ओम श्री हैरि विष्णु नमन आप सभी को नेव। रात्रि। हार्दिक शुभकामनाएं जी

ओम श्री हैरि विष्णु नमन
आप सभी को नेव। रात्रि। हार्दिक शुभकामनाएं जी
ओम श्री हैरि विष्णु नमन
आप सभी को नेव। रात्रि। हार्दिक शुभकामनाएं जी
ओम श्री हैरि विष्णु नमन
आप सभी को नेव। रात्रि। हार्दिक शुभकामनाएं जी

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कामेंट्स

charu sharma Oct 6, 2021
🌹श्री हरि कहते है🌹 धैर्य और परिश्रम से हम वह प्राप्त कर सकते है, जो शक्ति और शीघ्रता से कभी नहीं कर सकते । 🌹जय श्री हरि🌹

Saumya sharma Oct 6, 2021
Shri Ganeshay namah 🙏Good night bhai g, sweet dreams 🙏☺Ganesh ji bless you with health, wealth, success and happiness in your family ☺🌹🙏'HAPPY NAVRATRI' in advance 🙏☺🌹

Hari Priya Oct 6, 2021
radhe krishna 🌹🌹 Shubh ratri ji 🙏😊🙏

Kamala Sevakoti Oct 6, 2021
jai shree Radhey jai shree Radhey jai shree🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵 Radhey jai shree Radhey jai shree🏵🌺🌺🌺🌺🌺🌺👆👆 Radhey good night ji 🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏

R H BHAtt Oct 7, 2021
Jai matage Jay Mata Di AAP Ko happy Navratri ki Hardik Shubh Kamna ji Vandana ji

santoshi thakur Oct 7, 2021
JAI MATA DI 🙏💐 HAPPY NAVRATRI 🪴 GOOD NIGHT 🪴 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔

Brajesh Sharma Oct 9, 2021
प्रेम से बोलो जय माता दी जय माता दी ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव खुश रहें मस्त रहें मुस्कुराते रहें स्वस्थ रहें राम राम जी जय जय श्री राम

Saumya sharma Oct 9, 2021
जय माता दी भाई जी🙏सुप्रभात वंदन 🌹अति सुंदर प्रस्तुति के लिए धन्यवाद 🙏तृतीय नवरात्रि माँ चंद्रघंटा उसी प्रकार आप का ध्यान रखें जैसे एक माँ अपने पुत्र का रखती है 🙏आप सपरिवार स्वस्थ रहें,खुश रहें, हँसते मुस्कुराते रहें 🌹😊

Poonam Aggarwal Oct 21, 2021
🌷🐚🌷🐚🌷🐚🌷 🌷 ॐ नमो नारायण वासुदेव 🌷 जय श्री हरि विष्णुजी की कृपा से आप के घर परिवार में सुख शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहे 👣 आप सभी खुश और स्वस्थ रहे शुभ मंगलमय शुभकामनाओं सहित राम राम जी राधे राधे जी 🌹🙏 ‼️ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ ‼️🙏🌷🐚🌷🐚🌷🐚🌷

Pandurang Jan 29, 2022

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. माघ माहात्म्य अध्याय - 12 यमदूत कहने लगा कि जो कोई प्रसंगवश भी एकादशी के व्रत को करता है वह दुखों को प्राप्त नहीं होता। मास की दोनों एकादशी भगवान पद्मनाभ के दिन हैं। जब तक मनुष्य इन दिनों में व्रत नहीं करता उसके शरीर में पाप बने रहते हैं। हजारों अश्वमेघ, सैकड़ो वाजपेयी यज्ञ, एकादशी व्रत की सोलहवीं कला के बराबर भी नही हैं। एकादशी के दिन व्रत करने से ग्यारह इंद्रियों से किए सब पाप नष्ट हो जाते हैं। गङ्गा, गया, काशी, पुष्कर, कुरुक्षेत्र, यमुना, चन्द्रभागा कोई भी एकादशी के तुल्य नहीं है। इस दिन व्रत करके मनुष्य अनायास ही वैकुंठ लोक को प्राप्त करता है। एकादशी को व्रत और रात्रि जागरण करने से माता-पिता और स्त्री के कुल की दस-दस पीढ़ियाँ उद्धार पाती हैं और वह पीताम्बरधरी होकर भगवान के निकट रहते हैं। बाल, युवा और वृद्ध सब तथा पापी भी व्रत करने से नर्क में नहीं जाते। यमदूत कहता है कि हे वैश्य! मैं सूक्ष्म में तुमसे नरक से बचने का धर्म कहता हूँ। मन, कर्म और वचन से प्राणिमात्र का द्रोह न करना, इंद्रियों को वश में रखना, दान देना, भगवान की सेवा करना, नियमपूर्वक वर्णाश्रम धर्म का पालन करना, इन कर्मों के करने से मनुष्य नरक से बचा रहता है। स्वर्ग प्राप्त करने की इच्छा से मनुष्य गरीब भी हो तो भी जूता, छतरी, अन्न, धन, जल कुछ न कुछ दान देता रहे। दान देने वाला मनुष्य कभी यम की यातना को नही भोगता तथा दीर्घायु और धनी होता है। बहुत कहने से ही क्या अधर्म से ही मनुष्य बुरी गति को प्राप्त होता है। मनुष्य सदैव धर्म के कार्यों से ही स्वर्ग प्राप्त कर सकता है इसलिए बाल्यावस्था से ही धर्म के कार्यों का अभ्यास करना चाहिए। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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. माघ माहात्म्य अध्याय - 11 यमदूत कहने लगा कि हे वैश्य! मनुष्य को सदैव शालिग्राम की शिला में तथा वज्र या कीट(गामति) चक्र में भगवान वासुदेव का पूजन करना चाहिए क्योंकि सब पापों का नाश करने वाले, सब पुण्यों को देने वाले तथा मुक्ति प्रदान करने वाले भगवान विष्णु का इसमें निवास होता है। जो मनुष्य शालिग्राम की शिला या हरिचक्र में पूजन करता है वह अनेक मंत्रों का फल प्राप्त कर लेता है। जो फल देवताओं को निर्गुण ब्रह्म की उपासना में मिलता है वही फल मनुष्य को भगवान शालिग्राम का पूजन करने से यमलोक को नहीं देखने देता। भगवान को लक्ष्मी जी के पास अथवा वैकुंठ में इतना आनंद नहीं आता जितना शालिग्राम की शिला या चक्र में निवास करने में आता है। स्वर्ण कमल युक्त करोड़ो शिवलिंग के पूजन से इतना फल नहीं मिलता जितना एक दिन शालिग्राम के पूजन से मिलता है। भक्तिपूर्वक शालिग्राम का पूजन करने से विष्णुलोक में वास करके मनुष्य चक्रवर्ती होता है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार से युक्त होकर भी मनुष्य शालिग्राम का पूजन करने से बैकुंठ में प्रवेश करता है। जो सदैव शालिग्राम का पूजन करते है वह प्रलयकाल तक स्वर्ग में वास करते हैं। जो दीक्षा, नियम और मंत्रों से चक्र में बलि देता है वह निश्चय करके विष्णुलोक को प्राप्त होता है। जो शालिग्राम के जल से अपने शरीर का अभिषेक करता है वह मानो सम्पूर्ण तीर्थों में स्नान करता है। गङ्गा, रेवा, गोदावरी सबका जल शालिग्राम में वास करता है। जो मनुष्य शालिग्राम की शिला के सन्मुख अपने पिता का श्राद्ध करता है उसके पितर कई कल्प तक स्वर्ग में वास करते हैं। जो लोग नित्य शालिग्राम की शिला का जल पीते हैं उनके हजारों बार पंचगव्य पीने से क्या प्रयोजन? यदि शालिग्राम की शिला का जल पिया जाए तो सहस्त्रो तीर्थ करने से क्या लाभ? जहाँ पर शालिग्राम हैं वह स्थान तीर्थ स्थान के समान ही है, वहाँ पर किए गए सम्पूर्ण दान-होम, करोड़ो गुणा फल को प्राप्त होता है। जो एक बूँद भी शालिग्राम का जल पीता है वह माता के स्तनों का दुग्ध पान नहीं करता अर्थात गर्भाशय में नहीं आता। शालिग्राम शिला में जो कीड़े-मकोड़े एक कोस के अंतर पर मरते हैं वह भी वैकुंठ को प्राप्त होते हैं। जो फल वन में तप करने से प्राप्त होता है वही फल भगवान को सदैव स्मरण करने से प्राप्त होता है। मोहवश अनेक प्रकार के घोर पाप करने वाला मनुष्य भी भगवान को प्रणाम करने से नर्क में नहीं जाता। संसार में जितने तीर्थ और पुण्य स्थान हैं, भगवान के केवल नाम मात्र के कारण से प्राप्त हो जाते हैं। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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Archana Singh Jan 27, 2022

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सभी भगवान विष्णु भक्तों को षट्तिला एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त दोस्तों मित्रों साथियों की तरफ से आओ स्तुति करें षट्तिला एकादशी व्रत की...... 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ आज माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि यानी 28 जनवरी, दिन शुक्रवार है और आज षटतिला एकादशी व्रत रखा जाएगा। सनातन धर्म के लिहाज से षटलिता एकादशी के दिन तिल के उपयोग के साथ साथ व्रत और दान का बहुत महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही आरोग्यता तथा सम्पन्नता आती है। षटतिला एकादशी के दिन तिल का छह तरीकों से प्रयोग किया जाता है। आपको बता दें कि इस दिन तिल मिश्रित जल से स्नान करने, तिल का उबटन लगाने, तिल से हवन करने, तिल मिश्रित जल का सेवन करने, तिल का भोजन करने और तिल का दान करने का विधान है। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ इस दिन तिल का मुख्य रूप से इन छः तरीकों से उपयोग करने पर ही माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी को षट्तिला एकादशी कहते हैं। आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा में भी विशेष रूप से तिल का इस्तेमाल किया जाता है। आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है और उसे जीवन में वैभव प्राप्त होता है। साथ ही सुख-सौभाग्य, धन-धान्य में वृद्धि होती है और आरोग्यता की प्राप्ति होती है। जानें षटतिला एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ इस दिन जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से षटतिला एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके सभी पापों का नाश होता है। इसलिए माघ मास में पूरे माह व्यक्ति को अपनी समस्त इन्द्रियों पर काबू रखना चाहिए। काम, क्रोध, अहंकार, बुराई तथा चुगली का त्याग कर भगवान की शरण में जाना चाहिए। माघ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को व्रत रखना चाहिए। इससे मनुष्य के सभी पाप समाप्त हो जाएंगे तथा उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी। (जनवरी माह के अंत में चंद्रमा कर रहा है वृश्चिक राशि में प्रवेश, जानें अपना भविष्यफल) 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ षटतिला एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी तिथि 27 जनवरी की रात 02 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होगी और 28 जनवरी की रात 11 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में एकादशी व्रत उदया तिथि में 28 जनवरी को रखा जाएगा। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ षटतिला एकादशी व्रत की पूजा विधि 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान का मनन करते हुए सबसे पहले व्रत का संकल्प करें। इसके बाद सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद पूजा स्थल में जाकर भगवान श्री कृष्ण की पूजा विधि-विधान से करें। इसके लिए धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह चीजों से करने के साथ रात को दीपदान करें। इस दिन रात को सोए नहीं। (31 जनवरी राशिफल: महीने के आखिरी दिन इन राशियों को देगा अचानक धनलाभ, वहीं ये राशियां रहें सचेत) 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ सारी रात जागकर भगवान का भजन-कीर्तन करें। इसी साथ भगवान से किसी प्रकार हुआ गलती के लिए क्षमा भी मांगे। अगले दूसरे दिन यानी की 5 फरवरी, शुक्रवार के दिन सुबह पहले की तरह करें। इसके बाद ब्राह्मणों को ससम्मान आमंत्रित करके भोजन कराएं और अपने अनुसार उन्हे भेट और दक्षिणा दे। इसके बाद सभी को प्रसाद देने के बाद खुद भोजन करें। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ व्रत के दिन व्रत के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए। इसके साथ ही साथ जहां तक हो सके व्रत के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। भोजन में उसे नमक का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे आपको हजारों यज्ञों के बराबर फल मिलेगा। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ षटतिला एकादशी की व्रत कथा 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ एक बार भगवान विष्णु ने नारद जी को एक सत्य घटना से अवगत कराया और नारदजी को एक षटतिला एकादशी के व्रत का महत्व बताया। इस एकादशी को रखने की जो कथा भगवान विष्णु जी ने नारद जी को सुनाई वह इस प्रकार से है 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ प्राचीन काल में पृथ्वी लोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह हमेशा व्रत करती थी लेकिन किसी ब्राह्मण अथवा साधु को कभी दान आदि नहीं देती थी। एक बार उसने एक माह तक लगातार व्रत रखा। इससे उस ब्राह्मणी का शरीर बहुत कमजोर हो गया था। तब भगवान विष्णु ने सोचा कि इस ब्राह्मणी ने व्रत रख कर अपना शरीर शुद्ध कर लिया है अत: इसे विष्णु लोक में स्थान तो मिल जाएगा परन्तु इसने कभी अन्न का दान नहीं किया। इससे ब्राह्मणी की तृप्ति होना कठिन है। इसलिए भगवान विष्णु ने सोचा कि वह भिखारी का वेश धारण करके उस ब्राह्मणी के पास जाएंगें और उससे भिक्षा मांगेगे। 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 यदि वह भिक्षा दे देती है तब उसकी तृप्ति अवश्य हो जाएगी और भगवान विष्णु भिखारी के वेश में पृथ्वी लोक पर उस ब्राह्मणी के पास जाते हैं और उससे भिक्षा मांगते हैं। वह ब्राह्मणी विष्णु जी से पूछती है - महाराज किसलिए आए हो? विष्णु जी बोले मुझे भिक्षा चाहिए। यह सुनते ही उस ब्राह्मणी ने मिट्टी का एक ढे़ला विष्णु जी के भिक्षापात्र में डाल दिया। विष्णु जी उस मिट्टी के ढेले को लेकर स्वर्गलोक में लौट आये। 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 कुछ समय के बाद ब्राह्मणी ने अपना शरीर त्याग दिया और स्वर्ग लोक में आ गई। मिट्टी का ढेला दान करने से उस ब्राह्मणी को स्वर्ग में सुंदर महल तो मिल गया परन्तु उसने कभी अन्न का दान नहीं किया था इसलिए महल में अन्न आदि से बनी कोई सामग्री नहीं थी। वह घबराकर विष्णु जी के पास गई और कहने लगी कि हे भगवन मैंने आपके लिए व्रत आदि रखकर आपकी बहुत पूजा की उसके बावजूद भी मेरे घर में अन्नादि वस्तुओं का अभाव है। ऐसा क्यों है? तब विष्णु जी बोले कि तुम पहले अपने घर जाओ। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ तुम्हें मिलने और देखने के लिए देवस्त्रियां आएगी, तुम अपना द्वार खोलने से पहले उनसे षटतिला एकादशी की विधि और उसके महात्म्य के बारे में सुनना तब द्वार खोलना। ब्राह्मणी ने वैसे ही किया। द्वार खोलने से पहले षटतिला एकादशी व्रत के महात्म्य के बारे में पूछा। एक देवस्त्री ने ब्राह्मणी की बात सुनकर उसे षटतिला एकादशी व्रत के महात्म्य के बारे में जानकारी दी। उस जानकारी के बाद ब्राह्मणी ने द्वार खोल दिए। देवस्त्रियों ने देखा कि वह ब्राह्मणी न तो गांधर्वी है और ना ही आसुरी है। वह पहले जैसे मनुष्य रुप में ही थी। अब उस ब्राह्मणी को दान ना देने का पता चला। 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 अब उस ब्राह्मणी ने देवस्त्री के कहे अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया। इससे उसके समस्त पापों का नाश हो गया। वह सुंदर तथा रुपवति हो गई। अब उसका घर अन्नादि सभी प्रकार की वस्तुओं से भर गया। इस प्रकार सभी मनुष्यों को लालच का त्याग करना चाहिए। किसी प्रकार का लोभ नहीं करना चाहिए। संपूर्ण जानकारी सम्पूर्णम .......ब्रह्मदत्त जय जय श्री नारायण हरि विष्णु ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार स्वीकार करें

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Pandurang Jan 28, 2022

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