GOVIND CHOUHAN
GOVIND CHOUHAN Sep 21, 2021

JAI SHREE RAM JAI RAM JAI JAI RAM 🌹🌹 JAI SIYARAM 🌹 JAI BAJARANG BALI 🌹🌹 SHUBH DOPAHAR VANDAN JIII. 🌹🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹 VERY NICE BHAJAN 🌹🌹🌹🌹 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺RAM NAAM SE TUNE BANDE KIYO APNA MUKH MODA 🌹DOUDA JAYE RE SAMAY KA GHODA🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

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कामेंट्स

Ansouya M 🍁 Sep 21, 2021
अति सुन्दर प्रस्तुति के लिए धन्यवाद भईया जी 🙏 जय सिया राम 🌹🙏🌹 🙏🏻🙏🏻👌👌👌🕉🕉

Ragni Dhiwer Sep 21, 2021
🥀 शुभ दोपहर स्नेह वंदन भैया जी 🌼 आपके जीवन का हर एक पल खुशियों से भरा रहे🥀 राधे राधे 🥀🙏🥀

Ragni Dhiwer Sep 21, 2021
🥀👌🥀जय श्री कृष्ण 🥀👌🥀

Neha Sharma Sep 21, 2021
🌺🙏जय श्री राधेकृष्णा🙏🌺 🙏शुभ संध्या नमन🙏ईश्वर की कृपा से आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो भाईजी🙏

Anupama Shukla Sep 21, 2021
Shree radhe 🌹🙏🌹 Good evening bhai ji stay blessed always be happy and healthy 🙏👌👌

Renu Singh Sep 21, 2021
Jai Siyaram 🙏🌹 Shubh Sandhya Vandan Bhai ji 🙏 Aàpka Har Pal Shubh Avam Mangalmay ho 🌸🙏

Radhe Krishna Sep 21, 2021
जय श्री राम 🙏🏻🌹 जय हनुमान 🌸🌸🙏🏻 शुभ संध्या वंदन भाई जी 🙏🏻🌹🌹

laltesh kumar sharma Sep 21, 2021
🌹🌿🌹 jai shree ram ji 🌹🌿🌹 jai shree hanuman ji 🌹🌿🌹🙏🙏

हरे रामा हरे कृष्णा Sep 21, 2021
राधे राधे जय श्री कृष्ण🙏 शुभ संध्या वंदन जी🙏 आप का हर पल मंगलमय हो 🙏 जय गणेश भगवान की🙏🌹

[email protected] Sep 21, 2021
Jay Shree Ram Bhaiji 🙏🏻🌺🙏🏻🌺🙏🏻🌺🙏🏻🌺🙏🏻 Nice Bhajan 👌👌👌👍🌹👌🙏🌹🌿 Good Everything 👋👋👋👋

Mamta Chauhan Sep 21, 2021
Jai shri ram jai hanuman ji🌹🙏Shubh sandhya vandan vandan bhai ji aapka har pal mangalmay ho khushion bhra ho aapki sabhi manokamna puri ho🌹 Radhe radhe 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

Reena Singh Sep 21, 2021
Jai shri ram🙏 Jai hanuman ji🙏 good evening vandan bhai ji prabhu shri ram bhakt hanuman ji ki kripa aap spariwar par bani rahe aapka har pal shubh manglmay ho 🙏🏻🙏🏻🌹🌹

Bindu Singh Sep 21, 2021
Jai shree krishna ji Radhe Radhe ji good night ji bhai ji 🙏🏼🙏🏼🌷🌷👌👌

ILA SINHA❤️ Oct 20, 2021

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Arun singh Oct 20, 2021

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Gajendrasingh kaviya Oct 20, 2021

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pk jain Oct 20, 2021

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Kanta Kamra Oct 20, 2021

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R S Sharma Oct 20, 2021

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Jagruti patel Oct 20, 2021

. कार्तिक मास में तुलसी की महिमा ब्रह्मा जी कहे हैं कि कार्तिक मास में जो भक्त प्रातः काल स्नान करके पवित्र हो कोमल तुलसी दल से भगवान् दामोदर की पूजा करते हैं, वह निश्चय ही मोक्ष पाते हैं। पूर्वकाल में भक्त विष्णुदास भक्तिपूर्वक तुलसी पूजन से शीघ्र ही भगवान् के धाम को चला गया और राजा चोल उसकी तुलना में गौण हो गए। तुलसी से भगवान् की पूजा, पाप का नाश और पुण्य की वृद्धि करने वाली है। अपनी लगाई हुई तुलसी जितना ही अपने मूल का विस्तार करती है, उतने ही सहस्रयुगों तक मनुष्य ब्रह्मलोक में प्रतिष्ठित रहता है। यदि कोई तुलसी संयुत जल में स्नान करता है तो वह पापमुक्त हो आनन्द का अनुभव करता है। जिसके घर में तुलसी का पौधा विद्यमान है, उसका घर तीर्थ के समान है, वहाँ यमराज के दूत नहीं जाते। जो मनुष्य तुलसी काष्ठ संयुक्त गंध धारण करता है, क्रियामाण पाप उसके शरीर का स्पर्श नहीं करते। जहाँ तुलसी वन की छाया हो वहीं पर पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध करना चाहिए। जिसके कान में, मुख में और मस्तक पर तुलसी का पत्ता दिखाई देता है, उसके ऊपर यमराज दृष्टि नहीं डाल सकते। प्राचीन काल में हरिमेधा और सुमेधा नामक दो ब्राह्मण थे। वह जाते-जाते किसी दुर्गम वन में परिश्रम से व्याकुल हो गए, वहाँ उन्होंने एक स्थान पर तुलसी दल देखा। सुमेधा ने तुलसी का महान् वन देखकर उसकी परिक्रमा की और भक्ति पूर्वक प्रणाम किया। यह देख हरिमेधा ने पूछा कि 'तुमने अन्य सभी देवताओं व तीर्थ-व्रतों के रहते तुलसी वन को प्रणाम क्यों किया ?' तो सुमेधा ने बताया कि 'प्राचीन काल में जब दुर्वासा के शाप से इन्द्र का ऐश्वर्य छिन गया तब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मन्थन किया तो धनवंतरि रूप भगवान् श्री हरि और दिव्य औषधियाँ प्रकट हुईं। उन दिव्य औषधियों में मण्डलाकार तुलसी उत्पन्न हुई, जिसे ब्रह्मा आदि देवताओं ने श्री हरि को समर्पित किया और भगवान् ने उसे ग्रहण कर लिया। भगवान् नारायण संसार के रक्षक और तुलसी उनकी प्रियतमा है। इसलिए मैंने उन्हें प्रणाम किया है।' सुमेधा इस प्रकार कह ही रहे थे कि सूर्य के समान अत्यंत तेजस्वी विशाल विमान उनके निकट उतरा। उन दोनों के समक्ष वहाँ एक बरगद का वृक्ष गिर पड़ा और उसमें से दो दिव्य पुरुष प्रकट हुए। उन दोनों ने हरिमेधा और सुमेधा को प्रणाम किया। दोनों ब्राह्मणों ने उनसे पूछा कि आप कौन हैं ? तब उनमें से जो बड़ा था वह बोला, मेरा नाम आस्तिक है। एक दिन मैं नन्दन वन में पर्वत पर क्रीड़ा करने गया था तो देवांगनाओं ने मेरे साथ इच्छानुसार विहार किया। उस समय उन युवतियों के हार के मोती टूटकर तपस्या करते हुए लोमश ऋषि पर गिर पड़े। यह देखकर मुनि को क्रोध आया। उन्होंने सोचा कि स्त्रियाँ तो परतंत्र होती हैं। अत: यह उनका अपराध नहीं, दुराचारी आस्तिक ही शाप के योग्य है। ऐसा सोचकर उन्होंने मुझे शापित किया - "अरे तू ब्रह्म राक्षस होकर बरगद के पेड़ पर निवास कर।" जब मैंने विनती से उन्हें प्रसन्न किया तो उन्होंने शाप से मुक्ति की विधि सुनिश्चित कर दी कि जब तू किसी ब्राह्मण के मुख से तुलसी दल की महिमा सुनेगा तो तत्काल तुझे उत्तम मोक्ष प्राप्त होगा। इस प्रकार मुक्ति का शाप पाकर मैं चिरकाल से इस वट वृक्ष पर निवास कर रहा था। आज दैववश आपके दर्शन से मेरा छुटकारा हुआ है। तत्पश्चात् वे दोनों श्रेष्ठ ब्राह्मण परस्पर पुण्यमयी तुलसी की प्रशंसा करते हुए तीर्थ यात्रा को चल दिए। इसलिए भगवान् विष्णु को प्रसन्नता देने वाले इस कार्तिक मास में तुलसी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। "जय जय श्री राधे"

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