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M.j.S Oct 19, 2021

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M.j.S Oct 19, 2021

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Jagruti patel Oct 19, 2021

खीर को ‘रसराज’ कहते हैं । ◆ सीता जी को अशोक वाटिका में रखा गया था । रावण के घर का तो क्या खायेंगी सीताजी ! तो इन्द्रदेव उन्हें खीर भेजते थे । ◆ खीर बनाते समय घर में चाँदी का गिलास आदि जो बर्तन हो, आजकल जो मेटल (धातु) का बनाकर चाँदी के नाम से देते हैं वह नहीं, असली चाँदी के बर्तन अथवा असली सोना धो-धा के खीर में डाल दो तो उसमें रजतक्षार या सुवर्णक्षार आयेंगे । लोहे की कड़ाही अथवा पतीली में खीर बनाओ तो लौह तत्व भी उसमें आ जायेगा । ◆ इलायची, खजूर या छुहारा डाल सकते हो लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, चारोली ये रात को पचने में भारी पडेंगे । ◆ रात्रि ८ बजे महीन कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर ११ बजे के आसपास भगवान को भोग लगा के प्रसाद रूप में खा लेनी चाहिए । लेकिन देर रात को खाते हैं इसलिए थोड़ी कम खाना और खाने से पहले एकाध चम्मच मेरे हवाले भी कर देना । मुँह अपना खोलना और भाव करना : ‘लो महाराज ! आप भी लगाओ भोग ।’ और थोड़ी बच जाय तो फ्रिज में रख देना । सुबह गर्म करके खा सकते हो । ~ (खीर दूध, चावल, मिश्री, चाँदी, चन्द्रमा की चाँदनी – इन पंचश्वेतों से युक्त होती है, अतः सुबह बासी नहीं मानी जाती ।

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M.j.S Oct 19, 2021

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