kanha ki diwani
kanha ki diwani Jan 15, 2022

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Anil Sharma Kusum Jan 15, 2022
जय श्री राम जी सीता मैया बजरंग बली महाराज की जय

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Shibu Rai Jan 23, 2022

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sn vyas Jan 23, 2022

...........!! *श्रीराम: शरणं मम* !!......... ।।श्रीरामकिंकर वचनामृत।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° *जब तक मद, मोह और ईर्ष्या से* *भरे दोष आँखों से दूर नहीं हो जाते,* *तब तक ईश्वर दिखायी नहीं देंगे।* °"" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" "" ""° रामचरितमानस में बड़ा सुन्दर संकेत आता है। महाराज जनक की सभा में सीता स्वयंवर के धनुष यज्ञ में जो राजा आये हुए थे उनमें से जो बड़े स्वार्थी और कुटिल राजा थे, उन्होंने धनुष को तोड़ने का प्रयास किया, किन्तु जो विवेकी थे, उन्होंने ऐसा नहीं किया। जिन लोगों ने धनुष तोड़ने का प्रयास किया, वे तो विफल होकर अपमानित हो ही चुके थे किन्तु जिन लोगों ने ऐसा नहीं किया वे सम्मानपूर्वक बैठे थे। उन्हें देखकर अपमानित राजाओं को और भी बुरा लगा। सभी राजा विफल हो जाते तो उन्हें संतोष होता कि चलो, हम एक ही नहीं, सभी विफल हो गये और जहाँ सभी विफल हो जायँ, वहाँ विफलता में कोई लज्जा की बात नहीं होती। किन्तु जिन्होंने प्रयास ही नहीं किया, वे सम्मानपूर्वक बैठे हुए हमें देखकर मुस्करा रहे हैं, हमें अपमान की दृष्टि से देख रहे हैं, तब क्रोध में आकर उन लोगों ने कहा कि आप लोग स्वयंवर में सम्मिलित होने आये हैं कि केवल तमाशा देखने। हम पर हँस क्यों रहे हैं, ताकत है तो उठिये और धनुष तोड़िये। यहाँ आकर भी कायर की तरह बैठे हैं, क्या नाक कटवाने आये हैं ? तब उन राजाओं ने कहा कि आप लोगों ने तो प्रयास करके देख लिया पर क्या आप लोग अपनी नाक बचा पाये। गोस्वामीजी ने साहित्यिक भाषा में बड़े व्यंग्यात्मक शब्द का प्रयोग किया। उन्होंने कहा -- *नाक पिनाकहि संग सिधाई ।।* 1/266/7 वह था पिनाक (धनुष) , और आप लोग जब उसे तोड़ने गये तो तोड़ नहीं पाये, बल्कि तुम्हारी नाक ही कटकर उस पिनाक के साथ चली गयी और तुम लोग बिना नाक के वापस आ गये। अब चाहते हो कि हमारी भी नाक कट जाय, ताकि तुम्हें नकटा कहने वाला कोई न हो। लेकिन चिन्ता न करें, अब हमारी नाक कट ही नहीं सकती। क्यों ? इसलिये कि हम तो आये थे एक को पाने के लिये और बिना प्रयास हमें दोनों मिल गये। आये थे भक्ति देवी श्री सीताजी जगन्माता को पाने और मिल गये जगन्माता सीता और जगत्‌पिता राम। हमने तो प्रयास एक भी नहीं किया और लाभ हो गया दूना। अब इससे हमारी नाक कटेगी कि ऊँची होगी ? बात तो सही है पर पूछ दिया उन्होंने कि भाई, ये जगन्माता और जगतपिता हमें क्यों नहीं दिखायी दे रहे हैं। तो उन्होंने कहा कि तुम्हारी आँखें ठीक नहीं है। तुम्हारी आँखों में मद, मोह और ईर्ष्या भरी हुई हैं। जब तक तुम्हारी आँखों के दोष दूर नहीं हो जाते, तब तक वे दिखायी नहीं देंगे। अगर तुम उन्हें देखना चाहो तो -- *देखहु रामहि नयन भरि* *तजि इरिषा मदु मोहु।* 1/266 🏹 जय गुरुदेव जय सियाराम 🙏

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