NAMO NAMAH 👏 JAY JAY JAY SHREE RADHEY KRISHNA GOVINDA HARE MURAREE HE NATHA NARAYAN BASUDEV 👏 SUVA RATRERA SUVA MAYA KAMANA APAN NKU PRAVU GANTA GHODEI RAKHITHANTU ATIKI PRAVU PADA TALE DIPA TI A VAKATI PRADIP JALE SUVA RATREE 🪔 KHUSHI RUHANTU SUSTHA RUHANTU SANTI RUHANTU SAMASTANKAR MANGAL KARANTU 🚩🔔🌹🌹🙏

Ravi Kumar Taneja Jul 30, 2022

🌞शुभ प्रभात स्नेह वंदना जी🌞 आपका जीवन मंगलमय हो 🙏 🌼ॐ भास्कराय नमः🙏 🌼ॐ आदित्याय नमः🙏 🌼ॐ भानवे नमः🙏 🌼ॐ प्रभाकराय नमः🙏 🌼ॐ दिवाकराय नमः🙏 🌼ॐ सुर्याय नमः🙏 🌼ॐ दिनेशाय नमः🙏 🌼ॐ अर्काय नमः🙏 🌼ॐ सुर्यदैवाय नमः🙏 🌼ॐ सविताय नमः🙏 🌹☘️🌹☘️🌹☘️🌹 प्रभु सूर्य देव की कृपा से आप स्वस्थ रहे, मस्त रहे, मुस्कुराते रहें, तथा प्रसन्न: रहे🕉🌞🙏🌻🙏🌞🕉 *🌈सबंध को ज्ञान एवं पैसे से भी बड़ा बताया गया है क्योकि,* *🌈जब ज्ञान और पैसा विफल हो जाता है* *🌈तब सबंध से स्थिति सम्भाली जा सकती है मधुर सबंध बनाकर जीवन सार्थक कीजिये!* *🌈लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है!!!* *🌈हीरा बनाया है ईश्वर ने हर किसी को पर चमकता वही है जो तराशने की हद से गुज़रता है!* *🌈मंजिल दूर ही सही पर घबराना मत क्योंकि नदी कभी नहीं पूछती कि समुन्दर अभी कितना दूर है!!!* *आपका दिन मंगलमय हो👏* अपना ध्यान रखें, सुरक्षित रहें,और खुश रहें ना केवल अपने लिए बल्कि अपनो के लिए !!!😊 *सदैव प्रसन्न रहिये!* *जो प्राप्त है,पर्याप्त है!!* 🕉🏹🙏💐🙏🏹🕉

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Gopal Jalan Jul 30, 2022

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रिटायर्ड बेचारा करे तो क्या करे * ------------------------------------- *1. रिटायर व्यक्ति अगर देर तक सोया रहे तो....* *बीवी :* अब उठ भी जा इये ! आपके जैसा भी कोई सोता है क्या ? रिटायर हो गये तो इसका मतलब यह नहीं कि सोते ही रहियेगा....! 😐😐😐😐😐 *2. रिटायर व्यक्ति अगर जल्दी उठ जाये तो....* *बीवी:* आपको तो बुढापे में नींद पड़ती नहीं, एक दिन भी किसी को चैन से सोने नही देते हो, 5:30 बजे उठ कर बड़ बड़ करने लगते हो। अब तो आफिस भी नहीं जाना है, चुपचाप सो जाइये और सबको सोने दीजिए.....! 😢😢😢 *३. रिटायर व्यक्ति अगर घर पर ही रहे तो....* *बीवी:* सबेरा होते ही मोबाइल लेकर बैठ जाते हो और चाय पर चाय के लिए चिल्लाते रहते हो, कुछ काम अपने से भी कर लिया कीजिए । सब लोगों को कुछ न कुछ काम रहता है, कौन दिनभर पचास बार चाय बना कर देता रहे। यह नहीं होता है कि जल्दी से उठकर नहा धोकर नाश्ता पानी कर लें, अब इनके लिए सब लोग बैठे रहें....! 😢😢😢 *4. रिटायर व्यक्ति अगर घर से देर तक बाहर रहे तो....* *बीवी :* कहाँ थे आप आज पूरा दिन ? अब नौकरी भी नही है, कभी मुँह से भगवान का नाम भी ले लिया कीजिए...! 😢😢😢 *5. रिटायर व्यक्ति अगर पूजा करे तो...* *बीवी :* ये घन्टी बजाते रहने से कुछ नहीं होने वाला। अगर ऐसा होता तो इस दुनिया के रईसों में टाटा या बिल गेट्स का नाम नहीं होता, बल्कि किसी पुजारी का नाम होता...! 😢😢😢 *6. अगर रिटायर व्यक्ति खाली समय में पैसा कमाने के लिए कुछ काम करे तो...* *बीवी :* हर वक़्त काम, काम काम, आपके पास अब नौकरी भी नही सिर्फ काम का नाटक उसी से सात फेरे ले लेने चाहिए थे। हम क्या यहाँ पर बंधुआ मजदूर हैं जो सारा दिन काम करें और शाम को आपका इंतज़ार करें...? 😢😢😢 *7. रिटायर व्यक्ति अगर पत्नी को घुमाने के लिए ले जाए तो...* *बीवी :* देखिये, सक्सेना जी अपनी बीबी को हर महीने घुमाने ले जाते हैं और वो भी स्विट्ज़रलैंड और दार्जिलिंग जैसी जगहों पर, आपकी तरह "हरिद्वार" नहाने नहीं जाते....! 😢😢😢 *8. रिटायर व्यक्ति अगर अपनी जिंदगी भर की बचत से नैनीताल, मसूरी, गोवा, माउन्ट आबू, ऊटी जैसी जगहों पर घुमाने ले भी जाए तो....!* *बीवी :* अपना घर ही सबसे अच्छा, बेकार ही पैसे लुटाते फिरते है। इधर उधर बंजारों की तरह घूमते फिरो। क्या रखा है घूमने में ? इतने पैसे से अगर घर पर ही रहते तो पूरे 2 साल के लिए कपड़े खरीद सकते थे...! *9.रिटायर व्यक्ति पुराने गानों का शौक़ीन हो तो... !* *बीवी:* बुढ़ापे में गाने भाते हैं, कोई भजन या राम के नाम ही ले लिया करो.....! *10.रिटायर व्यक्ति अगर मन बहलाने के लिए फोन करे तो....!* *बीवी :* दिन भर फोन पर लगे रहते हो, हम तो नहीं करते किसी को.....फोन! *11. रिटायर व्यक्ति बन ठन कर घर में रहे तो....!* *बीवी :* बुढ़ापे में क्या सिंगार करते हो, घर में बहुएें क्या कहेंगी...! *वाह रे! रिटायर आदमी* बेचारा रिटायर्ड आदमी 🙏🙏आप ही बताइए

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*जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई* ~~~~~~~~~~~~~ *एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर* *बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में एक हीरों का हार था,* *जिसे उतार कर वहीं आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी।* *इतने में एक कौवा आया।* *उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, तो उसे लेकर उड़ गया।* *एक पेड़ पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश की, पर खा न सका।* *कठोर हीरों पर मारते-मारते चोंच दुखने लगी।* *अंतत: हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ कर वह उड़ गया।* *जब रानी के बाल सूख गए तो उसका ध्यान अपने हार पर गया,* *पर वह तो वहां था ही नहीं।* *इधर-उधर ढूंढा, परन्तु हार गायब।* *रोती-धोती वह राजा के पास पहुंची,* *बोली कि हार चोरी हो गई है, उसका पता लगाइए।* *राजा ने कहा, चिंता क्यों करती हो,* *दूसरा बनवा देंगे।* *लेकिन रानी मानी नहीं,* *उसे उसी हार की रट थी।* *कहने लगी,नहीं मुझे तो वही हार चाहिए।* *अब सब ढूंढने लगे, पर किसी को हार मिले ही नहीं।* *राजा ने कोतवाल को कहा,* *मुझ को वह गायब हुआ हार लाकर दो।* *कोतवाल बड़ा परेशान*, *कहां मिलेगा?* *सिपाही*, *प्रजा, कोतवाल-* *सब खोजने में लग गए।* *राजा ने ऐलान किया,* *जो कोई हार लाकर मुझे देगा,* *उसको मैं आधा राज्य पुरस्कार में दे दूंगा।* *अब तो होड़ लग गई प्रजा में।* *सभी लोग हार ढूंढने लगे आधा राज्य पाने के लालच में।* *ढूंढते-* *ढूंढते अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा।* *हार तो दिखाई दे रहा था,* *पर उसमें से बदबू आ रही थी।* *पानी काला था। परन्तु एक सिपाही कूदा*।*इधर* *उधर* *बहुत हाथ मारा* *पर कुछ नहीं मिला। पता नहीं कहां गायब हो गया।* *फिर कोतवाल ने देखा,* *तो वह भी कूद गया।* *दो को कूदते देखा तो कुछ उत्साही प्रजाजन भी कूद गए।* *फिर मंत्री कूदा।* *तो इस तरह उस नाले में भीड़ लग गई।* *लोग आते रहे और अपने कपडे़ निकाल-निकाल कर कूदते रहे।* *लेकिन हार मिला किसी को नहीं- कोई भी कूदता,* *तो वह गायब हो जाता।* *जब कुछ नहीं मिलता,* *तो वह निकल कर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता*। *सारे* *शरीर पर बदबूदार गंदगी,* *भीगे हुए खडे़ हैं।* *दूसरी ओर दूसरा तमाशा, बडे़-बडे़ जाने-माने ज्ञानी, मंत्री सब में होड़ लगी है, मैं जाऊंगा पहले, नहीं मैं तेरा सुपीरियर हूं, मैं जाऊंगा पहले हार लाने के लिए।* *इतने में राजा को खबर लगी। उसने सोचा, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें?* *आधे राज्य से हाथ तो नहीं धोना पडे़गा। तो राजा भी कूद गया।* *इतने में एक संत गुजरे उधर से। उन्होंने देखा तो हंसनेलगे, यह क्या तमाशा है?* *राजा, प्रजा,मंत्री, सिपाही - *सब कीचड़ मे लथपथ,* *क्यों कूद रहे हो इसमें?* *लोगों ने कहा, महाराज! बात यह है कि रानी का हार चोरी हो गई है। वहां नाले में दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे ही लोग कूदते हैं तो वह गायब हो जाता है। किसी के हाथ नहीं आता।* *संत हंसने लगे, भाई! *किसी ने ऊपर भी देखा?* *ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है। नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी परछाई है। *इस कहानी का क्या मतलब हुआ?* *जिस चीज की हम को जरूरत है,* *जिस परमात्मा को हम पाना चाहते हैं, जिसके लिए हमारा हृदय व्याकुल होता है -वह सुख शांति और आनन्द रूपी हार क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है और* *यह महसूस होता है कि इस को हम पूरा कर लेंगे। अगर हमारी यह इच्छा पूरी हो जाएगी तो हमें शांति मिल जाएगी, हम सुखी हो जाएंगे। परन्तु जब हम उसमें कूदते हैं, तो वह सुख और शांति प्राप्त नहीं हो पाती* *इसलिए सभी संत-महात्मा हमें यही संदेश देते हैं कि वह शांति, सुख और आनन्द रूपी हीरों का हार, जिसे हम संसार में परछाई की तरह पाने की कोशिश कर रहे हैं, वह हमारे अंदर ही मिलेगा, बाहर नहीं* 🙏🙏 जाग्रत रहें जाग्रत करें

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*आदमी का लालच😜* ----------------------- *एक ट्रक गेंहू के बोरे भरकर मंडी जा रहा था। जंगल का रास्ता उबड़-खाबड़ होने के कारण एक बोरा खिसक कर रास्ते में गिर गया। कुछ ही देर में कुछ चीटियां आई दस बीस दाने ले गयी, फिर कुछ चूहे आये पाव आधा किलो गेहूं खाये और चले गये। कुछ ही देर में पक्षी आये दो चार मुट्ठी दाने चुगे और उड़ गये। कुछ गायें और बकरियां आयी पांच दस किलो गेहूं खाकर चली गयीं। आख़री में एक आदमी आया और वह पूरा बोरा ही उठाकर ले गया। गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं के लिए जीता है। इसीलिए आदमी के पास सब कुछ होते हुए भी वह सबसे ज्यादा दुखी है। इसलिए जरूरत पुरी हो जाने के बाद इच्छाओं को रोकें, अन्यथा यह बढ़ती ही जायेगी, और आपके दुखों का कारण बनेगी।* *🙏।।सुप्रभात।।🙏 ओम शांति*

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Sudhir Sharma Jul 30, 2022

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Naresh.Rathore Jul 29, 2022

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Ravi Kumar Taneja Jul 29, 2022

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शिव पुराण के अनुसार भगवती श्री दुर्गा के आविर्भाव की कथा इस प्रकार है- मां दुर्गा की उत्पत्ति........ प्राचीन काल में दुर्गम नामक एक महाबली दैत्य उत्पन्न हुआ। उसने ब्रह्मा जी के वरदान से चारों वेदों को लुप्त कर दिया। वेदों के अदृश्य हो जाने से सारी वैदिक क्रिया बंद हो गई। उस समय ब्राह्मण और देवता भी दुराचारी हो गए। न कहीं दान होता था, न तप किया जाता था। न यज्ञ होता था, न होम ही किया जाता था। इसका परिणाम यह हुआ कि पृथ्वी पर सौ वर्षों तक वर्षा बंद हो गई। तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। सब लोग अत्यंत दु:खी हो गए। कुआं, बावड़ी, सरोवर, सरिता और समुद्र सभी सूख गए। सभी लोग भूख-प्यास से संतप्त होकर मरने लगे। प्रजा के महान दु:ख को देखकर सभी देवता महेश्वरी योग माया की शरण में गए। देवताओं ने भगवती से कहा, ‘‘महामाये! अपनी सारी प्रजा की रक्षा करो। सभी लोग अकाल पडऩे से भोजन और पानी के अभाव में चेतनाहीन हो रहे हैं। तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मची है। मां! जैसे आपने शुम्भ-निशुम्भ, चंड-मुंड, रक्तबीज, मधु-कैटभ तथा महिष आदि असुरों का वध करके हमारी रक्षा की थी, वैसे ही दुर्गमासुर के अत्याचार से हमारी रक्षा कीजिए।’’ देवताओं की प्रार्थना सुनकर कृपामयी देवी ने उन्हें अपने अनंत नेत्रों से युक्त स्वरूप का दर्शन कराया! तदनंतर पराम्बा भगवती ने अपने अनंत नेत्रों से अश्रुजल की सहस्रों धाराएं प्रवाहित कीं। उन धाराओं से सब लोग तृप्त हो गए और समस्त औषधियां भी सिंच गईं। सरिताओं और समुद्रों में अगाध जल भर गया। पृथ्वी पर शाक और फल-मूल के अंकुर उत्पन्न होने लगे। देवी की इस कृपा से देवता और मनुष्यों सहित सभी प्राणी तृप्त हो गए।उसके बाद देवी ने देवताओं से पूछा, ‘‘अब मैं तुम लोगों का और कौन-सा कार्य सिद्ध करूं?’’ देवताओं ने कहा, ‘‘मां! जैसे आपने समस्त विश्व पर आए अनावृष्टि के संकट को हटाकर सब के प्राणों की रक्षा की है, वैसे ही दुष्ट दुर्गमासुर को मारकर और उसके द्वारा अपहृत वेदों को लाकर धर्म की रक्षा कीजिए।’’ देवी ने ‘एवमस्तु’ कहकर देवताओं को संतुष्ट कर दिया। देवता उन्हें प्रणाम करके अपने स्थान को लौट गए। तीनों लोकों में आनंद छा गया। जब दुर्गमासुर को इस रहस्य का ज्ञान हुआ, तब उसने अपनी आसुरी सेना को लेकर देवलोक को घेर लिया। करुणामयी मां ने देवताओं को बचाने के लिए देवलोक के चारों ओर अपने तेजोमंडल की एक चारदीवारी खड़ी कर दी और स्वयं घेरे के बाहर आ डटीं। देवी को देखते ही दैत्यों ने उन पर आक्रमण कर दिया। इसी बीच देवी के दिव्य शरीर से काली, तारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगलामुखी, धूमावती, त्रिपुरसुंदरी और मातंगी ये दस महाविद्याएं अस्त्र-शस्त्र लिए निकलीं तथा असंख्य मातृकाएं भी प्रकट हुईं। उन सबने अपने मस्तक पर चंद्रमा का मुकुट धारण कर रखा था। इन शक्तियों ने देखते ही देखते दुर्गमासुर की सौ अक्षौहिणी सेना को काट डाला। इसके बाद देवी ने दुर्गमासुर का अपने तीखे त्रिशूल से वध कर डाला और वेदों का उद्धार कर उन्हें देवताओं को दे दिया। दुर्गमासुर को मारने के कारण उनका दुर्गा नाम प्रसिद्ध हुआ। शताक्षी और शाकम्भरी भी उन्हीं के नाम हैं। दुर्गतिनाशिनी होने के कारण भी वे दुर्गा कहलाती हैं। !! जय माता दी !! जगत पालन हार है माँ मुक्ति का धाम है माँ! हमारी भक्ति के आधार है माँ, हम सब की रक्षा की अवतार है माँ… !! जय माता दी !!

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