मित्रों, नवरात्रि में हम अगर श्रीमद् देवी भागवत पुराण पढेंगे तो पायेंगे कि जिवन के सूत्र जो अपने पुरखों के मर्यादामय् जीवन का चिन्तन करें, तो पायेंगे कि मानवता क्या है, दुआओं का क्या असर होता है, यानी मनुष्य सही मायने में कैसे जी सकता है, जहाँ हम चले जायें वहाँ रास्ता मिले, जहाँ हम बैठे वहाँ जागरण हो जायें, और यह सीख मिलती है अपने ग्रन्थ-शास्त्रों से, ग्रन्थों में स्पष्ट लिखा गया है कि मनुष्य को क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये। इसका वर्णन तो सिर्फ ग्रंथों और शास्त्रों में पाया जाता है, इन बातों को समझ कर, उनका पालन करते हुयें अपने जीवन को सुखद बनाया जा सकता है, श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में स्वयं देवी भगवती ने कुछ नियमों के बारे में बताया गया है, इन नियमों का पालन कर हर मनुष्य अपने मनुष्य जन्म को धन्य कर सकता है, क्योंकि, इस मानव जीवन में अच्छा करने पर ही आगे वाले रास्ते खुले मिलेंगे, नहीं तो आवागमन का तो कोई अन्त ही नहीं है, क्या पता? कब वापिस इस मनुष्य जन्म में पैदा होने का मोका मिले, अतः आपको अपने जीवन में माँ भगवती को ह्रदय में धारण करना ही होगा। तपः सन्तोष आस्तिक्यं दानं देवस्य पूजनम्। सिद्धान्तश्रवणं चैव ह्रीर्मतिश्च जपो हुतम्।। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अनुसार, ऐसे वे दस नियम है, जिन्हें हर मनुष्य को अपने जीवन में अपनाना चाहियें, वे नियम हैं, तप, संतोष, आस्तिकता, दान, देवपूजन, शास्त्रसिद्धांतों का श्रवण करना, लज्जा, सद्बुद्धि, जप और हवन, ये दस नियम देवी भगवती द्वारा कहे गये है, जो इस ग्रंथ में उपलब्ध है। तपस्या करने या ध्यान लगाने से मन को शांति मिलती है, मनुष्य को जीवन में कई बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें समझ पाना कभी-कभी मुश्किल सा हो जाता है, तप करने या ध्यान लगाने से हमारा सारा ध्यान एक जगह केन्द्रित हो जाता है, और मन भी शांत रहता है, शांत मन से किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है, साथ ही ध्यान लगाने से कई तरह की मानसिक और शारीरिक रोगों का नाश हो जाता है, विज्ञान ने भी इस बात को सही माना है। मनुष्य के जीवन में कई इच्छायें छुपी होती हैं, हर इच्छा को पूरा कर पाना संभव मानव के लिये संभव नहीं होता, ऐसे में मनुष्य को अपने मन में संतोष यानी संतुष्टि रखना बहुत जरूरी होता है, असंतोष की वजह से मन में जलन, लालच जैसी भावनायें जन्म लेने लगती हैं, जिनकी वजह से मनुष्य गलत काम तक करने को तैयार हो जाता है, सुखी जीवन के लिए इन भावनाओं से दूर रहना बहुत आवश्यक होता है, इसलिये, मनुष्य को हमेशा अपने मन में संतोष रखना चाहिये। प्रत्येक मानव को आस्तिक होना ही चाहिये, आस्तिकता का अर्थ होता है- देवी-देवता में विश्वास रखना, मनुष्य को हमेशा ही देवी-देवताओं का स्मरण करते रहना चाहियें, शास्त्रों में नास्तिक व्यक्ति पशु के समान समझा गया है, नास्तिक व्यक्ति के लिए अच्छा-बुरा कुछ नहीं होता, वह बुरे कर्मों को भी बिना किसी भय से बेझिझक करता ही जाता है, जीवन में सफलता हासिल करने के लिये आस्तिकता की भावना का होना बहुत ही जरूरी हो जाता है। सनातन हिन्दू धर्म में दान का बहुत ही महत्व है, दान करने से पुण्य मिलता है, दान करने पर ग्रहों के दोषों का भी नाश होता है, देखा गया है और सुना भी गया है, कई बार मनुष्य को उसकी ग्रह दशाओं की वजह से भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, कठिनाईयों के उस दौर में दान देकर या अन्य पुण्य कर्म करके ग्रह दोषों का निवारण किया जा सकता है, प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा ही दान कर्म करते ही रहना चाहियें। प्रत्येक मानव की कई कामनायें होती हैं, अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए कर्मों के साथ-साथ देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना का भी विधान है, यह हमारी आध्यात्मिक परंपरा है, जिसे हर व्यक्ति को बड़ी जिम्मेदारी के साथ निभाना चाहियें, हमेशा अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिये यथासंभव समय निकालकर अपने समाज विकास का सपना देखने वाले स्वाभिमानी भाई-बहनों को राहत दें, यह आपका फर्ज भी है और हक भी, आपको अपने जीवन में अध्यात्म को धारण करना ही होगा, क्योंकि हमने ऋषि मुनियों और संत महात्माओं के आश्रय में जन्म लिया है। मनुष्य अपने हर दुःख में, हर परेशानी में भगवान को याद अवश्य करता है, सुखी जीवन और हमेशा भगवान की कृपा अपने परिवार पर बनाये रखने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की पूजा करनी चाहिये, कई पुराणों और शास्त्रों में धर्म-ज्ञान संबंधी कई बातें बतायीं गयी हैं, जो बातें न कि सिर्फ उस समय बल्कि आज भी बहुत उपयोगी हैं, अगर उन सिद्धान्तों को जीवन में धारण किया जायें तो किसी भी कठिनाई का सामना आसानी से किया जा सकता है। शास्त्रों में दिये गये सिद्धांतों से सीख के साथ-साथ पुण्य भी प्राप्त किया जा सकता है, इसलिये मानव को शास्त्रों और पुराणों का अध्यन और श्रवण करना मनुष्यों के लिये जरूरी बताया गया है, क्योंकि मनुष्य जन्म तो ब्रह्म से हमेशा मिलने के लिये मिला है, ताकि जन्म-मरण के झंझट से हमेशा के लिये छुटकारा मिल जायें, जब देवताओं तक की भी उम्र होती है, सत्वगुणी मानव ही गये जन्म में देवता ही थे, अपने दोषों को ही अपने जीवन से निकाल दें। किसी भी मनुष्य में लज्जा या शर्म भाव का होना भी बहुत जरूरी होता है, बेशर्मी मनुष्य जीवन में पशु के समान है, जिस मनुष्य के मन में लज्जा का भाव नहीं होता, वह कोई भी दुष्कर्म कर सकता है, जिसकी वजह से कई बार न की सिर्फ स्वयं उसे बल्कि उसके परिवार को भी अपमान का पात्र बनना पड़ सकता है, लज्जा ही मनुष्य को सही और गलत में फर्क करना सिखाती है, मनुष्य को अपने मन में लज्जा का भाव निश्चित ही रखना चाहिये। किसी भी मनुष्य को अच्छा या बुरा उसकी बुद्धि ही बनाती है, अच्छी सोच रखने वाला मनुष्य जीवन में हमेशा ही सफलता की सिढ़ी द्वारा दीर्घकालिन तक ऊंचाई पर रहेगा और समाज में सम्मान भी बढ़ेगा, बुरी सोच रखने वाला मनुष्य कभी उन्नति नहीं कर पाता, मनुष्य की बुद्धि उसके स्वभाव को दर्शाती है, सदबुद्धि वाला मनुष्य धर्म का पालन करने वाला होता है, उसकी बुद्धि कभी गलत कामों की तरफ नहीं ले जा सकती, अतः हमेशा अपनी सदबुद्धि का पालन करना चाहिये, ताकि मनुष्यता का गौरव हो। पुराणों और शास्त्रों के अनुसार- जीवन में कई समस्याओं का हल तो केवल भगवान का नाम जपने से ही दूर हो जाता है, जो मनुष्य पूरी श्रद्धा से अपने मानवीय यानी अध्यात्म धर्म का पालन करते हुये भगवान का नाम जपता हो, उस पर भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है, भगवान का भजन-कीर्तन करने से मन को शांति भी मिल जाती है, और पुण्य की भी प्राप्ति हो जाती है, शास्त्रों के अनुसार- कलियुग में देवी-देवताओं का केवल नाम ले लेने मात्र से ही पापों से मुक्ति मिल जाती है। किसी भी शुभ काम के मौके पर हवन किया जाता है, यह हम सभी ने सुना भी है और देखा भी है, लेकिन करना भी बहुत जरूरी है, हवन को प्रत्यक्ष देखना भी बहुत पुण्य माना गया है, लेकिन हवन करना सबसे जरूरी कहा गया है, हवन के वातावरण में जीवन जीना देवताओं के साथ जीवन जीने जैसा है, हवन करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है, कहा तो यहाँ तक गया है कि हवन करने से, हवन में दी गयी आहुति का एक भाग सीधे देवी-देवताओं को प्राप्त होता है, उससे घर में देवी-देवताओं की कृपा हमेशा बनी रहती है। साथ ही वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है, सकारात्मक ऊर्जा के द्वारा किये गये सकाम कार्य सही मायने मैं मनुष्यता में जीना है, यह मानव जन्म हर बार संभव नहीं, ये बातें सिखाने वाले श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में माँ भगवती ने अपने शब्दों में कही गयी हैं, भाई-बहनों में तो एक साधारण सा भक्त आदमी हूँ, मैं अपनी बात एक पोस्ट मेन की तरह आपको चिट्ठी के रूप में पहुंचा कर जाता काम हूंँ, और आप से जुडा हुआ आपका ही कोई भाई हूंँ। मैं चाहता हूंँ कि मुझे परब्रह्म से मिले मेरे मानव जीवन को अपने शास्त्रों में बताये हुए रास्ते से जिऊँ, ताकि आने वाले समय में हमें अपने आने वाली पीढ़ीयों के लिये एक साफ सुथरा वातावरण निर्मित कर सकूँ ताकी सभी मनुष्य बन कर जियें, ऐसा कुछ वातावरण बनाने का आप सभी कार्य करों और मैं उस वातावरण का एक हिस्सा रहूँ, ऐसा अध्यात्म से ओतप्रोत हमारा जीवन होना चाहियें, और ये सभी बातें हमको सिखने को मिलती है इस शास्त्र से जो माँ भगवती ने स्वयं अपने मुखारविन्द से कही है, कल फिर माँ भगवती की आराधना के साथ उपस्थित रहने की पूरी कोशिश करूँगा। जय माँ भगवती! जय माता दी!

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कामेंट्स

sadadiya vaishukh Jul 1, 2022
जय माताजी शुभ प्रभात वंदना

Anup Kumar Sinha Jul 1, 2022
जय माता दी 🙏🙏 सुप्रभात वंदन,भाई जी । माता रानी की कृपा से आप सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें। आप सपरिवार को रथ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🍁

kalash Pandey Jul 1, 2022
जय माता दी सुप्रभात वंदन भाई जी

kalash Pandey Jul 1, 2022
माता रानी की कृपा दृष्टि आप पर सदैव बनी रहे

dinesh patidar Jul 1, 2022
Jay Shri Radhe Krishna🌹 aapka Din Shubh avm mangalmay Ho🙏 🌹suprbhat🌹

🙏🙏🌹Sushil Kumar Sharma 🙏🌹 Jul 1, 2022
Good Morning My Bhai ji 🙏🙏 Jay Mata di 🌹🌹🌹 Mata Rani 🌹🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🌹🌹 Aapka Har Pal Har Din Shub Mangalmay Ho ji 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷.

Mamta Soni Jul 1, 2022
🙏🌹Jai Mata di🌹🙏 Mata Rani ki kripa aap pr Hamesha bni rhe🙏🙏 🌹

🍁RAJU-Rai🍁 Aug 17, 2022

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heera Aug 17, 2022

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heera Aug 17, 2022

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AJAY Aug 17, 2022

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heera Aug 17, 2022

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heera Aug 17, 2022

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Ajeet Tiwari Aug 17, 2022

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