PRABHAT KUMAR
PRABHAT KUMAR Oct 15, 2021

🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *#जय__श्री__राम* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *सभी आदरणीय साथियों को बुराई पर अच्छाई की जीत पर मनाया जाने वाला पर्व विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *#दशहरा_मनाने_के_पीछे_का_कारण* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि के समापन वाले दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरे का त्योंहार बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय पर मनाया जाने वाला पर्व है। ऐतिहासिक मान्यताओं और सबसे प्रसिद्ध हिंदू ग्रंथ रामायण में यह उल्लेख किया गया है कि भगवान राम ने शक्तिशाली राक्षस रावण का वध किया था इसीलिए दशहरा मनाया जाता है। वैसे यह कहानी तो सबको ही पता है लेकिन क्या आप जानते है दशहरे से जुड़ी हुई पौराणिक कहानियों के बारे में। जिसके बारे में आज हम जानेंगे।* 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 *दशहरे के दिन पूजन को लेकर देश के विभिन्न इलाकों और समुदायों में अलग-अलग तरह की परंपराएं है। शस्त्र का प्रयोग करने वालों के लिए इस दिन शस्त्र पूजन का बड़ा महत्व है। वहीं कई लोग इस दिन अपनी पुस्तकों, वाहन इत्यादि की भी पूजा करते हैं। अश्विन महीने की शुरुआत माता के नौ रूपों की भक्ति के नौ दिनों के साथ होती है। इसी अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकेश रावण पर विजय प्राप्त की थी, इसलिए इस दिन को विजयादशमी कहा जाता है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले के दहन की परंपरा है। साथ ही इस दिन शस्त्र पूजन का भी बड़ा महत्व है।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#दशहरे_से_जुड़ी_पौराणिक_कहानियाँ* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#राम_रावण_की_कहानी* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *भगवान श्री राम ने अपनी पत्नी को रावण के चुंगुल से मुक्त कराने हेतु भाई लक्षमण, हनुमानजी एवं वानरों की सेना के साथ मिल कर नौ दिन तक रावण के साथ युद्ध किया और दशमी के दिन रावण का वध कर दिया और माता सीता को रावण के बंधन से मुक्त कराया। ऐसा भी कहा जाता हैं कि रावण बहुत ही बुद्धिमान ब्राह्मण था और वह ये बात अच्छी तरह से जानता था की ईश्वर के हाथो मरने से सीधा उसे मोक्ष की प्राप्ति होती इसी कारणवश उसने माता सीता का हरण किया।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#माँ_दुर्गा_और_महिषासुर_की_कहानी* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिषासुर नामक एक राक्षस था जिसे ब्रह्माजी से वरदान मिला था कि पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति उसे नहीं मार सकता है। इस आशीर्वाद के कारण उसने तीनों लोक में हाहाकार मचा रखा था। इसके बढ़ते पापों को रोकने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी शक्ति को मिलाकर माँ दुर्गा का सृजन किया। माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर का मुकाबला किया और दसवें दिन माँ दुर्गा ने इस असुर का वध कर किया। जिसके फलस्वरूप लोगों को इस राक्षस से मुक्ति मिल गई और चारों तरफ हर्ष का मौहाल हो गाया। क्योंकि माँ दुर्गा को दसवें दिन विजय प्राप्त हुई थी इस कारण इस दिन को दशहरा या विजयादशमी के रूप में मनाया जाने लगा।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#दशहरे_की_पूजा_विधि_और_उपाय* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *नवरात्री के नव दिनों तक माँ दुर्गा ने अपने विविध नौ रूपों से महिसासुर की पूर्ण दैत्य सेना का नाश किया। इसीलिए माँ दुर्गा का शक्ति के रूप में दशहरा के दिन पूजन किया जाता है। माँ दुर्गा की पूजा के साथ आयुध पूजा यानि की शस्त्र पूजा की भी प्रथा सदियों पुरानी है। आज के आधुनिक युग में जब हम बात करते हैं शस्त्रों की, तो यह बताना जरूरी है की आप जो भी कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं, उस कार्यक्षेत्र में उपयोग में लिए जाने वाले कोई भी उपकरण या किसी भी प्रकार के साधन आपका शस्त्र ही गिना जायेगा जैसे की वाहन, कंप्यूटर, डॉक्टर के लिए उनके उपयोगीदा साधन या फिर किसी फैक्ट्री के मशीन्स इत्यादि।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *आइये अब जानते हैं #शस्त्र_पूजा_की_विधि के बारे में* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *जिस शस्त्र या मशीन की पूजा करनी है उस पर दूर्वा से गंगाजल से छींटकाव करें। तत्पश्च्यात कुमकुम, हल्दी, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं। उसके बाद शस्त्र या मशीन को अगरबत्ती का धुप दिखाएं और मिठाई एवं फलादि का भोग लगाएं। अंत में आरती कर के शक्ति रूपी शस्त्र या मशीन्स को इस मंत्र के साथ नमस्कार करें।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#या_देवी_सर्वभूतेषु_शक्ति_रूपेण_संस्थिता।* *#नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमो_नमः।।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#शक्ति_स्वरूपाय_विद्महे।* *#महायंत्राय_धीमहि।* *#तन्नो_यन्त्र_प्रचोदयात।।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *आइये अब जानते हैं कुछ ऐसे विशिष्ट प्रयोग जिसको दशहरा के दिन पर करने से आपके जीवन से संबंधित बहुत विविध दुविधाओं में से आपको निजात मिल सकता है।* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *#विशेष_उपाय* 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 *शनि, राहू या केतु जनित कोई समस्या हो, कोई ऊपरी बाधा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, कोई अनजाना भय आपको भयभीत कर रहा हो अथवा ऐसा लग रहा हो कि किसी ने आपके परिवार पर कुछ कर दिया है, तो इसके निवारण के लिए दशहरे के दिन एक पानी वाला और चोटी वाला नारियल लेकर उसे काले कपड़े में लपेटें। काले तिल, उड़द की दाल तथा 1 कील के साथ उसे बहते जल में प्रवाहित करें।* 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️

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🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️   *#जय__श्री__राम*   🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️
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*सभी आदरणीय साथियों को बुराई पर अच्छाई की जीत पर मनाया जाने वाला पर्व विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं*
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*#दशहरा_मनाने_के_पीछे_का_कारण*
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*हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि के समापन वाले दिन दशहरा मनाया जाता है। दशहरे का त्योंहार बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय पर मनाया जाने वाला पर्व है। ऐतिहासिक मान्यताओं और सबसे प्रसिद्ध हिंदू ग्रंथ रामायण में यह उल्लेख किया गया है कि भगवान राम ने शक्तिशाली राक्षस रावण का वध किया था इसीलिए दशहरा मनाया जाता है। वैसे यह कहानी तो सबको ही पता है लेकिन क्या आप जानते है दशहरे से जुड़ी हुई पौराणिक कहानियों के बारे में। जिसके बारे में आज हम जानेंगे।*
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*दशहरे के दिन पूजन को लेकर देश के विभिन्न इलाकों और समुदायों में अलग-अलग तरह की परंपराएं है। शस्त्र का प्रयोग करने वालों के लिए इस दिन शस्त्र पूजन का बड़ा महत्व है। वहीं कई लोग इस दिन अपनी पुस्तकों, वाहन इत्यादि की भी पूजा करते हैं। अश्विन महीने की शुरुआत माता के नौ रूपों की भक्ति के नौ दिनों के साथ होती है। इसी अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकेश रावण पर विजय प्राप्त की थी, इसलिए इस दिन को विजयादशमी कहा जाता है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले के दहन की परंपरा है। साथ ही इस दिन शस्त्र पूजन का भी बड़ा महत्व है।*
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*#दशहरे_से_जुड़ी_पौराणिक_कहानियाँ*
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*#राम_रावण_की_कहानी*
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*भगवान श्री राम ने अपनी पत्नी को रावण के चुंगुल से मुक्त कराने हेतु भाई लक्षमण, हनुमानजी एवं वानरों की सेना के साथ मिल कर नौ दिन तक रावण के साथ युद्ध किया और दशमी के दिन रावण का वध कर दिया और माता सीता को रावण के बंधन से मुक्त कराया। ऐसा भी कहा जाता हैं कि रावण बहुत ही बुद्धिमान ब्राह्मण था और वह ये बात अच्छी तरह से जानता था की ईश्वर के हाथो मरने से सीधा उसे मोक्ष की प्राप्ति होती इसी कारणवश उसने माता सीता का हरण किया।*
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*#माँ_दुर्गा_और_महिषासुर_की_कहानी*
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*धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिषासुर नामक एक राक्षस था जिसे ब्रह्माजी से वरदान मिला था कि पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति उसे नहीं मार सकता है। इस आशीर्वाद के कारण उसने तीनों लोक में हाहाकार मचा रखा था। इसके बढ़ते पापों को रोकने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी शक्ति को मिलाकर माँ दुर्गा का सृजन किया। माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर का मुकाबला किया और दसवें दिन माँ दुर्गा ने इस असुर का वध कर किया। जिसके फलस्वरूप लोगों को इस राक्षस से मुक्ति मिल गई और चारों तरफ हर्ष का मौहाल हो गाया। क्योंकि माँ दुर्गा को दसवें दिन विजय प्राप्त हुई थी इस कारण इस दिन को दशहरा या विजयादशमी के रूप में मनाया जाने लगा।*
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*#दशहरे_की_पूजा_विधि_और_उपाय*
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*नवरात्री के नव दिनों तक माँ दुर्गा ने अपने विविध नौ रूपों से महिसासुर की पूर्ण दैत्य सेना का नाश किया। इसीलिए माँ दुर्गा का शक्ति के रूप में दशहरा के दिन पूजन किया जाता है। माँ दुर्गा की पूजा के साथ आयुध पूजा यानि की शस्त्र पूजा की भी प्रथा सदियों पुरानी है। आज के आधुनिक युग में जब हम बात करते हैं शस्त्रों की, तो यह बताना जरूरी है की आप जो भी कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं, उस कार्यक्षेत्र में उपयोग में लिए जाने वाले कोई भी उपकरण या किसी भी प्रकार के साधन आपका शस्त्र ही गिना जायेगा जैसे की वाहन, कंप्यूटर, डॉक्टर के लिए उनके उपयोगीदा साधन या फिर किसी फैक्ट्री के मशीन्स इत्यादि।* 
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*आइये अब जानते हैं #शस्त्र_पूजा_की_विधि के बारे में*
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*जिस शस्त्र या मशीन की पूजा करनी है उस पर दूर्वा से गंगाजल से छींटकाव करें। तत्पश्च्यात कुमकुम, हल्दी, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं। उसके बाद शस्त्र या मशीन को अगरबत्ती का धुप दिखाएं और मिठाई एवं फलादि का भोग लगाएं। अंत में आरती कर के शक्ति रूपी शस्त्र या मशीन्स को इस मंत्र के साथ नमस्कार करें।*
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*#या_देवी_सर्वभूतेषु_शक्ति_रूपेण_संस्थिता।*
*#नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमस्तस्यै_नमो_नमः।।*
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*#शक्ति_स्वरूपाय_विद्महे।*
*#महायंत्राय_धीमहि।*
*#तन्नो_यन्त्र_प्रचोदयात।।*
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*आइये अब जानते हैं कुछ ऐसे विशिष्ट प्रयोग जिसको दशहरा के दिन पर करने से आपके जीवन से संबंधित बहुत विविध दुविधाओं में से आपको निजात मिल सकता है।*
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*#विशेष_उपाय*
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*शनि, राहू या केतु जनित कोई समस्या हो, कोई ऊपरी बाधा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, कोई अनजाना भय आपको भयभीत कर रहा हो अथवा ऐसा लग रहा हो कि किसी ने आपके परिवार पर कुछ कर दिया है, तो इसके निवारण के लिए दशहरे के दिन एक पानी वाला और चोटी वाला नारियल लेकर उसे काले कपड़े में लपेटें। काले तिल, उड़द की दाल तथा 1 कील के साथ उसे बहते जल में प्रवाहित करें।*
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*#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।*
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*( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )*
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कामेंट्स

HAZARI LAL JAISWAL Oct 15, 2021
जय श्री राम 🙏🙏 विजयादशमी पर्व शुभ हो 🌹🌹

Ram Niwas Soni Nov 27, 2021

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SaarthakR Prajapat Nov 27, 2021

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ILA SINHA Nov 27, 2021

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Kailash Prasad Nov 27, 2021

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Kailash Prasad Nov 27, 2021

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Ramesh agrawal Nov 27, 2021

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Bindu Singh Nov 27, 2021

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prakash patel Nov 27, 2021

🏹 રામાયણ🏹 અયોધ્યા કાંડ ✍️ ૧૮ લક્ષ્મણજી આગળ કહે છે કે-મનુષ્ય-જન્મ ની અંદર જે કંઇ ધર્મ,અર્થ અને કામ પ્રાપ્ત થાય છે તે,પણ પૂર્વજન્મ માં કરેલાં ધર્મ-કર્મ નું જ ફળ છે.તે જ પ્રારબ્ધ (દૈવ) છે.અને તે ભોગવ્યા વિના કોઈ પણ ઉપાયે તેનો નાશ થઇ શકતો નથી.ભોગવાઈ જાય એટલે આપોઆપ આ પ્રારબ્ધ (દૈવ) પુરુ થાય છે. એકવાર રામજી આગળ હું પુરુષાર્થ ની બડાઈ કરતો હતો ત્યારે તેમણે જ મને કહ્યું હતું કે- જેને પુરુષાર્થ કહે છે તે –કાગ-તાડીય ન્યાય જેવું છે. જેમ,કાગડા નું બેસવું અને તાડ ના ઝાડ ના ફળ નું પડવું,-એ બે ક્રિયાઓ કોઈ વાર એક સાથે થઇ જાય છે, તેમ,પુરુષાર્થ થી ફળ મળી જાય છે,પરંતુ તેમ છતાં પ્રારબ્ધ જ સર્વ વાતે બળવાન છે.અને પ્રાણી માત્ર ને સુખ,દુઃખ,ભય,લાભ,હાનિ,ક્રોધ,લોભ,બંધન અને મોક્ષ –એ બધામાંથી જે કંઈ પ્રાપ્ત થાય છે, એ પ્રારબ્ધ (દૈવ) નું જ કાર્ય છે. ઘણીવાર મોટા આરંભેલા કાર્ય નો પણ એકાએક વિઘ્ન આવતા નાશ થઇ જાય છે. હે ભાઈ,આ સંસાર માં કોઈ કોઈ ને સુખી કે દુઃખી કરી શકતું નથી, પરંતુ,સૌ પોતપોતાનાં કરેલાં કર્મોનું ફળ ભોગવે છે. કાહુ ન કોઉં સુખ કર દુઃખ દાતા,નિજ કૃત કરમ ભોગ સબુ ભ્રાતા. સુખ-દુઃખ નું કારણ અંદર શોધે તે સંત, અને બહાર શોધે તે પામર. પામર એટલા માટે કે-એને બહાર કશું જડવાનું નથી,કેવળ ભ્રમ પ્રાપ્ત થવાનો છે. કોઈ બીજો સુખ-દુઃખ આપે છે એવી કલ્પના માત્ર થી તે વ્યક્તિ પ્રત્યે વેરભાવ પેદા થાય છે. માટે સર્વદા મન ને સમજાવવું કે –સુખ-દુઃખ તેં જ પેદા કરેલું છે. મનમાં જ્યાં સુધી સુખ-દુઃખ છે ત્યાં સુધી તે સુખ-દુઃખ છે,બાકી તે (સુખ-દુઃખ) ખરેખર તો છે જ નહિ. સંયોગ-વિયોગ,શત્રુ-મિત્ર,જન્મ-મૃત્યુ,સંપત્તિ –વિપત્તિ—એ સર્વ નું મૂળ મોહ છે, અજ્ઞાન છે. જમીન,ઘર, ધન,નગર,પરિવાર,સ્વર્ગ,નરક—એ બધું યે અજ્ઞાન નું જ ફળ છે.ખરી રીતે તે બધાં છે જ નહિ. જેમ સ્વપ્ન માં રાજા ભિખારી થઇ જાય કે ભિખારી રાજા થઇ જાય,પણ જાગ્યા પછી જુએ તો નથી કોઈ ભિખારી થયો કે નથી કોઈ રાજા થયો,તેમ આ બધી સ્વપ્ન ની દુનિયા છે. આપણે બધાં મોહ ની રાત્રિ માં સૂતાં છીએ અને સૂતાં સૂતાં સ્વપ્નાં જોઈએ છીએ. અહીં જે જાગે છે તે જોગી છે,અને જે નથી જાગતો તે ભોગી છે. જ્યાં સુધી ભોગ છે,વિષય-વિલાસ છે,ત્યાં સુધી આ સ્વપ્ન ના જેવી દુનિયા સાચી છે એવું લાગે છે, પણ જેવો ભોગ છૂટ્યો,અને વૈરાગ્ય આવ્યો,ત્યારે સ્વપ્નમાંથી જાગૃતિ માં પ્રવેશ થયો સમજવો. એટલા માટે ગીતામાં કહ્યું છે કે-ભોગીઓ જયારે ઊંઘે છે ત્યારે જોગીઓ જાગે છે અને જોગીઓ જયારે ઊંઘતા હોય છે ત્યારે ભોગીઓ ની આંખ ઉઘાડી હોય છે. શ્રીરામ પરમાનંદ-બ્રહ્મ-સ્વ-રૂપ છે.મનથી ન જણાય તેવા,સૂક્ષ્મ દ્રષ્ટિથી યે ન દેખાય એવા,એ, અનાદિ,અનુપમ,અવિકારી અને ભેદ-રહિત છે. એમને કર્મ નું કોઈ બંધન નથી,તેઓ તો કર્માંતીત છે,અને તેઓ પોતાની ઇચ્છાથી પ્રગટ થાય છે. “શ્રીરામ સત્ય-પર-બ્રહ્મ છે,અને રામ (બ્રહ્મ) વિના આ જગતમાં બીજું કંઈ છે જ નહિ” અરે,રામજી (રામ-નામ) નું જે સ્મરણ કરે,તેણે કદી દુઃખ થતું નથી તો રામજી ને શું દુઃખ થવાનું? રામજી ને તો તળાઈ (રૂ ની પથારી) કે પરાળ (ઘાસ ની પથારી) સરખાં છે, મેવા-મીઠાઈ ને કંદમૂળ સરખાં છે, રાજપાટ અને વનવાસ પણ સરખાં છે. કૈકેયી એ એમને વનવાસ દીધો પણ એમના મનમાં ક્ષણ માટે પણ રોષ પ્રગટ્યો નથી. એમના મન માં દ્વિધા ને સ્થાન નથી,સંશય ને સ્થાન નથી,રાગ-દ્વેષ ને સ્થાન નથી. જીવને પોતાનાં કર્મ પ્રમાણે જન્મ મળે છે,તે કર્મ થી બંધાયેલ છે,પણ ઈશ્વર (બ્રહ્મ) તો સ્વેચ્છા એ પ્રગટ થાય છે. તેઓ તો કર્મ થી પર છે.તેમ છતાં પરમાત્મા જયારે લીલા કરવા પૃથ્વી પર પધારે છે ત્યારે, તેઓ કર્મ ની મર્યાદા રહે છે, અને જગતને એવો આદર્શ બતાવે છે કે- “હું ઈશ્વર છું,છતાં પણ કર્મ ની મર્યાદા પાળું છું,કર્મ ના બંધન માં છું” આ ભગવાન ની લીલા છે. પૃથ્વી પરના જીવો ને આશ્વાસન આપવા માટે પ્રભુ આમ કરે છે. https://m.facebook.com/groups/367351564605027/permalink/609166967090151/ 🏹 ॐ શ્રી રામ જય રામ જય જય રામ 🙏🏼

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