
Rama Devi Sahu
6 hours ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 25 अगस्त 2026* *⛅दिन - मंगलवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - द्वादशी प्रातः 06:20 तक तत्पश्चात् त्रयोदशी* *⛅नक्षत्र - उत्तराषाढा रात्रि 10:51 तक तत्पश्चात् श्रवण* *⛅योग - आयुष्मान् सुबह 07:41 तक तत्पश्चात् सौभाग्य* *⛅राहुकाल - दोपहर 03:40 से शाम 05:16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:07* *⛅सूर्यास्त - 06:51 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:37 से प्रातः 05:22 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:03 से दोपहर 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:06 से मध्यरात्रि 12:52 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - भौम प्रदोष व्रत, चतुर्थ मंगला गौरी व्रत, त्रिपुष्कर योग (प्रातः 06:07 से प्रातः 06:20 तक)* *🌥️विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* ✨विद्यावादबोधोपदेश 1, सर्ग 272 📖✨ 🔴 वशिष्ठजी बोले, हे रामजी! जब दृष्टा 👁️ दृश्यरुप को चेतता है तब विश्व 🌌 होता है सो विश्व सब अन्तवाहकरूप है | निराकार संकल्प 🌌 को अन्तवाहक कहते हैं | जब दृश्य में अहंभाव से चैतन्यता ✨ रहती हे तब अन्तवाहक से आधिभौतिक शरीर हो जाता है | 🔴 आदि जो ब्रह्म संवेदन ✨ फुरा है सो अन्तवाहक शरीर हुआ है और जब उसने बारम्बार अपने शरीर को देखा तब वह भी चतुष्टयमुख आधिभौतिक हो गया | उसने ओंकार 🕉️ का उच्चारण करके वेद 📜 और वेद के क्रम को रचा और संकल्प से विश्व 🌌 रचा | 🔴 जैसे कोई बालक मनोराज से बगीचा 🌳 रचे और उसमें नाना प्रकार के वृक्ष 🌳, फल 🍎, फूल 🌸, टास और पत्र रचे, तैसे ही ब्रह्माजी ने रचा और अन्तवाहक जीव उपजे और जब जीवों को शरीर में दृढ़ अभ्यास हुआ तब वे अन्तवाहक से आधिभौतिक हो गये | 🔴 रामजी! ने पूछा, हे भगवन्! ब्रह्मसत्ता 🕉️ तो निराकार थी उसको शरीर का संयोग कैसे हुआ है और उससे आधिभौतिकता कैसे हो गई? 🔴 वशिष्ठजी बोले, हे रामजी! न कोई शरीर है और न किसी को शरीर का संयोग हुआ है केवल अद्वैत आत्मसत्ता 🕉️ अपने आपमें स्थित है और उसमें जो चैतन्य संवेदन ✨ फुरी है वही संवेदन दृश्य को चेतती रहती है | वही जगत््रूप 🌌 होकर स्थित हुई है | 🔴 जब संकल्प की दृढ़ता हुई तब अपने साथ शरीर और आकार भासने लगे परन्तु सब आकाश ही रूप ☁️ हैं-कुछ बने नहीं | जैसे स्वप्ने 🌙 की सृष्टि को उपजी कहिये तो उपजी नही और उनका कारण भी कोई नहीं केवल आकाशरूप है और कोई पदार्थ उपजा नहीं परन्तु स्वरूप के विस्मरण से आकार भासते हैं, तैसे ही यह शरीर और जगत् जो भासता है सो केवल आभासमात्र है और असंभावना की दृढ़ता से प्रत्यक्ष भासता है | जब स्वरूप का विचार 🧘 करके देखोगे तब शान्त हो जावोगे | 🔴 हे रामजी! अविद्या भी कुछ वस्तु नहीं | जैसे स्वप्ने के पदार्थ अविद्यमान होते हैं और विद्यमान भासते हैं पर जब जागता है तब अविद्यमान हो जाते हैं, तैसे ही यह जगत् अविचारसिद्ध है विचार किये से शान्त हो जाता है जब चिचार करके देखोगे तब सर्वात्मा 🕉️ ही भासेगा | *🙏🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏*

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 25, 2026
🌺 ॐ श्री हनुमते नमः 🌺 🌸 शुभ मंगलवार • सुप्रभात 🌸 बजरंगबली की कृपा से आपका दिन मंगलमय हो। सभी संकट दूर हों, हर कार्य सफल हो और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहे। 🚩 🙏जय श्री राम 🌺• 🔱जय हनुमान 🚩

Rakesh Kumar
Aug 25, 2026
jai shree ram